शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में क्या तालिबान का कोई प्रतिनिधि होगा?

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शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन की 21वीं बैठक है. इस बार ये बैठक वीडियो लिंक के जरिए होगी. इस संगठन में सेंट्रल और साउथ एशिया के देश हैं.
चीन और रूस के दबदबे वाले शंघाई सहयोग संगठन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वीडियो लिंक के ज़रिए शामिल होंगे.
अफ़ग़ानिस्तान इस समूह का पर्यवेक्षक सदस्य है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि तालिबान सरकार का कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल होगा या नहीं.
चीन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के अधिकारियों को मान्यता देगा या नहीं.
तालिबान की सरकार के मंत्रीमंडल में एक भी महिला सदस्य को जगह नहीं दी है. हालांकि चीन ने काबुल में अपने दूतावास को अभी तक बंद नहीं किया है.
चीन अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार बताता रहा है. चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका ने जिस तरह अपने सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से वापस निकाला उसी के कारण वहां अराजकता फैली.
चीन ने शंघाई सहयोग संगठन का इस्तेमाल राजनीतिक वार्ता और संयुक्त सैन्य अभ्यास के माध्यम से मध्य एशिया में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए किया है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को कम करना है.






