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ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की जांच पर नहीं मानी अमेरिका की मांग
ईरान ने अमेरिका की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था संयुक्त राष्ट्र के जांचतकर्ताओं को ईरान के परमाणु संयंत्रों पर जाने की इजाजत दी जाए.
लाइव कवरेज
सिंधुवासिनी, पवन सिंह अतुल and विभुराज
कन्हैया कुमार: क्या संसद जाने की जल्दी में सीपीआई छोड़ कांग्रेस का थामा दामन
ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की जांच पर नहीं मानी अमेरिका की मांग

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इमेज कैप्शन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ईरान ने अमेरिका की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था संयुक्त राष्ट्र के जांचतकर्ताओं को ईरान के परमाणु संयंत्रों पर जाने की इजाजत दी जाए.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि अमरीका को जांच के मामले में बोलने का हक़ नहीं है क्योंकि उसने ईरान के परमाणु स्टेशनों पर उनके शब्दों में आतंकवादी हमलों की भर्त्सना नहीं की थी.
लगता है कि इस्लामी का इशारा उन नुकसान पहुंचाने वाली उन घटनाओं की तरफ़ था जिसको लेकर समझा जाता है कि वो इसराइल ने किया था.
अमेरिका ने कल कहा था कि ईरान को जांचकर्ताओं को उन कारखानों में जाने से नहीं रोकना चाहिए जहां सेंट्रीफ्यूज तैयार होता है जिसका इस्तेमाल यूरेनियम के संवर्धन में किया जाता है.
यूरोप को अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार करना चाहिए: फ्रांस

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यूरोप को अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार करना चाहिए और इसे अपनी सुरक्षा को लेकर चूकना नहीं चाहिए.
फ्रांस ने ग्रीस के साथ तीन अरब डॉलर का सुरक्षा समझौता किया है.
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के दौरे पर आए ग्रीस के प्रधानमंत्री के साथ इस रक्षा सौदे के बाद बोल रहे थे.
ग्रीस ने फ्रांस से युद्धपोत खरीदने के लिए करार किया है.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का कहना था कि ये समझौता फ्रांस के रक्षा क्षेत्र पर भरोसे को दर्शाता है.
हाल में ही अमरीका-ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए समझौते की वजह से फ्रांस को ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए रक्षा सौदे से हाथ धोना पड़ा था.
कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने थामा कांग्रेस का हाथ
वीडियो कैप्शन, कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने थामा कांग्रेस का हाथ जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई के नेता कन्हैया कुमार मंगलवार को औपचारिक तौर पर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. उनके साथ ही गुजरात के दलित और युवा नेता जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस में शामिल हुए. मेवानी फ़िलहाल गुजरात की वडगाम सीट से निर्दलीय विधायक हैं.
पार्टी में शामिल होने के बाद कन्हैया कुमार ने कहा,"मैं कांग्रेस पार्टी इसलिए ज्वॉयन कर रहा हूं क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि इस देश में कुछ लोग इस देश की सत्ता पर काबिज़ हैं, वे इस देश का भविष्य ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं."
कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला की मौजूदगी में कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी कांग्रेस में शामिल हुए.
पाकिस्तान: ईशनिंदा के मामले में 'मानसिक रूप से बीमार' मुस्लिम महिला को सज़ा-ए-मौत

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लाहौर की एक अदालत ने ईशनिंदा के एक मामले में एक मुस्लिम महिला को मौत की सजा सुनाई है और उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इस फैसले के तहत दोषी अब सात दिनों के भीतर अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ लाहौर हाई कोर्ट में अपील कर सकता है.
महिला के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत ईशनिंदा के आरोप में साल 2013 में निश्तार कॉलोनी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंसूर अहमद कुरैशी ने सोमवार को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपने फैसले में कहा कि यह स्पष्ट है कि अभियुक्त (सलमा तनवीर) मानसिक रूप से बीमार थीं, अन्यथा वो इस तरह की अपमानजनक बात नहीं लिखती.
उन्होंने कहा, "हालांकि, सवाल ये है कि क्या इस तरह के गंभीर अपराध के अभियुक्त को बरी करने के लिए मानसिक बीमारी का आधार काफी है? क़ानून इसे मान्यता नहीं देता है."
फैसले के मुताबिक, कानून में लिखी गई असामान्यता (मानसिक बीमारी) सलमा तनवीर की बीमारी से मेल नहीं खाती है. अदालत ने फैसला सुनाया कि घटना के समय जो व्यक्ति अपना स्कूल लगन से चला रहा था, उसे मानसिक रूप से बीमार नहीं कहा जा सकता.

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क़ानून में बचाव के रूप में मानसिक बीमारी केवल पीपीसी की धारा 84 की श्रेणी के अंतर्गत आती है, जो किसी अभियुक्त द्वारा किए गए किसी भी कार्य को अपराध नहीं करार देती है अगर उसे करने वाला मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है.
2 सितंबर 2013 को जामिया मस्जिद बहादुराबाद, निश्तार कॉलोनी के इमाम ने पुलिस को सूचित किया था कि शाम करीब 6 बजे सलमा तनवीर ने कथित तौर पर ईशनिंदा सामग्री लिखकर पड़ोस में बांट दी थी.
वादी के अनुसार, उन्होंने संबंधित थाने में सामग्री भी जमा कर दी थी और साथ ही उसने संबंधित थाने में सात फतवे भी सौंपे थे.
प्राथमिकी के अनुसार, सलमा तनवीर नाम की एक महिला पर 2 सितंबर, 2013 को लाहौर में अपने आवास के पास एक पैम्फलेट प्रकाशित करने और वितरित करने का आरोप लगाया गया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पैम्फलेट में अंतिम मुस्लिम पैगंबर के बारे में अपमानजनक शब्द कहे गए थे.
उत्तर कोरिया बार-बार मिसाइल टेस्ट क्यों करता रहता है?, लौरा बिकर, बीबीसी संवाददाता

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आर्थिक प्रतबिंधों के चलते उत्तर कोरिया में एक बड़ी आबादी भूख के कगार पर बताई जाती है. पिछले क़रीब दो सालों से जारी महामारी ने हालात को और भी भयानक बना दिया है क्योंकि उत्तर कोरिया ने पड़ोसी चीन से, जिसके साथ उसका बड़ा व्यापार है, लगी सीमा को सील कर रखा है.
लेकिन सवाल है कि फिर भी उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षणों और परमाणु कार्यक्रमों पर क्यों अड़ा है? दक्षिण कोरिया के सोल में बीबीसी ने इस सवाल का जवाब समझने की कोशिश की.
पिछले चालीस सालों में उत्तर कोरिया ने डेढ़ सौ से अधिक मिसाइल परीक्षण किए हैं. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतबिंध झेल रहे देश ने इस माह में ही तीन मिसाइल टेस्ट किए. जिसमें ट्रेन से दागा जा सकने वाला क्रूज़ मिसाइल भी शामिल है.
उत्तर कोरिया के वैज्ञानिक दर्जनों मिसाइल तैयार करते रहते हैं जिनकी क्षमता को जांचने के लिए इनका टेस्ट किया जाना ज़रूरी है. हर मिसाइल पुराने वाले से अधिक तेज़ है, अधिक दूरी तक उड़ान भर सकता है और पुराने वाले से अधिक शक्तिशाली है.

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उत्तर कोरिया को लगता है कि ये उसका एक जबरदस्त हथियार है और वो कहता है कि उसे खुद की रक्षा के लिए इनकी ज़रूरत है. उत्तर कोरिया अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया के मुकाबले खड़ा रहना चाहता है.
हालांकि दक्षिण कोरिया के पास परमाणु हथियार नहीं हैं लेकिन उसके मित्र देश अमेरिका के पास परमाणु हथियार हैं. दक्षिण कोरिया को इस तरह के उस सुरक्षा की गारंटी है जिसे न्यूक्लिर अम्ब्रेला कहते हैं.
अमरीका के 28 हज़ार सैनिक दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिक अड्डे पर मौजूद हैं और उत्तर कोरिया दोनों के साझा सैन्य अभ्यासों पर नज़र बनाए रखता है. साल 1910 से जापान के कब्ज़े में रहे कोरिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में अमरीका और रूस ने दो हिस्सों में बांट दिया था.
साल 1950 में दोनों के बीच युद्ध शुरू हुआ जो बाद में रुक गया लेकिन दोनों हिस्सों में शत्रुता बनी हुई है. उत्तर कोरिया अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा सैन्य अभ्यासों को खुद पर हमले की तैयारी के तौर पर देखता है और उसका जवाब मिसाइलों से देने की कोशिश करता है कि हम तैयार हैं.

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हथियारों का इस्तेमाल देश के नेता जनता में राष्ट्रवाद की भावना जगाने को भी करते हैं. लोग अमरीका की ओर निगाह गड़ाए रखते हैं ये जानने के लिए कि वो कब इन परीक्षणों का जवाब देगा.
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में इन ख़बरों को खूब तरजीह दी जाती है. खासतौर पर तब देश की अर्थव्यवस्था खस्ता हाल है. पड़ोसी चीन से सामनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है जिसससे ज़रूरत के सामान भी वहां उपलब्ध नहीं हैं.
किम जोंग उन हाल में एक सैन्य परेड के दौरान जनता के हाल पर आंसू बहाते दिखे. कई बार इन टेस्ट के ज़रिये लोगों को दिखाना होता है कि वो अपने देश की ताकत पर गर्व कर सकते हैं, हालांकि हो सकता है उन्हें दो वक्त का खाना नसीब न होता हो.
ये इस बात का भी आह्वान है कि शत्रु के खिलाफ़ हम साथ खड़े हों. उत्तर कोरिया ये भी चाहता है कि दुनिया ये माने कि उसके पास शक्ति है और जब वक्त आए तो इस ताकत के सहारे वो दुनियां के साथ अपनी शर्तों पर रिश्ते कायम कर सके.
उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, क्या बोले अमेरिका-जापान

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दक्षिण कोरिया की सेना के मुताबिक उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट की ओर एक कम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल दागी है.
उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट करने के कुछ देर बाद संयुक्त राष्ट्र में उनके राजदूत ने कहा कि प्योंगयांग के आत्मरक्षा और हथियारों के परीक्षण के अधिकार को कोई ख़ारिज नहीं कर सकता है.
उत्तर कोरिया सितंबर के ही महीने में बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण भी कर चुका है. इसके पहले उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत करने की इच्छा भी जाहिर की थी.
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि उसे मिसाइल दागे जाने की जानकारी है लेकिन इसके जरिए फिलहाल अमेरिकी जवानों और इसके सहयोगियों के लिए कोई ख़तरा दिखाई नहीं देता है.
हालांकि, अमेरिका की हिंद प्रशांत कमान ने कहा कि ये 'परीक्षण (उत्तर कोरिया के) अवैध हथियार कार्यक्रम के अस्थिर करने वाले प्रभाव को दिखाता है.'
जापान के मीडिया ने मंगलवार को रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि ये एक बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है.

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संयुक्त राष्ट्र की ओर से उत्तर कोरिया पर लगाई गई पाबंदी की तरह इस पर प्रतिबंध लगाया गया है.
वहीं दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल को आदेश दिया है कि वो उत्तर कोरिया की ओर से किए गए हालिया मिसाइल परीक्षण और किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग की ओर से हाल में दिए गए बयान के पीछे की मंशा का विश्लेषण करें. किम जोंग काफी शक्तिशाली मानी जाती हैं.
किम जोंग ने कुछ दिन पहले कहा था कि वो कोरियाई युद्ध की औपचारिक समाप्ति का एलान किए जाने के मून के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं लेकिन उसके पहले 'शत्रुतापूर्ण नीतियों' पर रोक लगाए जाने की ज़रूरत है.
उत्तर कोरिया लगातार दक्षिण कोरिया पर आरोप लगाता रहा है कि वो सैन्य गतिविधियों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाता है.
दक्षिण कोरिया ने हाल में पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का पहली बार परीक्षण किया था. दक्षिण कोरिया ने इसे उत्तर कोरिया के 'उकसावे' के मुक़ाबले के लिए ज़रूरी बताया था.
भगत सिंह ने जब काउंसिल हाउस में बम फेंका, कैसे की थी तैयारी

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इमेज कैप्शन, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की एक पुरानी तस्वीर उस ज़माने में काउंसिल हाउस जो कि आज का संसद भवन है, का शुमार दिल्ली की बेहतरीन इमारतों में किया जाता था.
काउंसिल हाउस में सेफ़्टी बिल पेश होने से दो दिन पहले 6 अप्रैल, 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त काउंसिल हाउस के असेंबली हॉल गए थे ताकि ये जायज़ा लिया जा सके कि पब्लिक गैलरी किस तरफ़ हैं और किस जगह से वहाँ बम फेंके जाएंगे.
वो ये हर क़ीमत पर सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके फेंके गए बमों से किसी का नुक़सान न हो. हाँलाकि 'ट्रेड डिस्प्यूट बिल' पास किया जा चुका था जिसमें मज़दूरों द्वारा की जाने वाली हर तरह की हड़ताल पर पाबंदी लगा दी गई थी, लेकिन 'पब्लिक सेफ़्टी बिल' पर अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल ने अभी तक अपना फ़ैसला नहीं सुनाया था. इस बिल में सरकार को संदिग्धों को बिना मुक़दमा चलाए हिरासत में रखने का अधिकार दिया जाना था.
8 अप्रैल को सदन की कार्यवाही शुरू होने से कुछ मिनट पहले 11 बजे भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त बिना किसी का ध्यान आकर्षित किए हुए काउंसिल हाउस में दाख़िल हो चुके थे. उस समय उन्होंने ख़ाकी रंग की कमीज़ और हाफ़ पैंट पहन रखी थी. उसके ऊपर उन्होंने सिलेटी रंग का चारखाने का कोट पहन रखा था जिसमें तीन बाहरी जेबें थीं और एक जेब कोट के अंदर थी. उन दोनों ने ऊनी मोज़े भी पहन रखे थे.
भगत सिंह ने एक विदेशी फ़ेल्ट हैट लगाई हुई थी. इसका उद्देश्य था कि भगत सिंह की ऊँची कद काठी और सुंदर व्यक्तित्व की वजह से कहीं उन्हें पहले ही न पहचान लिया जाए. इस फ़ेल्ट हैट को लाहौर की एक दुकान से ख़रीदा गया था. सदन का एक भारतीय सदस्य उन्हें गेट पर पास दे कर ग़ायब हो गया था. उस समय दर्शक दीर्घा लोगों से खचाखच भरी हुई थी.
भारत कोयले के बिना क्यों नहीं रह सकता है?

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भारत दुनिया का ऐसा तीसरा सबसे बड़ा देश है जो बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधनों को निकालता है और उसमें भी वो सबसे अधिक कोयला निकालता है.
दुनिया के बड़े देश मांग कर रहे हैं कि कोयले का खनन कम किया जाना चाहिए. यह भारत जैसे तेज़ी से विकास कर रहे देश के लिए कितना मुश्किल है कि वो अपने सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत को खो दे?
भारत में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को ऐसे समझा जा सकता है कि 2006 में मेरी शौनक नामक एक युवा व्यवसायी से बात हुई थी.
उन्होंने कहा था, "भारतीयों से ही क्यों कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कहा जाता है जबकि पश्चिम दशकों से धरती को प्रदूषित कर रहा है और लाभ उठाया है."
वो तेज़-तर्रार उद्यमी मुंबई की एक जूते की फ़ैक्ट्री के मालिक थे, उन्होंने स्वीकार किया था कि ये हवा में गंदी गैस भर रहा है.
डीज़ल-पेट्रोल की कीमत एक बार फिर बढ़ी

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मंगलवार को पेट्रोल 20 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल 25 पैसा प्रति लीटर और महंगा हो गया. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत तीन साल में पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल के क़रीब पहुंच गई है.
इस कारण पेट्रोल बढ़कर दिल्ली में 101.39 रुपया तो मुंबई में 107.47 रुपया प्रति लीटर की रेट पर पहुंच गया. दिल्ली में डीज़ल 89.57 रुपया तो मुंबई में 97.21 रुपये की रेट पर है.
भारत में अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय करों और ढुलाई लागत के कारण डीज़ल-पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग होती हैं.
पिछले दो महीनों में पेट्रोल की कीमत में किया गया ये पहला इजाफा है हालांकि डीज़ल की कीमत में इसी अवधि के दौरान इससे पहले तीन बार बढ़ चुकी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में पिछले पांच दिनों से कच्चे तेल की क़ीमतें लगातार बढ़ रही हैं.
सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 24 सितंबर से डीज़ल-पेट्रोल की क़ीमतों की रोज़ाना समीक्षा का काम फिर से शुरू कर दिया है. 24 सितंबर से आज तक डीज़ल की कीमत 95 पैसे प्रति लीटर बढ़ गई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, कन्हैया कुमार ने अपने फायदे के लिए भरोसा तोड़ा: सीपीआई
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कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने कहा है कि वो खुद ही पार्टी से निष्कासित हो गए हैं.
उन्होंने कहा, "सीपीआई जाति विहीन, वर्ग विहीन समाज के लिए लड़ती रही है. उनकी कुछ अपनी महत्वाकांक्षाएं रही होंगी. इससे पता चलता है कि कम्युनिस्ट और कामकाजी वर्ग की विचाराधारा पर उनका कोई भरोसा नहीं रह गया था."
"सीपीआई उनके आने से पहले भी अस्तित्व में थी और उनके जाने के बाद भी सफल होगी. पार्टी उनके साथ ख़त्म नहीं होने वाली है. हमारी पार्टी निस्वास्थ संघर्ष के लिए है. कन्हैया कुमार भरोसेमंद नहीं थे."
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 28 सितंबर 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ
28 सितंबर, मंगलवार, दिन भर में स्वागत है आपका, मैं हूं फैसल मोहम्मद अली.
उत्तर कोरिया के फिर दागा मिसाइल, माह भर में तीसरा परीक्षण, अमरीका से कहा ख़त्म करे दुश्मनी.जानने की कोशिश करेंगे, जिस मुल्क की जनता भूख की कगार पर है, वो क्यों करता रहता है मिसाइल लांच.अफगानिस्तान में बैंकों पर संकट और, पाकिस्तानी बाज़ारों में अमरीकी और नेटो सेना के इस्तेमाल के सामान की स्मगलिंग खबरें भारत से भी.
छोड़िए YouTube पोस्टGoogle YouTube सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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सऊदी अरब में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर गिरी गाज, पांच को समन

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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर सऊदी अरब के मीडिया रेगुलेटर ने सोशल मीडिया के लिए निर्धारित नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को समन किया है.
सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल कमीशन फॉर ऑडियो विजुअल मीडिया का कहना है कि इन लोगों ने भ्रामक विज्ञापन या सामाग्री अपने चैनल पर पोस्ट किया था.
कमीशन ने बताया है कि साल 2021 की शुरुआत के बाद से सोशल मीडिया के नियमों के उल्लंघन के अब तक 65 मामले सामने आ चुके हैं.
एसपीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने ये नियम क़ायदे समाज के हित और सार्थक मीडिया कंटेंट को सुनिश्चित करने के मक़सद से बनाए थे.
सऊदी अरब में इन नियमों को तोड़ने पर कड़े जुर्माने का प्रावधान है और वहां प्रशासन लोगों से अपील करती है कि वे ऐसे उल्लंघन के मामलों को संबंधित विभाग के पास रिपोर्ट करें.
हाल के सालों में सऊदी अरब में मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के इस्तेमाल का चलन बढ़ा है.
लेकिन सऊदी मीडिया की रिपोर्टों में पिछले दिनों ये चर्चा रही है कि ये सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स झूठे दावे करके अपनी हद लांघ रहे हैं. वे अपने फॉलोअर्स बढ़ाना चाहते हैं ताकि विज्ञापन से होने वाली कमाई बढ़ाई जा सके.
मक्का की द ग्रैंड मॉस्क के इमाम ने दो दिन पहले ही सोशल मीडिया के ख़तरे को लेकर नौजवानों को आगाह किया था.
पाकिस्तान में जिन्ना की मूर्ति बम से उड़ाई
वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान में जिन्ना की मूर्ति बम से उड़ाई पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की एक मूर्ति को बम धमाके में उड़ा दिया गया. ये घटना पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर की है.
पाकिस्तान में क़ायद-ए-आज़म कहे जाने वाले जिन्ना की मूर्ति पर हमले की ज़िम्मेदारी चरमपंथी संगठन बलोच रिपब्लिकन आर्मी (बीआरए) ने ली है. पाकिस्तान ने इस संगठन पर पाबंदी लगाई हुई है.
बीआरए के प्रवक्ता बाबगर बलोच ने धमाके की ज़िम्मेदारी लेते हुए ट्वीट किया. इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाक़े में लगी मूर्ति पर हुए हमले को लेकर कई लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं.
कोरोना जहां से शुरू हुआ, अब वहां क्या हाल है?
वीडियो कैप्शन, कोरोना जहां से शुरू हुआ, अब वहां क्या हाल है? चीन में अब लोग सर्फ़िंग की तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं. चीन का हैनान द्वीप रिज़ॉर्ट के लिए प्रसिद्ध है. यहां सालों से लोग सर्फ़िंग कर रहे हैं.
लेकिन जो कभी चुनिंदा लोगों का रोमांचक खेल होता था, अब एक बड़ा व्यापार बन गया है.
ये सब कोरोनावायरस की वजह से हुआ है. अचानक से लोग सर्फ़िंग सीखने में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं.
क्वाड सम्मेलन को लेकर आख़िर क्या हैं चीन की मीडिया के आरोप?

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पिछले हफ़्ते अमेरिका में हुए क्वाड शिखर सम्मेलन पर चीन की मीडिया और विशेषज्ञों ने कहा है कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को नियंत्रित करने का एक और प्रयास है. साथ ही ये भी कहा कि ये समूह अपना उद्देश्य पाने में नाकाम रहा है.
दरअसल क्वाडिलैटरल सिक्योरिटी डॉयलॉग को संक्षेप क्वाड कहा जाता है. अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया इसके चार सदस्य देश हैं.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने 24 सितंबर को हुई इस बैठक के अगले दिन अपनी राय रखी. उसने बताया कि क्वाड सम्मेलन की पहली व्यक्तिगत बैठक में भाग लेने वाले नेताओं ने "बिना चीन का सीधा हवाला दिए" कई मुद्दों पर चर्चा की. हालांकि इस रिपोर्ट में उसने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि क्वाड एक "अनौपचारिक सभा" है, जिसके निशाने पर कोई देश नहीं है.
फिर भी उसने इस बैठक को "साफ़ तौर पर इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव को निशाना बनाने" की कोशिश बताया है. उसकी इस रिपोर्ट में, क्वाड की बैठक से पहले चीन के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों को भी सामने रखा गया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने क्वाड को "बंद और विशिष्ट गुट" करार दिया था.
सिद्धू का इस्तीफ़ा: अमरिंदर सिंह ने लिया निशाने पर

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नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
हालांकि उन्होंने साफ़ तौर पर ये कहा है कि वे पार्टी में बने रहेंगे.
नवजोत सिंह सिद्धू को इसी साल 23 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी.
जुलाई-अगस्त में पार्टी में छिड़े अंदरूनी घमासान के बाद उन्हें पीसीसी चीफ़ के पद पर नियुक्त किया गया था.
ये अभी साफ़ नहीं हो पाया है कि आख़िर नवजोत सिंह सिद्धू ने पीसीसी चीफ़ के पद से इस्तीफ़ा क्यों दिया.
सिद्धू के बाद चरणजीत सिंह चन्नी सरकार की मंत्री रज़िया सुल्ताना ने दिया इस्तीफ़ा

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इमेज कैप्शन, रज़िया सुल्ताना को आज ही वाटर सप्लाई और महिला एंव परिवार कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया था पंजाब कांग्रेस में जारी घमासान थमता हुआ नहीं दिख रहा है.
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी से सिद्धू् के इस्तीफ़े के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार की महिला मंत्री रज़िया सुल्तान ने इस्तीफ़ा दे दिया.
उन्होंने कहा कि ये इस्तीफ़ा वो नवजोत सिंह सिद्धू के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए दे रही हैं.
इस्तीफ़े के बाद रज़िया सुल्ताना ने कहा, "मैं इतना कहना चाहूंगी कि सिद्धू साहब उसूलों वाले आदमी हैं. उनको कोई लालच नहीं है. वो पंजाबियत के लिए लड़ रहे हैं."
उधर, पंजाब कांग्रेस में सिद्धू के करीबी नेता उनके घर पर जमा हो रहे हैं.
रज़िया सुल्ताना को आज ही वाटर सप्लाई और महिला एंव परिवार कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया था.
पंजाब में आज ही मंत्रालयों का वितरण हुआ था.
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कार्टून: लो ऑफर आ गया!
