ऑस्ट्रेलिया की
शीर्ष अदालत ने अपने एक आदेश में कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई न्यूज़ आउटलेट्स के सोशल
मीडिया पोस्ट्स पर अगर भद्दे कमेंट्स आते हैं तो इसके लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया
जा सकता है.
ऑस्ट्रेलिया में
न्यूज़ इंडस्ट्री से जुड़े संस्थान या फिर ऐसे ही दूसरे संस्थानों के लिए यह
निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. जिसका उनकी सोशल मीडिया स्ट्रेटजी पर
प्रभाव ज़रूर पड़ेगा.
एक शख़्स ने मीडिया
कंपनियों पर इसे लेकर मुक़दमा किया था जिसके बाद अदालत का यह फ़ैसला आया है.
पूर्व क़ैदी रह
चुके इस शख़्स ने मीडिया कंपनियों पर इसलिए मुक़दमा किया था क्योंकि इन कंपनियों
ने अपने आलेखों में इस शख़्स के साथ दुर्व्यवहार का ज़िक्र किया था, उस आलेख के नीचे
कई सोशल मीडिया कमेंट्स आए थे. जिनमें से कुछ काफी भद्दे थे. जिसके बाद उन्होंने मीडिया कंपनियों पर मुक़दमा कर दिया
था.
न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया
और नाइन एंटरटेनमेंट को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
जानकारों का कहना
है कि इस फ़ैसले का असर सिर्फ़ न्यूज़ पब्लिशर पर नहीं पड़ेगा बल्कि बड़ी संख्या में
ऑनलाइन फॉलोअर्स पर भी इसका असर होगा.
यह अपने तरह का दुनिया
का पहला फ़ैसला है जिससे वैश्विक स्तर पर मानहानि के मामलों पर भी असर पड़ सकता
है.
2016 में,
17 साल के डायलन वोलर के साथ यूथ-डिटेंशन में हुई क्रूरता
को टीवी पर प्रकाशित कर दिया गया था.
उनके साथ हुए
क्रूर व्यवहार की तस्वीरें सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर लोगों ने नाराज़गी
जताई थी.
इन तस्वीरों ने उत्तरी
क्षेत्र के यूथ डिटेंशन में कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की सार्वजनिक जांच को सामने ला दिया था.
इसे मीडिया ने
जमकर कवरेज दी. जिसमें पब्लिशर की ओर से फ़ेसबुक पर लेख भी शेयर किये गए थे.
कई यूज़र्स ने मिस्टर
वोलर के बारे में उन फ़ेसबुक पोस्ट पर टिप्पणियां कीं थीं जिन्हें 2017 की शुरुआत में रिहा कर
दिया गया था.
उस साल के बाद मिस्टर
वोलर ने सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड और द ऑस्ट्रेलियन और स्काई न्यूज़ ऑस्ट्रेलिया पर उन
कमेंट्स को पोस्ट करने की अनुमति देने के लिए मुक़दमा दायर किया था. उनका कहना था
कि इससे उनके सम्मान को चोट पहुंची है.
चार साल की कानूनी
लड़ाई में मीडिया कंपनियों ने तर्क दिया था कि वे अपनी
पोस्ट्स पर आने वाले कमेंट्स के लिए उत्तरदायी नहीं क्योंकि उन्हें अपने पाठकों के
कमेंट्स को पब्लिश करने वाला नहीं माना जा सकता.
लेकिन इन तर्कों और
अन्य को 2019 में न्यू साउथ वेल्स सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.
इसके बाद समाचार समूहों
ने ऑस्ट्रेलिया के उच्च न्यायालय में अपील की थी, जिसने बुधवार को पिछले फ़ैसले को बरकरार रखते हुए ही अपना
फ़ैसला दिया.