योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट विस्तार के बाद नए मंत्रियों को सौंपे विभाग
योगी आदित्यनाथ ने रविवार को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आज नवनियुक्त मंत्रियों को उनके विभाग सौंप दिए हैं.
लाइव कवरेज
चीन के एक बड़े इलाके में बत्ती गुल, इस बिजली संकट का क्या है कारण

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चीन के पूर्वोत्तर इलाके में लोगों को भीषण बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है. शुरू में वहां बिजली संकट से केवल कल-कारखानों को जूझना पड़ रहा था लेकिन अब ये संकट लोगों के घरों तक पहुंच गया है.
लायनिंग, जिलिन, हीलोंगजियांग प्रांत के लोगों ने सोशल मीडिया पर इस बात की शिकायत की है कि बिजली के अभाव के कारण वे हीटर नहीं जला पा रहे हैं, घरों की लिफ्ट काम नहीं कर रही है और यहां तक कि ट्रैफिक लाइट्स की बत्ती भी गुल है.
स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार, वहां कोयले की कीमत अचानक तेज़ी से बढ़ी है, इसलिए आपूर्ति कम पड़ गई है. चीन में बिजली का प्रमुख स्रोत आज भी कोयले से मिलने वाली ऊर्जा है.
बिजली बनाने वाली एक कंपनी ने कहा है कि अगले साल के बसंत तक ये संकट बना रहने वाला है. बिजली का अचानक चले जाना अब आम बात हो जाएगी. हालांकि कंपनी ने बाद में अपना सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर लिया है.
बिजली संकट का पहले असर देश भर के उत्पादकों पर पड़ा है. उनमें से कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों को हाल के हफ़्तों में अपना उत्पादन रोकना पड़ा है या फिर उसमें कटौती करनी पड़ी है.

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इसी सप्ताहांत पर कुछ शहरों के लोगों ने पाया कि उनके यहां बिजली बराबर जा रही है. चीन की सोशल मीडिया वेबसाइट वीबो पर नॉर्थ ईस्ट इलेक्ट्रिसिटी कट जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
चीन में जारी ये बिजली संकट कितना व्यापक है, इस पर फिलहाल तस्वीर साफ़ नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि तीन प्रांतों की तकरीबन 10 करोड़ आबादी इससे प्रभावित हुई है.
लायनिंग प्रांत की एक फैक्टरी में अचानक बिजली चले जाने से वैंटिलेटर ने काम करना बंद कर दिया और इस वजह से 23 स्टाफ़ को कॉर्बन मोनोऑक्साइड के कारण दम घुटने लगा. बाद में उन लोगों को अस्पताल में दाखिल कराया गया.
ऐसी रिपोर्टें भी हैं कि कुछ लोगों ने तंग कमरों में गर्मी के लिए स्टोव का इस्तेमाल किया और वे बीमार पड़ गए जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. इन प्रांतों में ऊंची इमारतों में लिफ्ट काम नहीं कर रही है जिसके कारण लोगों को सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही है और लोग बीमार पड़ रहे हैं.
एक वायरल वीडियो में ये देखा जा सकता है कि शेनयांग शहर के एक व्यस्त हाइवे पर गाड़ियों का काफिला अंधेरे में आगे बढ़ रहा है क्योंकि वहां सड़कों की लाइट्स बंद हैं. शेनयांग के अधिकारियों ने द बीजिंग न्यूज़ को बताया कि वे व्यापक बिजली संकट का सामना कर रहे हैं.
ताइवान के क़रीब से गुज़रा ब्रिटिश युद्धपोत, चीन ने दी चेतावनी

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चीनी सेना ने कहा है कि उसने ताइवान की खाड़ी से गुज़र रहे एक ब्रिटिश युद्धपोत को ट्रैक करते हुए उसे चेतावनी दी है.
चीन ने ब्रिटेन पर बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया है.
चीन ताइवान द्वीप को अपना हिस्सा मानता है.
ब्रिटिश युद्धपोत एचएमएस रिचमंड, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है.
इस जहाज़ के ट्वीटर अकाउंट पर कहा गया है कि ये इस समय वियतनाम की ओर जा रहा है.
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ताइवान पर चीन
चीन ताइवान को अपना एक बाग़ी राज्य मानता है.
चीन और ताइवान के बीच 1949 से विवाद चला आ रहा है जिसकी वजह से ताइवान की पहुंच अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक नहीं है और उसे सीमित अंतरराष्ट्रीय मान्यता ही मिली हुई है.
दुनिया के सिर्फ 15 देश ही ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र मानते हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, अशरफ़ ग़नी ने फ़ेसबुक पर की तालिबान की हिमायत, ट्विटर पर कहा- फ़ेसबुक हुआ हैक
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने आधिकारिक फ़ेसबुक एकाउंट से तालिबान हुकूमत का समर्थन किया है. इतना ही नहीं उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान की सरकार से बातचीत की अपील भी की है.
इसके साथ ही उन्होंने तालिबान की सरकार को मान्यता देने और समर्थन देने का आह्वान किया है. उन्होंने ये भी कहा है कि विदेशों में फ्रीज़ की गईं अफ़ग़ानिस्तान की परिसंपत्तियों को रिलीज़ किया जाना चाहिए.
लेकिन इस फ़ेसबुक पोस्ट के बाद ट्विटर पर उन्होंने अपने बयान का ये कहते हुए खंडन किया है कि उनका फ़ेसबुक एकाउंट हैक कर लिया गया है और कल के बाद किए गए पोस्ट को वैध न माना जाए.
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इससे पहले फ़ेसबुक पर जिस पोस्ट का उन्होंने खंडन किया है, वो कुछ इस तरह से था, "प्यारे देशवासियों. ये एक कड़वी सच्चाई है कि हम और हमारी कैबिनेट का अफ़ग़ानिस्तान पर जरा सा भी नियंत्रण नहीं है. लेकिन इसके बावजूद कुछ देश पूर्व राजदूतों और दुनिया भर में फैले हमारे प्रतिनिधियोंयों को एक नया संकट खड़ा करने के लिए उकसा रहे हैं."
"उन्होंने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान और उसकी सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र में ग़ुलाम मोहम्मद इशाक़ ज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में कोई हुकूमत नहीं है और उसे जनता का समर्थन हासिल नहीं है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ़ग़ानिस्तान से दूर रहने के बजाय उन्हें मौजूदा सरकार से बात करनी चाहिए. अफ़ग़ानिस्तान का पैसा जारी करके उनकी मदद करनी चाहिए. उन्हें मान्यता देनी चाहिए. मेरे कुछ दोस्त मुझसे सहमत नहीं होंगे लेकिन वे जानते हैं कि मैं सीधी बात कहता हूं."
अमेरिका ने तुर्की से कहा रूस से हथियार न खरीदे, क्या दिया तुर्की ने जवाब?

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अमेरिका ने तुर्की से साफ़ शब्दों में कहा है कि वो रूसी सेना से अब और कोई हथियार न खरीदे.
इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा था कि उन्हें अत्याधुनिक रूसी मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की एक और खेप खरीदने से नहीं रोका जा सकता.
अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर तुर्की चाहता है कि तनाव और पाबंदियाँ न बढ़ें तो वो रूस से आगे कोई हथियार न खरीदे.
इतनी ही नहीं अमेरिकी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि तुर्की ने रूस से खरीदे S-400 मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम खरीदा है उससे भी छुटकारा पा ले. क्योंकि इस सिस्टम से अमेरिका के F-35 फ़ाइटर जेट को ख़तरा है.

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हमारे मामले में कोई दख़ल नहीं दे सकता: अर्दोआन
वहीं, सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में अर्दोआन ने कहा कि तुर्की के रक्षा भंडार से जुड़े फ़ैसलों में कोई दख़ल नहीं दे सकता.
अर्दोआन ने कहा, “भविष्य में कोई इस मामले में दख़ल नहीं देगा कि हम कैसा डिफ़ेंस सिस्टम खरीदते हैं, किस देश से खरीदते हैं और किस स्तर पर खरीदते हैं.”
उन्होंने कहा, “कोई हमारे मामलों में दख़ल नहीं दे सकता और ये फ़ैसला करने वाले सिर्फ़ हम हैं. तुर्की 8.4 करोड़ आबादी वाला देश है. हम अपने डिफ़ेंस सिस्टम को लेकर बहुत दृढ़ हैं. इसमें कोई दख़ल नहीं दे सकता.”
तुर्की ने आज से दो साल पहले रूस से S-400 मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की खेप खरीदी थी जिसके बाद अमेरिका ने इस पर प्रतिबंध लगा दिए थे.
क्या है S-400?
रूस में बनने वाले 'एस-400: लॉन्ग रेंज सरफ़ेस टू एयर मिसाइल सिस्टम' को भारत भी ख़रीदना चाहता है.
ये मिसाइल ज़मीन से हवा में मार कर सकती है. एस-400 को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफ़ेंस सिस्टम माना जाता है.
इसमें कई ख़ूबियाँ हैं. जैसे एस-400 एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है.
इसके बारे मैं और अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो -
वीडियो कैप्शन, रूस से भारत को कब मिलेगा एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम? सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फ़ैसले से क्यों चर्चा में है केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर?
इंग्लैंड के ऑल राउंडर मोईन अली टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हुए

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इंग्लैंड के आल राउंडर मोईन अली ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायर होने का एलान किया है. 34 वर्षीय अली ने 2014 में इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया था.
उन्होंने 64 मैचों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया है. इस दौरान अली ने 195 टेस्ट विकेट लिए और पांच टेस्ट शतक भी बनाए.
रिटायर होने के फैसले पर मोईन अली ने कहा इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की वेबसाइट पर अपने संदेश में कहा, “ मैं अब 34 साल का हूँ और जितने दिन मुमकिन हो, मैं क्रिकेट खेलते रहना चाहता हूं. मैंने टेस्ट क्रिकेट का लुत्फ़ उठाया है लेकिन इसमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है. मुझे लगता है कि अब बहुत कुछ कर लिया है. मैंने जो भी किया है उससे ख़ुश हूँ. ”
उन्होंने कहा कि भारत के ख़िलाफ़ सीरिज़ के दौरान उन्हें लगा कि वे अब टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना चाहते.
मोईन अली को उम्मीद है कि उनकी वजह से और कई मुसलमान लड़कों के लिए इंग्लैंड की क्रिकेट टीम में खेलने का ख़्वाव देख सकेंगे.
जर्मनी चुनाव: एंगेला मर्केल की पार्टी हारी, सोशल डेमोक्रेटिक एसपीडी को मिली जीत

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जर्मनी के आम चुनाव में सेंटर-लेफ़्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) ने जीत हासिल की है. हालाँकि शुरुआती नतीजों में वोटों का मार्जिन कम ही है.
एसपीडी को 25.7 फ़ीसदी वोट मिले जबकी एंगेला मर्केल की सत्ताधारी पार्टी सीडीयू को 24.1 फ़ीसदी.
वहीं, ग्रींस पार्टी अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रदर्शन और 14.8 फ़ीसदी वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रही.
सरकार बनाने के लिए अब एक गठबंधन अनिवार्य होगा.
नतीजे आने से पहले ही सपीडी नेता ओलाफ़ स्कोल्ज़ ने कहा था कि उनकी पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिला है.

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नए नेता के सामने होंगी ये चुनौतियाँ
एग्ज़िट पोल्स में भी एसपीडी और सीडीयू में कड़े मुकाबले की उम्मीद जताई गई थी लेकिन इस बार के चुनाव शुरुआत से लेकर आख़िर तक अप्रत्याशित रहे हैं.
नतीजे आने के बाद भी अभी इस चुनाव का किस्सा ख़त्म नहीं होने वाला है क्योंकि एंगेला मर्केल तब तक नहीं जाने वाली हैं जब तक सत्ता के लिए गठबंधन नहीं बन जाता.
इसके लिए उन्हें क्रिसमस तक का इंतज़ार भी करना पड़ सकता है.
मर्केल के उत्तराधिकारी को अगले चार वर्षों तक यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करना है और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काम करना है.
ये मुद्दे जर्मनी के मतदाताओं के एजेंडे में सबसे ऊपर थे.
भारत बंद: तस्वीरों में देखिए कैसेे कर रहे हैं किसान खेती क़ानूनों का विरोध
भारत में केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में बुलाए गए भारत बंद में बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर हैं.
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा गाज़ीपुर बॉर्डर पर पिछले साल नंवबर से किसान बैठे हैं.
देखिए वहां की कुछ तस्वीरें -








यूएन में पीएम मोदी और स्नेहा दुबे पर क्या कह रहा है पाकिस्तान का मीडिया
भारत बंद: चेन्नई में बैरिकेड तोड़ने पर हिरासत में लिए गए कुछ किसान

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तमिलनाडु के चेन्नई में भारत बंद के दौरान पुलिस के बैरिकेड को तोड़ने पर कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
आज भारत के कई किसान संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ देशव्यापी बंद बुलाया है. देश के कई हिस्सों से किसानों के प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं.
कई शहरों में सड़कों पर जाम की भी ख़बरें हैं.
तमिलनाडु में किसान राजधानी चेन्नई की प्रमुख सड़क अन्ना सलाई पर प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे थे.
घटनास्थल से जारी समाचार एजेंसी एएनआई के वीडियो में पुलिस और किसानों के बीच एक बैरिकेड पर संघर्ष देखा जा सकता है.
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तमिलनाडु में सीपीएम के सचिव के बालकृष्णन ने एएनआई को बताया कि किसानों का विरोध लगातार जारी है पर मोद सरकार क़ानून वापिस लेने को तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा कि इन कानूनों के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा और आने वाले वक़्त में ये और तीव्र होगा.
किसानों का भारत बंद, देखिए लाइव
PFI सदस्यों से मिलने पहुँची महिलाएं गिरफ़्तार, फ़र्जी कोविड रिपोर्ट लेकर गई थीं
....में - Author, समीरात्मज मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ की ज़िला जेल में बंद पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया यानी पीएफ़आई के सदस्यों से मिलने पहुंची चार महिलाओं को गिरफ़्तार किया है.
इन पर आरोप है कि वो क़ैदियों से मिलने फ़र्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट के साथ पहुँची थीं.
महिलाओं पर आरोप है कि वो जेल में बंद पीएफ़आई के सदस्य बदरुद्दीन और फ़िरोज़ से जेल में मिलने के लिए रविवार को गई थीं लेकिन उनके पास जो आरटीपीसीआर की रिपोर्ट थी, वो फ़र्ज़ी थी.
जेलर अजय राय ने तीनों महिलाओं को गोसाईंगंज पुलिस के सुपुर्द कर दिया जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है.
ये सभी महिलाएं पीएफ़आई सदस्यों के परिवार की बताई जा रही हैं.
देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद हैं पीएफ़आई सदस्य
एसीपी गोसाईगंज स्वेता चौधरी के मुताबिक, “महिलाएं फ़र्ज़ी रिपोर्ट लेकर जेल पहुंची थीं, जिस पर मुक़दमा दर्ज किया गया है. उनके पास मौजूद अन्य दस्तावेजों के साथ जांच की जा रही है.”
इसी साल फ़रवरी में कश्मीर के रहने वाले बदरुद्दीन और फ़िरोज़ को एटीएस ने गिरफ़्तार किया था और उनके खिलाफ देशद्रोह और विस्फोटक अधिनियम के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था.
23 सितंबर को दोनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश करना था लेकिन लखनऊ के पुलिस कमिश्नर ने पेश कराए जाने पर सुरक्षा और क़ानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई थी जिसकी वजह से इन दोनों अभियुक्तों की पेशी जेल में रहकर ही कराई गई थी.
रविवार को जब चार महिलाएं इनसे मिलने जेल पहुंचीं तो जेलकर्मियों को इनकी कोविड रिपोर्ट पर शक़ हुआ, जिसकी जानकारी जेल प्रशासन को दी गई.
संबंधित लैब से रिपोर्ट की पड़ताल कराई गई तो रिपोर्ट फ़र्ज़ी निकली.
राजस्थान: शिक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए 9-12 घंटे तक इंटरनेट बंद

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मोहर सिंह मीणा
जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में 31 हज़ार पदों के लिए पर राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) आयोजित की गई.
कक्षा पहली से पांचवीं तक के शिक्षकों के लिए दोपहर ढाई से शाम पांच बजे तक और कक्षा छठीं से आठवीं तक के शिक्षकों के लिए सुबह 10 से दोपहर साढ़े 12:30 बजे तक दो पारियों में परीक्षा आयोजित की गई.
परीक्षा के लिए राज्य भर में क़रीब 4,000 प्ररीक्षा केंद्र बनाए गए थे जिनमें 13 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए.
दोनों परीक्षाओँ के लिए 16 लाख अभ्यर्थियों के नामांकन की जानकारी है.

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पेपर लीक और नकल रोकना थी बड़ी चुनौती
राज्य सरकार के लिए रीट भर्ती परीक्षा आयोजित कराना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था.इसके लिए राज्य भर में क़रीब दो सप्ताह से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं.
परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां रोकने के लिए राज्य भर में छापेमारी की जा रही थी.
छापेमारी में बड़ी संख्या में अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है और उनसे नकल संबंधित सामग्री भी बरामद की गई है.
पेपर लीक होने और नकल रोकने के लिएपरीक्षा के दिन जयपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर,भरतपुर औरसंभाग समेत राज्य भर में 9-12 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं.
गृह विभाग ने पत्र जारी कर सभी कलेक्टर और एसपी को व्यवस्थाओं के लिए आदेश दिए थे.
इसके बावजूद नकल करने का प्रयास कर रहे अभियुक्तों को नागौर, राजसमंद, भरतपुर, बूंदी, अजमेर, सीकर और बीकानेर से गिरफ्तार किया गया है.
इनमें सरकार कर्मचारी भी शामिल हैं.
कोरोना: 24 घंटे में संक्रमण के 26,041 मामले, 276 लोगों की मौत

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पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना संक्रमण के कुल 26,041 मामले सामने आए हैं और 276 लोगों की मौत हुई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, इस दौरान 29,621 लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.
पिछले 24 घंटे 11,65,006 सैंपल्स की कोरोना के लिए जाँच की गई.
इसी के साथ देश में अब संक्रमण के कुल 3,36,78,786 मामले हैं जिनमें से 2,99,620 मामले एक्टिव हैं.

कोविड-19 की चपेट में आकर अब तक कुल 4,47,194 लोगों की जान गई है और 3,29,31,972 लोगों ने संक्रमण को मात दी है.
देश में अब तक कुल 86,01,59,011 लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है.
पिछले 24 घंटे में कुल 38,18,362 लोगों को वैक्सीन लगाई गई.
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किसानों का भारत बंद: कहाँ पर क्या हो रहा है?

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केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के विरोध में आज 40 से ज़्यादा किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है.
किसान संगठनों की योजना के अनुसार बंद सुबह छह बजे से शुरू हो चुका है और शाम चार बजे तक चलेगा.
संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी सामाजिक संगठनों और ट्रेड यूनियन से भी भारत बंद को समर्थन देने की अपील की है.
कई विपक्षी पार्टियों ने भी किसानों के बंद से एकजुटता ज़ाहिर की है.
बीबीसी पंजाबी संवाददाता सुखचरनप्रीत के अनुसार बरनाला में सैकड़ों किसान सुबह छह बजे से पहले ही जुट गए और रेलवे ट्रैक जाम कर दिया.

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इमेज कैप्शन, तिरुवनंतपुरम में बंद दुकानें बंद का असर दक्षिण भारत तक
भारत बंद का असर उत्तर भारत के पंजाब और हरियाणा से लेकर दक्षिण भारत के केरल तक नज़र आ रहा है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम की कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं जहाँ दुकाने बंद और सड़कें सूनी नज़र आ रही हैं.
केरल में एलडीएफ़ और यूडीएफ़ से जुड़े ट्रेड यूनियन ने भारत बंद का समर्थन किया है.
अमृतसर समेत पंजाब के कई शहरों में किसानों के बंद के मद्देनज़र सुबह पाँच बजे से ही पुलिस तैनात कर दी गई है.
बिहार के हाजीपुर में आरजेडी नेता मुकेश भूषण समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत बंद के तहत प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
बंद के कारण बिहार के हाजीपुर-मुज़फ़्फ़रवुर रोड और महात्मा गांधी सेतु पर ट्रैफ़िक प्रभावित हुआ.
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बस संदेश देना चाहते हैं: राकेश टिकैत
कृषि क़ानूनों के विरोध का केंद्र बने दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर भी सुबह से हलचल है.
वहाँ प्रदर्शनकारी किसान नेता सुबह से ही भाषण दे रहे हैं.
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बंद के दौरान एंबुलेंस को नहीं रोका जा रहा है.
उन्होंने कहा, “हम सिर्फ़ एक संदेश देना चाहते हैं. हमने दुकानदारों से अपील की है कि वो शाम चार बजे तक दुकानें बंद रखें.”
वीडियो: पीएम मोदी के दौरे पर क्या बोला विदेशी मीडिया?
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पांचजन्य ने अब अमेज़न पर साधा निशाना, बताया 'ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0'
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध पत्रिका पांचजन्य ने अपने ताज़ा संस्करण में अमेरिकी कंपनी अमेज़न पर निशाना साधा है.
पांचजन्य ने इस बार अपनी कवर स्टोरी अमेज़न पर की है और इसे ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0 बताया है.
इससे पहले पांचजन्य ने भारत की मशहूर आईटी कंपनी इंफ़ोसिस को निशाना बनाया था और इसे ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़ा बताया था.
पत्रिका के इस बार के कवर पेज पर अमेज़न के संस्थापर जेफ़ बेज़ोस की फ़ुल पेज तस्वीर छपी है.
कवर पेज पर कुछ सवाल भी पूछे गए हैं. जैसे:
1. अमेज़न ऐसा क्या करती है कि इसे घूस देने की ज़रूरत पड़ती है?
2. क्यों इस भीमकाय कंपनी को देसी उद्यमिता, आर्थिक स्वतंत्रता और संस्कृति के लिए ख़तरा मानते हैं लोग?”
पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने पत्रिका का कवर पेज ट्वीट करते हुए #VocalforLocal हैशटैग के लिखा है- पांचजन्य यानी बात भारत की.
कुछ समय पहले ऐसी ख़बरें आई थीं कि भारत में अमेज़न के क़ानूनी प्रतिनिधियों ने मोटी रिश्वत दी थी और कंपनी इस मामले में आंतरिक जाँच कर रही है.
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इससे पहले सितंबर महीने के एक संस्करण में पांचजन्य ने भारत की प्रमुख आईटी कंपनी इंफ़ोसिस पर जमकर निशाना साधा था.
पत्रिका में इंफ़ोसिस को ‘ऊँची दुकान, फीका पकवान’ बताते हुए इस पर बिना किसी सबूत के देश विरोधी साज़िश में लिप्त होने की आशंका जताई गई थी.
पांचजन्य के इस कवर स्टोरी में कहा गया था कि इंफ़ोसिस पर अतीत में "नक्सलियों, वामपंथियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की मदद करने" के आरोप लग चुके हैं.
इतना ही नहीं, इंफ़ोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति पर भी निशाना साधा गया था.
इस कवर स्टोरी पर काफ़ी विवाद हुआ था और आरएसस के प्रवक्ता सुनील आंबेकर को इसे लेकर सफ़ाई देनी पड़ी थी.
उन्होंने कहा था पांचजन्य संघ का मुखपत्र नहीं है और नारायण मूर्ति की इंफ़ोसिस का देश की आर्थिक तरक्की में अहम योगदान है.
वहीं, पांचजन्य के संपादक ने कहा था कि पत्रिका अपने लेख को लेकर अडिग और अगर इंफ़ोसिस को किसी तरह की आपत्ति है तो वो मुद्दे का दूसरा पहलू पेश करे.
इंफ़ोसिस को लेकर पांचजन्य की कवर स्टोरी से जुड़ा क्या विवाद था, विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.
जर्मनी चुनाव: एंगेला मर्केल के उत्तराधिकारी पीछे, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त

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इमेज कैप्शन, एसपीडी नेता ओलाफ़ स्कोल्ज़ जर्मनी के आम चुनावों सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी सीडीयू के ओलाफ़ स्कोल्ज़ ने थोड़ी ही सही लेकिन बढ़त बना रखी है.
वहीं, एंगेला मर्केल के उत्तराधिकारी आर्मिन लॉशेट ने हार नहीं मानी है और सीडीयू के इतिहास में अब तक से सबसे ख़राब प्रदर्शन के बावजूद सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध नज़र आ रहे हैं.
ये नतीजे अभी आख़िरी नहीं हैं और वोटों का मार्जिन भी कम है लेकिन सेंटर-लेफ़्ट एसपीडी जीत हासिल कर सकती है.
एसपीडी नेता ओलाफ़ स्कोल्ज़ ने कहा कि उनकी पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिला है.

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नए नेता के सामने होंगी ये चुनौतियाँ
एग्ज़िट पोल्स में भी एसपीडी और सीडीयू में कड़े मुकाबले की उम्मीद जताई गई थी लेकिन इस बार के चुनाव शुरुआत से लेकर आख़िर तक अप्रत्याशित रहे हैं.
नतीजे आने के बाद भी इस चुनाव का किस्सा ख़त्म नहीं होने वाला है क्योंकि एंगेला मर्केल तब तक नहीं जाने वाली हैं जब तक सत्ता के लिए गठबंधन नहीं बन जाता.
इसके लिए उन्हें क्रिसमस तक का इंतज़ार भी करना पड़ सकता है.
मर्केल के उत्तराधिकारी को अगले चार वर्षों तक यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करना है और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काम करना है.
ये मुद्दे जर्मनी के मतदाताओं के एजेंडे में सबसे ऊपर थे.
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