अमेरिकी राष्ट्रपति
जो बाइडन ने व्हाइट हाउस में
पहली बार व्यक्तिगत तौर पर क्वाड शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की.
24 सितंबर को हुए
इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया और जापान
के समकक्षों के साथ भाग लिया.
अपने संबोधन के
दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि चार लोकतंत्रों का समूह एक
"ताक़त के रूप में कार्य करेगा" और “हिंद-प्रशांत क्षेत्र
के साथ-साथ पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि सुनिश्चित” करेगा.
साल 2017 नवंबर
में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने
चीन की बढ़ती ताक़त के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को
चीन के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक नई रणनीति विकसित करने के लिए क्वॉड की स्थापना
की थी. यह एक लंबित प्रस्ताव था, जिसे 2017 नवंबर में अमल में लाया गया.
क्वॉड शिखर
सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के आमंत्रण पर भारत के पीएम मोदी,
ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम योशीहिदे सुगा पहली बार व्यक्तिगत रूप
से इस शिखर सम्मेलन के लिए व्हाइट हाउस में मिले.
राष्ट्रपति बाइडन
ने इससे पहले मार्च महीने में चारों नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक की थी.
शिखर सम्मेलन का उद्घाटन
करते हुए बाइडन ने कहा कि चार लोकतंत्र कोविड महामारी से लेकर जलवायु समस्या से
जुड़ी आम चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ, एक मंच पर आए हैं.
उन्होंने कहा, "इस समूह में लोकतांत्रिक देश साझेदार हैं जो विश्व-विचार साझा करते हैं और भविष्य के लिए समान दृष्टि रखते हैं."
उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि चीज़ों को कैसे करना है और हम हर चुनौती के लिए तैयार हैं.
एक संक्षिप्त और स्पष्ट भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि "क्वॉड में हमारी भागीदारी हिंद-प्रशांत के साथ-साथ पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करेगी."
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि हमारा सहयोग विश्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि स्थापित करेगा. क्वॉड वैश्विक भलाई के लिए एक शक्ति के रूप में कार्य करेगा.”
उन्होंने कहा कि आज दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है. हम क्वाड के रूप में मानवता के लिए साथ आए हैं. हमारी क्वॉड वैक्सीन पहल से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को बहुत मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा, “हमारे साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर क्वॉड ने सकारात्मक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है.”
इस मौक़े पर ऑस्ट्रेलिया के पीएम मॉरिसन ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त किया जाना चाहिए और विवादों को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार हल किया जाना चाहिए.
जापान के प्रधानमंत्री सुगा ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि हम एक सार्थक शिखर सम्मेलन आयोजित करने में कामयाब हैं."