कानपुर में ज़ीका वायरस
संक्रमण का पहला मामला मिला है. यह उत्तर प्रदेश में भी ज़ीका वायरस का पहला मामला
है.
भारतीय वायु सेना के एक
स्टाफ़ में संक्रमण की पुष्टि हुई है और उनका एयरफ़ोर्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा
है.
बीते 10 दिनों से उनका
इलाज इसी अस्पताल में चल रहा था और ज़ीका जैसे लक्षण दिखने पर अस्पताल प्रशासन ने
उनका सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी (एनआईवी) भेजा.
जाँच में
उनके ज़ीका वायरस से पॉज़िटिव होने की पुष्टि हुई.
अब केजीएमयू (लखनऊ) से डॉक्टर
मानवेंद्र त्रिपाठी और दिल्ली स्थित एम्स से डॉक्टर केजी चौधरी ने टीम के साथ उनका
इलाज करना शुरू कर दिया है.
कानपुर के डीएम विशाख जी. अय्यर ने बताया कि सूचना के मुताबिक़
मरीज़ की हालत अभी स्थित बनी हुई है.
कंटेनमेंज ज़ोन बना इलाका, एलर्ट पर अधिकारी
कानपुर के चीफ़ मेडिकल ऑफ़सिर डॉक्टर नैपाल सिंह ने बताया कि ज़ीका वायरस की पुष्टि की सूचना के बाद परदेवनपुरवा में उनके घर के एक किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट ज़ोन घोषित कर दिया गया है.
अलर्ट मोड पर काम करते हुए रविवार को पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की 24 टीमों ने 300 घरों में 1300 लोगों की जाँच की है. इसमें 112 लोगों में बुखार और दर्द के लक्षण वाले लोग मिले हैं.
इनमें से पाँच ख़ून के नमूनों को लखनऊ जाँच के लिए भेज दिया गया है. शनिवार को भी एयरफ़ोर्स कर्मी के संपर्क में आए 24 लोगों को सैंपल केजीएमयू भेजे गए थे.
सभी की जांच रिपोर्ट देर रात रविवार को आ गई. सभी के सैंपल निगेटिव रिपोर्ट हुए हैं. किसी में भी ज़ीका वायरस की पुष्टि नहीं हुई है.
कानपुर नगर निगम ने पूरे इलाके में रविवार को साफ़-सफ़ाई, एंटी लार्वा का छिड़काव और फ़ॉगिंग का कार्य शुरू कर दिया.
मोहल्लों में जीका वायरस से कैसे बचा जा सकता है, इससे संबंधित पोस्टर भी स्वास्थ्य विभाग ने चिपकाना शुरू कर दिए हैं. लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं.
ज़ीका वायरस एयरफोर्स कर्मी में कैसे आया, इसको लेकर भी बड़ा सवाल बना हुआ है.
सीएमओ ने इस बारे में बताया कि ज़ीका वायरस एडीज़ मच्छरों के काटने से भी होता है. हालाँकि यह संक्रमण हवा के ज़रिए नहीं फैलता है.
क्या होता है ज़ीका वायरस?
ज़ीका वायरस का संक्रमण
एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से भी होता है. यह मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया की वजह भी
बनता है.
संक्रमित मरीज के साथ संबंध
बनाने पर यह स्वस्थ व्यक्ति में भी फैल सकता है. ज़ीका वायरस से संक्रमित होने का सबसे
ज्यादा ख़तरा गर्भवती महिलाओं को रहता है.
पहली बार ज़ीका वायरस से जुड़ी
महामारी प्रशांत महासागर के याप आइलैंड में 2007 में आई थी. इसके बाद ब्राजील, अमेरिका और एशिया में ये एक महामारी की तरह फैला.
इसका पहला मामला 1947 में
युगांडा में सामने आया था. इसके पाँच साल बाद यह वायरस इंसानों में पाया गया.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के
मुताबिक यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो इंसानों में लकवा और मौत की वजह बन सकता
है.