ओवैसी ने कहा, तालिबान और कट्टरता पर क़दम उठाएं पीएम मोदी, सिर्फ़ बातों का कोई मोल नहीं

पीएम मोदी के शंघाई सहयोग संगठन में कट्टरता पर दिए बयान को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि बोलना आसान है लेकिन जबतक कदम न उठाएं जाएं आपको कोई गंभीरता से नहीं लेता.

लाइव कवरेज

  1. पुतिन के विरोधी नवेलनी पर रूस के इस क़दम से नाराज़ उनके समर्थक

    नवेलनी

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    गूगल के प्ले स्टोर और एप्पल के एप्प स्टोर ने रूस में विपक्षी नेता और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के धुर विरोधी एलेक्सी नवेलनी की ऐप 'स्मार्ट वोटर' को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है.

    ऐसा रूस की सरकार की मांग के बाद किया गया है. नवेलनी इस समय रूसी जेल में हैं. गौरतलब है कि रूस में आज से तीन दिन के संसदीय चुनावों में मतदान शुरू हुआ है.

    नवेलनी की 'स्मार्ट वोटर' एप का प्रयोग उनके सहयोगी और समर्थक अपना विचार शेयर करने के लिए करते थे.

    नवेलनी के प्रमुख सहयोगी इवान ज़डानोव ने ट्वीटर पर गूगल और एप्पल के इस क़दम को शर्मनाक बताया है. ज़डानोव ने लिखा, “नवेलनी एप्प को हटाना राजनीतिक सेंसरशिप की एक शर्मनाक कार्रवाई है.”

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    गूगल और एप्पल ने ये कार्रवाई रूस के टेलिकॉम रेग्यूलेटर रोसकोम्नाडज़ोर की मांग के बाद की थी. टेलिकॉम रेग्यूलेटर की मांग के बारे में इंटरफ़ैक्स न्यूज़ एजेंसी ने ख़बर छापी है.

    रेग्लूलेटर ने एक रूसी अदालत का हवाला दिया था जिसने एलेक्सी नवेलनी की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था को एक चरमपंथी संगठन बताकर, बैन कर दिया था.

    नवेलनी के सहयोगी उनकी इस एप्प पर ख़बरें और ब्लॉग छाप रहे थे क्योंकि रूसी रेग्लूलेटर ने पहले ही उनकी तमाम वेबसाइट्स को पहले बैन कर दिया था.

    नवेलनी राष्ट्रपति पुतिन के नीतियों के विरोधी हैं और वे इस समय जेल में बंद हैं. उन्हें पिछले साल अगस्त में जहर ​दिया गया था लेकिन बेहतर इलाज के बाद वे बचने में सफल रहे.

  2. चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की गुटबंदी का निकाला ये तोड़

    व्यापार

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    चीन ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मज़बूत करने की दिशा में एशिया-प्रशांत व्यापार सौदे में शामिल होने के लिए आवेदन किया है.

    चीन ने यह क़दम तब उठाया है जब एक दिन पहले ही इस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुरक्षा सौदे को अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया अनुमति दे चुके हैं.

    AUKUS के नाम से जाने जा रहे इस समझौते के पीछे अमेरिका का उद्देश्य चीन के इस क्षेत्र में बढ़ते दबदबे को कम करना बताया जा रहा है.

  3. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री ने लद्दाख गतिरोध पर की चर्चा

    भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात

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    इमेज कैप्शन, दुशांबे में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक

    भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव ख़त्म नहीं हुआ है. कुछ मुद्दे अभी भी जस के तस बने हुए हैं.

    यह मुलाक़ात ताज़िकिस्तान के दुशांबे में राष्ट्राध्यक्षों की 21वीं एससीओ बैठक के दौरान हुई.

    दोनों विदेश मंत्रियों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ-साथ वैश्विक विकास की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की.

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    विदेश मंत्री ने कहा कि 14 जुलाई को दोनों देशों के बीच हुई पिछली बैठक के बाद से पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ-साथ गतिरोध के कुछ मुद्दों के समाधान में प्रगति हुई है. गोगरा क्षेत्र से सेना पूरी तरह पीछे हो गई है. हालाँकि अभी भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिनका हल निकाला जाना बाकी है.

    इस मौक़े पर भारत के विदेश मंत्री ने पिछली बैठक के दौरान हुई बातचीत को भी संदर्भ के तौर पर रखा.

    उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी पिछली बैठक में कहा था दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर पर है. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि मौजूदा गतिरोध स्थिति को लम्बा खींचना दोनों पक्षों के हित में नहीं है क्योंकि यह संबंधों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है. इसलिए विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया था कि दोनों पक्षों को द्विपक्षीय समझौतों का पूरी तरह से पालन करते हुए पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ शेष मुद्दों को जल्दी से जल्दी सुलझाने की दिशा में काम करना चाहिए.

    विदेश मंत्री ने कहा कि बाकी मुद्दों के समाधान में प्रगति सुनिश्चित करना ज़रूरी था.

    दोनों मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों के सैन्य और राजनयिक अधिकारियों को फिर से मिलना चाहिए और बाकी मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने के लिए चर्चा जारी रखनी चाहिए.

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  4. अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर नीदलैंड्स की विदेश मंत्री ने दिया इस्तीफ़ा

    सिग्रिड काम

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    अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकालने के मुद्दे को लेकर नीदलैंड्स की विदेश मंत्री सिग्रिड काग ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

    तालिबान के नियंत्रण के बाद अफ़ग़ानिस्तान में मची उथल-पुथल को लेकर पश्चिमी देशों में यह किसी पहले सरकारी अधिकारी का इस्तीफ़ा है.

    डच सांसदों ने मंत्री के ख़िलाफ़ एक निंदा प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया था कि सरकार ने बहुत सुस्ती से प्रतिक्रिया देते हुए उन अधिकतर अफ़ग़ान लोगों को वहीं छोड़ दिया जो वहां से भागना चाहते थे.

    काग ने कहा कि वह अपने फ़ैसलों के साथ खड़ी हैं लेकिन वो सांसदों के फ़ैसले को भी स्वीकार करती हैं.

    उन्होंने माना कि तालिबान के बढ़ते दबदबे को लेकर जारी की गई चेतावनियों को लेकर सरकार धीमी और अव्यवस्थित थी.

    अगस्त के अंतिम दो हफ़्तों में नीदरलैंड्स ने अफ़ग़ानिस्तान से 2,000 लोगों को बाहर निकाला है.

    लेकिन ऐसे सैकड़ों स्थानीय स्टाफ़ और लोग वहीं रह गए हैं जो डच सुरक्षाबलों के लिए दुभाषिए का काम किया करते थे.

    मंत्री ने कहा- पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं

    सिग्रिड काम

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    काग ने स्वीकार किया कि सरकार ने ‘ग़लत धारणा’ के आधार पर कार्रवाई की लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान की ताक़त के इतने तेज़ी से उभरने से हर कोई हैरान था ‘तालिबान ख़ुद भी हैरान था.’

    इसके बावजूद काग ने कहा कि सांसदों के मत ने उनके आगे पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है.

    उन्होंने कहा, “संसद ने फ़ैसला किया है कि कैबिनेट ने ज़िम्मेदारी से काम नहीं किया है. अगर नीति को ख़ारिज किया गया है तो मंत्री को ज़रूर जाना चाहिए.”

    काग उदारवादी D66 पार्टी की नेता बनी रहेंगी जो इस समय नई गठबंधन सरकार के लिए बातचीत कर रही है.

    तालिबान के नियंत्रण के बाद इस्तीफ़ा देने वाली वो पहली विदेश मंत्री हैं.

    काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के दौरान छुट्टी पर रहने की ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब की काफ़ी निंदा हो चुकी है जिन्हें पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल में तब्दीली के दौरान विदेश मंत्री पद से हटा दिया गया था.

  5. उत्तर कोरिया का क्रूज़ मिसाइल परीक्षण दूसरे देशों के लिए चिंता की बात क्यों है?

    मिसाइल

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    इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तर कोरिया ने घोषणा की थी कि उसने लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जो जापान तक को निशाना बना सकती है.

    क्रूज़ मिसाइल बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग होती हैं जिसको हमले के दौरान अलग-अलग दिशाओं से भी छोड़ा और मोड़ा जा सकता है.

    यह दिखाता है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार पाने की अपनी इच्छा की दिशा में किस तरह से विविध और जटिल हथियार बना ले रहा है.

    यह भी साफ़ है कि महामारी की प्राकृतिक आपदा और आंतरिक आर्थिक दिक़्क़तों की मार ने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार पाने की दिशा में थोड़ा रोके रखा था.

    लेकिन हालिया परीक्षण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं जैसे कि- उत्तर कोरिया यह अभी क्यों कर रहा है, यह कितना महत्वपूर्ण है और यह हमें उसकी प्राथमिकताओं के बारे में क्या बताता है?

  6. भारत में सरकार के निशाने पर आलोचक, कार्यकर्ता और पत्रकार: ह्यूमन राइट्स वॉच

    मोदी

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    मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारतीय अधिकारी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सरकार के आलोचकों को चुप कराने के लिए कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

    सितंबर 2021 में सरकारी वित्तीय अधिकारियों ने श्रीनगर, दिल्ली और मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की. जिसमें पत्रकार, एक अभिनेता और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के घर और कार्यालय पर छापेमारी शामिल है.

    ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि छापेमारी की ये कार्रवाई राजनीति से प्रेरित हैं. ये छापेमारी भी केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद से अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर की जा रही कार्यवाही का ही एक हिस्सा है.

    "इस क्रम में राजनीति से प्रेरित कई आपराधिक मामले भी शामिल हैं जिसमें कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों, छात्रों और अन्य के ख़िलाफ़ राजद्रोह तक का मुक़दमा दर्ज किया गया है. आलोचकों और मुखर समूहों को निशाना बनाने के लिए विदेशी फंडिंग नियमों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी इस्तेमाल किया गया है."

    ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, "भारत सरकार की छापेमारी आलोचकों को परेशान करने और डराने-धमकाने के इरादे से की गई लगती है. यह आलोचकों को चुप कराने की कोशिश के एक पैटर्न को दर्शाती है."

    वह कहती हैं "ये भारत के मूल लोकतांत्रिक संस्थानों को कमज़ोर करती हैं और मौलिक स्वतंत्रता को भी."

    हर्ष मंदर

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    एडिटर्स गिल्ड और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जैसे पत्रकार संगठनों ने बार-बार मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले ना करने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर एक खुला हमला है.

    सबसे हालिया घटना में 16 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दिल्ली में एक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के घर और कार्यालय पर छापेमारी की.

    छापेमारी के समय मंदर एक फेलोशिप के लिए जर्मनी में थे. कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और पूर्व सिविल सेवकों ने छापे की निंदा की है.

    इससे पूर्व 16 सितंबर को अभिनेता सोनू सूद से जुड़े मुंबई के परिसर और कुछ अन्य जगहों पर इनकम टैक्स के अधिकारी पहुंचे थे.

    सोनू सूद

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    पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया था कि आयकर विभाग 'एक रियल एस्टेट सौदे की जांच कर रहा है.'

    इससे पूर्व 8 सितंबर को जम्मू और कश्मीर में पुलिस ने चार कश्मीरी पत्रकारों - हिलाल मीर, शाह अब्बास, शौकत मोट्टा और अज़हर कादरी के घरों पर छापा मारा था और उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए थे.

    10 सितंबर को आयकर विभाग ने कथित कर चोरी की जांच के तहत न्यूज़लॉन्ड्री और न्यूज़क्लिक के कार्यालयों पर छापा मारा था.

    मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त और विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पिछले कुछ सालों में नागरिकों के कम होते अधिकार क्षेत्र और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, आलोचकों के बढ़ते उत्पीड़न पर चिंता ज़ाहिर की है.

  7. अमेरिका को पाकिस्तान ने दिया जवाब, तालिबान सरकार को मान्यता देने या न देने का कोई दबाव नहीं, फरहत जावेद, बीबीसी उर्दू संवाददाता

    अमेरिका, पाकिस्तान

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    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उस पर तालिबान सरकार को मान्यता देने या नहीं देने का कोई दबाव नहीं है.

    विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम कोई दबाव नहीं लेते हैं. हम अपने हितों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेंगे."

    अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिकी कांग्रेस में वहां के सांसदों की हाल की टिप्पणियों और बाइडन प्रशासन के सवालों के जवाब में विदेश विभाग ने कहा, "ये टिप्पणियां पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सहयोग के क़रीबी रिश्तों से मेल नहीं खाती हैं."

    विदेश मंत्रालय ने कहा, "ये आश्चर्यजनक है क्योंकि अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की सकारात्मक भूमिका, वहां से बहुराष्ट्रीय सेना की वापसी के प्रयासों के लिए उसके समर्थन और अफ़ग़ानिस्तान में एक व्यापक राजनीतिक समझौते के लिए उसके निरंतर समर्थन को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई थी."

    पाकिस्तानी विदेश विभाग के बयान के मुताबिक़, इसी तरह का बयान अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने अपनी 15 सितंबर की ब्रीफिंग में दिया था.

    बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा को हराने में अमेरिका की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का प्राथमिक लक्ष्य था."

    अमेरिका

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    बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान ने हमेशा कहा है कि अफ़ग़ान संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और राजनीतिक समझौता अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है."

    ग़ौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन ने हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की जीत पर कांग्रेस की एक सुनवाई में कहा था कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करेगा.

    उन्होंने कहा कि समीक्षा इस पर आधारित होगी कि वाशिंगटन पाकिस्तान की मदद से अफ़ग़ानिस्तान में क्या हासिल करना चाहता है. उन्होंने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के कई हित हैं, जिनमें से कुछ से हम सहमत नहीं हैं.

    पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जिन्होंने तालिबान को पनाह दी थी. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान का सहयोग सहमति के विभिन्न बिंदुओं में से एक है.

    उन्होंने ये भी जोर दिया कि "पाकिस्तान सहित दुनिया में कोई भी देश अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को तब तक मान्यता नहीं देगा जब तक कि वे उन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं जिन पर उनके साथ सहमति हुई है."

  8. अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ ऑकस समझौता क्या है, जिसे लेकर चीन नाराज़ है

    अमेरिका-ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया

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    50 सालों में यह पहली बार है जब अमेरिका अपनी पनडुब्बी तकनीक किसी देश से साझा कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने केवल ब्रिटेन के साथ यह तकनीक साझा की थी.

    इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया अब परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का निर्माण करने में सक्षम होगा जोकि पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियों के बेड़े की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और मारक होंगी. ये ख़ास पनडुब्बियां महीनों तक पानी के भीतर रह सकती हैं और लंबी दूरी तक मिसाइल दाग सकती हैं.

    इससे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने एक संयुक्त वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'ऑकस' समझौते की जानकारी दी.

    हालांकि इस दौरान किसी ने भी सीधे तौर पर चीन का उल्लेख नहीं किया था लेकिन तीनों नेताओं ने बार-बार क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं का ज़िक्र ज़रूर किया था.

    ऑकस सुरक्षा समझौते पर एक संयुक्त बयान जारी कर कहा गया, "ऑकस के तहत पहली पहल के रूप में हम रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

  9. अमेरिका ने अल-क़ायदा को मदद करने वाले मिस्र और तुर्की के पांच लोगों के ख़िलाफ़ लगाया प्रतिबंध

    बाइडन

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    अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा को वित्तीय सहायता और यात्रा से जुड़ी मदद करने के संदेह में तुर्की में पांच लोगों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की घोषणा की है.

    जिन पांच लोगों के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई है वे तुर्की और मिस्र के नागरिक हैं.

    ट्रेज़री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन्होंने अल-क़ायदा के वरिष्ठ सदस्यों को कई तरह से मदद मुहैया करायी. इन वरिष्ठ अधिकारियों में वे चरमपंथी भी शामिल हैं जिन्होंने 9/11 हमले और अमेरिकी के ख़िलाफ़ हुए दूसरे हमलों को अंजाम देने में भूमिका निभाई.

    इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली उनकी सारी संपत्ति फ्रीज़ कर दी गई है और उन्हें ग्लोबल फ़ाइनेंशियल सिस्टम से भी बाहर कर दिया गया है.

    यह प्रतिबंध यह अल-क़ायदा के समर्थक नेटवर्क के ख़िलाफ़ लंबे समय से चल रहे अभियान का हिस्सा है.

    ट्रेज़री के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के निदेशक एंड्रिया गाकी ने इस कदम की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका, तुर्की और अन्य सहयोगी देशों के साथ काम करके अल-क़ायदा के सहयोगी नेटवर्क्स की पहचान कर उन्हें रोकना चाहता है.

    जिन पांच लोगों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाये गए हैं उनमें मिस्र में जन्मे वकील मजदी सलीम शामिल हैं, जिनके बारे में एजेंसी ने कहा कि वह तुर्की में अल-क़ायदा की गतिविधियों के सूत्रधारों में से एक हैं.

    एक अन्य की पहचान मिस्र के नागरिक मुहम्मद नस्र अल-दीन अल-गज़लानी के रूप में की गई है.

    इसके अलावा नुरेटिन मुस्लीहान, सेब्रेल गुज़ेल, सोनर गुरलेन के ख़िलाफ़ आरोप है कि उन्होंने अल-क़ायदा की मदद की.

  10. अमेरिका 9/11 हमलों के बाद चरमपंथ को ख़त्म करने में कितना कामयाब रहा

    अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सेना

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    11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर अब तक का सबसे बड़ा चरमपंथी हमला हुआ. इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए.

    अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को सत्ता से बेदखल किया और इराक़ में सद्दाम हुसैन के शासन को ख़त्म किया. लेकिन बीस साल बाद अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान एक बार फिर सत्ता पर काबिज़ है और इराक़ हिंसा के दौर से गुज़र रहा है.

    दुनिया जहान में इस बार पड़ताल इस बात की कि 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका की जवाबी प्रतिक्रिया का नतीजा क्या निकला? क्या वो चरमपंथ को पूरी तरह ख़त्म कर सका?

    ब्रूस हॉफ़मैनअमेरिका की काउंसिल ऑफ़ फ़ॉरेन रिलेशन्स में काउंटरटेररिज़्म एंड होमलैंड सिक्योरिटी में सीनियर फेलो हैं. साथ ही वो जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं.

    11 सितंबर 2001 को जिस वक्त चरमपंथी हमला हुआ उस वक्त ब्रूस हॉफ़मैन वॉशिंगटन में अपने दफ्तर में थे. वो कहते हैं, "जब अमेरिकी एयरलाइन का विमान पेंटागन से आकर टकराया, उस वक्त मैं उसके सामने वाली इमारत में था. पूरी इमारत कांपने लगी थी, ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो."

  11. आईटीसी शेयर प्राइस में इतनी ज़बरदस्त उछाल कैसे दर्ज की गई -प्रेस रिव्यू

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज

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    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में एफ़एमसीजी कंपनी ITC के शेयर गुरुवार को 8 फ़ीसदी उछाल के साथ 233.50 रुपये पर पहुंच गए.

    फ़ाइनैंशियल एक्सप्रेस अख़बार लिखता हैकि ITC के शेयर सात महीने के उच्चतम स्तर के क़रीब पहुंच चुके हैं. इसी साल फ़रवरी में इसके शेयर की क़ीमत 239.15 रुपये पहुंच गई थी.

    इस कंपनी के शेयर्स की ख़रीद-फ़रोख़्त में काफ़ी बढ़ोतरी देखी गई है. बीएसई में इस दिन 98.15 लाख इक्विटी ख़रीदी गई हैं जबकि एनएसई में कुल 13.41 करोड़ यूनिट का व्यापार हुआ.

    ITC के शेयर्स में इस महीने 11.45 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. विश्लेषकों ने इसकी वजह कंपनी के व्यापार में हुए बदलाव को बताया है क्योंकि ITC के शेयर काफ़ी समय से 207-217 रुपये के बीच में ही चल रहे थे.

  12. नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देश भर में बीजेपी की तैयारी, कांग्रेस ने कहा- राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस

    नरेंद्र मोदी

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    केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भव्य तरीके से मना रही है लेकिन विपक्षी कांग्रेस ने इस 'राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस' के तौर पर मनाने का एलान किया है.

    इसके लिए बीजेपी ने 20 दिन के एक राष्ट्रव्यापी अभियान की योजना बनाई है जिसे 'सेवा और समर्पण अभियान' का नाम दिया गया है. ये अभियान 7 अक्तूबर को ख़त्म होगा.

    पीएम मोदी का 71वां जन्मदिन 17 सितंबर को पड़ने वाला है. वहीं इसके बीस दिन बाद यानी 7 अक्तूबर को, आज से बीस साल पहले मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.

    प्रधानमंत्री के जन्मदिन मनाने की बीजेपी की तैयारियों की कई हलकों से आलोचना भी हो रही है. बीजेपी की तैयारियों के बीच किसान नेता कामरेड इंदरजीत सिंह ने बीजेपी की निंदा की है. उन्होंने कहा, "जहां एक तरफ किसान साढ़े नौ महीने से सड़कों पर आंदोलन कर रहा है और आम जनता कोरोना के चलते हुए नुक़सान से उबर नहीं पाई है वहीं प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के जन्मदिन को मनाने के लिए बीस दिन तक कार्यक्रम चलाने की बात करना दुर्भाग्यपूर्ण है."

    इसके लिए बीजेपी ने एक चार सदस्यीय समिति बनाई है ताकि अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें. इस समिति का नेतृत्व कैलाश विजयवर्गीय कर रहे हैं.

  13. ऑकस समझौते पर चीन कहा- ये शीत युद्ध की मानसिकता को दर्शाता है

    चीन

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    चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते ऑकस की आलोचना करते हुए इसे बेहद ग़ैर ज़िम्मेदाराना बताया है. चीन ने कहा है कि यह छोटी सोच का उदाहरण है.

    चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए रक्षा समझौते की निंदा करते हुए कहा कि ये शीत युद्ध की मानसिकता को दर्शाता है.

    इससे पहले ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने एक विशेष सुरक्षा समझौते की घोषणा की थी. इस समझौते के तहत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया को न्यूक्लियर पन्नडुबी की तकनीक भी मुहैया करवाएगा.

    जानकारों का मानना है कि इस नए सुरक्षा समझौते को एशिया पैसेफ़िक क्षेत्र में चीन के प्रभाव से मुक़ाबला करने के लिए बनाया गया है.

    ऑकस

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    यह क्षेत्र वर्षों से विवाद का कारण है और वहां तनाव बना हुआ है.

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि “इन्हीं वजहों से हथियारों के अंतरराष्ट्रीय प्रसार को रोकने के प्रयासों को धक्का लगता है.”

    उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए इस नए रक्षा समझौते की निंदा करते हुए कहा कि ये शीत युद्ध की मानसिकता को दर्शाता है.

    चीनी की सरकारी मीडिया ने इस समझौते की निंदा करते हुए लेख प्रकाशित किये हैं.

    ग्लोबल टाइम्स अख़बार के लेख में कहा गया है इस समझौते के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने ख़ुद को चीन का विरोधी बना लिया है.

    50 सालों में यह पहली बार है जब अमेरिका अपनी पनडुब्बी तकनीक किसी देश से साझा कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने केवल ब्रिटेन के साथ यह तकनीक साझा की थी.

    इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया अब परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का निर्माण करने में सक्षम होगा जोकि पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियों के बेड़े की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और मारक होंगी. ये ख़ास पनडुब्बियां महीनों तक पानी के भीतर रह सकती हैं और लंबी दूरी तक मिसाइल दाग सकती हैं.

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    इससे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने एक संयुक्त वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘ऑकस’ समझौते की जानकारी दी.

    हालांकि इस दौरान किसी ने भी सीधे तौर पर चीन का उल्लेख नहीं किया था लेकिन तीनों नेताओं ने बार-बार क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं का ज़िक्र ज़रूर किया था.

    ऑकस सुरक्षा समझौते पर एक संयुक्त बयान जारी कर कहा गया, "ऑकस के तहत पहली पहल के रूप में हम रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

    अमेरिका की ऑस्ट्रेलिया के साथ परमाणु पन्नडुबी ख़रीदने की डील पर फ़्रांस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. दरअसल ऑस्ट्रेलिया पहले यही परमाणु पन्नडुबियां, फ़्रांस से ख़रीदने वाला था.

    फ्रांस के विदेश मंत्री ज़ॉ ईव ले ड्रियां ने इसे "पीठ में छुरा घोंपना" बताया है.फ्रांस ने पांच साल पहले पारंपरिक रूप से संचालित 12 पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया को बेचने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

    ये सौदा 56 बिलियन यूरो का था. लेकिन फिर ख़बर आई कि यूके-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया एक रणनीतिक साझेदारी की डील कर रहे हैं.

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