लखीमपुर खीरी: मारे गए किसानों के लिए अंतिम अरदास, प्रियंका गांधी होंगी शामिल
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखीमपुर खीरी से
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में खाड़ी से कुचलकर मारे गए किसानों की याद में आज अंतिम अरदास रखा गया है.
मारे गए किसान लवप्रीत सिंह और नक्षत्र सिंह लखीमपुर के निवासी थे जबकि गुरविंदर सिंह और दलजीत सिंह पड़ोसी बहराइच ज़िले के रहने वाले थे.
संयुक्त किसान मोर्चा ने तिकुनिया के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में इस कार्यक्रम का आयोजन किया है. इसमें आस पास के ज़िलों जैसे सीतापुर, पीलीभीत और बहराइच से भी किसान जुट रहे हैं.
इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रियंका गांधी भी सुबह लखनऊ पहुँच चुकी हैं और अब लखीमपुर खीरी पहुँच रही हैं.
किसान नेता राकेश टिकैत सोमवार रात ही तिकुनिया पहुँच चुके हैं. उन्होंने ट्वीट करके यह जानकारी और अपनी एक तस्वीर शेयर की है.
सुरक्षा बढ़ाई गई, बड़ी संख्या में पुलिस तैनात
मारे गए किसानों की तरफ़ से टिकैत ने उत्तर प्रदेश प्रशासन से बातचीत की थी जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हुआ और किसानों का अंतिम संस्कार हुआ
मृतक के परिवार वालों को 45-45 लाख का मुआवज़ा मिला और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की माँग आख़िरकार पूरी हुई थी.
आयोजन के मद्देनज़र लखीमपुर में मंगलवार को भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.
लखनऊ से लखीमपुर के रास्ते में जगह जगह पुलिस गाड़ियों की चेकिंग कर रही है.
कांग्रेस के ख़िलाफ़ लगे पोस्टर
दूसरी तरफ़ लखनऊ से लखीमपुर के रास्ते में कई सारे पोस्टर लगे हैं जिनमें कुछ सिख समुदाय के लोगों तरफ़ से कांग्रेस पर निशाना साधने वाले संदेश छपे हैं.
एक पोस्टर पर लिखा है- नहीं चाहिए फ़र्ज़ी सहानुभूति. 1984 के दंगों के ज़िम्मेदारों से लखीमपुर के किसानों को सहानुभूति नहीं चाहिए.”
एक अन्य पोस्टर का यह संदेश है, “नहीं चाहिए फ़र्ज़ी सहानुभूति. खून से भरा है दमन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा? नहीं चाहिए साथ तुम्हारा.”
यह पोस्टर राज्य सरकार के अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परविंदर सिंह के नाम से लगाया गया है.