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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया.
मोहम्मद शाहिद and कमलेश मठेनी
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया.
उन्हें चार जुलाई को संजय गांधी पीजीआई के आईसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया था.
लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे नाकाम होने के कारण आज उन्होंने अंतिम सांस ली.
वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे और दो बार संसद के सदस्य. बाबरी मस्जिद विध्वंस का मामला उनके ही मुख्यमंत्रित्वकाल में हुआ था.
अमेरिका और नेटो सेनाओं ने भारत को हर रोज़ काबुल से दो उड़ानें संचालित करने की इजाज़त दी है.
इस समय अमेरिका और नेटो सेनाएं काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा कर रही हैं. और काबुल एयरपोर्ट के बाहर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.
एयरपोर्ट के बाहर हज़ारों - हज़ार लोग किसी तरह अंदर जाने की गुंजाइश तलाश रहे हैं. इस वजह से हालात लगातार जोख़िमपूर्ण होते जा रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, भारत सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बताया है कि आने वाले दिनों में भारत से हर रोज़ काबुल से दो फ़्लाइट चलाई जाएंगी.
इस समय काबुल एयरपोर्ट से एक दिन में कुल 25 उड़ानों का संचालन किया जा रहा है.
इस समय काबुल में 300 से ज़्यादा भारतीय मौजूद है जिन्हें भारत सरकार निकालने की कोशिश कर रही है. सरकार इन नागरिकों को क़तर और ताजिकिस्तान के मार्ग से एयर लिफ़्ट कर रही है.
बता दें कि भारतीय एनएसए अजित डोवाल ने अमेरिकी सुरक्षा घेरे में भारतीय अधिकारियों को काम करने की अनुमति दिलाने के लिए अपने अमेरिकी समकक्ष जैक सलीवान से बात की थी.
इसके बाद ही भारत के पहले विमान को काबुल में उतरने की इजाज़त मिली थी.
भारतीय वायु सेना अब तक कुल 180 भारतीयों को काबुल से लेकर आ चुकी है जिनमें अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत समेत अन्य राजनयिक शामिल हैं.
इसी बीच एयर इंडिया की एक फ़्लाइट कुछ समय बाद लैंड करने वाली है जिसमें 90 भारतीय होंगे. माना जा रहा है कि ये लोग सी130 एयरक्राफ़्ट से लाए जा रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण स्थापित होने के बाद हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पसरी अव्यवस्था की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.
वायरल हुई ऐसी ही एक तस्वीर में एक परिवार एयरपोर्ट की दीवार के पार खड़े अमेरिकी सैनिक को अपना बच्चा देते हुए दिख रहा है.
अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को बताया है कि उन्होंने संबंधित बच्चे को उसके परिवार को सौंप दिया है.
यूएस मरीन्स के प्रवक्ता मेजर जेम्स स्टेंगर ने न्यू यॉर्क टाइम्स को बताया है कि मेडिकल टीम ने बच्चे को लौटाने से पहले उसका इलाज़ किया और अब यह बच्चा एयरपोर्ट पर सुरक्षित है और अपने पिता के साथ है.
स्टेंगर ने कहा कि "ये घटना इस बात का सच्चा प्रमाण है कि बचाव अभियान के दौरान तेजी से बदलती स्थितियों में जल्दी फैसले ले रहे मरीन अपने काम में कितने पेशेवर हैं."
काबुल प्रांत के तालिबान प्रभारी अब्दुल रहमान मंसूर ने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई और अफ़ग़ानिस्तान की उच्च सुलह परिषद के प्रमुख डॉक्टर अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मुलाकात की.
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने तालिबान अधिकारियों से कहा है कि "काबुल के लोगों के जानोमाल और इज़्ज़त की सुरक्षा सभी लोगों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए."
उनके अनुसार, तालिबान ने इस पर ये कहा कि वे "काबुल के लोगों की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे."
हक़्क़ानी नेटवर्क अफ़ग़ान तालिबान की एक सैन्य शाखा है. इसके बारे में ये उम्मीद की जा रही है कि यह तालिबान के नए ढांचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, जलालुद्दीन हक़्क़ानी ने इस गुट की स्थापना की थी और 1980 के दशक में सोवियत संघ के ख़िलाफ़ जंग में अहम भूमिका निभाई थी.
तब जलालुद्दीन हक़्क़ानी को सीआईए और पाकिस्तान जैसे उसके सहयोगियों की मदद मिली थी. जंग के दौरान और सोवियत संघ की वापसी के बाद भी इस गुट का दबदबा बना रहा.
साल 1996 में जलालुद्दीन हक्कानी तालिबान में शामिल हो गए और तालिबान की पहली हुकूमत के दौरान एक महकमे के मंत्री के रूप में भी काम किया.
साल 2018 में, तालिबान ने घोषणा की कि जलालुद्दीन हक़्क़ानी की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई थी, और उनका बेटा सिराजुद्दीन हक़्क़ानी गुट का प्रमुख बन गया.
उनके छोटे भाई अनस हक़्क़ानी काबुल पर कब्ज़ा करने के बाद से पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई और पूर्व मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला के साथ बातचीत कर रहे हैं.
साल 2019 में अफ़ग़ान सरकार की हिरासत से अनस हक़्क़ानी की रिहाई को संयुक्त राज्य अमेरिका और तालिबान के बीच सीधी बातचीत की शुरुआत के रूप में देखा गया.
इसी शुरुआती कदम के बाद अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका की वापसी मुमकिन हुई. हक़्क़ानी नेटवर्क की वित्तीय ताकत और सैन्य ताकत के कारण, इसे तालिबान के भीतर अर्ध-स्वायत्त भी माना जाता है.
हक़्क़ानी नेटवर्क को अमेरिका ने विदेशी चरमपंथी गुट का दर्जा दिया है और संयुक्त राष्ट्र ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को शनिवार सुबह गोमतीनगर पुलिस ने गोरखपुर जाने से रोक दिया. अमिताभ ठाकुर चुनाव के लिए जनसंपर्क करने गोरखपुर जा रहे थे.
तभी गोमतीनगर पुलिस भारी संख्या में पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गई और अमिताभ ठाकुर को उनकी सुरक्षा का हवाला देकर गोरखपुर जाने से रोक लिया.
शनिवार सुबह अमिताभ ठाकुर अपने घर से निकलकर पास की रेल विहार कॉलोनी में अपने एक मित्र के घर गए थे. तभी वहां पुलिस टीम लेकर पहुंचीं एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव ने अमिताभ ठाकुर को वहीं रोक लिया.
सुरक्षा का हवाला देकर उनसे कहा गया कि आप गोरखपुर न जाएं. रेल विहार कॉलोनी के उक्त मकान के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई. जहां से कुछ देर बाद अमिताभ ठाकुर को उनके घर भेज दिया गया. उनके घर के बाहर और आसपास पुलिस तैनात है.
पुलिस का कहना है कि अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार नहीं किया गया है. उन्हें सिर्फ गोरखपुर जाने से रोका गया है. इस मौके पर एसीपी गोमतीनगर का कहना है कि दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह करने वाली रेप पीड़िता और उसके साथी ने अमिताभ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए थे.
आरोप था कि वह रेप के आरोपी बसपा सांसद अतुल राय की मदद कर रहे हैं. रेप पीड़िता और आरोपी बसपा सांसद अतुल राय भी गोरखपुर के नजदीक के ही रहने वाले हैं, इस वजह से अमिताभ ठाकुर को गोरखपुर जाने से रोका गया है.
उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है. मामले पर पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने कहा कि "जब मैं सुबह अपने साथी के साथ गोरखपुर जाना चाह रहा था तब गोमतीनगर पुलिस वहां आ गई उन्होंने मुझसे कहा कि आप गोरखपुर नहीं जा सकते हैं. मैंने पुलिस से पूछा कि क्या मामला है तो पुलिस ने कहा कि आप की सुरक्षा को लेकर आपको रोका जा रहा है. इस पर मैंने पुलिस से कहा कि अगर सुरक्षा का मामला है तो मुझे सुरक्षा दी जाए, जाने से ना रोका जाए. इसके बाद भी मुझे गोरखपुर नहीं जाने दिया गया."
अमिताभ ठाकुर ने यह भी कहा कि पुलिस ने रेप के मामले में महिला द्वारा खुदकुशी की कोशिश को बहाना बनाकर मुझे रोका है और कहां कि महिलाओं में आपके प्रति बहुत रोष है इसलिए आपको वहां जाने से रोका जा रहा है जिस पर अमिताभ ठाकुर ने कहा कि ये एक अजीबो-गरीब बहाना है यदि मुझे खतरा है तो मुझे सुरक्षा देनी चाहिए थी.
अफ़ग़निस्तान के बग़लान प्रांत में कुछ स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अफ़ग़ान सरकार के एक वफ़ादार गुट ने तालिबान लड़ाकों को हराकर तीन जिलों पर कब्ज़ा कर लिया है.
बीबीसी फ़ारसी की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान से छीने गए तीन ज़िले पाली हिसार, दी सलाह और बानो हैं. बग़लान पंजशीर सूबे के पड़ोस में स्थित है.
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर घाटी तालिबान के ख़िलाफ़ प्रतिरोध का अंतिम प्रमुख गढ़ माना जात है.
काबुल के उत्तर में हिंदुकुश पहाड़ियों से घिरी पंजशीर घाटी लंबे समय से प्रतिरोध के केंद्र के रूप में जानी जाती है.
विश्लेषकों का कहना है कि अगर तालिबान पंजशीर पर हमला करता है, तो वहां इकट्ठा हुए विरोध गुट उनसे लड़ेंगे.
न्यूज़ीलैंड में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन को बढ़ा दिया है.
ऑस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में भी लॉकडाउन को बढ़ाया गया है.
अमेरिका में बेहद संक्रामक डेल्टा वेरिएंट की वजह से वो लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है.
चीन और पाकिस्तान दोनों ही उन चुनिंदा देशों में भी शामिल हैं, जिनके दूतावास अफ़गानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भी सक्रिय हैं.
एक तरफ़ जहाँ अफ़गानिस्तान से हैरान-परेशान लोगों की चिंताजनक तस्वीरें सामने आ रही है. वहीं, दूसरी तरफ़ चीन और पाकिस्तान का तालिबान के लिए नरम रवैया भी चर्चा का विषय है.
कई विशेषज्ञ चीन-पाकिस्तान और तालिबान के बीच इस 'रोमांस' पर बिल्कुल हैरान नहीं हैं. वो इसे तालिबान की एक बड़ी 'कूटनीतिक जीत' के रूप में देख रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और तालिबान को कहीं न कहीं एक दूसरे की ज़रूरत है. वहीं, पाकिस्तान पर तालिबान को समर्थन देने के आरोप पहले से लगते रहे हैं.
तो क्या ऐसा माना जाए कि अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा चीन और पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर है? क्या तालिबान से चीन और पाकिस्तान को कोई ख़तरा भी है?
70 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड में हाजी मस्तान, वर्दराजन मुदालियर और करीम लाला का बोलबाला था.
इन लोगों ने अपराध की दुनिया में कैसे पैर जमाए बता रहे हैंरेहान फ़ज़ल,विवेचना में.
भारत का विदेश मंत्रालय अफ़ग़ानिस्तान में फंसे भारतीयों को निकालने की कोशिश कर रहा है. जो लोग निकाल कर लाए जा रहे हैं उनमें अफ़ग़ान हिंदू और सिख भी हैं.
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "हम भारतीयों को काबुल से निकालने की कोशिश कर रहे हैं." काबुल एयरपोर्ट अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा में है और बाहर तालिबान के लड़ाके तैनात हैं.
वहां मौजूद लोगों का कहना है कि हज़ारों की तादाद में लोग एयरपोर्ट में दाख़िल होने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अंदर नहीं पहुंच पा रहे हैं.भारत भी अपने नागरिकों को एयरपोर्ट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है.
एयरपोर्ट के पास मौजूद भारतीय नागरिकों के दल में शामिल एक व्यक्ति ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "हमें दो दिनों से एयरपोर्ट लाने की कोशिश की जा रही है."
उन्होंने आगे बताया," भारत का कोई अधिकारी यहां मौजूद नहीं है. हमें कॉन्ट्रैक्टरों के ज़रिए लाया जा रहा है."
"मैंने हज़ारों लोगों को एयरपोर्ट की ओर दौड़ते देखा, लोग अपनी कारें छोड़कर पैदल दौड़ रहे थे. बच्चे, युवा और महिलाएं सब दौड़ रहे थे और इन सबके साथ मैं भी दौड़ रही थी."
"तभी किसी ने मुझसे कहा, "अगर तालिबान ने आपको पकड़ लिया है तो वे आपको मार देंगे, आपको और तेजी से भागना चाहिए…"
ये बातें ब्रिटेन की काउंसलर पैमाना असद ने बीते हफ्ते की आपबीती बयान करते हुए कहीं. वो तालिबान से बचकर ब्रिटेन पहुंचने में सफल रहीं.
पैमाना असद मात्र तीन साल की उम्र में एक शरणार्थी के रूप में ब्रिटेन पहुंची थीं और तब से उन्होंने एक लंबा सफर तय किया है. असद ब्रिटेन में सार्वजनिक पद के लिए चुनी जाने वाली अफ़ग़ान मूल की पहली शख़्स हैं. वो लंदन के हेरो क्षेत्र से काउंसलर हैं. असद बीती 30 जुलाई को अपने परिजन से मिलने काबुल आई थीं.
उन्होंने बीबीसी रेडियो 5 लाइव को बताया कि उन्हें एक स्थानीय व्यक्ति ने चेताया था, "अगर तालिबान ने आपको पकड़ लिया, तो वो आपको मार देंगे."
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले सात दिनों से सभी बैंक बंद हैं और एटीएम मशीनों में पैसे नहीं हैं. आम लोगों को इस वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस समय एक भी ऐसा बैंक नहीं है जो कामकाज कर रहा हो. न ही वेस्टर्न यूनियन की शाखाएं ही काम कर रही हैं.
वेस्टर्न यूनियन के जरिए विदेशों में काम कर रहे लोग अपने देश में पैसा भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
चूंकि वेस्टर्न यूनियन बंद हैं, इसका मतलब ये हुआ कि आम अफ़ग़ानियों के लिए बाहर से पैसे मंगाना तकरीबन नामुमकिन हो गया है.
लोगों का कहना है कि उनके पास नकदी खत्म हो रही है और काबुल समेत दूसरे शहरों में भी पैसे की तंगी को लेकर बेचैनी देखी जा रही है.
काबुल में जानवरों के लिए काम करने वाले पूर्व सैनिक पेन फार्थिंग का कहना है कि उनके पास अपने स्टाफ़ को देने के लिए पैसा नहीं है और लोगों के पास खाने-पीने की चीज़ें ख़त्म हो रही हैं.
एक्ट्रेस, फ़िल्म डायरेक्टर और संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी की विशेष दूत एंजेलीना जॉली ने इंस्टाग्राम पर आगाज़ करते हुए एक अफ़ग़ान लड़की की भेजी हुई चिट्ठी शेयर की है.
इस चिट्ठी में उस लड़की ने एंजेलीना जॉली को तालिबान के द्वारा अफ़ग़ानिस्तान को अपने दखल में लेने से जुड़ी चिंताओं के बारे में विस्तार से लिखा है. "तालिबान के आने से पहले... हम सभी के पास हक़ थे. अब हम फिर क़ैदी हो गए हैं."
एंजेलीना जॉली ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा है, "फिलहाल अफ़ग़ान लोग सोशल मीडिया पर अपनी बात कहने की आज़ादी खो रहे हैं. इसलिए मैं इंस्टाग्राम पर आई हूं ताकि बुनियादी मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे दुनिया भर के लोगों की कहानियां शेयर कर सकूं."
उन्होंने साल 2001 की अपनी अफ़ग़ानिस्तान यात्रा के बारे में भी लिखा है. एंजेलीना याद करती हैं कि अफ़ग़ानिस्तान यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात तालिबान के डर से भागे शरणार्थियों से हुई थी.
उन्होंने लिखा है कि देश में जारी अनिश्चितता के कारण लोगों को एक बार फिर से विस्थापित होते हुए देखना तकलीफ़देह है.
अफ़ग़ानिस्तान में नई सरकार के गठन के लिए जारी बातचीत के बीच तालिबान का एक ऐसा नेता काबुल पहुंचा है जो कभी अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल रहा था. खलील हक़्क़ानी कट्टरपंथी हक़्क़ानी नेटवर्क का हिस्सा हैं.
शुक्रवार के दिन उन्हें काबुल में देखा गया. वे मिलिट्री यूनिफॉर्म पहने लड़ाकों के सुरक्षा घेरे में थे. काबुल से आई तस्वीरों में ये देखा जा सकता था कि खलील हक़्क़ानी एक मस्जिद में लोगों को संबोधित कर रहे थे.
इसी हफ़्ते की शुरुआत में 'अफ़ग़ानिस्तान हाई काउंसिल फ़ॉर नेशनल रिकंशीलिएशन' के चीफ़ अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने हक़्क़ानी और उनके तालिबान प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं.
इस मुलाकात में अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई भी शामिल थे. हक़्क़ानी अमेरिका की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल लोगों में से एक हैं. उनके सिर पर 5 मिलियन डॉलर का इनाम है.
हक़्क़ानी नेटवर्क के मरहूम नेता जलालुद्दीन हक़्क़ानी के भाई खलील हक़्क़ानी तालिबान के डिप्टी लीडर सिराजुद्दीन हक़्क़ानी के चाचा हैं. हक़्क़ानी नेटवर्क अफ़ग़ानिस्तान के सबसे ताक़तवर चरमपंथी गुटों में से एक हैं.
अफ़ग़ान फौज और पश्चिमी देशों की सेनाओं के ख़िलाफ़ हाल के सालों में हुए कई हमलों के लिए हक़्क़ानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया जाता है.
न्यूयॉर्क टाइम्स के एक फ़ोटोग्राफ़र से बात करते हुए हक़्क़ानी ने शुक्रवार को कहा कि देश में शांति है और पत्रकार और महिलाएं यहां सुरक्षित रहेंगी. उन्होंने कहा, "हमारे इरादे नेक हैं."
ये काबुल में यूनिवर्सिटी के छात्रों के नए सत्र के लिए तैयार होने का वक़्त है. लेकिन जब से तालिबान लड़ाके यहां सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं, कई छात्र अपने अब तक के जीवन के सबूतों को नष्ट करने में लगे हैं.
ये महिला छात्र सताए गए उस हज़ारा अल्पसंख्यक समुदाय की सदस्य हैं जिसे हाल के वर्षों में तालिबान के हाथों अपहरण और हत्याओं का सामना करना पड़ा है. इन्होंने बीबीसी से बात की.
वो बीबीसी को बताती हैं कि कैसे वो सपने बुन रही थीं लेकिन अब उनके लिए वो डर में बदल गए हैं. कुछ दिनों में उनके अस्तित्व का भविष्य तय हो जाएगा.
उन्होंने जो कुछ बीबीसी से कहा... पढ़िए उनकीज़ुबानी.
ये कुछ ऐसा है जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती. वो सब कुछ जिसके मैंने सपने देखे थे, वो सब जिसके लिए मैंने कभी काम किया था. मेरी गरिमा, मेरा अभिमान, यहां तक कि एक लड़की के रूप में मेरा अस्तित्व, मेरा जीवन- सब ख़तरे में है.
"वापस जाओ, वापस जाओ", एक परिसर के बाहर खड़ी भीड़ पर एक ब्रितानी सैनिक ज़ोर से चिल्लाता है. अफ़ग़ानिस्तान में इस परिसर में ब्रितानी दूतावास द्वारा बाहर ले जाए जा रहे लोगों को उड़ान से पहले लाया जाता है.
इस सैनिक के सामने कई लोग अपने ब्रितानी पासपोर्ट इसलिए हवा में लहरा रहे थे ताकि उन्हें अंदर जाने दिया जाए. लेकिन, अफ़ग़ान सुरक्षा बलों का एक समूह उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था.
भीड़ में मौजूद इनमें से कई लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने के बारे में कुछ नहीं कहा गया था. लेकिन, फिर भी वो कोशिश कर रहे थे कि किसी भी तरह अफ़ग़ानिस्तान से बाहर चले जाएं. कई लोगों को दूतावास से ईमेल आया था और उन्हें यहां पहुंचने और रुककर प्रक्रिया पूरी होने का इंतज़ार करने के लिए कहा गया था.
इस भीड़ में पश्चिमी लंदन के उबर ड्राइवर हेलमंद ख़ान भी थे जो कुछ महीनों पहले अपने रिश्तेदारों से मिलने अपने बच्चों के साथ अफ़ग़ानिस्तान पहुंचे थे.