टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा

टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के खिलाड़ियों की घोषणा हो गई है.

लाइव कवरेज

भूमिका राय, कमलेश मठेनी and अपूर्व कृष्ण

  1. टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के खिलाड़ियों की घोषणा

    टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के खिलाड़ियों की घोषणा हो गई है.

    विराट कोहली की कप्तानी में रोहित शर्मा, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, ईशान किशन, हार्दिक पांड्या, रविंद्र जडेजा, राहुल चाहर, आर अश्विन, अक्षर पटेल, वरूण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और मो. शामी टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की ओर से खेलेंगे.

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    श्रेयर अय्यर, शरदुल ठाकुर और दीपक चाहर को स्टैंडबाय में रखा गया है.

    बीसीसीआई सचिव जय शाह के हवाले से ट्वीट किया गया है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी टी20 विश्व कप के लिए टीम का मार्गदर्शन करेंगे.

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  2. अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना को लेकर पाकिस्तान ने क्या कहा

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता की स्थापना के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयासों के लिए कुछ अहम बिंदु गिनाते हैं.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट करके इनका उल्लेख किया गया है.

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    इस ट्वीट के मुताबिक़, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अफ़ग़ानों के मुद्दे पर अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी मुल्कों से बात की. शाह महमूद कुरैशी ने अपने संबोधन में कहा-

    - हम पूरी तरह अफ़ग़ान लोगों के साथ हैं और उन्हें हमारा पूरा समर्थन है.

    - अफ़ग़ानिस्तान की एकजुटता, तरक्की और समृद्धि के लिए हमारी प्रतिबद्धता है.

    - हम पूरी कोशिशि करेंगे कि अफ़गान लोगों के मसलों का उनके अनुरूप ही समाधान निकलें.

    - हमें यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि अफ़गान की धरती का किसी भी दूसरे मुल्क़ के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

    अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का कब्ज़ा हो जाने के बाद से ही पाकिस्तान की भूमिका वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हो गई है.

    तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में जिस अंतरिम सरकार की घोषणा की है, उसे लेकर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की छाप प्रमुखता से दिख रही है.

    एक तरफ़ जहाँ कुछ पश्चिमी ताक़तों को ये लगता है कि वो नई तालिबान हुकूमत को प्रभावित कर सकेंगी तो दूसरी तरफ़ पाकिस्तान से मध्यस्थता की भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है.

    पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते बहुत ख़ास रहे हैं. दोनों मुल्कों की 1600 मील लंबी सरहद है.

    उनके बीच कारोबारी साझेदारी है. सांस्कृतिक, नस्लीय और धार्मिक संपर्क भी हैं.

  3. यूज़र्स ने भद्दी टिप्पणी की तो उसकी ज़िम्मेदार मीडिया, ऑस्ट्रेलियाई अदालत का फ़ैसला

    सोशल मीडिया

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    ऑस्ट्रेलिया की शीर्ष अदालत ने अपने एक आदेश में कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई न्यूज़ आउटलेट्स के सोशल मीडिया पोस्ट्स पर अगर भद्दे कमेंट्स आते हैं तो इसके लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

    ऑस्ट्रेलिया में न्यूज़ इंडस्ट्री से जुड़े संस्थान या फिर ऐसे ही दूसरे संस्थानों के लिए यह निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. जिसका उनकी सोशल मीडिया स्ट्रेटजी पर प्रभाव ज़रूर पड़ेगा.

    एक शख़्स ने मीडिया कंपनियों पर इसे लेकर मुक़दमा किया था जिसके बाद अदालत का यह फ़ैसला आया है.

    पूर्व क़ैदी रह चुके इस शख़्स ने मीडिया कंपनियों पर इसलिए मुक़दमा किया था क्योंकि इन कंपनियों ने अपने आलेखों में इस शख़्स के साथ दुर्व्यवहार का ज़िक्र किया था, उस आलेख के नीचे कई सोशल मीडिया कमेंट्स आए थे. जिनमें से कुछ काफी भद्दे थे. जिसके बाद उन्होंने मीडिया कंपनियों पर मुक़दमा कर दिया था.

    न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया और नाइन एंटरटेनमेंट को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

    जानकारों का कहना है कि इस फ़ैसले का असर सिर्फ़ न्यूज़ पब्लिशर पर नहीं पड़ेगा बल्कि बड़ी संख्या में ऑनलाइन फॉलोअर्स पर भी इसका असर होगा.

    यह अपने तरह का दुनिया का पहला फ़ैसला है जिससे वैश्विक स्तर पर मानहानि के मामलों पर भी असर पड़ सकता है.

    किस बारे में था मामला?

    2016 में, 17 साल के डायलन वोलर के साथ यूथ-डिटेंशन में हुई क्रूरता को टीवी पर प्रकाशित कर दिया गया था.

    उनके साथ हुए क्रूर व्यवहार की तस्वीरें सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर लोगों ने नाराज़गी जताई थी.

    इन तस्वीरों ने उत्तरी क्षेत्र के यूथ डिटेंशन में कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की सार्वजनिक जांच को सामने ला दिया था.

    इसे मीडिया ने जमकर कवरेज दी. जिसमें पब्लिशर की ओर से फ़ेसबुक पर लेख भी शेयर किये गए थे.

    कई यूज़र्स ने मिस्टर वोलर के बारे में उन फ़ेसबुक पोस्ट पर टिप्पणियां कीं थीं जिन्हें 2017 की शुरुआत में रिहा कर दिया गया था.

    उस साल के बाद मिस्टर वोलर ने सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड और द ऑस्ट्रेलियन और स्काई न्यूज़ ऑस्ट्रेलिया पर उन कमेंट्स को पोस्ट करने की अनुमति देने के लिए मुक़दमा दायर किया था. उनका कहना था कि इससे उनके सम्मान को चोट पहुंची है.

    अदालत में क्या हुआ?

    चार साल की कानूनी लड़ाई में मीडिया कंपनियों ने तर्क दिया था कि वे अपनी पोस्ट्स पर आने वाले कमेंट्स के लिए उत्तरदायी नहीं क्योंकि उन्हें अपने पाठकों के कमेंट्स को पब्लिश करने वाला नहीं माना जा सकता.

    लेकिन इन तर्कों और अन्य को 2019 में न्यू साउथ वेल्स सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

    इसके बाद समाचार समूहों ने ऑस्ट्रेलिया के उच्च न्यायालय में अपील की थी, जिसने बुधवार को पिछले फ़ैसले को बरकरार रखते हुए ही अपना फ़ैसला दिया.

  4. रूस के आपात मंत्री की अभ्यास के दौरान कैमरामैन को बचाने में मौत

    रूस

    इमेज स्रोत, RUSSIAN EMERGENCIES MINISTRY

    रूस के आपात मंत्री येवगेनी ज़िनिख़ेव की एक नागरिक सुरक्षा अभ्यास के दौरान एक दुर्घटना में मौत हो गई है.

    मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, 55 वर्षीय ज़िनिखेव नोरिल्स्क में एक व्यक्ति की जान बचाने की कोशिश कर रहे थे और उसी दौरान उनकी मौत हो गई.

    रूसी ब्रॉडकास्टर आरटी की प्रमुख मार्गरीटा सिमोनयन के अनुसार,"वह और उनका साक्षात्कार लेने वाला कैमरामैन एक चट्टान के किनारे पर थे. तभी कैमरामैन फिसल गया और पानी में गिर गया."

    "ज़िनिखेव उसके पीछे कूदे और इसी दौरान एक नुकीली चट्टान से वो टकरा गए और उनकी मौत हो गई."

    कैमरामैन की पहचान 63 वर्षीय फिल्म निर्देशक अलेक्ज़ेंडर मेलनिक के रूप में की गई है. बाद में उनकी भी मौत की पुष्टि की गई है.

    ज़िनिचेव 2018 से आपात स्थिति मंत्री थे और कथित तौर पर वर्षों तक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सुरक्षा ब्यौरे के प्रमुख सदस्य भी थे.

    अपने करियर में एक लंबे समय तक वह राज्य सुरक्षा के लिए काम करते रहे.

    क्रेमलिन के एक बयान में कहा गया है कि उन्हें याद करते हुए पुतिन नेकई पुरानी यादों का ज़िक्र किया. वहीं प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने उनकी मौत एक बड़ी क्षति बताया है.

    मेलनिक निर्देशक और पटकथा लेखक थे और उन्हें उनकी 2015 की फ़िल्म टेरिटरी के लिए जाना जाता है.

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, असमः ब्रह्मपुत्र में यात्रियों से भरी दो नावों में टक्कर, कई लापता

    जोरहाट क निमाती घाट

    इमेज स्रोत, DILIP KUMAR SHARMA/BBC

    इमेज कैप्शन, जोरहाट क निमाती घाट (फ़ाइल तस्वीर)

    दिलीप कुमार शर्मा

    गुवाहाटी से बीबीसी हिन्दी के लिए

    असम के जोरहाट स्थित ब्रह्मपुत्र नदी में दो यात्री नावों की आपस में हुई टक्कर के बाद नावों में सवार यात्री पानी में गिर गए.

    मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने जोरहाट के निमाती घाट के पास हुई इस नाव दुर्घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए जोरहाट और माजुली जिला प्रशासन को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के सहयोग से तत्काल बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए है.

    इसके साथ ही घटना का जायज़ा लेने के लिए मंत्री बिमल बोरा को घटनास्थल के लिए रवाना किया है.

    मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट करते हुए कहा है कि वे खुद बृहस्पतिवार को इस घटना का जायजा लेने घटनास्थल जाएंगे.

    ऐसी जानकारी मिल रही है कि जोरहाट के निमाती घाट के पास जिन दोनों नावों में टक्कर हुई है उनमें 100 के करीब यात्री थे.

    असम में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जगह ब्रह्मपुत्र नदी अपने ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है.

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  6. करनाल में किसानों की सरकार से वार्ता दूसरे दिन भी नाक़ाम, धरना जारी

    करनाल, किसान

    इमेज स्रोत, KAMAL SAINI/BBC

    हरियाणा के करनाल ज़िले में धरना दे रहे किसानों और सरकार की वार्ता दूसरे दिन भी नाक़ाम हो गई है जिसके बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर धरना जारी रखने की घोषणा की है.

    करनाल से बीबीसी संवाददाता कमल सैनी के मुताबिक 11 सदस्यीय किसान समिति और प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को तीन घंटे की बैठक की मगर उसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका.

    किसान नेता राकेश टिकैत ने इस बारे में कहा," हमारी आज प्रशासन के साथ 3 घंटे मीटिंग हुई. सरकार एसडीेेएम (आयुष सिन्हा) पर कोई भी कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए हमने तय किया है कि हमारा धरना प्रदर्शन जारी रहेगा. हमारा धरना स्थल यही रहेगा हम चाहते हैं कि अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो."

    किसान नेताओं ने कहा कि आम जनता अपने दैनिक कार्यों के लिए सचिवालय आ सकती है और धरना स्थल को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा.

    किसान 28 अगस्त को करनाल में एक प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के सिलसिले में कार्रवाई और मुआवज़े की माँग कर रहे हैं.

    किसानों ने इसके बाद एलान किया था कि वो 7 सितंबर को घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवज़ा देने और प्रशासनिक अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग को लेकर लघु सचिवालय का घेराव करेंगे.

    संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों के खिलाफ लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारी के खिलाफ़ मामला दर्ज किया जाए.

    किसानों ने यह भी कहा कि अगर मामला दर्ज नहीं है तो कम से कम इसे निलंबित तो किया जाना चाहिए.

    हालांकि, 11 सदस्यीय किसान समिति ने इस मुद्दे पर मंगलवार को भी प्रशासन के साथ दो बार चर्चा की लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ.

    इसके बाद किसान लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.

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  7. फ़ारुक़ अब्दुल्लाह तालिबान पर बोले- उम्मीद है वो अच्छी सरकार चलाएँगे

    फ़ारुक़ अब्दुल्ला

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक़ अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वे मानवाधिकारों का सम्मान करेंगे.

    अब्दुल्ला ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान एक अलग मुल्क़ है. अब वहाँ जो आए हैं उन्हें उस देश को संभालना है.मुझे उम्मीद है कि वे सभी के साथ इंसाफ़ करेंगे और एक अच्छी हुकूमत चलाएँगे जिसमें वो मानवाधिकारों का ध्यान रखेंगे और इस्लामी उसूल पर चलाएँगे."

    उन्होंने ये उम्मीद जताई कि वो सभी देशोंं के साथ दोस्ताना संबंध रखेंगे.

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    जम्मू और कश्मीर में चुनाव और विशेष राज्य का दर्जा बहाल करने की बात पर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष फ़ारुक़ अब्दुल्ला ने कहा है कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को दोबारा विशेष राज्य का दर्जा बहाल करवाने को लेकर प्रतिबद्ध है लेकिन जब भी इस केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होंगे तो उनकी पार्टी चुनाव में खड़ी होगी.

    जम्मू और कश्मीर के नसीम बाग़ में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक और अपने पिता शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला की 39वीं पुण्यतिथि के मौक़े पर फ़ारुक अब्दुल्लाह ने पत्रकारों से यह बात कही.

    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा हासिल था.

    फारुक़ अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को बहाल करने के लिए संघर्ष को प्रतिबद्ध है.

    उन्होंने कहा, "हम नहीं जानते कि चुनाव कब होंगे, लेकिन हम इसे लेकर एकदम स्पष्ट हैं कि जब भी जम्मू और कश्मीर में चुनाव होंगे, हम चुनाव लड़ेंगे."

  8. अमरिंदर सिंह बनेंगे रसोइया, ओलंपिक विजेताओं को खिलाएँगे अपने हाथ का खाना

    अमरिंदर सिंह

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    पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अपना वादा पूरा करते हुए आज रसोइया बनने वाले हैं.

    उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाले राज्य के खिलाड़ियों और नीरज चोपड़ा के लिए रात के खाने का आयोजन किया है जिसके लिए वो खुद खाना बनाने वाले हैं.

    ये आयोजन मोहाली के सिसवाँ स्थित अमरिंदर सिंह के फार्महाउस में होगा.

    मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने एक ट्वीट में बताया, “पटियाला के व्यंजनों से लेकर पुलाव, लैंब, चिकन, आलू और जर्दा चावल तक, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कल के डिनर में पंजाब के ओलंपिक पदक विजेताओं (और नीरज चोपड़ा) से अपने वादे को पूरा करने के लिए इनमें से हर व्यंजन खुद तैयार करेंगे.”

    इस आयोजन में नीरज चोपड़ा भी शामिल होंगे. वो हरियाणा के खांडरा गांव से हैं जो टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक लाने वाले एकमात्र खिलाड़ी बने हैं. उन्होंने भाला फेंक प्रतियोगिता में ये पदक हासिल किया.

    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ओलंपिक में पदक विजेताओं के सम्मान समारोह के दौरान उनके लिए खुद खाना बनाने का वादा किया था.

  9. मोदी सरकार ने किसानों के विरोध के बीच रबी फ़सलों की एमएसपी बढ़ाई

    किसान

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    केंद्र सरकार ने कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच गेहूँ और सरसों जैसी रबी फ़सलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी बढ़ा दी है.

    गेहूँ का एमएसपी 40 रुपये बढ़ाकर 2,015 प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

    सरसों का एमएसपी 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

    ये वृद्धि वर्ष 2021-22 के फ़सल वर्ष और 2022-23 के बाज़ार वर्ष के लिए लागू होगी.

    एमएसपी बढ़ाने का फ़ैसला आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी की बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की.

    न्यूनतम समर्थन मूल्य वो दर होती है जिस पर सरकार किसानों से अनाज ख़रीदती है.

    सरकार अभी ख़रीफ़ और रबी के मौसमों में 23 फ़सलों के लिए एमएसपी तय करती है.

    सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कैबिनेट कमिटी ने 6 रबी फ़सलों के लिए एमएसपी बढ़ाने को मंज़ूरी दी है.

    रबी फ़सलें अक्तूबर में खरीफ़ फ़सलों की कटाई के ठीक बाद लगाई जाती हैं.

    गेहूँ और सरसों के अलावा जौ, चना, मसूर दाल, रेपसीड के एमएसपी में भी वृद्धि की गई है.

    सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार गेहूँ के उत्पादन की लागत 1,008 रुपये प्रति क्विंटल होती है.

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  10. ब्रेकिंग न्यूज़, पाकिस्तान के न्यौते पर अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसियों की बैठक, चीन,ईरान भी मौजूद

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

    अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी देशों के विदेश मंत्री आज एक बैठक कर रहे हैं जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी कर रहे हैं.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस ऑनलाइन बैठक में चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे.

    अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के लिए विदेश मंत्रियों की ये बैठक पाकिस्तान के निमंत्रण पर बुलाई गई है. इसकीअध्यक्षता पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी कर रहे हैं.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, "इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान की उपजी स्थिति में क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए साझा चुनौतियों और नए अवसरों की पहचान पर चर्चा की जाएगी."

    इससे पहले इन देशों के विशेष प्रतिनिधियों और राजदूतों ने 5 सितंबर को चर्चा की थी और समझा जाता है कि विदेश मंत्रियों की वार्ता में उसी पर आगे विमर्श होगा.

    ये बैठक अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के अंतरिम सरकार के एलान के एक दिन बाद हो रही है और ये भी समझा जा रहा है कि इसमें नई सरकार को मान्यता देने पर भी विचार हो सकता है.

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  11. निक्की हेली का बाइडन पर हमला जारी, तालिबान को लेकर शुरू की ऑनलाइन याचिका

    निक्की हेली

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    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने बाइडन सरकार पर अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देने की अपील करते हुए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है.

    उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, "मुझे नहीं लगता कि ये कहना ज़रूरी है, मगर अभी यहाँ जो सरकार है उसे देखते हुए ऐसा कहना ज़रूरी हैः अमेरिका को तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान की जायज़ सरकार नहीं मानना चाहिए."

    उन्होंने इस याचिका में लिखा है- "तालिबान की करतूतों का अंत नहीं. अमेरिका को तालिबान को एक जायज़ शासक या सरकार का प्रमुख नहीं मानना चाहिए. तालिबान को ना तो अमेरिका से पहचान मिलनी चाहिए ना मदद."

    निक्की हेली ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान के नए गृह मंत्री एफ़बीआई की मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल हैं.

    उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा है, "जो बाइडन की वजह से आज हमें एक जिहादी गुट से उन लोगों को बचाने के लिए बात करनी पड़ रही है जिन्हें वो छोड़ आए."

    पूर्व अमेरिकी राजदूत अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर लगातार राष्ट्रपति जो बाइडन की आलोचना करती रही हैं.

    उन्होंने तालिबान के काबुल पर कब्ज़े के बाद बाइडन पर हमला बोलते हुए कहा था कि उन्होंने मात्र कुछ घंटों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 20 सालों में हुई प्रगति, संबंध और उस सबको नष्ट कर दिया जो अमेरिका ने वहाँ किया.

    उन्होंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान से सैन्य टुकड़ियों को जल्दबाजी में वापस बुलाकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी सहयोगियों का विश्वास एवं भरोसा खो दिया है.

    उन्होंने पिछले सप्ताह भी चेतावनी देते हुए कहा था कि चीन अफ़ग़ानिस्तान के बगराम एयर फोर्स बेस पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर सकता है.

    उन्होंने साथ ही कहा था कि अमेरिका को इस समय अपने सहयोगियों को आश्वस्त करने की ज़रूरत है कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है.

    इन सहयोगियों में भारत का नाम शामिल करते हुए हेली ने कहा कि "अमेरिका को अपने क़रीबी मित्रों जैसे भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया को आश्वस्त करने एवं ये अहसास दिलाने की आवश्यकता है कि हम उनके साथ हैं और हमें भी उनकी ज़रूरत है."

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  12. तेजस्वी यादव से मिले चिराग पासवान, दिया पिता की बरसी का निमंत्रण

    तेजस्वी यादव और चिराग पासवान

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    लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव से बुधवार को मुलाक़ात की.

    पटना में इस मुलाक़ात में चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास पासवान की बरसी के लिए तेजस्वी यादव को निमंत्रण दिया है.

    रामविलास पासवान का निधन आठ अक्टूबर, 2020 को हुई थी और अब 12 सितंबर को उनकी बरसी की तिथि के दिन पटना में एक आयोजन होना है.

    इस मुलाक़ात को लेकर चिराग पासवान ने कहा, “मेरे पिताजी के स्वर्गवास को करीब एक साल होने वाला है इसलिए हमारे यहां 12 तारीख़ को बरखी कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. हमारा तेजस्वी भाई के परिवार से एक लंबा रिश्ता रहा है, लालू जी से मेरे पिता और मेरा अच्छा संबंध रहा है इसलिए मैं इन्हें आमंत्रित करने आया हूं.”

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    इससे पहले चिराग पासवान ने बिहार के राज्यपाल फागू चौहान से मुलाक़ात की थी और उन्हें बरसी के लिए बुलाया था.

    इस सिलसिले में उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाक़ात की थी. इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे.

    उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी बरसी के लिए आमंत्रित किया है.

    इस साल जून में लोजपा दो टुकड़ों में बंट गई थी. चिराग को छोड़कर पार्टी के सारे सांसद उनके चाचा पशुपति पारस के साथ चले गए थे और उन्हें लोजपा प्रमुख के तौर पर चुन लिया गया था.

    मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में भी पशुपति पारस को केंद्रीय मंत्री बनाया गया जिसे लेकर चिराग पासवान ने नाराज़गी जाहिर की थी.

    वहीं, तेजस्वी यादव चिराग पासवान के पक्ष में बयान दे चुके हैं और दोनों की नज़दीकियां बढ़ रही हैं.

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  13. करनालः लघु सचिवालय के बाहर किसानों का धरना जारी, इंटरनेट पर आज भी पाबंदी

    करनाल में किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    हरियाणा के करनाल में लघु सचिवालय के बाहर किसानों का धरना जारी है. किसान 28 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के सिलसिले में कार्रवाई और मुआवज़े की माँग कर रहे हैं.

    किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है, ''आगे क्या करना है ये बैठकर तय करेंगे. रात में प्रशासन से बातचीत नहीं हुई थी. प्रशासन अपना काम करे, वे दूसरे गेट का इस्तेमाल कर लें, कई गेट हैं.''

    इस बीच क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने करनाल ज़िले में इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं पर लगी रोक को बुधवार तक बढ़ा दिया है. ये रोक आठ सितंबर रात 11:59 बजे तक जारी रहेगी. बैंकिंग और मोबाइल रीचार्ज के लिए एसएमएस को पाबंदी से बाहर रखा गया है.

    28 अगस्त को करनाल में एक टोल प्लाज़ा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज में कई किसान घायल हो गए थे.

    किसानों ने इसके बाद एलान किया था कि वो 7 सितंबर को घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवज़ा देने और प्रशासनिक अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग को लेकर लघु सचिवालय का घेराव करेंगे.

    प्रशासन ने हालात को क़ाबू में रखने के लिए वहाँ धारा 144 लगा दी थी. मंगलवार को प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई और कई किसान नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया मगर बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

    किसान नेताओं की मंगलवार को करनाल प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता भी हुई मगर उसके नाकाम रहने के बाद किसान लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.

    हरियाणा की खाप पंचायतों ने भी किसानों से अपनी एकजुटता ज़ाहिर की है.

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  14. तालिबान ने ज़ाहिर कर दिया कि मिली-जुली नहीं, बस उनकी होगी सरकार- विश्लेषण

    तालिबान

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    लीज़ ड्यूसेट

    मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता, बीबीसी

    तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी अंतरिम सरकार के गठन का एलान करते हुए अफ़ग़ानिस्तान को 'इस्लामिक अमीरात' घोषित कर दिया है.

    मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद प्रधानमंत्री होंगे तो मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर उप प्रधानमंत्री. वहीं मुल्ला अब्दुल सलाम हनफ़ी को भी उप प्रधानमंत्री बनाया गया है.

    अखुंद की अगुवाई में गठित होने वाली सरकार में मुल्ला याकूब रक्षा मंत्री होंगे और सिराजुद्दीन हक्कानी गृह मंत्री होंगे.

    15 अगस्त को तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद से सरकार बनाने की कवायद जारी थी.

    इस बीच नेतृत्व को लेकर सहमति ना बनने की बात भी सामने आई और सरकार के प्रमुख के तौर पर कुछ नेताओं के नामों पर कयास भी लगाए गए.

    फिलहाल अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार का गठन हो चुका है पर अब भी ये एक अंतरिम सरकार है जिसमें वो सभी मंत्री पद रखे गए हैं जो दुनिया की दूसरी सरकारों में मिलते हैं.

    तालिबान

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    वो लड़ाई जो लंबे समय तक अंधेरों में चलती रही, जिसके नेताओं का नाम दुनिया के आतंकवादियों की सूची में शामिल है, वो अब दुनिया के दूसरे देशों की तरह ही सरकार में मंत्री पद बना रहा है.

    सरकार बनाने को लेकर तालिबान के सैन्य और राजनीतिक नेताओं के बीच टकराव की स्थिति रही है. ऐसे में कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को टकराव शांत करने वाले समझौता उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है.

    तालिबान के बंदूक से होते हुए प्रशासन संभालने तक के सफर में अंतरिम सरकार बनाने से उसे मदद मिल सकती है.

    इससे तालिबान की ये सोच भी जाहिर होती है कि तालिबान की जीत के बाद केवल वो ही शासन करेगा.

    सूत्रों का कहना है कि तालिबान ने ‘समावेशी’ सरकार का विरोध किया था. वो पूर्व राजनीतिक हस्तियों और अधिकारियों को सरकार में शामिल नहीं करना चाहते थे. खासकर के वो नेता जो शीर्ष पर रहे हैं और जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

    उनका जवाब था, “हम दूसरों को अपनी कैबिनेट क्यों बनाने दें जबकि दूसरे देश अपनी कैबिनेट खुद चुनते हैं.”

    जहां तक महिलाओं की बात है, तो ऐसी कोई संभावना नहीं थी कि किसी महिला को मंत्री पद दिया जाएगा. वहीं, ऐसा लगता है कि महिला मामलों के मंत्रालय को अभी के लिए ख़त्म कर दिया गया है.

  15. तालिबान की ये घोषणा और रूस-अमेरिका हुए भारत को लेकर सक्रिय

  16. चीन, पाकिस्तान, रूस, ईरान सोच रहे हैं कि तालिबान के साथ क्या किया जाए, बोले बाइडन

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि चीन, पाकिस्तान, रूस और ईरान अभी ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि तालिबान के साथ क्या किया जाए.

    मंगलवार को तालिबान के अपनी अंतरिम सरकार का ब्यौरा घोषित करने के कुछ ही घंटे बाद बाइडन ने संवाददाताओं से कहा कि चीन को तालिबान को लेकर एक 'असल समस्या' है.

    बाइडन ने पत्रकारों से कहा, "चीन को तालिबान के साथ असल समस्या है. मुझे पूरा भरोसा है, वो इस बारे में कुछ करने की कोशिश कर रहे होंगे. ऐसे ही पाकिस्तान भी कर रहा होगा, रूस भी, ईरान भी."

    व्हाइट हाउस में एक प्रश्न के जवाब में कहा, "वे सब ये समझने की कोशिश कर रहे होंगे कि अब क्या किया जाए. तो इंतज़ार करें और देखें क्या होता है. ये देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है."

    तालिबान ने मंगलवार को मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद की अगुआई में एक अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा की है जिसमें गुट के कट्टर नेताओं को जगह दी गई है.

    सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर तालिबान के बड़े नेताओं को बिठाया गया है जिनमें ख़तरनाक हक़्क़ानी नेटवर्क के मुखिया सिराजुद्दीन हक़्क़ानी के नाम की काफ़ी चर्चा हो रही है जिन्हें गृह मंत्रालय दिया गया है.

    हक़्क़ानी का नाम संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक चरमपंथियों की सूची में शामिल है और अमेरिकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई को भी उनकी तलाश है.

  17. इंडोनेशिया की एक जेल में लगी आग, 41 की मौत

    इंडोनेशिया

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    इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के बाहरी इलाक़े में एक जेल में आग लगने से कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं.

    टैंगरेंग जेल में ये हादसा बुधवार सुबह उस समय हुआ जब अधिकतर क़ैदी सो रहे थे.

    जेल के ब्लॉक सी में आग लगी थी जिसमें 122 क़ैद रखे गए थे जबकि इसकी क्षमता 40 क़ैदियों की है.

    ये क़ैदी ड्रग से जुड़े मामलों में बंद थे. इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हो गये हैं जिन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

    जेल की प्रवक्ता ने बताया है कि हादसे की वजह की जांच की जा रही है.

  18. जेल में बंद मसर्रत आलम को बनाया गया हुर्रियत प्रमुख

    मसरत आलम भट

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    जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के निधन के बाद जेल में बंद उनके क़रीबी मसर्रत आलम भट को ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के गिलानी गुट का अध्यक्ष बनाया गया है.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने मंगलवार को मीडिया में जारी एक बयान में कहा कि श्रीनगर में हुई पार्टी की एक बैठक में ये फ़ैसला लिया गया है.

    इस बैठक में मसर्रत आलम को अध्यक्ष, शब्बीर अहमद शाह और ग़ुलाम अहमद गुलज़ार दोनों को उपाध्यक्ष चुना गया है.

    कश्मीर में साल 2010 में विरोध-प्रदर्शन के दौरान ''पोस्टर ब्वॉय'' के रूप में पहचाने जाने वाले मसर्रत आलम आतंकी संगठनों को वित्त पोषण करने के आरोप में जेल में बंद हैं. शब्बीर शाह भी इस समय जेल में हैं.

    हुर्रियत नेता मसर्रत आलम जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग के अध्यक्ष हैं. एक आंदोलन में उनकी कथित भूमिका को लेकर अक्टूबर 2010 में उन्हें गिरफ़्तार किया गया था. इसके बाद उन पर और भी मामले दर्ज किए गए हैं.

    उन्हें मार्च 2015 में रिहा किया गया था, लेकिन इसका विरोध होने के कारण उन्हें अप्रैल में फिर से गिरफ़्तार कर लिया गया.

    हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के गिलानी गुट के अध्यक्ष का पद 29 जून, 2020 से खाली है जब सैयद अली शाह गिलानी ने ख़ुद को हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस से अलग कर लिया था. उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद हुर्रियत के नेताओं पर कुछ ना करने का आरोप लगाया था.

  19. जस्टिन ट्रूडो पर चुनाव प्रचार के दौरान पत्थरों से हमला

    कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो

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    कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर प्रचार अभियान के दौरान प्रदर्शनकारियों ने छोटे-छोटे पत्थर फेंके. ये पत्थर जस्टिन ट्रूडो के नज़दीक से होकर निकले.

    ये घटना तब हुई जब ट्रूडो सोमवार को ओंटारियो के लंदन शहर में एक ब्रूअरी के दौरे से लौटते हुए बस में चढ़ रहे थे. तभी प्रदर्शनकारियों ने उन पर छोटे पत्थर फेंके. हालांकि उन्हें कोई चोट नहीं आई है.

    लेकिन, उन्होंने पत्रकारों को बताया कि शायद उनके कंधे पर पत्थर लगा है.

    कनाडा के सीटीवी नेशनल न्यूज़ के मुताबिक मीडिया बस में सवार दो लोगों को भी पत्थर लगे हैं लेकिन उन्हें चोट नहीं आई है.

    अगस्त में जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा में मध्यावधि चुनाव की घोषणा की थी. लेकिन कोविड वैक्सीनेशन को अनिवार्य बनाने और अन्य प्रतिबंधों को लेकर उनका विरोध हो रहा है. उनके चुनाव प्रचार के दौरान भी विरोध प्रदर्शन किए गए हैं.

    एक हफ़्ता पहले उन्हें अपनी एक चुनावी रैली रद्द करनी पड़ी थी क्योंकि गुस्साए विरोध प्रदर्शनकारी उसमें घुस आए थे.

    जस्टिन ट्रूडो ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारियों का व्यवहार अस्वीकार्य है. ये सिर्फ़ चुनावी रैलियों में ही नहीं हो रहा है बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों, रेस्तरां मालिकों और प्रांतीय राजनेताओं को भी परेशान किया जा रहा है.

    विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी ने भी इस तरह की हिंसा की निंदा की है.

  20. तालिबान को संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता की ज़रूरत: गुटेरेस

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस

    इमेज स्रोत, bbc

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि तालिबान से बातचीत के लिए मानवीय सहायता एक "प्रवेश द्वार" हो सकती है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका के जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अपने अभियान जारी रखे हैं.

    न्यूयॉर्क में बीबीसी की लॉरा ट्रिवैलियन से बात करते हुए उन्होंने तालिबान से संयुक्त राष्ट्र के काम करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की बात कही. हालांकि, उन्होंने ये भी माना कि स्थिति ‘बहुत अप्रत्याशित’ बनी हुई है.

    एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, ''सालों के युद्ध के बाद पड़ोसी देशों में लाखों लोग बेघर हो गए हैं. उन लोगों की तकलीफ़ों की कल्पना भी नहीं की जा सकती.''

    ''संयुक्त राष्ट्र के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी वहां रुकना और काम करना है, लेकिन तालिबान को ऐसी स्थितियां बनानी होंगी जिससे हम वहां काम कर सकें, जैसे कि हमें हर व्यक्ति तक पहुंचने की आज़ादी हो, लड़िकियों को स्कूल जाने की, महिलाओं को काम करने की अनुमति हो ताकि हम सामान्य तौर पर अपने अभियान चला सकें.''

    उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि मानवीय सहायता एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार हो सकता है क्योंकि तालिबान ये बात समझते हैं कि मानवीय सहायता बेहद ज़रूरी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके लिए इच्छुक भी है. इससे तालिबान से बातचीत बढ़ेगी और एक भरोसे का माहौल बनेगा. हालांकि, ये साफ है कि स्थितियां अभी तक अप्रत्याशित बनी हुई हैं.