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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा गिरफ़्तार

शनिवार को क़रीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ़्तार किया है.

लाइव कवरेज

  1. शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन में मिलाने की बात दोहराई

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को दोहराया कि वह शांतिपूर्ण तरीक़े से ताइवान को चीन में शामिल करेंगे.

    हालांकि उन्होंने एक हफ़्ते से चल रहे तनाव के बाद सीधे तौर पर बल के प्रयोग की बात नहीं की.

    शी जिनपिंग का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ताइवान को लेकर बीजिंग की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी चिंता ज़ाहिर की गई है.

    शी जिनपिंग के इस बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए ताइवान ने बीजिंग को अपनी ज़िद छोड़ने के लिए कहा.

    ताइवान ने कहा कि ताइवान के लोग ही सिर्फ़ अपना भविष्य कर सकते हैं.

    चीन दावा करता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है और उसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए प्रतिबद्ध है.

    इससे पूर्व अपने एक बयान में चीन ने कहा था कि अगर ताइवान को ख़ुद में मिलाने के लिए ताक़त का भी इस्तेमाल करना पड़ा तो किया जाएगा.

    चीन ताइवान में राष्ट्रपति साई इंग-वेन की सरकार को अलगाववादी मानता है. लेकिन ताइवान ख़ुद को एक संप्रभु देश मानता है.

    बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल में बोलते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि चीन लंबे समय से अलगाववाद का विरोध करता रहा है.

    साल 1911 में अंतिम शाही राजवंश की समाप्ति के लिए की हुई क्रांति की वर्षगांठ के मौक़े पर उन्होंने कहा, "ताइवान की स्वतंत्रता सबसे बड़ी मुश्किल है और देश के कायाकल्प के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा भी."

    उन्होंने इसे एक गुप्त-ख़तरा भी कहा.

    उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीक़े से ताइवान को चीन में मिलाने से ताइवान के लोगों के भी सभी हित पूरे होते हैं लेकिन उन्होंने यह भी दोहराया कि चीन किसी क़ीमत पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

    शी जिनपिंग ने कहा, "किसी को भी चीन के लोगों के दृढ़ संकल्प, इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता के प्रति समर्पण और क्षमता को कम करके नहीं आंकना चाहिए."

    उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि "देश के एकीकरण का ऐतिहासिक काम ज़रूर पूरी होगा."

    ताइवान ने शी जिनपिंग के संबोधन का स्वागत हालांकि उस तरह से नहीं किया है.

    ताइवान राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि वे एक संप्रभु स्वतंत्र देश थे और चीन गणराज्य का हिस्सा नहीं थे. उन्होंने "एक देश, दो प्रणाली" के चीन के प्रस्ताव को सिरे से ख़ारिज कर दिया है.

    कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "देश का भविष्य ताइवान के लोगों के हाथों में है."

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, लखीमपुर खीरी हिंसा- मुख्य संदिग्ध आशीष मिश्रा पुलिस लाइंस पहुँचे

    अनंत झणाणे, लखीमपुर खीरी से

    लखीमपुर खीरी सदर विधायक योगेश वर्मा और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के संसदीय प्रतिनिधि अरविंद सिंह और अपने वकीलों के साथ आशीष मिश्रा पुलिस लाइंस पहुँचे.

    वे पुलिस लाइंस में मुख्य दरवाज़े से अलग पिछले दरवाज़े से पैदल ही पहुँचे. लखीमपुर खीरी के पुलिस अधीक्षक विजय ढुल ने बताया कि आशीष मिश्रा से क्राइम ब्रांच पूछताछ कर रही है.

    मंत्री अजय मिश्रा शुक्रवार शाम को ही लखीमपुर खीरी के अपने निवास पर पहुँच चुके हैं और शनिवार सुबह से ही वह शहर में अपने संसदीय कार्यालय पहुँच कर भाजपा कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं.

    पुलिस लांइस से अजय मिश्रा टेनी का कार्यालय चंद मीटर की दूरी पर है और पूरे रास्ते पर भारी फ़ोर्स तैनात का गई है.

    अगर आज भी आशीष मिश्रा पुलिस के सामने पेश नहीं होते तो फिर पुलिस उनके ख़िलाफ़ कोर्ट से वॉरंट जारी करवा सकती थी.

    इस मामले में यूपी पुलिस की जाँच के दौरान सुस्त रवैए के लिए सप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगायी है.

    पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "क्या आप देश में हत्या के अन्य अभियुक्तों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं?"

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के सुझाव को भी नहीं माना.

    बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकीलों को कहा था “आप जानते हैं कि हम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं.”

    उधर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पत्रकार रमन कश्यप के निघासन स्थित घर पर मौन व्रत और भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

    सिद्धू ने कहा कि वह तब तक अनशन पर बैठे रहेंगे जब तक आरोपी आशीष मिश्र को गिरफ़्तार नहीं कर लिया जाता है.

  3. योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी के बाद प्रियंका ने फिर लगाई झाड़ू

    लखीमपुर खीरी हिंसा की घटना के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एकाएक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है.

    प्रियंका गांधी जहाँ कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए राज्य की बीजेपी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ भी राजनीतिक हमले कर रहे हैं.

    सीतापुर के गेस्ट हाउस में राज्य पुलिस की हिरासत में 60 घंटे तक रहने के दौरान प्रियंका गांधी का एक वीडियो और उसी से जुड़ी एक तस्वीर वायरल हुई थी. इस वीडियो में वह झाड़ू लगाती दिख रही थीं.

    इस वीडियो पर टिपप्णी करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जनता ने उन्हें केवल झाड़ू लगाने लायक ही छोड़ा है.

    योगी आधित्यनाथ की इस टिप्पणी के बाद प्रियंका गांधी लखनऊ की एक दलित बस्ती पहुँची और वहाँ स्थित वाल्मिकी मंदिर के परिसर में झाड़ू लगाई.

    प्रियंका गांधी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी उनके ख़िलाफ़ नहीं बल्कि उन करोड़ों महिलाओं, दलितों और सफ़ाई कर्मचारियों के ख़िलाफ़ थी जो पूरे स्वाभिमान के साथ घर और शहर साफ़ करते हैं.

    इससे पहले सीतापुर में हिरासत में लिए जाने के बाद गेस्ट हाउस में झाड़ू लगाती प्रियंका गांधी के बारे में पूछे जाने पर सीएम योगीआदित्यनाथ ने न्यूज़ 18 टीवी चैनल से कहा था कि लोग उन्हें इसी काबिल बनाना चाहते थे और उन्होंने उनसे वही करवाया है.

    योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कांग्रेस नेताओं के पास नकारात्मकता फैलाने के अलावा और कोई काम नहीं है.

    लखनऊ की दलित बस्ती पहुंचीं प्रियंका गांधी ने योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि सीएम ने सफ़ाई का काम करने वाले लोगों को अपमानित किया है.

    दलित बस्ती लव कुश नगर पहुंचीं प्रियंका ने कहा, "उन्होंने ऐसा कहकर मुझे अपमानित नहीं किया है.उन्होंने आप सभी का अपमान किया है क्योंकि करोड़ों दलित भाई-बहन सफ़ाई कर्मचारी हैं."

    प्रियंका ने अपने बयान में कहा कि इसीलिए उन्होंने ख़ुद वाल्मिकी मंदिर को साफ़ करने का फ़ैसला किया ताकि वो यह बता सकें कि सफ़ाई करने में कुछ भी ग़लत नहीं है.

    योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी मानसिकता बदलने को कहा.

    प्रियंका गांधी ने यहाँ लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप हैं, इसलिए बाकी नेताओं को पीड़ितों के साथ खड़े होने की ज़रूरत है.

    कांग्रेस 10 अक्टूबर को वाराणसी में एक रैली करने जा रही है जिसे उसने "किसान न्याय रैली" नाम दिया है.इस रैली को पार्टी के 2022 यूपी विधानसभा चुनाव के आगाज़ के रूप में भी देखा जा रहा है.

    रैली में प्रियंका गांधी के मौजूद रहने की भी उम्मीद है.

  4. अगले हफ़्ते कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक, विवाद की आशंका

    कांग्रेस पार्टी ने अगले सप्ताह कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक बुलाई है. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जबकि कांग्रेस पार्टी के भीतर सब कुछ सही नहीं चल रहा है.

    छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान में अपने ही नेताओं के बीच गतिरोध से जूझ रही कांग्रेस पार्टी का एक धड़ा नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष जताता रहा है.

    इन तमाम विवाद, गतिरोध के बीच पार्टी ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने का फ़ैसला किया है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के लिए एक स्थायी और पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव पर भी चर्चा हो.

    कोरोना महामारी का हवाला देते हुए एक लंबे समय से अध्यक्ष के चुनाव का मुद्दा टलता रहा है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता (जी23) पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं चुने जाने को लेकर नारज़गी जताते रहे हैं.

    पहले उन्होंने सोनिया गांधी को एक चिट्टी लिखकर अपना रोष जताया था, उसके बाद कई बार सार्वजनिक मंचों से भी उन्होंने खेद ज़ाहिर किया.

    क़रीब एक सप्ताह पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी से सदस्यों के पार्टी छोड़कर जाने पर नेतृत्व की आलोचना की थी.

    इससे पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद (जी23 के प्रमुख नेताओं में से एक) ने पिछले साल सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक बदलाव की मांग की थी.

    इसके बाद उन्होंने पिछले महीने भी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पंजाब की स्थिति पर चर्चा के लिए बैठक की मांग की थी.

    कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के तरीक़े से जी-23 के नेता नाराज़ हैं.

    भले ही अमरिंदर सिंह जा चुके हैं और नए सीएम ने पदभार भी संभाल लिया है बावजूद इसके पंजाब कांग्रेस में सब सही नहीं हुआ है.

    क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने तक़रीबन दस दिन पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दिया था लेकिन अब भी उनकी स्थिति को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है.

    मीडिया सूत्रों का कहना है कि अभी तक उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया गया है. यह मुद्दा भी कार्यसमिति की बैठक में उठ सकता है.

    कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में भी अनिश्चितता है. हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हाल ही में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्ति किया गया है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व यहां जल्दबाज़ी में कोई फ़ैसला नहीं लेगा.

    जानकार मानते हैं कि कार्यसमिति की बैठक में जमकर हंगामा हो सकता है.

    कपिल सिब्बल ने जिस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए और जिस तरह इसके बाद उनके घर के बाहर विरोध हुआ उससे जी23 के नेता काफ़ी नाराज़ हैं.

  5. तुर्की में राष्ट्रपति अर्दोआन के ख़िलाफ़ एकजुट हुआ विपक्ष

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआनऔर उनकी पार्टी को बेदख़ल करने के लिए छह विपक्षी गुट एक साथ आए हैं.

    तुर्की में साल 2023 में चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले ओपिनियन पोल के नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि सत्तारुढ़ गठबंधन के समर्थन में कमी आई है, जिससे राष्ट्रपति अर्दोआन पर दबाव बढ़ रहा है.

    विपक्षी गुटों ने एक बैठक में कहा कि इस गठबंधन को और व्यापक करने से उन्हें साल 2019 के स्थानीय चुनावों में अर्दोआन को झटका देने में मदद मिली थी.

    मंगलवार को इन पार्टियों की तीसरी बैठक हुई और इस बैठक में तय किया गया कि साल के अंत तक एक सिद्धांत पर सहमति तक पहुँचने के लिए साप्ताहिक बैठकें की जाएंगी.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स से राजनीतिक मामलों के जानकार मूरत येतकिन कहते हैं कि तुर्की में विपक्षी दल ऐसा कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले कभी भी नहीं किया गया है.उन्होंने कहा कि सरकार का सामना करने के लिए वे एकजुट हो रहे हैं. जो कि नई बात है.

    महंगाई, बेरोज़गारी, कोरोना महामारी, जंगलों में लगी आग, बाढ़ और आर्थिक संकट से निपटने जैसे मुद्दों पर अर्दोआन सरकार की काफ़ी आलोचना हुई है और इसी कारण उनकी सरकार के प्रति लोगों के समर्थन में भी कमी आई है.

    ओपिनियन पोल में अर्दोआन की एके पार्टी को क़रीब 31-33% फ़ीसद मतों के बीच दिखाया गया है.जो कि साल 2018 में हुए संसदीय चुनाव की तुलना में काफ़ी कम है.

    उस दौरान उनकी पार्टी को 42.6% मत मिले थे. एके पार्टी की सहयोगी राष्ट्रवादी एमएचपी पार्टी के वोट प्रतिशत में भी कमी देखी गई है, साल 2018 में इसे 11.1 फ़ीसद वोट मिले थे लेकिन ओपिनियन पोल में पार्टी को 8-9 फ़ीसद वोट ही मिलते दिख रहे हैं.

    अगर ओपिनियन पोल के नतीजे ही चुनावों में भी आते हैं तो अर्दोआन सत्ता में बमुश्किल वापसी कर पाएंगे.

    विपक्षी दलों की ओर से इस बैठक में आए नेताओं ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य राष्ट्रपति पद के लिए एक साझा उम्मीदवार चुनने के बजाय, साझा सिद्धांतों को तय करना है.

    आईवाईआई पार्टी के उपाध्यक्ष बहादिर एर्डेम ने कहा कि वे न्यायपालिका, मीडिया और शिक्षाविदों की स्वतंत्रता, राजनीतिक दलों और चुनावों से जुड़े क़ानूनी मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार हैं. ताकि सत्ता और लोकतंत्र एक-दूसरे से अलग रहें.

    एर्डेम ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "इन छह पार्टियों के एक साथ आने से लोगों में उम्मीद जगी है."

    सीएचपी के मुहर्रम एरकेक ने कहा कि पूरी ताक़त एक आदमी के हाथ में होने से लोगों की परेशानी बद से बदतर होती जा रही है और ऐसे में एक मज़बूत संसदीय प्रणाली उनकी उम्मीद को बढ़ाएगी.

  6. तिकुनिया में किसानों का बड़ा आंदोलन

    केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने किसानों से 12 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले के तिकुनिया गाँव में जुटने का आह्वान किया है.

    इसी दिन तीन अक्टूबर को हुए लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों का अंतिम संस्कार भी किया जाएगा.

    दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर बीते 11 महीनों से विरोध प्रदर्शन में बैठे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने शुक्रवार को लखीमपुर हिंसा मामले पर बैठक की.

    बैठक के बाद उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों, पंजाब के गुरुद्वारों और सभी राज्यों में ले जाया जाएगा.ताकि लोगों को यह संदेश पहुंचाया जाए कि भाजपा सरकार किसानों को प्रताड़ित कर रही है".

    इस बैठक में शामिल हुए भारतीय किसान यूनियन के दाकुंडा धड़े के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा है, "इतना ग़ुस्सा सिर्फ़ इस घटना के कारण ही नहीं है बल्कि नाराज़गी इस बात से भी है कि सरकार इतने लंबे समय से संदिग्धों को बचा रही है."

    बैठक में यह भी कहा गया कि अगर इस हिंसा के मुख्य संदिग्ध आशीष मिश्रा को तत्काल गिरफ़्तार नहीं किया जाता है और उनके पिता अजय मिश्रा जो कि गृह राज्य मंत्री भी है,11 अक्टूबर तक पद नहीं छोड़ते हैं या उन्हें नहीं हटाया जाता है तो संयुक्त किसान मोर्चा देशव्यापी "रेल रोको" विरोध प्रदर्शन करेगा.

    18 अक्टूबर को सुबह दस से शाम चार बजे तक पूरे देश में ट्रेनें रोकी जाएंगी. इसके अलावा 24 अक्टूबर को पिछले महीने मुज़फ़्फ़रनगर में हुई महापंचायत के तर्ज़ पर ही लखनऊ में महापंचायत की जाएगी.

    दशहरा पर किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला जलाने की योजना भी बनाई है.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने हिंसा की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की गठित एसआईटी और न्यायिक जांच को ख़ारिज कर दिया है.

    उन्होंने कहा कि ख़ुद सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि वह इससे संतुष्ट नहीं है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के साथ सहमति जताते हुए कहा कि सीबीआई जांच से भी समाधान नहीं होगा.

    उन्होंने इस मामले में "निष्पक्ष जांच की मांग की जो सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करे.

    शहीद किसान दिवस'

    संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 अक्टूबर को "शहीद किसान दिवस" ​​घोषित करते हुए किसानों से तिकुनिया पहुंचने की अपील की है.

    अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मुल्ला का कहना है कि पिछले रविवार को तिकुनिया में कम से कम 20,000 लोग जमा हुए होंगे. उस समय हिंदुओं और पंजाबी सिखों के बीच दंगा भड़क सकता था.किसान नेता राकेश टिकैत ने इसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

    उन्होंने अजय मिश्रा और दूसरे बीजेपी नेताओं पर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साज़िश का आरोप भी लगाया.

    उन्होंने कहा, "इस बार भी बड़ी संख्या में लोग जमा होंगे लेकिन किसान नेता यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी नाराज़गी शांतिपूर्ण विरोध तक ही सीमित रहे."

    उनका अनुमान है कि इस दिन देशभर से क़रीब बीस हज़ार लोग जमा होंगे.

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