अफ़ग़ानिस्तानः पंजशीर को अभी भी जीत नहीं पाया है तालिबान, कर रहा अब अपील
तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में उनके विरोधियों के एकमात्र गढ़ पंजशीर घाटी के लड़ाकों से कहा है कि वो हथियार डाल दें.
तालिबान के एक वरिष्ठ नेता आमिर ख़ान मुत्तक़ी ने पंजशीर के लोगों से आग्रह किया है कि वो उनके विरोधियों को लड़ना बंद करने के लिए समझाएँ.
मुत्तकी ने एक ऑडियो संदेश में कहा है, "देश में कहीं लड़ाई नहीं हो रही है और लोग शांत हैं. पंजशीर के लोगों को और सहन करने की ज़रूरत नहीं है."
उन्होंने कहा कि पंजशीर के लोगों के साथ कुछ समय से एक शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत हो रही थी मगर कोई समझौता नहीं हो सका है.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के अपदस्थ रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह मोहम्मदी ने कहा है कि रात को पंजशीर में एक हमले को नाक़ाम कर दिया गया और तालिबान के 34 लोग मारे गए.
पंजशीर पहले भी लड़ता रहा है
पंजशीर का अफ़ग़ानिस्तान में एक सांकेतिक महत्व है क्योंकि पिछले कई दशकों से वहाँ के लोगों ने हमला करने वालों का मुक़ाबला किया है.
बताया जाता है कि वहाँ हज़ारों तालिबान विरोधी लड़ाके अभी भी मोर्चा बाँधे हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के अपदस्थ प्रथम उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी पंजशीर में ही हैं और उन्होंने तालिबान के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद रखी हुई है.
उन्होंने ख़ुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया हुआ है और कहा है कि वो तालिबान के साथ समझौता नहीं करेंगे.
पूर्व जिहादी कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद भी पंजशीर में ही हैं और उनके आस-पास हज़ारों लोग मौजूद हैं.
उन्होंने कहा है कि वो तालिबान से बात करने के लिए तैयार हैं मगर "ज़रूरत हुई तो लड़ेंगे भी".
पंजशीर घाटी काबुल से लगभग 50 किलोमीटर दूर है और वहाँ जाने का मार्ग बहुत सँकरा है.