खट्टर सरकार ने ‘सिर फोड़ दो’ कहने वाले IAS आयूष सिन्हा का ट्रांसफ़र किया
हरियाणा सरकार पिछले कई दिनों से विपक्षी दलों से लेकर किसान नेताओं की ओर से अधिकारी पर कार्रवाई करने का दबाव झेल रही थी
लाइव कवरेज
अनंत प्रकाश, भूमिका राय and अपूर्व कृष्ण
अफ़ग़ानिस्तानः पंजशीर को अभी भी जीत नहीं पाया है तालिबान, कर रहा अब अपील
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तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में उनके विरोधियों के एकमात्र गढ़ पंजशीर घाटी के लड़ाकों से कहा है कि वो हथियार डाल दें.
तालिबान के एक वरिष्ठ नेता आमिर ख़ान मुत्तक़ी ने पंजशीर के लोगों से आग्रह किया है कि वो उनके विरोधियों को लड़ना बंद करने के लिए समझाएँ.
मुत्तकी ने एक ऑडियो संदेश में कहा है, "देश में कहीं लड़ाई नहीं हो रही है और लोग शांत हैं. पंजशीर के लोगों को और सहन करने की ज़रूरत नहीं है."
उन्होंने कहा कि पंजशीर के लोगों के साथ कुछ समय से एक शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत हो रही थी मगर कोई समझौता नहीं हो सका है.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के अपदस्थ रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह मोहम्मदी ने कहा है कि रात को पंजशीर में एक हमले को नाक़ाम कर दिया गया और तालिबान के 34 लोग मारे गए.
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पंजशीर पहले भी लड़ता रहा है
पंजशीर का अफ़ग़ानिस्तान में एक सांकेतिक महत्व है क्योंकि पिछले कई दशकों से वहाँ के लोगों ने हमला करने वालों का मुक़ाबला किया है.
बताया जाता है कि वहाँ हज़ारों तालिबान विरोधी लड़ाके अभी भी मोर्चा बाँधे हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के अपदस्थ प्रथम उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी पंजशीर में ही हैं और उन्होंने तालिबान के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद रखी हुई है.
उन्होंने ख़ुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया हुआ है और कहा है कि वो तालिबान के साथ समझौता नहीं करेंगे.
पूर्व जिहादी कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद भी पंजशीर में ही हैं और उनके आस-पास हज़ारों लोग मौजूद हैं.
उन्होंने कहा है कि वो तालिबान से बात करने के लिए तैयार हैं मगर "ज़रूरत हुई तो लड़ेंगे भी".
पंजशीर घाटी काबुल से लगभग 50 किलोमीटर दूर है और वहाँ जाने का मार्ग बहुत सँकरा है.
खट्टर सरकार ने ‘सिर फोड़ दो’ कहने वाले IAS आयूष सिन्हा का ट्रांसफ़र किया
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इमेज कैप्शन, पत्रकारों के सवालों पर अपने बयान की सफाई देते एसडीएम आयुष सिन्हा
हरियाणा सरकार ने बुधवार
को किसानों के साथ निर्ममता से पेश आने का आदेश देने वाले करनाल ज़िले के एसडीएम
आयूष सिन्हा का ट्रांसफर करके उन्हें अतिरिक्त सचिव बना दिया है.
पिछले कुछ दिनों से सरकार
पर सिन्हा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा था.
इसके चलते सरकार ने उनका
ट्रांसफर करके उन्हें हरियाणा के नागरिक संसाधन सूचना विभाग का अतिरिक्त सचिव बना
दिया है.
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सिन्हा पर क्यों हुई ये कार्रवाई
हाल ही में सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह पुलिसकर्मियों को कृषि क़ानून का विरोध कर रहे किसानों के साथ सख़्ती से पेश आने का आदेश देते हुए दिख रहे थे.
इस वीडियो में सिन्हा कहते दिख रहे थे कि “उठा – उठा के मारना पीछे सबको. हमें किसी भी हालत में ये नाका टूटने नहीं देना है. हमारे पास पर्याप्त फोर्स है. हम दो दिन से सोए नहीं हैं. लेकिन आपको थोड़ी नींद लेने के बाद यहां आना है. मेरे पास एक भी बंदा निकल कर नहीं आना चाहिए. अगर आए तो सर फूटा हुआ होना चाहिए उसका, क्लियर है आपको.”
सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखने के बाद कई पूर्व एवं मौजूदा अधिकारियों ने संबंधित अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.
इसके साथ –साथ विपक्षी दलों के नेताओं और संयुक्त किसान मोर्चा ने आयूष सिन्हा के इस्तीफे की मांग उठाई है.
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बचाव की मुद्रा में दिख रही थी सरकार
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक जगत में सिन्हा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने के बावजूद हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन अधिकारी का बचाव करने की मुद्रा में नज़र आ रहा था.
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सिन्हा का बचाव करते हुए कहा था कि अधिकारी को शब्दों का चुनाव सही ढंग से नहीं किया गया. हालांकि, उन्होंने पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई का बचाव किया था.
लगभग इसी तरह स्थानीय डीएम निशांत यादव ने भी सिन्हा का बचाव किया था.
उन्होंने कहा था, “कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था. करनाल प्रशासन के प्रमुख होने के नाते मैं अपना ख़ेद व्यक्त करता हूं. लेकिन एसडीएम एक अच्छे अधिकारी हैं. उन्होंने उस मौके पर गरमा-गरमी भरे हालातों में कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था. लेकिन उनका इरादा ग़लत नहीं था.”
वहीं, इस मामले में सिन्हा ने सफाई देते हुए कहा था कि पत्थरबाजी शुरू हो गयी थी और उन्होंने उचित रूप से बल प्रयोग करने का आदेश दिया था
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अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान ने क्रिकेट टीम को टेस्ट मैच खेलने की अनुमति दी
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तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम (पुरुष)
को ऑस्ट्रेलिया के साथ एक अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेलने की अनुमति दे दी है.
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के
बाद अफ़ग़ान टीम का ये पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच होगा.
अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख कार्यकारी
अधिकारी हामिद शिनवरी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी
को बताया है कि “हमें अपनी टीम को ऑस्ट्रेलिया भेजने की अनुमति मिल गयी है.”
इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई
क्रिकेट बोर्ड ने कहा था कि उसने टेस्ट मैच के आयोजन के लिए तैयारियां की हुई हैं.
इस मैच का आयोजन पिछले
साल होना था लेकिन महामारी की वजह से ये मैच की तारीख आगे बढ़ती गई. अब इस मैच का आयोजन
नवंबर में किया जाएगा.
इससे पहले नब्बे के दशक में तालिबानी शासन में मनोरंजन के ज़्यादातर साधनों पर प्रतिबंध था.
हालांकि, उस दौर
में भी क्रिकेट खेलने पर रोक नहीं थी.
अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ की जंग पर बीस साल में ख़र्चे 5.8 ट्रिलियन डॉलर
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अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक 9/11 के हमलों के बाद, 2022 के अंत तक अमेरिका ने अफगानिस्तान, इराक, पाकिस्तान और सीरिया में युद्ध छेड़ने में 5.8 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए हैं.
इसमें इन मुल्कों में युद्धों पर लगे पैसे पर दिया गया ब्याज भी शामिल है. ये नंबर आने वाले दशकों में बढ़ता रहेगा. यूनिवर्सिटी का अनुमान है कि साल 2050 तक केवल पूर्व सैनिकों हेल्थकेयर के लिए अमेरिका को $ 2.2 ट्रिलियन तक खर्च करने होंगे.
अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में युद्ध, अमेरिका द्वारा लड़ी गए पहले के युद्धों से अलग हैं. इन युद्धों में लगा धन टेक्स या बॉन्ड के ज़रिए नहीं बल्कि कर्ज़े पर लिया गया था.
कॉस्ट ऑफ वॉर के सह-निदेशक नेटा क्रॉफर्ड ने सीबीएस न्यूज को बताया "ये महत्वपूर्ण है कि हम 9/11 के बाद से अमेरिकी युद्धों और आतंकवाद विरोधी अभियानों की कीमत का हिसाब करें. साथ ही हम थोड़ा थमकर इन लड़ाइयों में जान गंवाने वालों के बारे में भी सोचें."
ब्रेकिंग न्यूज़, 23 लाख करोड़ के सवाल पर बीजेपी ने राहुल गांधी को दिया जवाब
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बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा है कि उन्होंने जिस मुद्दे पर बात की है उसके बारे में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है.
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल और गैस से 23 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं और सवाल उठाया था कि “सरकार बताए कि ये पैसे कहां गए.”
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी ने भ्रमित करने के लिए जीडीपी की गलत परिभाषा देश
के सामने पेश की है. जहां तक कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का सवाल है, सीएनपी वाले यानी करप्शन, नेपोटिज़्म और पॉलिसी
पैरालिसिस वाले जीडीपी के सही अर्थ को कभी नहीं समझ सकते."
"कल ही हमें ऐतिहासिक ख़बर मिली है. वित्तीय वर्ष
2021-22 की पहली तिमाही की वृद्धि दर सामने आई है. और वो शानदार है. बेहतरीन 20.1
फीसदी...महामारी प्रभावित क्षेत्र में ये रिकवरी सिर्फ पीएम मोदी के निर्णायक नेतृत्व
की वजह से संभव हो सकी है.”
इससे पहले राहुल गांधी ने पेट्रोल, डीज़ल और गैस
के दामों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाया था.
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तालिबान आतंकी समूह है कि नहीं? मोदी सरकार से उमर अब्दुल्लाह का सवाल
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जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने केंद्र सरकार से तालिबान को लेकर स्थिति साफ़ करने की माँग की है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार अब्दुल्लाह ने मोदी सरकार से पूछा, "तालिबान या तो आतंकी संगठन है या नहीं है. कृपया स्पष्ट करें कि आप उन्हें कैसे देखते हैं. यदि वो आतंकी समूह हैं तो आप उनसे क्यों बात कर रहे हैं?"
उन्होंने आगे कहा, "और अगर आप ऐसा नहीं मानते तो क्या आप संयुक्त राष्ट्र जाकर कहेंगे कि उन्हें आतंकी संगठनों की लिस्ट से निकाल दिया जाए."
उमर अब्दुल्ला ने ये टिप्पणी भारत और तालिबान के बीच मुलाक़ात की पहली आधिकारिक पुष्टि के बाद की है.
मंगलवार को क़तर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई के साथ मुलक़ात की थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुलाक़ात “तालिबान के आग्रह पर हुई“.
मंत्रालय ने बताया कि इस मुलाक़ात में अफ़ग़ानिस्ता में फँसे भारतीयों की सुरक्षित और जल्द वापसी पर चर्चा की गई.
राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछा- 23 लाख करोड़ रुपये कहाँ गए?
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र
सरकार से सवाल किया है कि गैस, डीज़ल और पेट्रोल से कमाए गए 23 लाख करोड़ रुपयों
का सरकार ने क्या किया है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय
बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इससे भारत सरकार संकट में आ
सकती है.
उन्होंने कहा है कि डीज़ल, पेट्रोल और गैस ऐसी चीजें
हैं जो अर्थव्यवस्था के हर भाग को प्रभावित करती हैं और जब इनके दामों में बढ़ोतरी
होती है तो इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर पड़ता है.
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राहुल गांधी ने कहा, “जब पेट्रोल, डीज़ल और गैस के दाम बढ़ते हैं तो उन लोगों पर सीधी चोट लगती है जो गाड़ी, स्कूटर, या ट्रक में डीज़ल, पेट्रोल डालता है तो उसे सीधी चोट लगती है. और जब डीज़ल, पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं तो उससे माल-ढुलाई में होने वाले ख़र्च में बढ़ोतरी होती है. इससे हर चीज के दाम बढ़ते हैं. ये इसका अप्रत्यक्ष असर है.”
इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि यूपीए ने जब 2014 में शासन की बागडोर बीजेपी को सौंपी थी तब डीजल, पेट्रोल और गैस के दाम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ज़्यादा होने के बावजूद भारत में इनके दाम कम थे.
उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में कहा था कि डीज़ल, पेट्रोल के दाम बढ़ते जा रहे हैं. तब गैस सिलेंडर की कीमत मात्र 410 रुपये थी. आज 885 रुपये है. 116% वृद्धि है. पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 71.5 रुपये थे. आज प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत 101 रुपये है. 42% वृद्धि है. और डीज़ल की कीमत प्रति लीटर 57 रुपये थी जो कि आज 88 रुपये है. ये 55% की वृद्धि है.
मजेदार बात ये है कि कोई कह सकता है कि ये वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में हुई वृद्धि से प्रभावित हो सकती है. लेकिन जब यूपीए सरकार थी तब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का दाम 105 रुपये थी. आज 71 रुपये है. हमारे दौर में 32 फीसदी ज़्यादा था. हमारे दौर में गैस का अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दाम 880 था, आज 653 है, 26 फीसदी ज़्यादा था.
ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इन चीजों के दाम गिर रहे हैं और हिंदुस्तान में बढ़ते जा रहे हैं. वहीं, हमारी संपत्तियों को बेचा जा रहा है.
सरकार ने गैस, डीज़ल और पेट्रोल से 23 लाख़ करोड़ रुपये कमाया है. मेरा सवाल ये है कि ये 23 लाख़ करोड़ रुपये कहां गए?”
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इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के ख़त्म होने के बाद राहुल गांधी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम बढ़े तो संकट आ सकता है.
उन्होंने कहा, “सरकार जिस तरह से ईंधन की कीमतों पर जी रही है, ये अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कम कीमतों ने इन्हें बचाकर रखा हुआ है. जैसे मैंने कोरोना की बात कही थी, मैं फिर से कह रहा हूं कि जिस दिन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम 70 रुपये से 100 रुपये तक पहुंच जाते हैं तो यहां पर सारा मामला नियंत्रण से बाहर चला जाएगा. ये देश की हक़ीकत है. अच्छी लगे न लगे, वो अलग बात है.”
इसके साथ ही राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की मोनेटाइज़ेशन पॉलिसी पर भी हमला बोला है.
उन्होंने कहा, “किसान, मजदूरों, छोटे एवं मंझले उद्योग, एमएसएमई, वेतन पाने वाले लोगों, सरकारी कर्मचारी, और इमानदारी उद्योगों का डिमोनेटाइजेशन हो रहा है...किसका मोनेटाइजेशन हो रहा है,...नरेंद्र मोदी जी के चार-पांच दोस्तों का. वहां अर्थव्यवस्था जा रही है.”
अफ़ग़ानिस्तानः तालिबान ने की ज़ब्त अमेरिकी सैन्य सामानों की नुमाइश
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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का आक्रामक अभियान शुरू
होने के बाद से राजधानी काबुल के बाहर के हालात जानना लगातार मुश्किल होता जा रहा
है.
कंधार अफ़ग़ानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है
और तालिबान का जन्म भी यहीं हुआ था.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के एक संवाददाता के मुताबिक़, तालिबान प्रशासन ने बुधवार को यहां अमेरिका से हथियाए गए सैन्य साज़ो-सामान की परेड आयोजित की थी.
इस संवाददाता ने कंदहार क्रिकेट ग्राउंड में तालिबानी
नेताओं को कुर्सियों और उनके समर्थकों को सीढ़ियों पर बैठकर परेड का इंतज़ार करते
हुए देखा.
इस दौरान अमेरिकी सेना के कई सैन्य वाहन जैसे हम्वी
और मल्टी-परपज़ ट्रक देखे गये.
इसके साथ ही एक ब्लैक-हॉक हेलिकॉप्टर कंदहार
के आसमान में उड़ता हुआ देखा गया.
इन हथियारों को अफ़ग़ान नेशनल डिफेंस एवं
सिक्योरिटी फॉर्स के आत्मसमर्पण के बाद हासिल किया गया है.
इसी बीच अफ़वाहें
सुनी जा रही थीं कि इस परेड में तालिबानी नेता मुल्ला हिब्तुल्लाह अखुंदज़ादा नज़र आ सकते
हैं.
लेकिन आख़िर तक
इस परेड में हिब्तुल्लाह नहीं आए और तालिबान गवर्नर ने भीड़ को संबोधित किया.
सायरा बानो की सेहत बिगड़ी, आईसीयू वॉर्ड में भर्ती
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हिंदी फ़िल्मों की वरिष्ठ अभिनेत्री सायरा बानो को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के आईसीयू वॉर्ड में भर्ती किया गया है.
समाचार एजेंसियो के मुताबिक़ उनकी सेहत के बारे में औपचारिक रूप से कुछ नहीं बताया गया है मगर उनके एक पारिवारिक मित्र ने जानकारी दी है कि उन्हें ब्लड प्रेशर संबंधी शिकायतों के बाद अस्पताल ले जाया गया.
77 वर्षीया सायरा बानो के पति और अभिनेता दिलीप कुमार को भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी वर्ष 7 जुलाई को दिलीप कुमार का निधन हुआ था.
नेहरू-गांधी परिवार पर वीडियो बना फँसीं पायल रोहतगी, केस दर्ज
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महाराष्ट्र पुलिस ने अभिनेत्री पायल
रोहतगी पर नेहरू-गांधी परिवार के ख़िलाफ़ एक आपत्तिजनक वीडियो बनाने के मामले
में केस दर्ज किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एक स्थानीय कांग्रेस
नेता की शिकायत पर पुणे की सायबर पुलिस ने मंगलवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (दो
समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाना), धारा 500 (मानहानि) और धारा 505 (2) के तहत
मामला दर्ज किया है.
शिकायत के अनुसार अभिनेत्री ने एक अज्ञात
व्यक्ति के साथ मिलकर महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा
गांधी, राजीव गांधी और गांधी परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में अपमानजनक वीडियो
बनाया था.
इसके बाद कांग्रेस नेता संगीता तिवारी समेत अन्य
कार्यकर्ताओं ने रोहतगी के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए पुणे पुलिस की सायबर शाखा से
संपर्क किया था.
रोहतगी इससे पहले भी अपने आपत्तिजनक बयानों और वीडियोज़ के लिए सुर्खियों में आ चुकी हैं.
इससे पहले दो बार उनका ट्विटर अकाउंट निलंबित होने का मामला भी सामने आ चुका है.
साल 2019 में राजस्थान पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में आपत्तिजनक बयान देने के मामले में रोहतगी को गिरफ़्तार भी किया था.
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योगी आदित्यनाथ ने दिया सुपरटेक ट्विन टावर मामले में सख़्त कार्रवाई का आदेश
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इमेज कैप्शन, योगी आदित्यनाथ (फ़ाइल)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में सुपरटेक के 40 मंज़िला ट्विन टावरों के अवैध निर्माण के दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ जाँच और सख़्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लखनऊ में मामले की समीक्षा के बाद अधिकारियों को ज़रूरत पड़ने पर आपराधिक मामला दर्ज करने का भी निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा के सेक्टर 93 में स्थित सुपरटेक एमेराल्ड कोर्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत बने 40 मंज़िलों वाले दो ट्विन टावरों को ढहाने का आदेश दिया था.
पीटीआई के अनुसार प्रवक्ता ने बताया कि योगी आदित्यनाथ ने ये कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन होना चाहिए. इस मामले में अनियमितता 2004 से ही चल रही थी. अब सरकारी स्तर पर एक विशेष जाँच समिति गठित की जानी चाहिए और पूरी तहक़ीक़ात होनी चाहिए.
उन्होंने साथ ही कहा, “हरेक दोषी अधिकारी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए. ज़रूरत हुई , तो आपराधिक मामला भी दर्ज कराना चाहिए. इस मामले में फ़ौरन कार्रवाई की जानी चाहिए.”
क्या है मामला
सुपरटेक ने एमराल्ड कोर्ट में दो एपेक्स और सेयाने नाम के 40 मंज़िल ऊंचे दो टॉवर बनाए थे जिनमें लगभग 1000 फ़्लैट थे.
लेकिन एमराल्ड कोर्ट के निवासियों ने कंपनी के इस कदम का विरोध किया और वे इसके ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाइकोर्ट तक गए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुपरटेक और एमराल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य के बीच जारी विवाद में सुपरटेक के ख़िलाफ़ फैसला दिया था.
इसके बाद सुपरटेक ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगवा दी थी.
लेकिन 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए इन टॉवरों को गिराने का आदेश दिया.
हरीश रावत ने ऐसा क्या कहा कि पंजाब के लोगों से माँगनी पड़ गई माफ़ी?
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पंजाब कांग्रेस में जारी कलह के बीच कांग्रेस
महासचिव हरीश रावत ने अपने विवादित बयान ‘पंज प्यारे’ के लिए पंजाब की
जनता से माफ़ी माँगी है.
रावत ने बीते रविवार चंडीगढ़ में एक बैठक के बाद कांग्रेस
की पंजाब शाखा के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए ‘पंज प्यारे’ शब्द का इस्तेमाल
किया था जिसे लेकर पंजाब में उनका ख़ासा विरोध होने लगा.
शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने इस बयान के लिए रावत की आलोचना की है. इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से उनके ख़िलाफ़ भावनाएं भड़काने के लिए मामला दर्ज करने की मांग उठाई है.
सिख परंपरा में रावत द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द ‘पंज प्यारे’ पांच पवित्र गुरुओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है. साल 1699 में, दस गुरुओं में से अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह ने पांच लोगों को ‘खालसा’ परंपरा से जोड़ा था.
इसके बाद सिख धर्म स्वीकार करने वाले इन पांचों सिखों को पंज प्यारे कहा गया जो कि सिखों को खालसा परंपरा में लाने के लिए अनुष्ठान करते हैं.
रावत ने अपने फेसबुक पेज पर बुधवार को अपनी ग़लती मानते हुए लिखा है, “कभी कभी सम्मान जताने के लिए आप ऐसे शब्दों का प्रयोग कर जाते हैं जो कि आपत्तिजनक होते हैं. मैंने भी अपने सम्मानीय अध्यक्ष और चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का इस्तेमाल करने की ग़लती की.”
उन्होंने लिखा है कि वह इस देश का इतिहास पढ़ने वाले विद्यार्थी रहे हैं और पंज प्यारे को जो स्थान मिला है, उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती.
उन्होंने लिखा, “मैंने एक ग़लती की है. मैं लोगों की भावनाएं आहत करने के लिए क्षमा मांगता हूं.”
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अमेरिकी सेना लौटी मगर अफ़ग़ानिस्तान में अभी भी मौजूद हैं अमेरिकी
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इमेज कैप्शन, 30 अगस्त को काबुल हवाई अड्डे से निकलते अमेरिकी सैनिक
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की पूरी तरह से विदाई के बाद भी वहाँ लगभग 100 अमेरिकी नागरिक मौजूद हैं जिन्हें निकालने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि अमेरिका सरकार अफ़ग़ानिस्तान में अभी भी मौजूद अमेरिकी लोगों के संपर्क में है और उन्हें जानकारी दी जा रही है कि अमेरिकी सेना की वापसी के बाद कैसे सरकार के संपर्क में रहना है.
प्रवक्ता ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे अमेरिकी नागरिकों के संपर्क में हैं जिन्होंने या तो वहीं रहने का फ़ैसला किया या जो वहाँ से बाहर नहीं निकल पाए."
उन्होंने कहा, “हम अभी वहाँ मौजूद हर उस अमेरिकी को बाहर निकाले के विकल्प पर विचार कर रहे हैं जो वहाँ से निकलना चाहते हैं.”
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी बताया है कि मार्च के बाद से लगभग 5,000 अमेरिकी नागरिकों की पहचान की गई थी जो लौटना चाहते थे.
उन्होंने कहा कि जो लोग रह गए हैं उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे हैं जिनके पास दोहरी नागरिकता है.
मगर उन्होंने कहा कि सबसे बुनियादी बात ये है कि ऐसे 90% अमेरिकी लोग जो लौटना चाहते थे वो निकल पाए हैं.
अमेरिका ने साथ ही कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सेनाओं की वापसी के बाद अब दोनों देशों के बीच एक नया अध्याय शुरू हो रहा है.
अमेरिकी प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, "हमारा काम जारी है, जैसा कि विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन कह चुके हैं, अफ़ग़ानिस्तान के साथ संबंध का एक नया अध्याय शुरू हो गया है."
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से लोगों की सुरक्षित वापसी के काम में अमेरिका मदद देता रहेगा, साथ ही वो काबुल एयरपोर्ट को दोबारा खोलने के लिए भी हरसंभव मदद देगा.
उन्होंने कहा, "अब जबकि हम अफ़ग़ानिस्तान के साथ इस नए अध्याय में प्रवेश कर रहे हैं तो हमारी दृष्टि बिल्कुल साफ़ है और हम उसपर ध्यान लगा रहे हैं."
प्राइस ने कहा कि अमेरिका अभी दोहा के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान को लेकर कूटनीतिक कार्रवाई करता रहेगा.
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस
कोरोना की तीसरी लहर के डर के बीच उत्तर प्रदेश में खुले प्राइमरी स्कूल
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उत्तर प्रदेश में
आज से कक्षा एक से लेकर कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुल गए हैं. इस
दौरान स्कूलों को अपने परिसर में कोरोना प्रोटोकॉल का सख़्ती से पालन करने को कहा
गया है.
महीनों बाद
स्कूल खुल रहे हैं. जिसे लेकर उत्साह तो है लेकिन संक्रमण का डर भी है. तीसरी लहर
को लेकर आशंकाओं से भी इनक़ार नहीं किया जा सकता है.
इस मौक़े पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया है-
उन्होंने लिखा है- "कोरोना महामारी के कारण पिछले 07 माह से बंद विद्यालय आज 01 सितंबर से पुनः प्रारम्भ हो रहे हैं. सभी बच्चों को ढेर सारी शुभकामनाएं. सभी गुरुजनों से विनम्र आग्रह है कि सभी बच्चों का ध्यान रखें. हर हाल में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने में अपना योगदान दें."
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लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की प्रिंसिपल दीपाली गौतम ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि बहुत लंबे समय बाद छात्र स्कूल आ रहे हैं. बच्चों में काफी उत्साह नज़र आ रहा है.
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उत्तर प्रदेश के अलावा राजधानी दिल्ली में भी कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के लिए आज से कक्षाएं शुरू हो रही हैं.
पूसा रोड स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में 10वीं कक्षा की छात्रा कुमकुम ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि डर तो है लेकिन आख़िरकार हमें पढ़ाई करनी है और परीक्षा में बैठना है."
12वीं कक्षा के एक छात्र कहते हैं, "स्कूल आकर पढ़ना, ऑनलाइन कक्षाओं से कहीं बेहतर हैं. मेरे सभी दोस्त इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे."
उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली में जहां स्कूलों कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खोलने की अनुमति दे दी गई है वहीं तेलंगाना में राज्य सरकार की अनुमति के बावजूद कई स्कूल बंद हैं.
एक आदेश में, तेलंगाना सरकार ने कल कहा है कि छात्रावास की सुविधा वाले सरकारी आवासीय स्कूल, समाज कल्याण स्कूल और आदिवासी कल्याण स्कूलों के अलावा अन्य सभी स्कूल आज से फिर से खुल सकते हैं. लेकिन किसी भी छात्र को स्कूल आकर क्लास लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के नियंत्रण के बाद नेटो के 10 हज़ार से ज़्यादा लोग पहुँचे पाकिस्तान
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी
पाकिस्तान सरकार ने बताया है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं की वापसी के दौरान नेटो और उससे जुड़े 10,000 से ज़्यादा लोग पाकिस्तान पहुँचे जिनमें से 9,000 से ज़्यादा लोग लौट चुके हैं.
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफ़िंग में इसकी जानकारी दी.
उन्होंने बताया, “नेटो के कुल 10,302 लोग यहाँ आए थे जिनमें से 9,032 लौट चुके हैं और 1,229 लोग अभी यहाँ मौजूद हैं.”
उन्होंने बताया कि इनमें से 545 लोग अफ़ग़ान हैं, और 684 लोग अलग-अलग देशों के नागरिक हैं.
फ़वाद चौधरी ने कहा, “ये जो 10,302 लोग आए थे उनमें अमेरिकी लोगों की संख्या 155 थी, और उनमें भी ज़्यादातर लौट चुके हैं, जो 42 अमेरिकी बचे हैं वो भी आज (मंगलवार) को चले जाएँगे.”
उन्होंने कहा कि आज के बाद, यानी 1 सितंबर से पाकिस्तान में एक भी अमेरिकी मौजूद नहीं रहेगा.
चौधरी ने बताया कि जो 1,229 लोग बचे हैं वो भी दो-तीन दिनों में पाकिस्तान से चले जाएँगे.
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अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान की चिंता
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अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी हो चुकी है और अफ़ग़ानिस्तान को कब्ज़े में लेने के बाद तालिबान वहां सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है.
इस बीच अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी मुल्क़ पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.
पाकिस्तान विशेष रूप से पाकिस्तान तालिबान समूह के लड़ाकों को लेकर चिंतित है. जो अफ़ग़ानिस्तान पार करके आ रहे हैं और क्षेत्र में घातक हमले कर रहे हैं.
बीते दो दशकों में हुए जिहादी हमलों में हज़ारों की संख्या में पाकिस्तान नागरिक मारे गए हैं.
काबुल हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद से चिंता और बढ़ गई है.
काबुल हवाई अड्डे पर हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है. इस हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए थे. जिनमें क़रीब 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे.
रविवार को अफ़ग़ानिस्तान में सीमा पार से चरमपंथियों की गोलीबारी में दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं.
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आगे आने वाले दो-तीन महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने पाकिस्तान के इस वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि इस्लामाबाद को अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा पर चरमपंथी हमलों के बढ़ने की आशंका है.
बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण
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भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, देशभर में बीते 24 घंटों में करीब 34 हज़ार कोरोना संक्रमित उपचार के बाद ठीक हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सेना और सरकार की मदद करने वालों के लिए ब्रिटेन की बड़ी घोषणा
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ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने घोषणा
की है कि अफ़ग़ानिस्तान में जिन भी लोगों ने ब्रिटिश सरकार और सेना की मदद की, वे
स्थायी तौर पर ब्रिटेन में रह सकते हैं.
इससे पहले तक पांच साल के प्रवास का प्रस्ताव था लेकिन अब
इसे बढ़ाकर अनिश्चितकाल तक के लिए कर दिया गया है.
ब्रिटेन 13 अगस्त से अफ़ग़ान पुनर्वास और सहायता नीति के तहत
योग्यता रखने वाले आठ हज़ार से अधिक लोगों को अफ़ग़ान से एयरलिफ़्ट कर चुका है. लेकिन
लेबर पार्टी का कहना है कि कई अफ़गानों के लिए और अधिक मदद किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाने के बाद भी उनके लिए
जान का जोख़िम है.
ब्रिटिश सैनिकों ने बीते सप्ताह अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दिया
था. इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन की 20 साल की सैन्य भागीदारी भी समाप्त
हो गई.
विदेश सचिव डॉमिनिक राब ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद कितने
लोग ब्रिटेन आने की योग्यता रखते हैं इसका कोई सटीक आंकड़ा तो फिलहाल नहीं दे सकते
हैं.
ऑपरेशन वॉर्म वेलकम नामक अपनी योजना का विवरण देते हुए गृह कार्यालय ने कहा
कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ब्रिटेन में आने वाले अफ़ग़ानों को अपने जीवन को नए तरीक़े से शुरू करने में मदद मिल सके.
अफगान रिलोकेशन एंड असिस्टेंस पॉलिसी (एआरएपी) स्थानीय रूप से
कार्यरत पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए है. ये वो लोग हैं जिन्हें तालिबान से ख़तरा हो सकता है.
प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने अपने एक संबोधन में कहा कि ब्रिटेन पर अफ़ग़ानिस्तान
में सशस्त्र बलों के साथ काम करने वालों का बहुत बड़ा कर्ज़ है.
उन्होंने कहा, "मैं इस बात को लेकर दृढ़ संकल्पित हूं कि हम उन्हें और उनके परिवारों
को ब्रिटेन में अपने जीवन के पुनर्निर्माण के लिए हर ज़रूरी समर्थन देंगे."
अफ़ग़ानिस्तान: अपने नागरिकों को निकालने के लिए ब्रिटेन कर रहा है तालिबान से बात
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अमेरिका का
आख़िरी सैन्य विमान भले ही अफ़ग़ानिस्तान से रवाना हो चुका हो लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में
अभी भी कई विदेशी नागरिक मौजूद हैं.
जिनमें कई ब्रिटिश नागरिक भी हैं और वे अफ़ग़ान
भी हैं जिन्होंने गठबंधन सेना की मदद की थी.
ब्रिटेन अपने
नागरिकों और अफ़ग़ान लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से सुरक्षित निकालने के लिए तालिबान
से बात कर रहा है.
यह बातचीत ब्रिटेन के अधिकारियों और तालिबान सदस्यों के बीच हो
रही है ताकि ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षित निकासी को सुनिश्चित किया जा सके.
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नंबर 10 ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत दोहा में हो रही है.
ऐसा माना जा रहा है कि क़रीब डेढ़ सौ से ढाई सौ ऐसे लोग अब भी अफ़ग़ानिस्तान में हैं जो री-लोकेशन की पात्रता रखते हैं और उनके साथ उनका परिवार भी है.
ब्रिटेन-तालिबान वार्ता पर टिप्पणी करते हुए टेन डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा, "अफ़ग़ान में हो रहे बदलावों के संदर्भ में प्रधानमंत्री के विशेष प्रतिनिधि साइमन गास दोहा की यात्रा पर हैं. वह तालिबान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे हैं ताकि ब्रिटिश नागरिकों के लिए अफ़ग़ानिस्तान से सुरक्षित वापसी को सुनिश्चित किया जा सके. इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो ब्रिटिश नागरिक हैं और वे अफ़ग़ान भी जिन्होंने पिछले 20 वर्षों में हमारे साथ काम किया है."
मंगलवार को विदेश सचिव डॉमिनिक राब ने कहा कि ब्रिटेन अब तक क़रीब 17,000 से अधिक लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से एयरलिफ़्ट कर चुका है. जिसमें 5,000 से अधिक ब्रिटिश नागरिक हैं.
अफ़ग़ानिस्तान से अंतिम सैन्य विमान की वापसी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कुछ कहा
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी
सैनिकों को वापस बुलाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है.
अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में अब पूरी
तरह से तालिबान का नियंत्रण हो गया है.
अमेरिकी सेना की वापसी के अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए बाइडन
ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में और लंबे समय तक रहना कोई विकल्प नहीं था.
मंगलवार की मध्यरात्रि (अफ़ग़ानिस्तान के समयानुसार) को
अमेरिका के आख़िरी सैन्य विमान ने अफ़ग़ानिस्तान से उड़ान भरी और इसी के साथ 20 साल
तक चले युद्ध का अंत भी हो गया.
अमेरिका के आख़िरी विमान के अफ़ग़ानिस्तान से रवाना होने के
बाद जो बाइडन ने अपने फ़ैसले और भविष्य की नीतियों को लेकर राष्ट्र को संबोधित
किया.
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राष्ट्रपति बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने की इच्छा रखने वाले क़रीब सवा लाख लोगों को एयरलिफ़्ट कराने के लिए अमेरिकी सेना की तारीफ़ की.
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इतिहास के सबसे बड़े एयरलिफ़्ट्स में से एक को पूरा किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने की इच्छा और क्षमता अमेरिका के ही पास थी.
अमेरिका की अफ़ग़ानिस्तान से पूर्ण वापसी पर तालिबान लड़ाकों ने गोलियां दागकर, आतिशबाज़ी कर जश्न मनाया.
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तालिबान नेताओं ने अमेरिका की वापसी को अपनी जीत बताया है और दावा किया है कि इससे लोग भी खुश हैं.
अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन देशों की सेना साल 2001 से अफ़ग़ानिस्तान में तैनात थी. अमेरिका में 9/11 को हुए हमले के बाद उठाए गए इस क़दम ने तालिबान को सत्ता से हटा दिया था. लेकिन अब एकबार फिर अफ़ग़ानिस्तान तालिबान के कब्ज़े में है.
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की इस तरह वापसी पर राष्ट्रपति बाइडन की काफी आलोचना हो रही है.
तालिबान लड़ाकों ने महज़ 11 दिनों के भीतर पूरे अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले लिया.14 अगस्त को काबुल भी उनके कब्ज़े में चला गया.
राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरिकी नागरिकों, गठबंधन देश के लोगों और स्थानीय अफ़ग़ानों (अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अनुवादक इत्यादि) को अफ़ग़ानिस्तान से सुरक्षित निकालने के लिए काबुल एयरपोर्ट पर क़रीब 6000 अमेरिकी सैनिक तैनात किये थे.
उन्होंने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि मैं इस युद्ध को हमेशा के लिए जारी नहीं रखने वाला था.