पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और आसपास के जिलों में पेट्रोल पंप
मालिकों ने गुरुवार शाम को आधे घंटे तक तमाम बत्तियां बुझा कर पेट्रोल और डीज़ल की
बिक्री बंद रखी.
राज्य में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें सौ के पार पहुंच कर हर रोज़ नया
रिकॉर्ड बना रही हैं.
इनके साथ ही कोलकाता की मशहूर पीली टैक्सी के दर्जनों ड्राइवरों ने भी अपनी
गाड़ी बंद कर सड़कों पर बैठ कर सांकेतिक विरोध जताया.
राज्य में हर महीने 1.3 लाख किलोलीटर पेट्रोल और तीन लाख किलो लीटर डीज़ल
की खपत होती है.
वेस्ट बंगाल पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के सदस्य अनिर्वाण साहा कहते हैं, “कोलकाता और आसपास
के ज़िलों में डीज़ल की कीमत सौ के पार पहुंच गई है. बिक्री घटने की वजह से हमें
नुकसान हो रहा है.”
दूसरी ओर, बस मालिकों के संगठन ज्वाइंट काउंसिल आफ बस सिंडीकेट के महासचिव तपन बनर्जी
कहते हैं,
“तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बसों का संचालन बेहद घाटे का सौदा बन
गया है. शाम को यात्री नहीं होने की वजह से बस मालिक सड़कों पर उतरने के पक्ष में
नहीं हैं.”
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के एक सदस्य बताते हैं, “पेट्रोल पर करीब 63 फीसदी यानी करीब 32.90 रुपए केंद्र को टैक्स के तौर पर मिलता है जबकि राज्य का हिस्सा 19.27 पैसा है. इसी तरह डीज़ल में यह अनुपात क्रमशः 31.80 और 13.08 रुपए है.”
पश्चिम बंगाल में पेट्रोल और डीज़ल पर बिक्री कर की दरें क्रमशः 17 और 25 प्रतिशत हैं. पहले इस पर एक रुपए प्रति लीटर का लंप-संप टैक्स भी था. लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने वर्ष 2018 में उसे हटा दिया था. पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से राज्य सरकार को सालाना करीब आठ हजार करोड़ का राजस्व मिलता है.
तृणमूल कांग्रेस सरकार लंबे अरसे से पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का मुद्दा उठाती रही है. दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा है, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में वृद्धि कोई ख़बर नहीं है. उन्होंने इसे जीएसटी के दायरे में शामिल करने का सवाल उठाते हुए राज्य सरकार की खिंचाई की है.