ओवैसी ने कहा, तालिबान और कट्टरता पर क़दम उठाएं पीएम मोदी, सिर्फ़ बातों का कोई मोल नहीं

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पीएम मोदी के शंघाई सहयोग संगठन में कट्टरता पर दिए बयान को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि बोलना आसान है लेकिन जबतक कदम न उठाएं जाएं आपको कोई गंभीरता से नहीं लेता.
ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, "इस बात से सहमत हूं कि कट्टरता कहीं भी क़ानून के लिए ख़तरा है. एक निर्दोष व्यक्ति की लिंचिंग के लिए कट्टर लोगों का इकट्ठा होना कट्टरता है. सत्ता में बैठी पार्टी का गोडसे को देशभक्त बताना कट्टरता है."
ओवैसी ने लिखा कि पीएम की खुलकर निंदा नहीं करना इसे सामाजिक मान्यता देने का साफ़ संकेत है.
"आपके प्रवक्ता 'तालिबानी' को टीवी पर गाली की तरह इस्तेमाल करते हैं, आपकी सरकार ने हमारे हितों की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया. न ही आपने 'कट्टर' तालिबान के ख़िलाफ़ कोई स्टैंड लिया है."
ओवैसी ने लिखा की सिर्फ़ इस बारे में बात करने से कुछ नहीं होगा. उन्होंने लिखा,"क्या आप अमेरिका के आदेश के अनुसार तालिबान से ट्रैवल बैन हटा देंगे? या फिर आपका कोई स्वतंत्र स्टैंड होगा? क्या आप तालिबान को यूएपीए के तहत एक आतंकी संगठन की लिस्ट में डालेंगे या फिर आप उन्हें यूएन प्रतिबंध सूची से हटा रहे हैं? बात करना आसान है, जब तक आप स्टैंड नहीं लेंगे तब तक आपको कोई गंभीरता से नहीं लेगा."
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, "SCO की 20वीं वर्षगाँठ इस संस्था के भविष्य के बारे में सोचने के लिए भी उपयुक्त अवसर है. मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियाँ शांति, सुरक्षा और भरोसे की कमी से संबंधित है. और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ती हुई कट्टरता है. अफ़ग़ानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है.















