नक्सलियों की आय के स्रोतों को बंद करना बेहद ज़रूरी: अमित शाह
गृह मंत्री का ये बयान 'वामपंथी उग्रवाद' के मुद्दे पर नई दिल्ली में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान आया. इस बैठक में नक्सली हिंसा से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित थे.
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बिहार: मोतिहारी में नाव पलटने से एक की मौत, चार लापता, सीटू तिवारी, बीबीसी हिंदी के लिए
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बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले की सिकरहना नदी में नाव पलटने से एक शख़्स की मौत हो गई है और चार लोग लापता हैं.
ये हादसा सुबह तक़रीबन दस बजे शिकारगंज थाना क्षेत्र के गोढिया घाट के पास हुआ.
पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा ने हादसे के बारे में बताया, “ घटना तकरीबन 10 बजे सुबह की है. नाव पर 15-16 लोग सवार थे."
एनडीआरएफ़ की टीम मौक़े पर मौजूद है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव में सवार लोग चारा लाने जा रहे थे.
स्थानीय पत्रकार सचिन पांडेय के मुताबिक, “अभी तक एक बच्ची का शव निकाला गया है जबकि चार का इलाज चल रहा है.”
हालांकि नाव पर कुल कितने लोग सवार थे, इसको लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.
प्रशासन का दावा है कि नाव पर 15-16 लोग सवार थे लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि नाव में कम से कम 25 लोग सवार थे.
रूस ने कहा, तालिबान को लेकर पाकिस्तान के साथ काम जारी
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रूस, चीन, पाकिस्तान और
अमेरिका सामूहिक तौर पर यह प्रयास कर रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की
मौजूदा सरकार ने जो वादे किये हैं, वह उन्हें पूरा किया जा सके. ख़ासतौर पर चरमपंथ से
इतर एक समावेशी सरकार के निर्माण के वादे को.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ
लवरोफ़ ने शनिवार को कहा कि रूस, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका से किए वादे तालिबान पूरे करे. रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि इसे सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं.
सर्गेइ लवरोफ़ ने कहा कि चारों
देश लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं.
उन्होंने बताया कि रूस, चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने हाल ही में तालिबान और ‘धर्मनिरपेक्ष अधिकारियों’ के प्रतनिधियों से
बातचीत करने के लिए कतर और फिर अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल की यात्रा भी की
है.
पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई
और अब्दुल्ला अब्दुल्ला तालिबान के साथ वार्ता परिषद में पूर्व अपदस्थ सरकार का नेतृत्व
कर रहे थे.
लवरोफ़ ने कहा कि तालिबान
की अंतरिम सरकार "पूरे अफ़ग़ान समाज के जातीय-धार्मिक और राजनीतिक पक्षों का
प्रतिनिधित्व नहीं करती है, इसलिए उनसे बातचीत की जा रही है. उनसे लगातार बात जारी
है."
तालिबान ने अपने इस दूसरे
शासन में एक समावेशी सरकार का वादा किया है. उन्होंने वादा किया है इस बार उनका
शासन 1996 से 2001 के बीच के शासन की तुलना में बहुत अलग होगा. इस बार उनका शासन
अधिक उदार होगा, जिसमें महिलाओं के अधिकारों का सम्मान भी निहित होगा.
तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान
में सत्ता संभालने के बाद यह भी वादा किया है कि 20 साल के युद्ध के बाद वह देश को
स्थिरता प्रदान करना चाहते हैं. और आतंकवाद के बढ़ावे के लिए अपनी ज़मीन का
इस्तेमाल नहीं होने देंगे.
लेकिन हाल के दिनों में
कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पता चलता है कि वे अधिक दमनकारी नीतियों के
साथर लौटे हैं. ख़ासकर महिलाओं के प्रति उनकी नीतियां अब भी उदार नहीं हैं.
लवरोफ़ ने कहा, "सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि जो वादे उन्होंने सार्वजनिक
रूप से किए हैं,
उन्हें पूरा किया जाए और हमारे लिए यह सर्वोच्च प्राथमिकता
है."
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एक संवाददाता सम्मेलन में और बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में लवरोफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान से जल्दबाज़ी में सेना बुलाने सहित कई मुद्दों पर बाइडन प्रशासन की आलोचना की.
उन्होंने कहा कि अमेरिका और नाटो ने परिणामों पर विचार किए बिना ही वापसी का फ़ैसला कर लिया.
उन्होंने कहा कि विदेशी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान में भारी मात्रा में हथियार छोड़े हैं, उन्होंने इसे लेकर कोई विचार नहीं किया.
अपने संबोधन में लवरोफ़ ने अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर मौजूदा समय की समस्याओं को हल करने की संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कम करने और उसे दरकिनार करने का आरोप लगाया. उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर अपने हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया.
उदाहरण के तौर पर लवरोफ़ ने कहा कि जर्मनी और फ्रांस ने हाल ही में बहुपक्षवाद के लिए एक गठबंधन के निर्माण की घोषणा की है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की तुलना में क्या कुछ और भी बहुपक्षीय हो सकता है?
अमेरिका भी संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार कर रहा है.
लवरोफ़ से संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश की चेतावनी पर रूस की प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया था. जिसमें उन्होंने अमेरिका और चीन के संदर्भ में एक और संभावित शीत युद्ध को लेकर आशंका ज़ाहिर की थी.
अपने जवाब में लवरोफ़ ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव दिखता है.
उन्होंने बढ़ते तनाव को लेकर चिंता भी ज़ाहिर की. उन्होंने बाइडन प्रशासन की कुछ हालिया नीतियों जैसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति जिसका उद्देश्य चीन के विकास को रोकना है, का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने दक्षिण चीन सागर विवाद और हाल ही में अमेरिका-ब्रिटेन सौदे का भी ज़िक्र किया. ऑस्ट्रेलिया के साथ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां के समझौते को भी उन्होंने रेखांकित किया.
लवरोफ़ ने कहा किबड़ी शक्तियों के बीच "सम्मानजनक" संबंध होने चाहिए. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रूस सुनिश्चित करना चाहता है कि ये संबंध कभी भी परमाणु युद्ध में नहीं बदलें.
तालिबान ने लड़ाकों को स्टेटस की दिलाई याद, कहा- सेल्फ़ी न लें और न ही घूमें-फिरें
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काबुल पर तालिबान के
क़ब्ज़े के बाद एम्यूज़मेंट पार्क और कई जगहों से तालिबान लड़ाकों की ऐसी तस्वीरें
आई थीं जिनमें वो झूला झूल रहे हैं या टॉय कार चला रहे हैं लेकिन अब तालिबान ने
अपने लड़ाकों को आदेश दिया है कि वो ऐसा न करें.
अमेरिकी अख़बार वॉल
स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि तालिबान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याक़ूब ने
लड़ाकों के इस व्यवहार पर नाराज़गी जताई है.
उनका कहना है कि यह
तालिबान के स्टेटस को नुक़सान पहुँचा रहा है.
ऐसा देखा गया है कि
तालिबान जब ड्यूटी पर नहीं होते हैं तब वो पर्यटन स्थलों, एम्यूज़मेंट पार्क में
अपनी बंदूक़ों और पगड़ी के साथ जाते हैं और उस जगह का आनंद लेते हैं.
याक़ूब ने कहा, “जो काम आपको दिया गया है, बस उसी पर
ही ध्यान केंद्रित करिए. आप हमारे स्टेटस को नुक़सान पहुँचा रहे हैं, जिसे हमारे
शहीदों ने अपने ख़ून से बनाया है.”
सेल्फ़ी लेने से किया
मना
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उन्होंने ख़ासतौर से
लड़ाकों को तब सेल्फ़ी लेने से मना किया है, जब कोई तालिबान नेता उनके पास से
गुज़रता है और फिर वो उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं.
उनका मानना है कि इसके
कारण जानकारी सार्वजनिक हो जाती है और संगठन के सदस्य की गतिविधियों का पता चल
जाता है.
इसके अलावा मंत्री ने
तालिबान लड़ाकों के पहनावे की भी आलोचना की है. उन्होंने आदेश दिया है कि इस्लामी
नियमों के अनुसार वे दाढ़ी और बाल रखें और कपड़े पहनें.
हाल ही में तालिबान
लड़ाकों को कंधे तक लंबे बाल रखे, स्टाइलिश कपड़े, धूप के चश्मे और ऊंचे जूते पहने
देखा गया है. जिस पर याक़ूब ने कहा है कि यह व्यवहार ‘वॉरलॉर्ड्स और कठपुतली सरकार के गैंगस्टर्स का है.’
उन्होंने कहा कि ‘अगर हम इसी तरह व्यवहार
करेंगे तो अल्लाह न करे, हम अपनी इस्लामी व्यवस्था को खो देंगे.’
सम्राट मिहिरभोज कौन हैं, जिन्हें लेकर आमने-सामने हैं राजपूत और गुर्जर?
अमेरिका- ट्रेन पटरी से उतरी, हादसे में तीन लोगों की मौत
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अमेरिका के मोंटाना
में एक ट्रेन पटरी से उतर गई.
इस हादसे में कम से
कम तीन लोगों की मौत हो गई है और 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
यह हादसा स्थानीय
समयानुसार, शाम चार बजे, जॉपलिन नाम के एक छोटे से कस्बे के पास हुआ.
एमट्रैक एम्पायर बिल्डर
पैसेंजर सर्विंस के कई डिब्बे पटरी से नीचे उतर गए. एमट्रैक ने कहा है कि रेल में लगभग 141 यात्री और 16 चालक दल
के लोग सवार थे.
कंपनी का कहना है
कि बचावकर्मी यात्रियों को निकालने का काम कर रहे हैं. यूएस नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी
बोर्ड ने इस हादसे की जांच शुरू कर दी है.
यह ट्रेन शिकागो से
सिएटल जा रही थी.
सिएटल जा रही एक यात्री
मेगन वेंडरवेस्टने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि वह डिब्बे के पटरी
से उतरने से जग गईं.
सोशल मीडिया पर इस
हादसे की कई तस्वीरें मौजूद हैं. जिसमें साफ़ दिख रहा है कि ट्रेन के डिब्बे किनारों
पर झुके हुए हैं और सामान जमीन पर बिखरा पड़ा है.
राज्य के सीनेटर स्टीव
डाइन्स ने कहा कि वह "इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं."
साल 2018 मेंएक एमट्रैक ट्रेन ग़लत ट्रैक
पर थी और वह एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी. जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, मिहिर भोज: गुर्जरों की महापंचायत, भारी पुलिस बल तैनात
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बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के अनुसार दादरी के मिहिर भोज बालिका इंटर कॉलेज के प्रांगण को सील कर दिया गया है.
यहाँ गुर्जर समाज की महापंचायत बुलाई गई थी.
पुलिस और प्रशासन ने दादरी आने वाले रास्तों की नाकेबंदी कर दी है.
इसी कॉलेज के प्रांगण में 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण किया था.
लेकिन शिलापट्ट पर लिखे गए 'गुर्जर सम्राट' से गुर्जर शब्द पर किसी ने कालिख लगा दी थी.
राजपूतों के संगठन करणी सेना ने गुर्जर शब्द लिखे जाने का विरोध किया था जिसके बाद तनाव पैदा हो गया.
आज गुर्जर समाज ने महापंचायत का आह्वान किया था.
अलग-अलग इलाक़ों से गुर्जर समाज के लोग महापंचायत में शामिल होने आ रहे हैं मगर समाज का आरोप है की उनके लोगों को दादरी आने से रोक दिया गया है. मिहिर भोज की जाति को लेकर राजपूत और गुर्जरों में विवाद है. दोनों मिहिर भोज को अपनी-अपनी जाति का बता रहे हैं.
रूस ने मान्यता के सवाल पर तालिबान को किया निराश
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रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लवरोफ़ ने कहा है कि तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता फ़िलहाल विचाराधीन नहीं
है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सर्गेइ लवरोफ़ ने संयुक्त
राष्ट्र महासभा से अलग यह बात कही.
उनकी यह टिप्पणी
ऐसे समय में आई है जब तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र के लिए अपने दूत को नामित किया
है.
सर्गेइ लवरोफ़ ने एक संवाददाता
सम्मेलन में कहा, "तालिबान की अंतरराष्ट्रीय
मान्यता का सवाल फ़िलहाल विचाराधीन नहीं है."
तालिबान के विदेश
मंत्री आमिर ख़ान मुत्तक़ी ने के तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन को अफ़ग़ानिस्तान की
ओर से संयुक्त राष्ट्र में राजदूत के रूप में नामित किया है.
तालिबान ने पिछले
महीने 15 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
तालिबान ने पहले
की (अशरफ़ ग़नी) अफ़ग़ानिस्तान सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राष्ट्र के
वर्तमान राजदूत गुलाम इसकज़ई को बेदख़ल कर दिया है. इसकज़ई ने भी अपनी संयुक्त राष्ट्र
मान्यता को दोबारा जारी करने करने का आग्रह किया है.
चीन और अमेरिका
समेत रूस भी संयुक्त राष्ट्र की उस नौ सदस्यीय समिति के सदस्य हैं जो इस साल के अंत
तक संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान की सीट के दावे पर फ़ैसला करेगी.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव
एंटोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए तालिबान की अपील ही
वो एकमात्र विकल्प है, जिसके आधार पर उस पर समावेशी सरकार और मानवाधिकारों के पालन (ख़ासतौर पर महिलाओं के संदर्भ में) को लेकर दबाव डाला जा सकता है.
मोदी की मौजूदगी मेें हुई क्वॉड बैठक पर चीनी मीडिया क्या कह रहा?
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अमेरिका, जापान,
भारत और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने क्वॉड शिखर सम्मेलन के तहत बीते शुक्रवार को
बैठक की थी. क्वॉड समूह देशों के नेताओं की यह पहली व्यक्तिगत मुलाक़ात थी.
ग्लोबल टाइम्स ने
इस मुलाक़ात को चीन के संदर्भ में रेखांकित किया है.
ग्लोबल टाइम्स के
मुताबिक़, शुक्रवार को वॉशिंगटन में क्वॉड देशों ने चीन को ‘रोकने’ के लिए
आपसी संबंधों की मज़बूती के लिए बैठक की.
लेकिन जानकारों का कहना है कि बैठक के
दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने अनुवाद उपकरण में ख़राबी की शिकायत की.
यह उभरते हुए चीन-विरोधी गुट के भविष्य का सूचक भी था. अमेरिका की घटती क्षमता और
वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव के कारण चीन विरोधी यह गुट किसी भी तरह से
कारगर साबित नहीं होगा.
वॉशिंगटन पोस्ट
की रिपोर्ट के मुताबिक़, शुक्रवार को हुई क्वॉड देशों की इस बैठक की उद्घोषणा में
मुख्य रूप से वैक्सीन, जलवायु, तकनीकी और अंतरिक्ष सहयोग सहित दूसरे अन्य मुद्दों
का ज़िक्र किया गया. पत्रकारों ने चीन या बीजिंग जैसे शब्द नहीं सुने लेकिन क्वॉड ‘समूह के ज़्यादातर एजेंडे का सब-टेक्स्ट चीन’ था.
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि क्वॉड समूह के देश मौजूदा समय में "कोविड से लेकर जलवायु की चुनौतियों और उभरती प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मंच पर आ रहे हैं."
उन्होंने बैठक की शुरुआत में कहा, “हम जानते हैं कि हमें हमारा लक्ष्य कैसे प्राप्त करना है और इसके लिए हम हर चुनौती के लिए तैयार भी हैं."
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बाइडन की टिप्पणी को ही दोहराते हुए कहा, "हम एक स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास करते हैं, क्योंकि यही एक मज़बूत, स्थिर और समृद्ध क्षेत्र प्रदान कर सकता है."
जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने भी इस बैठक में भाग लिया. उन्होंने कहा कि क्वॉड चार देशों की "एक अति महत्वपूर्ण" पहल है "जो समान मौलिक मूल्यों को साझा करते हैं और क़ानून के शासन के आधार पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को साकार करने के लिए सहयोग करते हैं."
चाइना फ़ॉरेन अफ़ेयर्स यूनिवर्सिटी में इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशन्स में प्रोफ़ेसर ली हैडोंगे ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, हालांकि इन चारों देशों के नेताओं ने चीन को लेकर कुछ नहीं कहा और ना ही उन्होंने ज़ाहिर तौर पर चीन के साथ मौजूदा गतिरोध का ज़िक्र किया लेकिन इस शिखर सम्मेलन का एजेंडा चीन पर ही केंद्रित था. यह एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के बैनर तले विवादों और टकराव को बढ़ाना है.
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उन्होंने कहा कि वीक्सीन की आपूर्ति पर सहयोग और महामारी से निपटने के उपायों जैसे मुद्दों की आड़ में अमेरिका समेत क्वॉड के अन्य तीन देश अपने असली उद्देश्य को छिपाना चाहते हैं. ऐसा करके वे अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना चाहते हैं लेकिन चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस तरह की निम्न-स्तरीय रणनीति देखी है.
ली के मुतबिक़, अमेरिका क्वॉड के चारों सदस्यों के बीच एकजुटता और समन्वय दिखाना चाहता है क्योंकि वह चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
ली ने कहा, "चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण प्रतिस्पर्धा है. ऐसे में बाइडन, चीन के साथ टकराव से बचना चाहते हैं और चीन के ख़िलाफ़ उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं. लेकिन तथ्य यह है कि वह नाजुक स्थिति को संभालने में असमर्थ है."
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अमेरिकी मीडिया के मुताबिक़, चार देशों के नेताओं के बीच हुई इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी शामिल हुए.
ली कहते है कि ब्लिंकन की उपस्थिति ने यह दिखा दिया है कि वह ब्लिंकन ही हैं जो क्वाड समूह को आगे बढ़ा रहे हैं.
शिन्हुआ विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के फेलो सुन चेंगहाओ के मुताबिक़ ने ग्लोबल टाइम्स से कहा है कि चीन का बिल्कुल उल्लेख नहीं होना भी क्वॉड देशों के बीच के गतिरोध को प्रदर्शित करता है. हो सकता है कि वे सभी देश चीन के उदय को न चाहने के समान विचार वाले हों लेकिन चीन के प्रति उनकी नीतियां एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं.
हालांकि शिखर सम्मेलन काफी सार्थक बताया गया लेकिन बैठक के दौरान जो बाइडन ने अपने एक कर्मचारी से कहा कि उनका अनुवादक उपकरण काम नहीं कर रहा है. यह बात उन्होंने माइक पर कही, जिसे अन्य नेताओं ने सुना भी.
सुन के मुताबिक़, क्वाड शिखर सम्मेलन बाइडन प्रशासन का नवीनतम क़दम है लेकिन अलग-अलग सहयोगियों के साथ, अलग-अलग गठबंधनों का अच्छा असर नहीं होगा क्योंकि अमेरिका का ध्यान केंद्रित नहीं है. इसने उसके सहयोगियों के बीच असंतोष को बढ़ाया भी है.
क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले ही अमेरिका ने ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ ऑकस डील की घोषणा की थी. इस पर फ्रांस ने नाराज़गी जतायी और अपने राजदूतों को इन सहयोगी देशों से वापस बुला लिया था.
विश्लेषकों का कहना है कि ऑकस ने क्वाड शिखर सम्मेलन पर असर तो ज़रूर डाला है क्योंकि जापान और भारत ऑकस में साझेदार नहीं है जबकि ऑस्ट्रेलिया है.
यूएन में भारत की स्नेहा दुबे को जवाब देने आईं पाकिस्तान की सायमा सलीम
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संयुक्त राष्ट्र की 76वीं आम सभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के संबोधन के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो चुका है.
शनिवार को इमरान ख़ान
ने भारत पर तीखे हमले किए थे. इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में भारत की फ़र्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने
पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया था.
उन्होंने राइट टू
रिप्लाई के तहत भारत की ओर से जवाब देते हुए पाकिस्तान को एक ऐसे देश के तौर पर
रेखांकित किया था कि जो आग लगाता है लेकिन ख़ुद को आग बुझाने वाले के तौर पर दिखाता है.
उन्होंने कश्मीर भारत का आंतरिक मामला बताया था.
अब एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से भारत पर पलटवार किया गया है. स्नेहा के जवाब में पाकिस्तान की सायमा
सलीम ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि कश्मीर भारत
का आंतरिक मामला नहीं है."
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सायमा सलीम ने कहा, "भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक विवादित क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर रहा है, जिसका अंतिम निर्णय संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुसार तय किया जाना है.”
उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान पर निराधार आरोप लगा रहा है और कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने के लिए झूठ का सहारा ले रहा है.
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान को लेकर भारत का रवैया न तो नया है और न ही आश्चर्यचकित करने वाला. लेकिन आरएसएस-बीजेपी और हिंदुत्व से प्रेरित सरकार के लिए यह चुनावी और विदेश नीति के तहत है.''
उन्होंने कहा कि ईयू डिसइन्फो लैब ने बताया था कि भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किस तरह से धोखे और दुष्प्रचार के तरीक़ों का इस्तेमाल किया है.
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उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारत के मानवाधिकारों के उल्लंघन को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों के उच्चायुक्त ने भी अपनी दो रिपोर्टों में दर्ज किया था.
"पाँच अगस्त, 2019 से उच्चायुक्त ने भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में लागू लॉकडाउन को अनलॉक करने और लोगों के नागरिक अधिकारों को पूरी तरह से बहाल करने का आग्रह किया."
सायमा ने कहा, "ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने भारत के मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में इसी तरह की चिंता ज़ाहिर की है.”
सायमा सलीम ने भारत पर आरोप लगाया कि भारत इनमें से किसी को भी जवाब देने में असफल रहा है.
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारत पर आरोप लगाया कि जिन लोगों ने इन "अपराधों की रिपोर्ट करने की हिम्मत की", उन लोगों के ख़िलाफ़ विच हंट शुरू कर दिया गया. पिछले साल ही एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार के उत्पीड़न का हवाला देते हुए भारत में काम करना बंद कर दिया था."
संयुक्त राष्ट्र में सायमा सलीम ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करता है कि वह सुबूतों को संज्ञान में ले और भारत को जवाबदेह ठहराए.
उन्होंने कहा, "अगर भारत के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे संयुक्त राष्ट्र की जांच को स्वीकार करना चाहिए और जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपना फ़ैसला लेने के लिए जनमत संग्रह निर्धारित करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के लिए सहमत होना चाहिए."
क्षेत्र में आतंकवाद के लिए भारत मुख्य अपराधी'
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद प्रायोजित करने के भारतीय आरोपों पर टिप्पणी करते हुए सायमा ने कहा, "मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहती हूँ कि भारत ही इस क्षेत्र में आतंकवाद का प्रमुख अपराधी, प्रायोजक, फाइनैंशर और उकसाने वाला है."
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पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने यह कहते हुए अपना भाषण समाप्त किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के बारे में झूठ फैलाने से अलग अपने देश की समस्याओं के समाधान पर ग़ौर करें तो ज़्यादा अच्छा होगा.
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी ने सायमा के बयान को री-ट्वीट करते हुए लिखा है-
"सायमा सलीम यूएनजीए में राइट टू रिप्लाई के अधिकार का प्रयोग कर रही हैं. सायमा दृष्टिबाधित हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने बात की ऐसा लगता है कि उसका दिल सब कुछ देख सकता है. धन्यवाद आपका."
कॉपरेटिव सोसाइटी एक्ट में जल्द ही संशोधन किया जाएगा: अमित शाह
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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जल्दी ही बहुराज्य सहकारी समिति
अधिनियम में संशोधन लेकर आएगी. उन्होंने यह भी कहा कि सहकारिता के लिए एक नई नीति पर
विचार-विमर्श किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि यह
सवाल उठ सकता है कि संविधान के अनुसार सहकारिता तो राज्य का विषय है. इसका क़ानूनी दायरे
में रहते हुए जवाब दिया जा सकता है लेकिन नव-निर्मित
मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर काम करेगा और इससे कोई गतिरोध नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि किसी से कोई संघर्ष नहीं, हम सबको साथ लेकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे.
कई राज्यों में समृद्ध
सहकारी समितियां विपक्षी दलों के जैसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या फिर कांग्रेस
के नियंत्रण में हैं.
सहकारी समितियां महाराष्ट्र,
केरल, गुजरात, कर्नाटक के कुछ हिस्सों,
तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक भविष्य
तय करती हैं.
इसी साल पाँच जुलाई को सहकारिता मंत्रालय के गठन की घोषणा हुई थी और कैबिनेट विस्तार के दौरान अमित शाह को यह मंत्रालय मिला.
अमित शाह ने अपने
बयान में कहा कि केंद्र सरकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को नियंत्रित करने वाले क़ानूनों में भी संशोधन
पर विचार कर रही है. इसके बाद राज्यों को एडवाइज़री भेजी जाएगी और उन्हें भी संबंधित
क़ानूनों में संशोधन करना होगा.
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उन्होंने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को मज़बूत किए जाने की ज़रूरत है और ज़मीनी स्तर पर काम किया जाना चाहिए ताकि हाशिए पर खड़े अंतिम शख़्स को भी ऋण का लाभ मिल सके.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजना के तहत अगले पाँच सालों में पूरे देश में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की संख्या मौजूदा 65,000 से बढ़ाकर 3 लाख करने की है.
उन्होंने कहा,“मान लीजिए दीपावली नज़दीक है और किसी को त्योहार मनाने के लिए 1000 रुपए की ज़रूरत है. दो महीने पहले उसकी आमदनी हुई थी लेकिन स्वास्थ्य इमर्जेंसी के चलते उसके पास फ़िलहाल पैसे नहीं हैं, ऐसे में केवल प्राथमिक कृषि ऋण समितियां ही यहाँ मदद कर सकती हैं. ये इकाइयां मानवीयता के आधार पर ऋण देती हैं. ”
पहले सहकारिता सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कहा कि कुछ लोगों को अचरज हो रहा है कि जबकि सहकारिता राज्य का विषय है तो केंद्र सरकार ने यह नया मंत्रालय क्यों बनाया.
उन्होंने कहा, सहकारिता देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है.
नमस्कार!
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