किसानों की मौत पर पीएम मोदी की ख़ामोशी, राहुल गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि वो 'किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं' और 'बढ़ती कीमतों' पर खामोश बने हुए हैं लेकिन जब उनकी या उनके दोस्तों की आलोचना की जाती है तो वे 'उग्र' हो जाते हैं.
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किसानों की मौत पर पीएम मोदी की ख़ामोशी, राहुल गांधी ने उठाए सवाल
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि वो 'किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं' और 'बढ़ती कीमतों' पर खामोश बने हुए हैं लेकिन जब उनकी या उनके दोस्तों की आलोचना की जाती है तो वे 'उग्र' हो जाते हैं.
राहुल गांधी ने सेना प्रमुख एमएम नरवणे के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें नरवणे ने लद्दाख सीमा विवाद के संदर्भ में कहा था कि चीन यहां रहने आया था.
लद्दाख सीमा पर चीन की सेना के जमावड़े पर नरवणे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल ने ट्विटर पर लिखा, "चीन यहां रहने आया था, कहां? हमारी ज़मीन पर?"
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एक अन्य ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री ख़ामोश हैं, महंगई बढ़ रही है, तेल के दाम बढ़ हे हैं, बेरोज़गारी, बीजेपी कार्यकर्ता और किसानों की हत्या हो रही है. लेकिन जब प्रधानमंत्री को कैमरा नहीं दिखता या फोटो खिंचाने का मौका नहीं मिलता या उनकी या उनके दोस्तों की सच्ची आलोचना की जाती है तो वो उत्तेजित हो जाते हैं."
राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी चीन के मुद्दे और किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहे हैं.
दुबई पुलिस का ऑपरेशन स्कॉर्पियन, 1000 करोड़ रुपये की कोकीन ज़ब्त
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दुबई पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कोकीन तस्करी के एक प्रयास को विफल करते हुए 500 किलोग्राम से अधिक शुद्ध कोकीन जब्त की है.
इसके लिए पुलिस ने एक माल ढोने वाले जहाज पर छापा मारा था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दुबई पुलिस के हवाले से बताया कि बाजार में जब्त की गई कोकीन की क़ीमत 50 दिरहम (1,000 करोड़ रुपए से अधिक) से भी ज़्यादा है.
छापे के दौरान पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के लिए काम करने वाले मध्य पूर्व के एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है.
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खलीज टाइम्स के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि इस इलाक़े में नशीली दवाओं की इससे बड़ी जब्ती अब तक नहीं हुई है. इसके लिए दुबई पुलिस ने सूचना मिलने पर 'स्कॉर्पियन' नामक ऑपरेशन के तहत छापेमारी की.
एंटी-नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के डायरेक्टर ब्रिगेडियर ईद मोहम्मद थानी हरेब ने बताया कि कोकीन की तस्करी की सूचना मिलने के बाद संदिग्ध शख़्स पर लगातार निगरानी रखी गई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि संदिग्ध ने अपना अपराध कबूल कर लिया है और आगे की क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है.
असम: फ़ेसबुक पर तालिबान की तारीफ़ की तो पुलिस ने लगाया UAPA क़ानून, अब हाई कोर्ट ने दी ज़मानत
....में
Author, दिलीप कुमार शर्मा
पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम संबंधी कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए एक अभियुक्त को ये कहते हुए जमानत दी है कि यह संदेहास्पद था कि क्या अकेले फेसबुक पोस्ट की सामग्री को एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा?
अदालत का यह फैसला बीते 6 अक्टूबर का है.
दरअसल पिछले 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर 'तालिबान' द्वारा कब्जा करने के बाद आरोपी मौलाना फजलुल करीम कासिमी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि अफगानिस्तान में 'तालिबान' आतंकवादी नहीं हैं.
ऐसे फेसबुक पोस्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था.
इस मामले की सुनवाई करने वाले न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ ने कहा कि यह संदेहास्पद था कि क्या अकेले फेसबुक पोस्ट की सामग्री संज्ञेय अपराध होगी.
दरंग जिले के घिलाकुरी गांव के रहने वाले कासिमी को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 1967 की धारा 39 के तहत गिरफ्तार किया गया था.
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अभियुक्त कासिमी के वकील दिगंता दास ने यह तर्क देते हुए जमानत मांगी कि अदालत ने ऐसे ही एक मामले में 23 सितंबर को एक अन्य आवेदक को जमानत दी है, जिसमें एक समान कार्यवाही दर्ज की गई थी और आवेदक को ऐसी राय व्यक्त करने के लिए गिरफ्तार किया गया था.
खंडपीठ ने केस डायरी के अवलोकन के बाद कहा कि आवेदक के खिलाफ सिवाय एक फेसबुक पोस्ट के कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है.यहां तक कि अगर यह स्वीकार कर लिया जाता है कि आवेदक फेसबुक पोस्ट का लेखक है, तब भी अन्य आपत्तिजनक सामग्री के अभाव में यह संदेहास्पद है कि क्या अकेले इस पोस्ट की सामग्री से एक संज्ञेय अपराध बनेगा.
अदालत ने कहा कि इस मामले में आवेदक को और अधिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है और आरोपी को 20 हजार रुपये के बांड प्रस्तुत करने पर जमानत दे दी गई.
पिछले सप्ताह एक ऐसे ही मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने फेसबुक पोस्ट के जरिए तालिबान की प्रशंसा करने वाले मकबूल आलम नाम के एक व्यक्ति को जमानत दी थी.
प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक नेता भी हैं और अच्छे श्रोता भी: अमित शाह
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'लोकतांत्रिक नेता' बताते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री के आलोचक भी इस बात से सहमत होंगे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कभी भी इतने लोकतांत्रिक ढंग से काम नहीं किया, जितना कि इस सरकार के दौरान कर रहा है.
रविवार को संसद टीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में उन्होंने ये बातें कही हैं.
इस इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय हित में राजनीतिक जोख़िम वाले फ़ैसले लेने से भी नहीं हिचकिचाते. उन्होंने दावा कि प्रधानमंत्री ने कई बार देश के कल्याण के लिए कई कड़वे फ़ैसले लिए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि विपक्ष और आलोचक नरेंद्र मोदी को तानाशाह बताते हैं, जो कि सारे फ़ैसले ख़ुद ही लेते हैं. लेकिन शाह ने मोदी को "लोकतांत्रिक नेता" बताया है.
केंद्रीय गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री के बारे में कहा कि वो बड़े धैर्यवान श्रोता हैं, जो इंसान के पद की परवाह किए बिना बेहतर लगने वाले सुझावों को अहमियत देते हैं.
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''बड़े धैर्यवान श्रोता हैं प्रधानमंत्री''
अमित शाह ने कहा, "मैंने नरेंद्र मोदी और उनकी कार्यशैली दोनों को क़रीब से देखा है. मैंने उनके जैसा धैर्यवान श्रोता कभी नहीं देखा. मामला चाहे जो हो, वो धैर्यपूर्वक सबकी सुनते हैं. उस दौरान वो कम से कम बोलते हैं और फिर एक उचित फ़ैसला लेते हैं. छोटे स्तर के अधिकारी हों या छोटे कार्यकर्ता, सबके दिए सुझावों पर धैर्यपूर्वक विचार करने के बाद वो कोई निर्णय लेते हैं."
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने आगे कहा, "उनके साथ जिन भी लोगों ने काम किया है या कभी उनके साथ काम कर चुके उनके आलोचक भी इस बात से सहमत होंगे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कभी ऐसे लोकतांत्रिक ढंग से काम नहीं किया जैसे कि मोदी जी के प्रधान मंत्री काल के दौरान कर रहा है."
उन्होंने बताया कि मोदी अनुशासन पर जोर देते हैं, इसलिए तय समय से पहले गोपनीयता की ज़रूरत के चलते कई बैठकों की जानकारी सामने नहीं आ पाती. अमित शाह ने जोर देकर कहा कि हर बैठक में फ़ैसले सामूहिक परामर्श के बाद ही लिए जाते हैं.
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''मोदी कड़े फ़ैसले लेने से नहीं हिचकिचाते''
शाह ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने हमेशा कहा है कि वो केवल सरकार चलाने के लिए सत्ता में नहीं हैं, बल्कि देश को बेहतर बनाने के लिए यहां हैं. इसलिए वो कड़े और जोख़िम भरे फ़ैसले लेने से भी नहीं हिचकिचाते. ऐसे फ़ैसले भी लेते हैं, जो पार्टी के समर्थकों के तो ख़िलाफ़ होते हैं, लेकिन देश और उसके लोगों के हित में होते हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "जब आप काले धन पर नकेल कसते हैं, आर्थिक सुधार करते हैं, कर चोरी के सारे रास्ते बंद करते हैं, तो इससे हमारे कई समर्थक और अन्य लोग भी पीड़ित हो सकते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "ऐसा होता है. लेकिन लोग ये भी समझते हैं कि इससे मोदी को कुछ नहीं मिलने वाला और अंतत: इससे हमारे देश को ही फायदा होगा. इसलिए हर कोई मोदी जी के साथ जुड़ पाता है."
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''निजी हमले बंद करे विपक्ष''
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ''विपक्ष के कुछ दल मानते हैं कि सत्ता में रहना उनके नेता का ही जन्मसिद्ध अधिकार है. लेकिन मोदी ने जनकेंद्रित और 'नेशन फर्स्ट' की राजनीति करके इसे बदल दिया.
अमित शाह ने विपक्षी दलों से कहा, "वो हमारी विफलताएं बेनक़ाब करें, लेकिन निजी हमले करके राजनीति का स्तर न गिराएं."
पहले मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में काम करते हुए अब 20 साल पूरा करने वाले नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को भी अमित शाह ने गिनाया.
राजस्थान: हनुमानगढ़ में दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या के मामले में पांच गिरफ्तार
....में
Author, मोहर सिंह मीणा
पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
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हनुमानगढ़ ज़िले में पीलीबंगा के प्रेमपुरा गांव में एक दलित युवक की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या और शव घर के बाहर फेंक दिए जाने के मामले में रविवार को पुलिस ने मुख्य अभियुक्त समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है.
आरोप है कि प्रेमपुरा गांव के जगदीश मेघवाल को गुरुवार को कुछ युवक घर से बुला कर साथ ले गए थे. सुनसान जगह युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे युवक की मौत हो गई. मारपीट का वीडियो भी बनाया गया, जिसमें आधा दर्जन लोग नज़र आ रहे हैं. वे सभी घटना के बाद से फरार थे.
मृतक जगदीश मेघवाल के परिजनों ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए शव लेने और पोस्टमॉर्टम कराने से इंकार कर दिया था.
ज़िला अस्पताल के सामने दो दिन तक मृतक के परिजनों और भीम आर्मी ने हत्यारों की गिरफ्तारी की मांगों को लेकर धरना दिया. हालांकि, प्रशासन से समझौता होने के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.
मृतक जगदीश मेघवाल के पिता बनवारी लाल मेघवाल ने पुलिस रिपोर्ट में बताया कि, गुरुवार शाम करीब 4.30 बजे प्रेमपुरा निवासी विनोद, मुकेश, लालचंद उर्फ रामेश्वर, सिकंदर एवं दिलीप ओढ़ राजपूत दो बाइक पर घर आए, जिन्होंने उसके पुत्र जगदीश को बाइक के बीच में बिठा रखा था.
पुलिस को दी गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में बताया गया है कि बाइक सवार युवक घर के आगे गली में जगदीश को डाल कर भाग गए. उसने भागकर जगदीश को संभाला तो देखा कि उसकी सांसे नहीं चल रही थी.
स्थानीय पत्रकार पुरुषोत्तम दत्त उपाध्याय इस मामले पर बीबीसी को बताते हैं कि, "जगदीश मेघवाल तलाक़शुदा थे और एक तलाक़शुदा महिला को प्रेम करते थे. इसकी जानकारी होने पर महिला के पूर्व पति ने ही अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया है."
उपाध्याय बताते हैं, "पुलिस में दर्ज एफआईआर में परिजनों ने तलाक़शुदा महिला समेत ग्यारह लोगों को आरोपी बनाया है."
इस मामले को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं. भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मामले पर कांग्रेस की खामोशी पर ट्वीट कर सवाल किए हैं.
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इस प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से मृतक जगदीश मेघवाल के परिजनों को 4,12,500 रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है.
हनुमानगढ़ की पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रीति जैन ने पांच अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "नामजद 11 में से अभी पांच को गिरफ़्तार कर लिया है, जांच जारी है और अभी दो से चार लोग और गिरफ्तार होंगे."
एसपी ने कहा, "मारपीट की वीडियो में नज़र आ रहे अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. वीडियो बनाने वाले शख्स को भी एफ़आईआर में नामजद किया जाएगा, उसकी तलाश की जा रही है."
उन्होंने बताया कि, "मृतक जगदीश का प्रेमपुरा गांव की ही एक तलाकशुदा महिला से प्रेम प्रसंग चल रहा था. महिला अपने पति से अलग सूरतगढ़ में रह रही थी. महिला से मिलने मृतक जागिश सूरतगढ़ गए हुए थे. महिला के पूर्व पति ने उनको वहां देख लिया."
"महिला के पूर्व पति मुकेश ने मृतक जगदीश को सूरतगढ़ सिटी से उठा कर बाइक से सिटी में ही एक सरकारी फार्म पर ले जा कर कुछ लोगों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट की. मारपीट के बाद जगदीश मेघवाल को उसके घर के पास छोड़ गए."
कोयला संकट पर केंद्र सरकार समस्या की अनदेखी कर रही है: मनीष सिसोदिया
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दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि केंद्र सरकार किसी भी समस्या को स्वीकार न करके उसे और विकराल बना देती है.
सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ये स्वीकार नहीं कर पा रही है कि देश में कोयला संकट है और उसकी हर समस्या से आंख मूंदने की नीति की वजह से कोई भी समस्या देश के लिए विकराल साबित हो सकती है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मनीष सिसोदिया ने ये बयान केंद्र सरकार के ये दावा करने के बाद दिया कि देश में पर्याप्त कोयला है और कोई बिजली संकट नहीं है.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने रविवार को कहा कि देश में अगले 28 दिनों के लिए पर्याप्त कोयला है और ईंधन खत्म होने का डर आधारहीन है.
उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
सिसोदिया ने कहा कि, "केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने ये भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर पत्र नहीं लिखना चाहिए था. ये दुखद है कि केंद्रीय मंत्री इतना ग़ैर ज़िम्मेदार रवैया अपना रहे हैं."
शनिवार को केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि यदि दिल्ली को कोयला नहीं मिला तो राज्य में बिजली संकट हो सकता है.
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है. उन्होंने मौजूदा कोयला संकट की कोविड महामारी के दौरान हुए ऑक्सीजन संकट से भी तुलना की.
सिसोदिया ने कहा कि जब महामारी के दौरान डॉक्टर और राज्य ये कह रहे थे कि कि ऑक्सीजन की कमी है तब भी केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया था.
सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा कोयला संकटन की वजह से देश की बिजली ठप्प हो सकती है और पूरा सिस्टम बैठ सकता है.
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस समय भारत के 135 कोयला संचालित बिजली संयंत्रों में से आधे से अधिक गंभीर कोयला संकट से जूझ रहे हैं.
कई प्रांतों में कोयला संचालित प्लांट बंद भी हो गए हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं.
वहीं कोयला मंत्रालय ने भरोसा दिया है कि देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला है. कोयला बिजली संयंत्रों में रोज़ाना 18.5 लाख टन कोयले की ज़रूरत होती है जबकि प्रतिदिन 17.5 लाख टन कोयले की ही आपूर्ति हो पा रही है.
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इमेज कैप्शन, गोरखपुर पुलिस पर कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की पीट-पीट कर हत्या करने के आरोप हैं
गोरखपुर के होटल में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की पीट-पीट कर हत्या के मामले में यूपी पुलिस ने दो वांछित पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार कर लिया है.
गोरखपुर के एसएसपी विपिन टाडा ने रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन एसएचओ जगत नारायण सिंह और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है.
मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच कानपुर पुलिस की एसआईटी टीम कर रही है.
गोरखपुर पुलिस का कहना है कि गिरफ़्तार अभियुक्तों को कानपुर एसआईटी को सौंपा जा रहा है.
अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने गए मनीष गुप्ता की गोरखपुर पुलिस के 6 पुलिकर्मियों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.
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मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता ने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज कराया था. उत्तर प्रदेश सरकार ने मीनाक्षी गुप्ता को कानपुर नगर निगम में नौकरी और चालीस लाख रुपये का मुआवज़ा दिया है.
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर इस हत्याकांड को दबाने के आरोप लगे थे. ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें यूपी सरकार और पुलिस के बड़े अधिकारी मीनाक्षी गुप्ता पर मुक़दमा ना दर्ज करवाने का दबाव बनाते दिख रहे थे.
यूपी पुलिस ने एसएचओ जगत नारायण और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा पर एक-एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया था.
लखीमपुर हिंसा: आशीष मिश्र की गिरफ़्तारी के बाद भी यूपी पुलिस पर उठते सवाल
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लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ियां चढ़ाने के मामले में मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्र को मामले की जांच कर ही एसआईटी ने शनिवार देर रात गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है.
उनकी गिरफ़्तारी पर एसआईटी के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने कहा, "आशीष मिश्र विवेचना में सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं, इस आधार पर पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर रही है."
हालांकि आशीष मिश्र के वकील अवधेश कुमार सिंह का दावा है कि उनके मुवक्किल ने पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग दिया है. उन्होंने बीबीसी को बताया, "सारी जांच हुई है, पुलिस ने जितने सवाल पूछे थे, आशीष मिश्र ने हरेक सवाल के जवाब लिखित में दिए हैं."
शनिवार की देर रात उनका मेडिकल चेक अप पुलिस लाइंस में ही हुआ और उसके बाद उन्हें स्थानीय मजिस्ट्रेट दीक्षा भारती के सामने पेश किया गया, जहां पुलिस ने उन्हें तीन दिन तक रिमांड पर लेने की मांग की थी, लेकिन मजिस्ट्रेट ने अगली सुनवाई सोमवार 11 बजे तक स्थगित करते हुए उन्हें लखीमपुर खीरी जेल भेजने का निर्देश दिया.
पुलिस के तीन दिन के रिमांड मांगे जाने से तय है कि पुलिस अभी कई पहलूओं पर आशीष मिश्र से पूछताछ जारी रखना चाहती है. अब सोमवार को एसआईटी की टीम एक बार फिर से आशीष मिश्र को रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी. आशीष मिश्र के मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल और हादसे के दिन ढाई बजे से चार बजे तक उनकी मौजूदगी के बारे में पुलिस और पूछताछ करना चाहती है.
बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं पर क्या बोले दिलीप घोष
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दिलीप घोष
भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने कहा है कि दुर्गा पूजा के दौरान उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए अपने कार्यकर्ता और ज्यादा याद आते हैं. उन्होंने दावा किया है कि उस हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों के साथ वो हमेशा खड़े रहेंगे.
पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष रह चुके घोष ने उस हिंसा का आरोप एक बार फिर सत्तारूढ़ टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर मढ़ा. साथ ही, उन्होंने दावा किया कि दो मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद से अब तक भाजपा के कम से कम 53 कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है.
वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने बताया कि चुनावी हिंसा में मारे गए उसके कई कार्यकर्ता हमेशा दुर्गा पूजा समारोह में सक्रियता से भाग लेते थे.
घोष ने कोलकाता के बेलेघाटा इलाके के पार्टी के एक कार्यकर्ता और चुनावी हिंसा में मारे गए अभिजीत सरकार के इलाके के पूजा पंडाल का दौरा किया. वहां उन्होंने कहा कि पिछले साल भी अभिजीत सरकार ने दुर्गा पूजा के इस उत्सव में शामिल हुए थे.
उन्होंने बताया, "मैं उनके परिजन और दोस्तों से मिलने उनके 'परार पूजो' में शामिल हुआ. मैंने उन्हें भरोसा दिया है कि अभिजीत को न्याय ज़रूर मिलेगा."
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शुभेंदु अधिकारी भी गए पूजा-पंडाल
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को पूजा पंडाल का दौरा करने के बाद एक ट्वीट किया.
इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, "कोलकाता के बेलेघाटा के दुर्गा पूजा पंडाल में पसरे दुख से भरा हुआ हूं. आयोजकों ने चुनाव बाद की हिंसा में मारे गए वहां के युवक अभिजीत सरकार की याद में उत्सव वाले किसी शोर से परहेज करने का फ़ैसला लिया है. यहां ढोलक की थाप भी शांत हो गई है."
हाल ही में भवानीपुर उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हारने वाली भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल ने भी पूजा-पंडाल का दौरा किया और कहा कि भाजपा अभिजीत सरकार के परिवार का समर्थन करना जारी रखेगी. टीएमसी के एक नेता ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी दुर्गा पूजा पर राजनीति नहीं करना चाहती.
सीमा विवाद पर भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 13वें दौर की वार्ता
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दो महीने के अंतराल के बाद भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच रविवार को फिर से एक उच्चस्तरीय मुलाक़ात हुई है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख के पूर्वी इलाके के बचे हुए हिस्सों से भी सैनिकों को हटाने के लिए इस बैठक का आयोजन किया गया.
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कोर कमांडर स्तर की बातचीत के इस 13वें दौर का आयोजन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीन की ओर पड़ने वाले मोल्दो में हो रहा है. ये बातचीत आज सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुई. आज की बातचीत में भारतीय दल का नेतृत्व लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन कर रहे हैं.
अब से लगभग तीन हफ़्ते पहले भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुशांबे में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की थी. उन्होंने तब कहा था कि दोनों देशों को पूर्वी लद्दाख में बाकी बचे हुए मुद्दों के जल्द समाधान के लिए काम करना चाहिए. इन दोनों नेताओं की ये मुलाक़ात एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान 16 सितंबर को हुई थी.
इससे पहले, भारत और चीन के सैन्य अधिकारी 31 जुलाई को 12वें दौर की बातचीत के लिए मिले थे. उसके कुछ दिनों बाद, दोनों देशों की सेना गोगरा से पीछे हट गई थी. इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में उस कदम को काफी अहम माना गया था.
शनिवार को भारत के थलसेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि यदि पूर्वी लद्दाख इलाके में चीन की सेना की बड़े पैमाने पर तैनाती जारी रही, तो भारतीय सेना भी अपनी सेना वहां बनाए रखेगी.
छत्तीसगढ़ः सुप्रीम कोर्ट ने रोकी हाई कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई भ्रष्टाचार की जांच
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छत्तीसगढ़ में राज्य संसाधन केंद्र (एसआरसी) और भौतिक रेफरल पुनर्वास केंद्र से जुड़े कथित घोटाले में हाई कोर्ट के सीबीआई को एफ़आईआर दर्ज करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है.
आरोप है कि दस सालों के दौरान इन केंद्रों में एक हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई है. बीते साल जनवरी में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.
आरोप है कि राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इन केंद्रों के पैसे में भ्रष्टाचार किया. अदालत ने इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज करने का आदेश दिया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में 31 लोगों को जवाबदेह बनाया था जिनमें कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे लेकिन इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि आदेश पारित किए जाने से पहले उन सब लोगों को नोटिस दिया गया था.
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि इस याचिका को फिर से सुना जाए और मेरिट के आधार पर निर्णय दिया जाए.
अदालत को बताया गया है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने बीते साल फ़रवरी में मुक़दमा दर्ज कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि यदि हाई कोर्ट फिर से याचिकाकर्ता के हक़ में फ़ैसला देता है तो एफ़आईआर पर आगे जांच की जा सकेगी.
अदालत ने कहा कि जब तक इस मामले में हाई कोर्ट का निर्णय नहीं आता है सीबीआई अपनी जांच ना करे. अदालत ने हाई कोर्ट से कहा है कि इस मामले पर तेज़ी से सुनवाई की जाए. अब सभी पक्ष 28 अक्तूबर को हाई कोर्ट के समक्ष पेश होंगे.
हाई कोर्ट के समक्ष पेश याचिका में दावा किया गया है कि इन केंद्रों पर काम कर रहे लोगों को सरकारी कर्मचारी के तौर पर दिखाया गया था और उनके वेतन के नाम पर मोटा पैसा सरकार से लिया गया लेकिन इन लोगों को कभी वेतन नहीं दिया गया. याचिकाकर्ता ने दावा किया गया था कि ऐसे लोगों को सिर्फ़ दस्तावेज़ों में पीआरसी और पीआरआरसी का कर्मचारी दिखाया गया.
काबुल धमाकों पर सुरक्षा परिषद के बयान में भारत की बात सुनी गई: रिपोर्ट
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने अफ़ग़ानिस्तान में कुंदुज़ के एक मस्जिद पर आईएसआईएस के ''नृशंस'' आतंकी हमले और हाल में अन्य धार्मिक स्थलों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस बयान में दो बातों को शामिल कराने के लिए भारत अड़ा रहा, लेकिन इन बातों को बयान में जगह न देने का खूब प्रयास किया गया. हालांकि भारत के कड़े रुख के बाद इस प्रेस विज्ञप्ति में अंतत: उन बातों को जगह देनी पड़ी.
15 देशों के सुरक्षा परिषद ने शनिवार को इस बारे में एक बयान जारी किया. इस बयान में यूएनएससी के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान के कुंदुज में हुए नृशंस और कायराना आतंकी हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है.
सुरक्षा परिषद के बयान में कहा गया, ''इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) ने ली है. यह संगठन इस्लामिक स्टेट-इराक और लेवेंट (आईएसआईएल) से जुड़ा हुआ है. इस हमले में 150 से अधिक लोग हताहत हुए. गोज़र-ए-सईद आबाद मस्जिद से पहले अफ़ग़ानिस्तान के कई और धार्मिक संस्थानों पर हाल में हमले हुए हैं.''
इससे पहले, शुक्रवार को इस्लामिक स्टेट के एक आत्मघाती हमलावर ने कुंदुज़ के एक शिया मस्जिद में ख़ुद को उड़ा लिया था.
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दो बातों पर अड़ा भारत
भारत सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा परिषद की इस प्रेस विज्ञप्ति को तैयार करने के दौरान भारत दो पहलुओं पर अडिग रहा. अंततः उसके रुख को इस बयान में जगह भी मिली.
भारत के जोर देने के बात इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल पहली बात ये है कि आतंकवादी हमले की सांप्रदायिक प्रकृति का साफ जिक्र हुआ है. बयान में कहा गया है कि हाल के दिनों में न केवल अफ़ग़ानिस्तान बल्कि पाकिस्तान में भी शिया संस्थानों पर आतंकी हमले हो रहे हैं.
भारत के जोर देने के बाद जो दूसरी बात इस बयान में शामिल हुई है वो ये कि अफ़ग़ानिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक संस्थानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं.
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इन सुझावों को खारिज करने की हुई भरपूर कोशिश
सूत्रों के अनुसार, भारत के सुझाए इन पहलुओं को हालांकि इस विज्ञप्ति से या तो हटा दिया गया या उसे बदल दिया गया. लेकिन भारत अपने रुख पर अड़ा रहा. उसका साफ कहना था कि 'हिंसा की सांप्रदायिक प्रकृति' के साथ-साथ 'अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति' को इस बयान में जगह मिलनी ही चाहिए.
सूत्रों ने बताया कि बाद में भारत के रुख को स्वीकार करना पड़ा और उसके बाद ही यह प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई.
मालूम हो कि अक्टूबर के शुरू में ही काबुल के 'गुरुद्वारा करते परवान' में तोड़फोड़ की गई थी.
उसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि काबुल के गुरुद्वारे में हुई तोड़फोड़ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. भारत का कहना था कि सुरक्षा परिषद में उसकी अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए प्रस्ताव के लक्ष्यों को पाने पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जोर देना चाहिए.
ईरान के साथ परमाणु डील पर जर्मनी ने इसराइल में क्या कहा
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इमेज कैप्शन, इसराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ एक साझा संवाददाता सम्मेलन में एंगेला मर्केल
इसराइल की यात्रा पर पहुंची जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने रविवार को कहा है कि ईरान के साथ परमाणु करार के भविष्य के लिए आने वाले हफ़्ते निर्णायक साबित होंगे.
उन्होंने ये भी कहा कि संबंध सुधारने की दिशा में अमेरिकी संकेतों का जवाब देने में ईरान की ओर से की जा रही हरेक दिन की देरी का मतलब है कि वो और अधिक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है.
इसराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ एक साझा संवाददाता सम्मेलन में एंगेला मर्केल ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी ये जिम्मेदारी बनती है कि वो ईरान को बातचीत के लिए तैयार करें.
उन्होंने कहा, "मैं इस मामले में चीन और रूस की भी जिम्मेदारी देखती हूं. क्योंकि अगर ईरान के साथ परमाणु करार अपने उद्देश्य को नहीं पूरा कर पाया तो इसमें बहुत मुश्किल आएगी. इस समझौते के लिए आने वाले हफ़्ते निर्णायक साबित होने वाले हैं."
कांग्रेस राजस्थान में दलित व्यक्ति की हत्या पर खामोश क्यों: मायावती
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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने रविवार को राजस्थान में दलित व्यक्ति को कथित तौर पर पीट-पीट कर मारे जाने की घटना की आलोचना करते हुए कांग्रेस की खामोशी पर सवाल उठाया है.
मायावती ने ट्विटर पर कहा, "राजस्थान के हनुमानगढ़ में दलित की पीट-पीट कर की गई हत्या अति-दुःखद और निन्दनीय है, लेकिन कांग्रेस हाईकमान चुप क्यों है?"
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सात अक्टूबर को राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक दलित व्यक्ति की कुछ लोगों ने पीट-पीट कर कथित तौर पर हत्या कर दी थी. राजस्थान पुलिस का कहना है कि हत्या की वजह प्रेम प्रसंग हो सकती है.
मायावती ने कांग्रेस से सवाल पूछा है, "क्या छत्तीसगढ़ और पंजाब के सीएम वहाँ जाकर पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये की मदद देंगे? बीएसपी जवाब चाहती है. वरना दलितों के नाम पर घड़ियाली आँसू बहाना बन्द करें."
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लखीमपुर हिंसा के मामले पर मायावती ने कहा, "साथ ही, यूपी के लखीमपुर खीरी जघन्य काण्ड में केन्द्रीय मंत्री के बेटे का नाम सुर्खियों में आना यह भाजपा सरकार की कार्यशैली पर अनेकों सवाल खड़े करता है."
"ऐसे में बीजेपी अपने मंत्री से खुद ही इस्तीफा ले तभी वहाँ पीड़ित किसानों को कुछ न्याय की उम्मीद हो सकती है. बीएसपी की ये माँग है. इसके अलावा, जम्मू और कश्मीर में आए दिन वहाँ आतंकियों द्वारा की जा रही निर्दोष लोगों की हत्या अति-दुःखद और शर्मनाक है. केन्द्र सरकार सख्त कदम उठाये, बीएसपी की यह माँग है."
कोयले और बिजली का उत्पादन अगले तीन-चार दिनों में सामान्य हो जाएगा: प्रह्लाद जोशी
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केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला के महंगा होने से इसकी आपूर्ति और बिजली के उत्पादन में कमी आई है. हालांकि उन्होंने भरोसा दिया है कि अगले तीन से चार दिनों में हालात "ठीक" हो जाएंगे.
एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर शनिवार को उन्होंने बताया कि इस साल भारी बारिश के चलते भी कोयले के उत्पादन और आपूर्ति में कमी आई है.
कोयला मंत्री ने हालांकि कहा, "यदि पिछले कई सालों के आंकड़ों को मिलाएंगे तो पाएंगे कि इस साल सितंबर और ख़ासकर अक्टूबर में कोयले का उत्पादन और इसकी आपूर्ति सबसे अधिक रही है. उम्मीद है कि अगले तीन से चार दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे."
प्रह्लाद जोशी ने कहा, "आयात किए जाने वाले कोयले के अंतरराष्ट्रीय दाम अचानक से बढ़ गए हैं. इसलिए आयातित कोयले से चलने वाले बिजली घरों ने अपना उत्पादन बंद कर दिया है. ऐसे संयंत्रों के बंद हो जाने के बाद समूचा भार घरेलू कोयले पर आ गया है."
कोयला मंत्री ने बताया है कि वो अगले एक-दो दिनों में कोयले की उपलब्धता का 'पूरा ब्यौरा' पेश करेंगे.
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केजरीवाल का पीएम को पत्र
इससे पहले शनिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की.
उन्होंने अनुरोध किया है कि दिल्ली को बिजली देने वाले ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति की जाए. केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को बताया कि कोयले की कमी के चलते दिल्ली को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है.
वहीं, दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया था कि दिल्ली की अधिकांश बिजली एनटीपीसी से खरीदी जाती है और यदि उसने आपूर्ति बंद कर दी, तो दिल्ली को 'ब्लैकआउट' के हालात का भी सामना करना पड़ सकता है.
इन मामलों पर जोशी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री को लिखे केजरीवाल के पत्र के बारे में जानकारी है और इस मामले पर वो एनटीपीसी से जानकारी मांगेंगे.
ब्रेकिंग न्यूज़, एयर इंडिया के बाद अब उसकी चार सहायक कंपनियों को बेचेगी मोदी सरकार
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एयर इंडिया के ऐतिहासिक निजीकरण के बाद अब भारत सरकार इसकी चार और सहायक कंपनियों, जिनमें अलायंस एयर भी शामिल है, के निजीकरण का काम शुरू करने जा रही है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि अलायंस एयर के अलावा चौदह हज़ार करोड़ क़ीमत की ज़मीन और दूसरी परिसंपत्तियों का निजीकरण किया जाएगा.
सरकार ने 8 अक्तूबर को बताया था कि टाटा समूह ने 18 हज़ार करोड़ रुपये की बोली लगाकर एयर इंडिया को ख़रीद लिया है. टाटा समूह ने 2700 करोड़ रुपए कैश में दिए हैं और एयर इंडिया का 15300 करोड़ रुपए का क़र्ज़ अपने ऊपर लिया है.
सरकार और टाटा समूह के बीच ये सौदा इस साल दस दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. इसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस और एआईएसएटीएस भी शामिल है जो ग्राउंड हैंडलिंग का काम करती है.
पीटीआई से बात करते हुए पांडे ने कहा कि निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग अब सहायक कंपनियों के निजीकरण पर काम शुरू करेगा. एयर इंडिया की सहायक कंपनियां एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड के पास हैं जो एयर इंडिया की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करती है.
तुहीन कांत पांडे के मुताबिक अब एईएएचएल की परिसपंत्तियों को बेचा जाएगा ताकि क़र्ज़ उतारा जा सके. उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों के निजीकरण का काम एयर इंडिया की बिक्री पूरी होने के बाद ही शुरू किया जा सकेगा.
31 अगस्त तक एयर इंडिया के ऊपर कुल 61,562 करोड़ रुपये का क़र्ज़ था जिसमें से 15300 करोड़ का क़र्ज़ टाटा के ऊपर गया है जबकि 46262 करोड़ का क़र्ज़ एआईएएचएल को चुकाना है.
लखीमपुर हिंसा: आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी आधी रात को कैसे हुई
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में किसानों को गाड़ी से कुचलने के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को लखीमपुर खीरी पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.
लखीमपुर खीरी में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे ने बताया कि क़रीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने शनिवार रात को उन्हें गिरफ़्तार किया.
इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के डीआईजी इंचार्ज उपेन्द्र अग्रवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि आशीष मिश्रा घंटों चली पूछताछ में सवालों का जवाब देने से बचने की कोशिश कर रहे थे और सहयोग नहीं कर रहे थे, इसीलिए उन्हें गिरफ़्तार किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि आशीष मिश्रा को मैजिस्ट्रेट के सामने पुलिस कस्टडी के लिए पेश किया जाएगा और फिर उनसे पूछताछ की जाएगी.
इस संबंध में किसानों ने जो एफ़आईआर दर्ज कराई थी, उसमें आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी के तिकुनिया किसान हत्या कांड के मुख्य अभियुक्त हैं.
ताइवान पर चीन के लिए हमला करना कितना आसान होगा?
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चीन और ताइवान के बीच एक बार फिर तनाव गहरा होता दिख रहा है. लगातार ताइवान के हवाई क्षेत्र में दख़ल देने के बाद अब चीन के शीर्ष नेतृत्व ने ताइवान के 'एकीकरण' यानी ख़ुद में मिलाने की बात कही है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि ताइवान का 'एकीकरण ज़रूर पूरा होना चाहिए.'
शी ने कहा है कि एकीकरण शांतिपूर्ण तरीक़े से होना चाहिए लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी चेतावनी देते हुए कह दिया कि चीन के लोगों की अलगाववाद का विरोध करने की एक 'महान परंपरा' रही है.
इसके जवाब में ताइवान ने भी कह दिया है कि उसका भविष्य उसके लोगों के हाथों में है.
ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा है कि ताइवान अपनी सुरक्षा मज़बूत करता रहेगा ताकि उसके द्वीप पर कोई ताक़त का इस्तेमाल न कर सके.
पाकिस्तान के पास भोपाल में जन्मे डॉ क़दीर ख़ान के होने के मायने
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28 जनवरी, 1987 की शाम का समय था. पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान देश की राजधानी इस्लामाबाद के सबसे महंगे इलाके ई -7 स्थित अपने आवास पर अपनी पत्नी के साथ अकेले थे.
एक सुरक्षा अधिकारी ने अंदर आकर कुछ बिन बुलाए मेहमानों के आने की सूचना दी.
सुरक्षा अधिकारी ने डॉक्टर ख़ान से कहा, कि वह मेहमानों में से एक को जानता है. वह मुशाहिद हुसैन सैयद हैं, जो पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध पत्रकार थे. डॉक्टर ख़ान ने सुरक्षा अधिकारी से कहा, कि मेहमानों को अंदर ले आओ और ड्राइंग रूम में बैठा दो.
जब डॉक्टर ख़ान मेहमानों से मिलने आए, तो मुशाहिद हुसैन ने दूसरे मेहमान का परिचय कुलदीप नैयर के रूप में कराया, जो भारतीय पंजाब के रहने वाले जाने-माने पत्रकार थे.
मुशाहिद हुसैन ने डॉक्टर ख़ान को बताया कि कुलदीप नैयर एक शादी में शामिल होने पाकिस्तान आए हैं. बैठक के एक सप्ताह बाद समारोह होना था.