कांग्रेस में शामिल होने के बाद क्या बोले कन्हैया कुमार

छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में आए कन्हैया कुमार ने मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है.
मीडिया को लेकर उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं आपको बधाई देना चाहता हूं कि आपने पत्रकारिता की उस मिसाल को ज़िंदा रखा है कि कम से विपक्ष से तो सवाल करते हैं आप. ताकि इस देश को याद रहे कि पत्रकारों का काम है सवाल पूछना."
"मुझे लगता है कि बहुत कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है. सूचना क्रांति के इस दौर में हमारे पत्रकार साथियों को ज़्यादा चीज़ें मालूम हैं."
"मैं कांग्रेस पार्टी इसलिए ज्वॉयन कर रहा हूं क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि इस देश में कुछ लोग, वे सिर्फ़ लोग नहीं हैं, वे एक सोच हैं. वे इस देश की सत्ता पर न सिर्फ़ काबिज़ हुए हैं, इस देश की चिंतन परंपरा, संस्कृति, इसका इतिहास, इसका वर्तमान और इसका भविष्य ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं."

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"उस सोच के बारे में आप अपने आप समझ जाएंगे. क्योंकि कहीं मैंने पढ़ा था कि आप अपने दुश्मन का चुनाव कीजिए, अपने विपक्ष का चुनाव कीजिए, दोस्त अपने आप बन जाएंगे. तो हमने ये चुनाव किया है कि हम इस देश की सबसे पुरानी पार्टी, सबसे लोकतांत्रिक पार्टी में हम इसलिए शामिल होना चाहते हैं कि हमको लगता है और सिर्फ़ हमको नहीं लगता है, इस देश के लाखों करोड़ों नौजवानों को ये लगने लगा है कि अगर कांग्रेस नहीं बचा तो देश नहीं बचेगा."
"और ये बात मैं आपको स्पष्ट कर देता हूं. देश में प्रधानमंत्री अब भी हैं, देश में प्रधानमंत्री इससे पहले भी थे. देश में आगे भी प्रधानमंत्री आगे भी होते रहेंगे लेकिन आज जब हम लोग राहुल गांधी की मौजूदगी में औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी का फॉर्म भर रहे थे तो साथी जिग्नेश मेवाणी ने संविधान की कॉपी दी और हमने उनको भगत सिंह, गांधी और आंबेडकर की तस्वीर दी. क्योंकि हमारा ये मानना है कि आज इस देश को भगत सिंह की वीरता की ज़रूरत है, भगत सिंह के साहस की ज़रूरत है. आज इस देश को आंबेडकर की समानता की ज़रूरत है और आज इस देश को गांधी की एकता की ज़रूरत है."

















