तालिबान पर महिला पुलिसकर्मी की बर्बर हत्या का आरोप, बात करने से डर रहे हैं लोग

परिवार वालों ने कुछ वीभत्स तस्वीरें भेजी हैं जिसमें दीवारों पर ख़ून दिख रहा है और कोने में एक लाश पड़ी है जिसका चेहरा विकृत है.

लाइव कवरेज

  1. तालिबान को लेकर अमेरिकी जनरल ने क्यों दी यह चेतावनी

    अमेरिकी जनरल मार्क मिली

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    अमेरिकी जनरल मार्क मिली ने अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध की आशंका जताई है. शनिवार को जर्मनी के रैमस्टेन में फॉक्स न्यूज की जेनिफ़र ग्रिफ़िन के साथ एक विशेष टीवी साक्षात्कार के दौरान जनरल मार्क मिली से अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा परिस्थितियों को लेकर और अमेरिका की नीति को लेकर कई तरह के सवाल किए गए.

    जनरल मिली से इस इंटरव्यू के दौरान पूछा गया कि क्या अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका की पूरी तरह वापसी के बाद अमेरिका सुरक्षित है?

    जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह बता पाना अभी जल्दबाजी होगी.

    एक अन्य सवाल के जवाब में मिली ने अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध के लिए परिस्थितियां बनने की आशंका ज़ाहिर की.

    उन्होंने कहा, "जहाँ तक मेरा सैन्य अनुमान है, अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध की परिस्थितियां बन सकती हैं. मुझे नहीं पता कि तालिबान सत्ता को मज़बूत करने और शासन स्थापित करने में कितने सक्षम हैं या नहीं हैं."

    उन्होंने चरमपंथी संगठनों के बढ़ने और पुनर्गठन को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की.

    उन्होंने कहा कि चरमपंथी संगठन अफ़ग़ानिस्तान की अव्यवस्था और अस्थिरता का फ़ायदा उठा सकते हैं.

    उन्होंने कहा की मुझे आशंका है कि अफ़ग़ानिस्तान में जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उससे कम से कम एक व्यापक गृह युद्ध होने की पूरी गुंजाइश है. इसके साथ ही ऐसी परिस्थितियों से भी इनक़ार नहीं किया जा सकता है, जो वास्तव में अल-क़ायदा के पुनर्गठन या फिर आईएसआईएस या दूसरे असंख्य चरमपंथी संगठनों के विकास को बढ़ावा देंगी.

    उन्होंने कहा, "आप कुछ महीनों या सालों के भीतर उस सामान्य क्षेत्र से चरमपंथ के पुनरुत्थान को होते हुए देख सकते हैं."

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, टोक्यो पैरालंपिक: भारत के खाते में जुड़ा एक और गोल्ड

    टोक्यो पैरालंपिक में भारत ने एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. कृष्णा नागर ने पैरालंपिक बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीता है.

    अपने प्रतिद्वंद्वी चू मान काई को उन्होंने 21-17, 16-21, 21-17 से मात देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया.

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    इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर के ज़िलाधिकारी और पैरालंपिक बैडमिंटन प्लेयर सुहास एल यथिराज ने सिल्वर मेडल अपने हक़ में किया है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों मेडल विजेताओं के साथ तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी है.

    कृष्णा नागर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा है कि टोक्यो पैरालंपिक में अपने बैडमिंटन ख़िलाड़ियों के उत्कृष्ठ प्रदर्शन को देखकर बेहद खुशी हो रही है. कृष्णा नागर के बेहतरीन प्रदर्शन से हर देशवासी के चेहरे पर मुस्कान खिल गई है. उन्हें गोल्ड मेडल जीतने की बधाई. भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं.

    पैरैलंपिक

    गौतमबुद्ध नगर के डीएम सुहास को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है – प्रशासनिक सेवा और खेल का अद्भुत संगम. बैडमिंटन में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाई. इस मौक़े पर पीएम मोदी ने उनसे फ़ोन पर बात भी की.

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  3. पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI प्रमुख के काबुल पहुँचने से सरगर्मी

    isi प्रमुख फैज़ा हामिद

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    इमेज कैप्शन, आईएसआई प्रमुख फैज़ हामिद

    पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख काबुल पहुँचे हैं और उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.

    इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हामिद शनिवार को तालिबान नेताओं से मिलने के लिए काबुल पहुँचे.

    कहा जा रहा है कि आईएसआई प्रमुख की यात्रा जिसे, संभवतः गुप्त रखा जाना था पर एक तस्वीर के कारण सार्वजनिक हो गई.

    आईएसआई प्रमुख अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत मंसूर अहमद ख़ान और अन्य अधिकारियों के साथ काबुल के एक होटल में चाय पी रहे थे तभी एक पत्रकार ने उनकी तस्वीर ले ली. जिसके बाद से यह कथित गुप्त मुलाक़ात सार्वजनिक हो गई.

    जनरल फ़ैज़ हामिद तब काबुल पहुँचे हैं, जब वहाँ सरकार बनाने के लिए रस्साकशी चल रही है. अभी तक सरकार में किस धड़े की क्या हैसियत होगी इस पर सहमति नहीं बन पाई है.

    कुछ लोगों का दावा है कि इन बीते तनाव भरे हफ़्तों में जनरल हामिद की यह दूसरी काबुल यात्रा थी.मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले सप्ताह सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स भी तालिबान नेता अब्दुल ग़नी बरादर के साथ मुलाकात के लिए काबुल में थे.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शुक्रवार को एक संवाददाता से कहा था कि तालिबान काबुल में "नई वास्तविकता" थी और पाकिस्तान के पास उनके साथ काम करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था.

    तालिबान के शासन के संबंध में दुनिया भर में कयास और शंकाओं का दौर है लेकिन इन सभी के बीच अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय संगठनों के लिए एक सुरक्षित वातावरण मुहैया करा पाना भी एक बड़ी चुनौती है.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यों को जारी रखने के लिए पाकिस्तान के समर्थन का आश्वासन दिया है.

    इमरान ख़ान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के बीच टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के एक रीडआउट में कहा गया है- "प्रधानमंत्री ने अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के मिशन के सही संचालन के लिए पाकिस्तान के समर्थन की पुष्टि की है."

    साथ ही शुक्रवार को कतर में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के उप प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्टनकज़ई ने कतर में पाकिस्तान के राजदूत सैय्यद अहसान रज़ा शाह से मुलाक़ात की थी.

    कतर कार्यालय में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ट्वीट किया था, "दोनों पक्षों ने मौजूदा अफ़ग़ान स्थिति, मानवीय सहायता, आपसी हित और सम्मान पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों, अफ़ग़ानिस्तान का पुनर्निर्माण और तोरखम और स्पिन बोल्डक में लोगों के आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई."

    तालिबान

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के बाद से ही कई मानवीय सहायता एजेंसियां वहाँ से वापस चली गई हैं, जिसके कारण अफ़ग़ानिस्तान में एक बड़े मानवीय संकट की आशंका बढ़ गई है.

    इसके अलावा जो देश या एजेंसियां अभी तक अफ़ग़ानिस्तान को सहायता किया करती थीं उनमें से कई ने आगामी सहायता पर रोक लगा दी है. इसके अलावा विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के भी भुगतान रोकने के कारण अफ़ग़ानिस्तान में अर्थव्यवस्था बेहद बुरी स्थिति में है. अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है तो अफ़ग़ानिस्तान में भयावह मानवीय संकट आ सकता है.

    हालांकि कुछ देश अफ़ग़ानिस्तान की सहायता की प्रतिबद्धताओं के साथ सामने आए हैं.कई देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय एजेंसियों के माध्यम से बेहतरी के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है. लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि अफ़ग़ानिस्तान में काम करने के लिए इन एजेंसियों को एक सुरक्षित और मददगार वातावरण मिल सके.

    पाकिस्तान इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को अफ़ग़ानिस्तान में शिपमेंट पहुंचाने में मदद कर चुका है. विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ भी इसी तरह की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है.

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    अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय ज़रूरतों को प्राथमिकता देने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदायों के साथ आने की ज़रूरत पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि इससे ना केवल सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि अफ़ग़ानों का पलायन भी थमेगा. जिससे शरणार्थी संकट को भी संभालने में मदद होगी.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के द से ही शरणार्थी संकट की आशंका बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र की रेफ़्यूजी एजेंसी ने पिछले हफ़्ते कहा था कि इस साल के अंत तक पांच लाख अफ़ग़ान अपना देश छोड़ सकते हैं.

    ऐसा माना जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की नई सरकार की स्थापना से पहले आईएसआई प्रमुख का दौरा भी इनमें से कुछ मुद्दों को हल करने के लिए ही हुआ है.

    उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी काबुल गया था.

    मानवीय सहायता के साथ-साथ अफ़ग़ानिस्तान में अब भी फंसे विदेशी नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालकर उनके मूल देश भेजना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान से एक समावेशी सरकार के गठन, देश छोड़ने के इच्छुक अफ़गानों के लिए अनुमतिऔर किसी भी तरमपंथी को पनाह ना देने के लिए मांग की है.

    तालिबान को कौन कौन से देश मान्यता देते हैं ये काफी हद तक इन्हीं मांगों पर निर्भर करेगा. हालांकि तालिबान ने अपने कुछ बयानों में यह ज़रूर कहा है कि वह दूसरों के साथ मिलकर चलने का इरादा रखते हैं.

    इमरान ख़ान

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  4. काबुल में महिलाओं के विरोध-प्रदर्शन पर तालिबान का हमला

    तालिबान

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का कब्ज़ा हो चुका है. इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की भावी स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है. यह चिंता सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान के भीतर महिलाओं के बीच नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जताई जा रही है.

    हालाँकि तालिबान कई बार यह कह चुका है कि उनका वर्तमान शासन उनके पूर्व शासन से बिल्कुल अलग होगा लेकिन हालिया घटनाक्रम संदेह पैदा करते हैं.

    काबुल में महिलाओं के एक प्रदर्शन पर तालिबान ने हमला कर उसे ख़त्म करवा दिया है.

    ये समूह अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के शिक्षा और रोज़गार के अधिकार के लिए प्रदर्शन कर रहा था.

    प्रदर्शन कर रही महिलाओं के इस समूह का कहना है कि तालिबान ने उन पर आंसू गैस छोड़ी और काली मिर्च स्प्रे से हमला किया. तालिबान का यह हमला तब हुआ जब ये समूह राष्ट्रपति भवन तक जाने की कोशिश कर रहा था.

    हालांकि तालिबान का कहना है कि यह प्रदर्शन अनियंत्रित हो गया था.

    टोलो न्यूज के अनुसार, तालिबान का कहना है कि महिलाओं का विरोध नियंत्रण से बाहर हो गया था.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के बाद महिलाओं का इस तरह खुलकर विरोध प्रदर्शन करना बेहद नया है.

    ये महिलाएं काम के अधिकार और सरकार में शामिल होने की मांग कर रही थीं.

    तालिबान पहले ही घोषणा कर चुका है कि आने वाले दिनों में वह अपने प्रशासन की रूपरेखा की घोषणा कर देगा. तालिबान ने कहा है कि महिलाएं उनकी सरकार में शामिल हो सकती हैं लेकिन मंत्री पद पर नहीं.

    साल 1996 और 2001 के बीच तालिबान की सत्ता के दौरान महिलाओं के साथ हुए व्यवहार को लेकर महिलाओं में डर है कि उन्हें एक बार फिर उन्हीं प्रतिबंधों और अत्याचार का सामना करना पड़ सकता है.

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    तालिबान के पहले शासन (1996-2001) के दौरान महिलाओं को ख़ुद को पूरी तरह ढक कर रहने के लिए मजबूर किया गया था और छोटे अपराधों के लिए भी उन्हें कठोर दंड दिए जाते थे.

    पत्रकार अज़ीता नाज़ीमी ने टोलो को बताया, "पहले जब तालिबान यहाँ था तो उन्होंने मुझे स्कूल जाने से रोक दिया."

    वो कहती हैं, "उनके पाँच साल के शासन के बाद मैंने पढ़ाई की और जी तोड़ मेहनत की. मैंने यह अपने बेहतर भविष्य के लिए किया और अब हम यह सब बर्बाद नहीं होने दे सकते."

    एक अन्य प्रदर्शनकारी महिला सोरया ने रॉयटर्स को बताया: "उन्होंने महिलाओं के सिर पर बंदूक के मैगज़ीन से हमला किया. कई महिलाएं खून से लथपथ हो गई थीं."

    इस बीच काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी में संघर्ष जारी है. यहाँ विरोधी लड़ाकों और तालिबान के बीच जंग हो रही है.

    लेकिन दोनों ओर से अपने-अपने पक्ष के दावे किए जा रहे हैं. तालिबान का कहना है कि उन्होंने प्रांत के और दो ज़िलों पर नियंत्रण पा लिया है.

    इसके साथ ही उनके कब्ज़े में सात में से चार ज़िले आ चुके हैं. वहीं अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (एनआरएफ़) के एक प्रवक्ता ने कहा कि लड़ाई जारी है और हज़ारों तालिबान को घेर लिया गया है.

    एनआरएफ के नेता अहमद मसूद ने हेरात में महिलाओं के विरोध की प्रशंसा की.

  5. पंजशीर में तालिबान की जंग जारी, अमेरिकी जनरल ने दी गृहयुद्ध की चेतावनी

    पंजशीर

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    राजधानी काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर घाटी अफ़ग़ानिस्तान के सबसे छोटे प्रांतों में से एक है और फ़िलहाल ये एकमात्र ऐसा प्रांत है जो अब भी तालिबान के कब्ज़े में नहीं आया है.

    तालिबान और स्थानीय विद्रोहियों के बीच पंजशीर पर कब्ज़े के लिए जंग जारी है. शनिवार को भी यह जंग जारी रही.

    दोनों पक्षों की ओर से दावा किया गया है कि पंजशीर उनके कब्ज़े में है लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि पंजशीर में स्थिति क्या है.

    पंजशीर में स्थिति स्पष्ट नहीं

    अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही तालिबान ने पूरे अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले लिया है. लेकिन पंजशीर वो इकलौता प्रांत है, जहाँ उन्हें जूझना पड़ रहा है. हालांकि यह कोई नई बात नहीं है. साल 1996 से लेकर 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान पर राज करने के दौरान भी पंजशीर तालिबान के कब्ज़े में नहीं था.

    हालांकि तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने दावा किया है कि खिंज और उनाबाह ज़िलों पर तालिबान का कब्ज़ा हो गया है. उनका दावा है कि उन्होंने प्रांत के सात ज़िलों में से चार ज़िलों पर कब्ज़ा कर लिया है.

    उन्होंने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा- "मुजाहिदीन (तालिबान लड़ाके) केंद्र (प्रांत के) की ओर बढ़ रहे हैं."

    लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (एनआरएफ़)के स्थानीय नेता अहमद मसूद के साथ खड़े बल का दावा है कि उन्होंने ख्वाक दर्रे में "हजारों चरमपंथियों" को घेर लिया है. उनका दावा है कि तालिबान ने दश्ते रेवाक क्षेत्र में कब्जे में लिए वाहनों और दूसरी चीज़ों को छोड़ दिया है.

    एनआरएफ़ के प्रवक्ता फ़हीम दश्ती ने कहा कि तालिबान के साथ युद्ध जारी है.

    एक फ़ेसबुक पोस्ट में अहमद मसूद ने कहा कि पंजशीर "दृढ़ता से खड़े रहना जारी रखेगा."

    उन्होंने हेरात शहर में महिलाओं के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि महिलाओं का अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि अफ़ग़ानों ने न्याय की मांग नहीं छोड़ी है और वे हर डर के आगे डटे हुए हैं.

    गृहयुद्ध की आशंका

    वहीं ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष अमेरिकी जनरल मार्क मिले ने अफ़ग़ानिस्तान में गंभीर परिस्थतियों को लेकर चेतावनी दी है.

    मार्क मिले ने कहा, "मुझे लगता है कि अफ़ग़ानिस्तान में जिस तरह के हालात हैं, उसके गृहयुद्ध में तब्दील होने की पूरी आशंका है. मुझे नहीं पता कि तालिबान सत्ता को मज़बूत करने और शासन स्थापित करने में सक्षम है या नहीं."

    फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए मिले ने कहा कि अगर तालिबान एक मज़बूत और स्थिर शासन स्थापित करने में नाकामयाब रहता है तो अगले तीन सालों में "अल-क़ायदा का पुनर्गठन या आईएसआईएस या ऐसे ही दूसरे चरमपंथी संगठन विकसित हो जाएंगे.

    पंजशीर में इस समय क्या हो रहा है क्या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि कर पाना संभव नहीं है.

    पंजशीर में कब्ज़े का जश्न

    रॉयटर्स की ख़बर के अनुसार, शुक्रवार को यह दावा किया गया कि तालिबान ने पंजशीर पर कब्ज़ा कर लिया है, इसके बाद तालिबान ने गोलियां दागकर जश्न मनाया गया, जिसमें कम से कम 10 से अधिक लोग मारे गए और चार से अधिक लोग घायल हो गए.

    इस बीच पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद शनिवार को काबुल पहुंचे.

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    हमीद के नेतृत्व में पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भावी तालिबन सरकार से बातचीत करने पहुँचा.

    रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि आईएसआई चीफ़ तालिबान के कमांडरों और नेताओं से मिलेंगे.

    वहीं वॉशिंगटन ने पाकिस्तान और आईएसआई पर काबुल में अमेरिकी समर्थित सरकार के ख़िलाफ़ तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगाया है.हालांकि इस्लामाबाद ने इन आरोपों से इनकार किया है.

    तालिबान

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    सरकार का गठन अगले सप्ताह और सामान्य होते हालात

    तालिबान के एक सूत्र ने कहा कि नई सरकार की घोषणा को अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

    बहुत हद तक यह स्पष्ट हो गया है कि तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर नई सरकार का नेतृत्व करेंगे.

    अफ़ग़ानिस्तान में क़तर के राजदूत ने कहा कि एक तकनीकी टीम काबुल हवाई अड्डे को फिर से खोलने का प्रयास कर रही है. अल-जज़ीरा ने अपने एक संवाददाता के हवाले से कहा है कि घरेलू उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं.

    आख़िरी अमेरिकी सैनिक के अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौटने के साथ ही काबुल एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया था.

    तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा है कि काबुल में मुख्य फ़ॉरेन एक्सचेंज डीलर्स में से एक फिर से खुल गया है.

    अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. कई बैंक बंद हैं और नक़दी की कमी है.

  6. नमस्कार!

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