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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी पर क्या बोल रहे हैं पाकिस्तानी?

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद से पाकिस्तान में इसे लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, मानसी दाश, कमलेश मठेनी and अपूर्व कृष्ण

  1. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी पर क्या बोल रहे हैं पाकिस्तानी?

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद से पाकिस्तान में इसे लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

    काबुल पर तालिबानी कब्जे के ठीक एक दिन बाद इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान ने ग़ुलामी की ज़ंजीरें तो तोड़ दी, लेकिन जो ज़हनी ग़ुलामी की ज़ंजीरे हैं वो नहीं टूटती.''

    जहां एक ओर तसलीमा नसरीन समेत कुछ लोगों ने इमरान ख़ान के इस बयान की निंदा की.

    लेकिन पाकिस्तान में इस मौके पर कुछ लोग अपनी ख़ुशी छिपा नहीं पा रहे हैं.

    पाकिस्तान की बड़ी धार्मिक पार्टियों जमात-ए-इस्लामी और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम ने खुलकर काबुल पर कब्जा करने के लिए तालिबान को बधाई दी है.

    इसके साथ ही इन पार्टियों ने तालिबान को अपना पूरा सहयोग देने की बात भी कही है.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को उनकी हाल की कामयाबियों के लिए बधाई दी है और उन्हें पूरा सहयोग देने की बात की है.

    इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी भी कुछ लोगों के लिए जश्न का विषय है. इसके साथ ही इस मौके पर कई लोग अपनी पीठ ठोंक रहे हैं.

    बीबीसी उर्दू के लिए सहर बलूच का विश्लेषण

    पाकिस्तान के न्यूज़ चैनलों पर जब काबुल में तालिबान की जीत की ख़बरें आना शुरू हुईं तो प्रतिक्रियाएं मिली जुली थीं.

    लेकिन कुछ पाकिस्तानी नेताओं और अधिकांश धार्मिक पार्टियों समेत ज़्यादातर लोग अपनी ख़ुशी नहीं छिपा सके कि अमेरिका हार गया.

    इसके बाद कई लोगों ने पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी के पूर्व महानिदेशक हामिद गुल के एक वीडियो का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका का काबुल से वापस जाना गुल का ‘विज़न’ यानी सोचथी.

    ‘तालिबान के जनक’ कहे जाने वाले हामिद गुल साल 2014 के एक वीडियो में कहते हुए दिख रहे हैं कि “जब इतिहास लिखा जाएगा, तब ये भी लिखा जाएगा कि आईएसआई ने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की मदद से सोवियत संघ को हरा दिया.

    लेकिन ये भी लिखा जाएगा कि आईएसआई ने (अफ़ग़ानिस्तान) मेंअमेरिका की मदद से अमेरिका को हरा दिया”

    सीमा पार जो कुछ भी हो रहा है, उससे सभी लोग खुश नहीं हैं. और कई लोगों ने उन लोगों को चेतावनी देना शुरू कर दिया है जो कि दूर बैठकर कठपुतली का खेल खेलना चाहते हैं.

    एक लंबे समय से पाकिस्तान पर अफ़ग़ानिस्तान में विरोधाभासी भूमिका निभाने का आरोप लगाया जाता है.

    अमेरिका और भारत ही नहीं, सबसे अहम बात ये है कि खुद पाकिस्तान के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने वाले चरमपंथियों को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करने के लिए अफगानिस्तान को "पिछवाड़े" के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

    सीनेटर शेरी रहमान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान के लिए एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान को “रणनीतिक पिछवाड़े” के रूप में देखना एक बड़ी ग़लती होगी.

    इसी बीच मानवाधिकारों पर पाकिस्तान की सीनेट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अफ़रासायब खट्टक को पाकिस्तान की पुरानी ग़लतियों की मुख़र आलोचना करने के बाद सरकार की ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा रहा है.

    उन्होंने कहा, “मूल बात ये है कि तालिबान एक आधुनिक राज्य के विचार के ख़िलाफ़ हैं. दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें बाहर से समर्थन मिल रहा है. और जो उन्हें समर्थन दे रहे हैं, वे इसकी भारी कीमत चुकाएंगे जैसी कि उन्होंने इससे पहले चुकाई है.”

  2. तालिबान को अब हो सकती है पैसे की मुश्किल, पश्चिमी देश खींच रहे हाथ

    बेथ टिमिन्स

    बीबीसी बिज़नेस संवाददाता

    एक तरफ अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद तालिबान वहां सत्ता के हस्तांतरण में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ पश्चिमी देशों की तरफ से उस पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.

    अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में मौजूद संस्थाएं पैसों तक तालिबान का पहुँच रोकने के लिए तेज़ी से काम कर रही हैं.

    इस कारण दुनिया के सबसे ग़रीब देशों की सूची में शुमार अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है क्योंकि वो विदेशों से मिलने वाली आर्थिक मदद पर पूरी तरह से निर्भर है. ये विदेशी आर्थिक मदद उसकी जीडीपी का 43 फीसदी हिस्सा है.

    ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में अफ़ग़ानिस्तान मामलों की जानकार वांडा फेलबॉब-ब्राउन ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "अफ़ग़ानिस्तान काफी हद तक विदेशी आर्थिक मदद पर निर्भर करता है. तालिबान अपने स्रोतों से जितना पैसा जमा कर सकता है ये उसके मुक़ाबले 10 गुना या फिर उससे अधिक है."

    अमेरिका पहले ही अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मुद्रा भंडारों तक तालिबान की पहुंच को रोकने के लिए कदम उठा रहा है.

    बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने कोष के संसाधनों तक अफ़ग़ानिस्तान की पहुंच को रोक दिया और कहा कि देश पर तालिबान के नियंत्रण के बाद अफ़ग़ान सरकार की मान्यता अब स्पष्ट नहीं रह गई है.

    मुद्रा कोष के एक प्रवक्ता ने कहा कि, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार की मान्यता को लेकर स्पष्टता नहीं है."

    इस साल की 23 अगस्त तक अफ़ग़ानिस्तान को आईएमएफ़ से 37 करोड़ डॉलर के संसाधन मदद के रूप में मिलने वाले थे. ये मदद आर्थिक संकट से निपटने की मुद्रा कोष की वैश्विक मुहिम का हिस्सा था.

    इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स एसेट्स (एसडीआर) के तहत आईएमएफ़ के संसाधनों का भी इस्तेमाल अब नहीं कर सकेगा.

    दूसरे दानकर्ताओं ने भी संकेत दिए हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान को दी जा रही आर्थिक मदद रोकने वाले हैं.

    इससे पहले अमेरिका के बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा था कि केंद्रीय बैंकों में मौजूद अफ़ग़ान सरकार के संसाधन तक तालिबान नहीं पहुंच सकेगा.

    इसके अलावा कांग्रेस से 17 सदस्यों ने अमेरिकी वित्त मंत्री जैनेट येलेन को पत्र लिख गुज़ारिश की है कि तालिबान को अमेरिका से किसी तरह की कोई आर्थिक मदद न दी जाए.

    पत्र में लिखा है, "एसडीआर के ज़रिए क़रीब आधा करोड़ डॉलर बिना शर्त एक ऐसे प्रशासन को दिए जाने की संभावना है जिसने इतिहास में अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आतंकी हमले करने वालों का साथ दिया है."

    इससे पहले अफ़ग़ान केंद्रीय बैंक ने कहा था कि अमेरिकी फ़ेडरल रिजर्व में मौजूद साल अरब डॉलर के उसके संसाधनों को फ्रीज़ कर दिया गया है.

    बीते सप्ताह देश छोड़ कर भागे अफ़ग़ान केंद्रीय बैंक के गवर्नर अजमल अहमदी ने कहा था कि एक सप्ताह पहले तक अफ़ग़ानिस्तान का कुल मुद्रा भंडार नौ अरब डॉलर का है.

    हालांकि उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत इसमें से अधिकतर पैसा अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड्स और सोने के रूप में रखा गया है.

    एक ट्वीट कर उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान अभी भी प्रतिबंधित संगठन है, हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस संसाधनों को फ्रीज़ कर दिया जाएगा और तालिबान इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा."

    अहमदी ने कहा कि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद रोक दी है जिसके कारण देश की मुद्रा अफ़ग़ानी लुढ़क कर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है.

    जून में आईएमएफ़ की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी जिसमें कहा गया था कि "तालिबान की आय का प्रमुख स्रोत आपराधिक गतिविधियां हैं, जिसमें अफीम का उत्पादन, नशीले पदार्थों की तस्करी, अपरहण करना, खनिजों का दोहन और तालिबान के कब्ज़े वाले इलाक़े से मिलने वाला टेक्स है."

    मनी ट्रांसफ़र कंपनी वेस्टर्न यूनियन ने अफ़ग़ानिस्तान को पैसे ट्रांसफर करने की सेवा को "अगले आदेश तक" रोक दिया है.

  3. तालिबान नेटो और अमेरिकी सहयोगियों को बना रहा है निशाना: यूएन रिपोर्ट

    संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि तालिबान अमेरिकी और नेटो सेनाओं के साथ काम कर चुके लोगों को तलाश करने की कोशिशों को तेज कर रहा है.

    इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र को खुफिया जानकारी देने वाली संस्था नॉरवेजियन सेंटर फॉर ग्लोबल एनालिसिस ने तैयार किया है.

    बीबीसी ने ये रिपोर्ट देखी है. रिपोर्ट में लिखा है, “तालिबान कुछ विशेष लोगों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के लिए उनके परिवारों को गिरफ़्तार कर रहा है, या गिरफ़्तार करने एवं जान से मारने की धमकी दे रहे हैं."

    इसमें लिखा है कि जो लोग, सेना, पुलिस या जाँच करने वाली इकाईयों में थे, उन पर ज़्यादा ख़तरा मंडरा रहा है.

    रिपोर्ट में लिखा है, “तालिबान बड़े शहरों पर कब्जा करने से पहले से इन लोगों के ठिकानों से जुड़ी जानकारी जुटा रहा था.”

    एयरपोर्ट जाते हुए लोगों की तलाशी

    इसके साथ ही बताया गया है कि चरमपंथी विदेशी नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट तक जाने की इजाज़त देते हुए भी इन 'ख़ास लोगों' की तलाश कर रहे हैं.

    ऐसे में काबुल एयरपोर्ट पर अभी भी अफ़रा तफ़री की स्थिति है.

    इस रिपोर्ट के मुताबिक़, तालिबान नई सरकार के साथ काम करने के लिए नए मुख़बिर भी बना रही है.

    हालांकि, तालिबान का कहना है कि वह बचाव अभियान का समर्थन करते हुए अपना वादा पूरा कर रहे हैं.

    तालिबान के प्रवक्ता ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया है कि तालिबान विदेशी सेनाओं को काबुल एयरपोर्ट से जाने देने में मदद करके अपना वादा पूरा कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, “हम सिर्फ विदेशियों को सुरक्षित रास्ता नहीं दे रहे हैं, बल्कि अफ़ग़ान लोगों को भी सुरक्षित रास्ता दे रहे हैं. हम एयरपोर्ट पर अफ़ग़ानों, विदेशियों और तालिबानियों में तीखी बहस से लेकर हर तरह की हिंसा को रोक रहे हैं.”

    हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तालिबान लोगों को ट्रेवल वीज़ा होने के बाद भी काबुल एयरपोर्ट नहीं जाने दे रहा है.

    हाल ही में एक मामला सामने आया था जब ऑस्ट्रेलियाई सेना के साथ काम करने वाले एक इंटरप्रिटर को तालिबानी लड़ाकों की ओर से पैर में गोली मार रही थी.

    इंटरप्रिटर एक अफ़ग़ान व्यक्ति थे जो कि ऑस्ट्रेलियाई दल के साथ काबुल एयरपोर्ट पर फ़्लाइट में बैठने जा रहे थे.

  4. चीन ने पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान मामले पर दी सलाह, तुर्की से भी की बात

    चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि चीन और पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान में एक स्थिर सत्ता हस्तांतरण को समर्थन देने के लिए आपस में बातचीत और समन्वय को मज़बूत करना चाहिए.

    चीनी मंत्री ने बुधवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के अलावा तुर्की के विदेश मंत्री से भी बात की है.

    चीन के सरकार समर्थक अख़बार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार वांग यी ने क़ुरैशी से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित "लोकतांत्रिक परिवर्तन" का काम आख़िरकार अवास्तविक सिद्ध हुआ जिससे वहाँ अनचाहे परिणाम निकले हैं. उन्होंने कहा कि इससे सबक़ लेना चाहिए.

    उन्होंने साथ ही कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के ज़िम्मेदार पड़ोसी होने के नाते चीन और पाकिस्तान को आपस में बातचीत और तालमेल को सशक्त करना चाहिए और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए.

    यी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में चीन और पाकिस्तान के दूतावास सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और दोनों पक्षों को अपने दूतावास कर्मियों व संस्थाओं की सुरक्षा के लिए तालिबान से बात करनी चाहिए.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों की ये अपेक्षा है कि वहाँ शांति हो.

    चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान चीन के साथ संपर्क को मज़बूत करने के लिेए तैयार है और चाहता है कि अफ़ग़ानिस्तान के पड़़ोसी देशों को लेकर एक बहुपक्षीय समन्वय की व्यवस्था बनाई जाए.

    चीनी विदेश मंत्री ने तुर्की के अपने समकक्ष मेवलुट कावुसोग्लु से भी फ़ोन पर बात की.

    शिन्हुआ के अनुसा तुर्की के विदेश मंत्री ने उनसे कहा कि वो चीन की राय को समझते हैं और तुर्की ये चाहता है कि चीन से क़रीबी तालमेल रखे जिससे कि अफ़ग़ानिस्तान में जल्द से जल्द स्थितियाँ सही दिशा में बढ़ सकें.

  5. तेज प्रताप के साथ 'तनाव' पर तेजस्वी बोले, 'लालू जी और मैं सब ठीक कर देंगे'

    राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को अपने भाई तेज प्रताप यादव के साथ जारी तनातनी पर कहा है कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव और वह सब ठीक कर लेंगे.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “सभी की राय अलग होती है. मैं और पार्टी अध्यक्ष यहां मौजूद हैं. हम सब ठीक कर देंगे.”

    ये पहला मौका नहीं है जब राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव इस तरह आमने-सामने आए हों.

    लेकिन इस बार दोनों के बीच तनातनी की वजह तेजस्वी यादव द्वारा तेज प्रताप यादव के करीबी आकाश यादव को राजद (छात्र) पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना था.

    तेज प्रताप यादव ने बुधवार को ट्वीट करके लिखा था, “प्रवासी सलाहकार से सलाह लेने में अध्यक्ष जी ये भूल गए कि पार्टी संविधान से चलता है और राजद का संविधान कहता है कि बिना नोटिस दिए आप पार्टी के किसी पदाधिकारी को पदमुक्त नहीं कर सकते. आज जो हुआ वो राजद के संविधान के ख़िलाफ़ हुआ..."

    इसके बाद तेज प्रताप यादव ने गुरुवार यानी आज ट्वीट करके लिखा है, “जिस प्रवासी सलाहकार के इशारों पर पार्टी चल रही वो हरियाणा में अपने परिवार से किसी को सरपंच नहीं बनवा सकता वो ख़ाक मेरे अर्जुन को मुख्यमंत्री बनायेगा. वो प्रवासी सलाहकार सिर्फ लालू परिवार और राजद में मतभेद पैदा कर सकता है.”

    हालांकि, तेजस्वी यादव की ओर से इस मुद्दे पर ट्विटर के माध्यम से कोई टिप्पणी नहीं आई है.

    ऐसा माना जाता है कि इस विवाद के केंद्र में एक पोस्टर है जिसमें आकाश यादव द्वारा तेज प्रताप यादव को प्रमुखता दी गयी थी जिससे तेजस्वी यादव नाराज़ हो गए,

    इसी बीच तेज प्रताप यादव के करीबी आकाश यादव को उनके पद से हटाने वाले जगदानंद सिंह ने एएनआई से बात की है.

    उन्होंने कहा है, "मुझे नहीं पता है कि वह नाराज़ हैं. शायद उन्हें कोई ग़लतफहमी हुई है. वह एक ज़रा सी बात पर इतना बड़ा पहाड़ खड़ा करना चाहते हैं."

    सिंह ने आकाश यादव की जगह राजद छात्र इकाई का अध्यक्ष पटना यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे गगन कुमार को बना दिया है.

    हाल ही में आकाश यादव ने उस पोस्टर को भी शेयर किया है जिसे विवाद की जड़ माना जा रहा है.

  6. अफ़ग़ानिस्तान में आज फिर हुए तालिबान विरोधी प्रदर्शन, काबुल में भी निकले लोग

    अफ़ग़ानिस्तान के कई शहरों में आज भी लोगों ने अपने देश का झंडा लेकर प्रदर्शन किए हैं. इनमें राजधानी काबुल और पूर्वी शहर जलालाबाद भी शामिल है.

    इस दौरान गोलियाँ चलाए जाने और लोगों के मारे जाने की भी ख़बर आ रही मगर अभी उनकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

    ये प्रदर्शन ऐसे दिन हो रहे हैं जब अफ़ग़ानिस्तान ब्रिटेन से अपनी आज़ादी की याद में अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए राजधानी काबुल के एक वीडियो में दिखता है कि बड़ी संख्या में लोग देश का झंडा उठाए नारा लगा रहे हैं - "हमारा झंडा, हमारी पहचान."

    इनमें महिलाएँ भी शामिल थीं. वीडियो में एक महिला अपने कंधों पर झंडे को लपेटी दिखती है. कुछ लोग नारे लगा रहे हैं- "अल्लाह-ओ-अकबर."

    तालिबान ने इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा है.

    उधर, कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद से एक रैली के दौरान कई लोगों के मारे जाने की भी ख़बर आ रही है.

    मगर ये स्पष्ट नहीं है कि ये लोग गोलीबारी में मारे गए या वहाँ कोई भगदड़ हुई थी.

    बुधवार को भी असदाबाद के अलावा जलालाबाद और खोस्त शहरों में लोगों ने अफ़ग़ान झंडे के साथ प्रदर्शन किए थे.

    जलालाबाद में तालिबान की गोलीबारी में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत भी हो गई थी.

    अफ़ग़ानिस्तान के प्रथम उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है- "हमारे झंडे को उठाने वालों को सलाम, वे देश की इज़्ज़त के लिए खड़े हुए हैं. सालेह देश में तालिबान के विरोध में लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं."

    उन्होंने मंगलवार को लिखा था कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की ग़ैर मौजूदगी में वही तालिबान के 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' हैं.

  7. पाकिस्तान बोला- अफ़ग़ानिस्तान से एक भी मुहाजिर नहीं आया, भारत ग़लतबयानी कर रहा

    पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के राजधानी काबुल समेत ज़्यादातर हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने के बाद से अब तक उनके यहाँ एक भी शरणार्थी नहीं आया है.

    पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख़ रशीद ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि पाकिस्तान और अफ़़ग़ानिस्तान की डूरंड सीमा पर बिल्कुल शांति है.

    उन्होंने कहा, "मैं भारतीय मीडिया की ख़बरों की तरदीद (खंडन) करता हूँ, कोई अफ़ग़ान मुहाजिर पाकिस्तान नहीं आया. भारत, पाकिस्तान की सीमा को लेकर जो कह रहा है, वो सौ फ़ीसद ग़लतबयानी है. तोर्खम और चमन - दोनों बोर्डर शांत हैं. तो ये कहना कि मुहाज़िर आ रहे हैं, ग़लत है. हमारे लिए अभी तक कोई मसला नहीं आया है.

    रशीद ने कहा, "बोर्डर पर ए-वन हालात हैं. सिविल सुरक्षाकर्मी भी हैं, सैन्य सुरक्षाकर्मी भी. किसी किस्म की कोई रूकावट नहीं है, तोर्खम में भी और चमन में भी. ना कोई मुहाजिर आ सकता है, ना हमने उनके लिए कोई इंतज़ाम किया है."

    उन्होंने बताया कि 7 अगस्त से अब तक अफ़ग़ानिस्तान से 600 से ज़्यादा पाकिस्तानी नागरिक लौटे हैं और अगले दो दिनों में वो सारे लोग लौट आएँगे जो वहाँ नहीं रहना चाहते.

    अफ़ग़ानिस्तान के लाखों शरणार्थी पहले से ही पाकिस्तान में रह रहे हैं और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा बदलाव के समय में पाकिस्तानी नेतृत्व इसे लेकर बयान देता रहा है.

    हालाँकि, पाकिस्तान ने इसे लेकर कोई आलोचना नहीं की है.

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने रविवार को तुर्की के दौरे पर इस बारे में कहा था- "पिछले तीन से चार दशक से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान में रह रहे हैं, और लाखों शरणार्थी तुर्की में हैं. ये दिखाता है कि हम दोनों देशों और हमारे लोगों का दिल बड़ा है."

    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के अनुसार इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में चार लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों से भाग चुके हैं.

    हालाँकि, अफ़ग़ानिस्तान से बहुत कम ही लोग बाहर निकल सके हैं, वो अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं.

    यूएनएचसीआर का अनुमान है कि दुनिया भर में 26 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी हैं. इनमें 14 लाख पाकिस्तान में हैं और 10 लाख ईरान में.

  8. योगी आदित्यनाथ ने भी यूपी में भी सरकारी कर्मचारियों का डीए 28% बढ़ाया

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा में एलान किया है कि उनकी सरकार राज्य के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों का महँगाई भत्ता 28 फीसदी तक बढ़ाने जा रही है.

    डियरनेस अलाउंस में ये बढ़त जुलाई 2021 से लागू होगी. इसके साथ ही आंगनवाड़ी वर्करों और सहायकों (AWWs/AWHs) को मिलने वाले मानदेय में भी इज़ाफा किया जाएगा.

    इससे पहले केंद्र सरकार जुलाई महीने में ही केंद्रीय कर्मचारियों के डीए को 28 फीसदी तक बढ़ा चुकी है.

    और इसके बाद धीरे - धीरे कुछ राज्यों ने डीए को 17 फीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी कर दिया है.

    उत्तर प्रदेश से पहले जम्मू – कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, और झारखंड आदि राज्य डीए को 28 फीसदी तक ला चुके हैं.

    लेकिन तमिलनाडु सरकार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है जिसकी वजह से वहां पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं.

    तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि वह अगले साल 1 अप्रैल 2022 से ऐसा करने में सक्षम है.

    'माफिया की ज़मीन पर बनेंगे ग़रीबों के घर'

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माफिया से जब्त की गयी ज़मीन पर ग़रीबों और दलितों के लिए घर बनाए जाएंगे.

    उन्होंने कहा, “सरकार ग़रीबों और दलितों के लिए माफिया से जब्त की गयी ज़मीन पर घर बनवाएगी. हम अपने साथ माफिया लेकर नहीं चलते. हम उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हैं.”

    इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वकीलों के कल्याण के लिए कोष की व्यवस्था हो गयी है.

    युवाओं और किसानों से जुड़ी घोषणा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पिछले चार सालों में गन्ना किसानों को एरियर के रूप में 1 लाख करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. इसके साथ ही सरकार एक योजना के तहत चुने जाने वाले छात्रों को स्मार्टफोन और टैबलेट देगी जिससे वे डिज़िटल रिसोर्स का इस्तेमाल कर सकें.

    तीन हज़ार करोड़ की इस स्कीम के तहत एक करोड़ बच्चे चुने जाएंगे और उन्हें पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन और टैबलेट दिया जाएगा. हम छात्रों को कम से कम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भत्ता भी देंगे.”

    'तालिबान समर्थक एक्सपोज़ होने चाहिए'

    योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा है कि तालिबान का समर्थन करने वालों को एक्सपोज़ किया जाना चाहिए.

    उन्होंने कहा,“पंचायत चुनाव में 46 फीसदी महिलाएं चुनकर आई हैं, ब्लॉक अध्यक्ष चुनाव में 56 फीसदी महिलाएं चुनकर आई हैं. कुछ लोग तालिबान का समर्थन कर रहे हैं. वहां महिलाओं और बच्चों के साथ क्या क्रूरता की जा रही है. परन्तु कुछ लोग बेशर्मी से तालिबान का समर्थन कर रहे हैं. इन सभी के चेहरे एक्सपोज किए जाने चाहिए."

    कोरोना पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह पहली महामारी है जिसमें एक भी गरीब भूखा नहीं मरा. हमें महामारी को तो स्वीकार करना होगा नहीं तो बीमारी के उपचार के लिए और बीमारी से बचाव के लिए कोई अभियान आगे नहीं बढ़ पाएगा."

    टेस्टिंग कैपिसिटी पर उन्होंने कहा है कि आज उत्तर प्रदेश में कोविड के लिए 4 लाख टेस्ट प्रतिदिन करने की क्षमता विकसित कर ली है. अब तक 7 करोड़ टेस्ट उत्तर प्रदेश में किए जा चुके हैं.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले एक मौके पर दूसरी लहर के दौरान कोरोना की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के काम की सराहना कर चुके हैं.

  9. जम्मू-कश्मीर के राजौरी में चरमपंथियों से मुठभेड़, सैन्य अधिकारी की मौत

    मोहित कंधारीजम्मू - कश्मीर से

    जम्मू संभाग के सीमावर्ती ज़िले राजौरी में गुरुवार सुबह थन्नामंडी इलाके में सुरक्षाबलों और चरमपंथियों के बीच शुरू हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड अफसर (JCO) और चरमपंथी की मौत हो गयी है.जम्मू में सेना प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंदर आनंद ने बयान जारी कर कहा है कि, " गुरुवार सुबह राजौरी ज़िले के थन्नामंडी इलाके में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए एक तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे चरमपंथियों ने अचानक से सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी".

    सुरक्षाबलों ने चरमपंथियों को घेरने के लिए पुलिस एवं सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों को मौके पर बुलाकर जवाबी कार्यवाही शुरू की थी.

    इस मुठभेड़ में अभी तक गंभीर रूप से घायल एक जूनियर कमीशंड अफसर की मौत हो गयी है.

    सेना प्रवक्ता ने कहा है कि घायल जवान को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया .फिलहाल दोनों ओर से गोलीबारी का सिलसिला जारी है. जम्मू में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने एक अलग बयान जारी कर इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि मुठभेड़ में अब तक एक चरमपंथी भी मारा गया है.सुरक्षाबलों के साथ संघर्ष में बीती 6 अगस्त को इसी इलाके में दो चरमपंथियों की मौत हुई थी.

  10. भारत क्या तालिबान के संपर्क में है? विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया जवाब

    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में होने वाली घटनाओं पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और उसका ध्यान युद्धग्रस्त अफ़ग़ानिस्तान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है.

    एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में ये बातें कहीं.

    उनसे ये भी पूछा गया कि क्या भारत का हाल के समय में तालिबान से कोई संपर्क हुआ है.

    उन्होंने साफतौर पर जवाब ना देते हुए कहा, “इस समय हम काबुल में बदलती स्थितियों को देख रहे हैं. तालिबान और इसके प्रतिनिधि काबुल पहुंच गए हैं इसलिए मुझे लगता है कि हमें चीजों को वहां से शुरू करने की जरूरत है.”

    विदेश मंत्री से पूछा गया कि भारत तालिबान नेतृत्व को कैसे देखता है और उसके साथ कैसे आगे बढ़ेगा. इसके जवाब में उन्‍होंने कहा, ''यह अभी शुरुआती दिन हैं.''

    क्‍या भारत अफ़ग़ानिस्‍तान में निवेश और अन्य संबंध जारी रखेगा? इसके जवाब में उन्होंंने कहा, ''अफ़ग़ानिस्‍तान के लोगों के साथ ऐतिहासिक संबंध बने हुए हैं.''

    उन्‍होंने कहा, “इससे आने वाले दिनों में हमारा दृष्टिकोण तय होगा. मुझे लगता है कि यह शुरुआती दिन हैं और हमारा फोकस वहां मौजूद भारतीय लोगों की सुरक्षा पर है.”

  11. अगर आप अभी अभी बीबीसी हिंदी के लाइव पन्ने के साथ जुड़ रहे हैं तो जानिए अब तक क्या-क्या हुआ-

    • राजधानी काबुल में आज अपेक्षाकृत शांति का माहौल है और अधिकतर लोग घरों के भीतर हैं. हालांकि बीबीसी अफ़ग़ान सेवा के संवाददाता का कहना है कि आज सवेरे उन्होंने गोली चलने की आवाज़ें सुनी है.
    • समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने तालिबान के प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि रविवार से लेकर अब तक काबुल हवाई अड्डे पर कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है.
    • अमरिकियों समेत दूसरे देश के नागरिकों और ख़तरे में मौजूद अफ़ग़ान नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के लिए काबुल हवाई अड्डे से लगातार विमानों की उड़ानें जारी हैं.
    • तालिबान के काबुल हवाई अड्डे की तरफ जा रहे अफ़ग़ानों को रोकने की ख़बरें मिल रही हैं. इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिनके पास यात्रा के लिए वैध दस्तावेज़ हैं.
    • काबुल हवाई अड्डा फिलहाल अमेरिकी सैनिकों के नियंत्रण में है लेकिन हवाई अड्डे तक जाने वाली सड़कों और नाकों पर तालिबान के हथियारबंद लड़ाके मौजूद हैं.
    • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिकी सरकार अपने किसी भी नागरिक को अफ़ग़ानिस्तान में पीछे नहीं छोड़ेगी. उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित अफ़ग़ानिस्तान से निकालने के लिए अमेरिकी सेना 31 अगस्त के बाद भी वहां पर अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी.
    • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने कोष के संसाधनों तक अफ़ग़ानिस्तान की पहुंच को ये कहते हुए रोक दिया है कि "अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार की मान्यता को लेकर स्पष्टता नहीं है."
    • ब्रितानी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली मानवीय राहत को दोगुना कर दिया है. ब्रिटेन ने अपने सहयोगियों से अपील की है कि अधिक संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थियों को स्वीकार करें.
    • देश छोड़ कर भागे अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पनाह ली है. एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि वो देश छोड़ कर नहीं भागे हैं बल्कि रक्तपात को रोकने के लिए उन्होंने ये कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी हो सके वो अफ़ग़ानिस्तान लौटेंगे.
  12. ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल एयरपोर्ट पर कितने लोगों की मौत हुई, तालिबान ने बताया

    तालिबान के एक अधिकारी ने बताया है कि रविवार से अब तक काबुल हवाई अड्डे पर अब तक कुल 12 लोगों की मौत हुई है.

    नाम न बताने की शर्त पर तालिबान के इस अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ये मौतें गोली लगने और एयरपोर्ट पर मची भगदड़ के कारण हुई हैं.

    तालिबान अधिकारी ने साथ ही काबुल हवाई अड्डे पर एकत्र लोगों से अपील की कि यदि उनके पास यात्रा के लिए वैध दस्तावेज़ न हों तो वो एयरपोर्ट के सामने भीड़ न बढ़ाएं. उन्होंने कहा कि "हवाई अड्डे पर तालिबान किसी को नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहता."

    इससे पहले अमेरिकी वायुसेना ने भी बताया था कि सोमवार को लोगों की मौत हुई थी और इस बारे में जाँच की जा रही हैै. मगर उसने मृतकों की संख्या नहीं बताई थी.

    अमेरिकी वायुसेना ने कहा था कि उनका मालवाहक विमान जब क़तर में उतरा तो उसके पहियों से मानव अवशेष मिले.

    15 अगस्त की देर शाम रविवार को तालिबान ने राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद बड़ी संख्या में अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर बाहर जाने की इच्छा रखने वाले लोग एयरपोर्ट पर एकत्र होने लगे थे. इस कारण वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया था.

    उस दिन सैकड़ों लोग काबुल हवाई अड्डे के भीतर चले गए और कई लोगों के अमेरिकी विमान के पहियों और पंखों पर चढ़ जाने की भी तस्वीरें आईं. ये भी ख़बर आई कि कुछ लोग उड़ते विमान से नीचे भी गिर गए.

    बाद में अमेरिकी सेना ने हवाई अड्डे का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. फ़िलहाल हवाई अड्डे पर अभी भी अमेरिकी सेना तैनात हैं जबकि हवाई अड्डे तक पहुंचने वाली सड़कों पर तालिबान के लड़ाके गश्त लगा रहे हैं.

    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हवाई अड्डे के सामने हथियारबंद लोग मौजूद हैं जो उन लोगों को प्रवेश करने से भी रोक रहे हैं जिनके पास यात्रा के लिए वैध दस्तावेज़ हैं.

  13. ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से झटका, सीबीआई और एसआईटी करेगी चुनाव बाद हिंसा की जाँच

    प्रभाकर मणि तिवारी

    कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

    पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा की सुनवाई कर रहे कलकत्ता हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को ममता बनर्जी सरकार को झटका देते हुए हत्या और अपहरण जैसे गंभीर मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने और कम गंभीर मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच बल (एसआईटी) के गठन का फैसला किया है.

    इस मामले की सुनवाई तीन अगस्त को पूरी हो गई थी. मुख्य न्यायधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच जजों की वृहत्तर पीठ ने आज इस मामले का फैसला सुनाया.

    इससे पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक टीम ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर हिंसा पर अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

    राज्य सरकार ने उस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे. लेकिन हाईकोर्ट ने इस आरोप को खारिज कर दिया है.

    अदालत ने राज्य सरकार को हिंसापीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है.

    तीन-सदस्यीय एसआईटी का गठन करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच का निर्देश दिया है.

    राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद कई इलाकों में हिंसा और आगजनी की खबरें सामने आई थीं.

    बीजेपी ने इस हिंसा के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराते हुए अपने दर्जनों कार्यकर्ताओं के मारे जाने और हज़ारों के बेघर होने का दावा किया था.

    इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं भी दायर की गई थीं. उन पर सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने बीते 18 जून के अपने फैसले में हिंसा के मामलों की जांच आयोग से कराने का निर्देश देते हुए सरकार को इसमें सहयोग करने को कहा था.

    राज्य सरकार ने अदालत के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी. लेकिन उसे खारिज करते हुए अदालत ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी.

    पांच जजों की वृहत्तर पीठ ने कहा था कि पहले तो राज्य सरकार हिंसा के आरोपों को स्वीकार नहीं कर रही है. लेकिन अदालत के पास ऐसी कई घटनाओं के सबूत हैं.

    अदालत के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंसा के कथित मामलों की जांच के लिए आयोग के सदस्य राजीव जैन की अध्यक्षता में एक सात-सदस्यीय टीम का गठन किया था.

    इस टीम ने 20 दिनों के दौरान राज्य के 311 स्थानों का दौरा कर हिंसा से प्रभावित लोगों से बातचीत की थी और 13 जुलाई को अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले बीजेपी पर हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने और फर्जी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ जगह छिटपुट हिंसा हुई है.

  14. नीतीश कुमार ने बताया, पीएम मोदी ने जाति जनगणना पर मिलने बुलाया

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जानकारी दी है कि जातिवार जनगणना के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 23 अगस्त को मुलाक़ात का समय दिया है.

    नीतीश कुमार ने ट्वीट करके समय देने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है.

    बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश कुमार से मिलकर यह माँग उठाई थी की इस मामले पर प्रधानमंत्री के साथ बातचीत होनी चाहिए.

    मुलाक़ात का समय माँगने के लिए नीतीश कुमार ने इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था.

    बिहार के अलावा कई राज्यों के विपक्षी राजनीतिक दल जातिवार जनगणना की माँग लगातार उठा रहे हैं जिनमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी शामिल हैं.

  15. पाकिस्तान ने अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए बंद की तोर्ख़म सीमा

    सारा अतीक़

    बीबीसी संवाददातात, पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा से

    ऊपरी तौर पर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तोर्ख़म सीमा पर सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन क़रीब से देखने पर पता चलता है कि अब यहां पहले जैसी बात नहीं रही.

    दोनों मुल्कों के बीच सबसे व्यस्त रहने वाली ये सीमा अब तालिबान के नियंत्रण में है.

    अफ़ग़ानिस्तान की सीमा की तरफ़ लगे तीन रंग वाले देश के रष्ट्रीय झंडे को उतार दिया गया है और उसकी जगह इस्लामिक अमीरात के सफ़ेद झंडे ने ले ली है. साथ ही सीमा पर तैनात अफ़ग़ान सैनिकों की जगह अब तालिबान के लड़ाकों ने ले ली है.

    तालिबान अफ़ग़ानिस्तान गणराज्य को 'इस्लामिक अमीरात का अफ़ग़ानिस्तान' कहता है. 20 साल पहले यहां सत्ता में रही तालिबान सरकार ने देश को ये नाम दिया था.

    अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर जाना चाह रहे सैंकड़ों नागरिक कुछ दिनों पहले से इस सीमा पर जमा हो गए थे. सीमा पार करने की चाह में वो कई दिनों तक यहीं जमे रहे थे.

    लेकिन काबुल पर तालिबान का कब्ज़ा होने के बाद तालिबान लड़ाकों ने इस सीमा पर कब्ज़ा कर लिया.

    सीमा पर होने वाले बदलाव की आशंका के मद्देनज़र पाकिस्तान ने पहले ही इस सीमा को बंद कर दिया था, लेकिन कुछ वक्त के बाद पैदल जाने वालों और व्यापार के लिए सीमा को फिर से खोला गया.

    आम तौर पर रोज़ाना छह से सात हज़ार लोग इस सीमा से होते हुए दोनों मुल्कों के बीच आते-जाते हैं, लेकिन अब यहां बमुश्किल 50 लोग ही दिख रहे हैं.

    सीमा पार करने की प्रक्रिया भी अब पहले के मुक़ाबले अधिक लंबी हो गई है.

    पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि वो नहीं चाहते कि आम नागरिकों के वेश में चरमपंथी देश में प्रवेश करें. इस कारण सीमा पर चेकिंग की प्रक्रिया को पहले से अधिक कड़ा कर दिया गया है.

    दशकों से तोर्ख़म सीमा पाकिस्तान में आ रहे अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए अहम मार्ग बना हुआ है.

    लेकिन अब पिछले कुछ दिनों में इस सीमा से बेहद कम संख्या में शरणार्थी पाकिस्तान में प्रवेश कर पाए हैं.

    एक तरफ़ पाकिस्तान ने उसके यहां आने वालों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है तो दूसरी तरफ़ तालिबान भी लोगों के देश से बाहर जाने को रोक रहा है.

    फ़िलहाल केवल व्यापारी या यात्रा के लिए वैध दस्तावेज़ों के साथ सफ़र कर रहे लोगों को ही सीमा पार करने की इजाज़त दी जा रही है.

    ऐसा नहीं कि केवल इन कारणों से अफ़ग़ान शर्णार्थियों की संख्या कम हुई है.

    हाल के सालों में सीमा पर हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है जिसके बाद पाकिस्तान एक तरह से अफ़ग़ानिस्तान से सटी अपनी सीमाओं को और मज़बूत कर रहा है.

    अफ़ग़ानिस्तान से सटी सीमा के सभी नाकों पर पाकिस्तान ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है जिसके बाद अब अफ़ग़ानों के लिए बिना इजाज़त सीमा पार करना आसान नहीं रह गया है.

    जून 2016 से पाक सरकार ने पाकिस्तान आने की इच्छा रखने वाले सभी अफ़ग़ान नागरिकों के लिए वैध पासपोर्ट और वीज़ा को बाध्यकारी बना दिया था.

    हाल के दिनों में सीमा पर आ रहे कई अफ़ग़ान नागरिक सीमा पार नहीं कर पाए हैं क्योंकि उसके पास वैध दस्तावेज़ नहीं थे.

    तोर्ख़म के नज़दीक बसे एक बाज़ार में अक्सर ऐसे लोगों की भीड़ रहती है जो अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर पाकिस्तान आ गए हैं.

    इस बाज़ार में खाने की दुकान चलाने वाले ओबेद अली कहते हैं कि सीमा पर तालिबान के कब्ज़े के बाद उन्होंने किसी अफ़ग़ान शरणार्थी को बाज़ार में नहीं देखा.

    हाल में संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर के मुल्कों से अपील की है वो अफ़ग़ानिस्तान से भाग रहे लोगों के लिए अपनी सीमाएं खोलें.

    कऱीब तीस लाख अरब अफ़ग़ान शरणार्थी दशकों से पाकिस्तान में रह रहे हैं जिनमें से आधे अवैध तरीके से यहां रह रहे हैं.

    लेकिन अब पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि शरणार्थियों की संख्या की भी एक सीमा और अब वो इस युद्धग्रस्त देश से और अधिक शरणार्थियों को प्रवेश की इजाज़त नहीं दे सकता.

  16. काबुल में फंसे इंटरप्रेटर ने मदद के लिए ब्रितानी प्रधानमंत्री से लगाई गुहार

    ब्रितानी सेना के लिए इंटरप्रेटर (दुभाषिये) का काम करने वाले अहमद ने मदद के लिए ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से गुहार लगाई है.

    उन्होंने प्रधानमंत्री से गुज़ारिश की है कि उनके और उनके परिवार को देश से बाहर निकाला जाए.

    अहमद का कहना है कि अफ़ग़ान रीलोकेशन असिस्टेंस पॉलिसी के तहत उन्हें बीते सप्ताह ब्रिटेन आने की इजाज़त मिल गई थी, लेकिन उसके दूसरे ही दिन काबुल पर तालिबान ने कब्ज़ा कर लिया. (सुरक्षा के लिहाज़ से पहचान गुप्त रखने के लिए नाम बदल दिया गया है.)

    अहमद कहते हैं कि अब वो, उनकी पत्नी जो एक अस्पताल में डॉक्टर हैं और उनका छह साल का बेटा अफ़ग़ानिस्तान के 'भयंकर' हालातों के बीच फंस गए हैं.

    उन्होंने बीबीसी को बताया, "काबुल के तालिबान के हाथों जाने के बाद हमारे लिए ज़िन्दगी एक तरह से ख़त्म हो गई है. हम जैसे एक खाई में फंस गए हैं."

    तालिबान ने कहा है कि वो बदले की भावना से प्रेरित हो कर किसी के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठाएगा. लेकिन अहमद कहते हैं कि उन्हें तालिबान के वादे पर भरोसा नहीं है.

    वो कहते हैं, "आप जानते हैं तालिबान भरोसे के काबिल नहीं हैं. अगर उन्होंने मुझे तलाश लिया तो मुझ पर दया नहीं दिखाएंगे. मैंने ब्रितानी फ़ौज के साथ मिल कर गश्त लगाने का काम किया है और उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर मैंने कई बार विशेष अभियानों में हिस्सा भी लिया है."

    "वो मुझे पहचानते हैं और मैं बाहर निकला तो मेरी जान को बड़ा ख़तरा हो सकता है. मुझ पर दया नहीं दिखाई जाएगी. ये तय है कि मुझे मार दिया जाएगा."

    अहमद ने तीन साल तक अफ़ग़ानिस्तान में ब्रितानी फ़ौज के साथ काम किया है. वो कहते हैं कि संघर्ष के दौरान तालिबान लड़ाके इंटरप्रेटर की हत्या कर देते थे क्योंकि वो मानते थे कि वो विदेशी सेना के 'आंख और कान हैं' और उन्हें सारी ख़बरें देते हैं.

    जब अहमद से पूछा गया कि परिवार की स्थिति के बारे में वो ब्रितानी प्रधानमंत्री से क्या कहना चाहते हैं तो उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि वो मेरे और मेरे परिवार को सुरक्षित यहां से बाहर निकाल लें."

  17. तालिबान ने भारत के साथ व्यापार किया बंद - भारत

    अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा स्थिति का असर अब उसके पड़ोसी मुल्कों पर पड़ने लगा है. भारत ने कहा है कि तालिबान ने उसके साथ सीमापार व्यापार बंद कर दिया है.

    आम तौर पर दोनों मुल्कों के बीच मालवाहक गाड़ियां पाकिस्तान के रास्ते से होते हुए गुज़रती हैं.

    फ़ेडेरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइज़ेशन (एफ़आईईओ) ने कहा है कि गाड़ियों की आवाजाही अब रोक दी गई है जिस कारण लाखों डॉलर के सामान का आयात और निर्यात रुक गया है.

    भारत के लिए व्यापार के मामले में अफ़ग़ानिस्तान उसका सबसे बड़ा सहयोगी है. अफ़ग़ानिस्तान में डैम, स्कूल और सड़कों के विकास के लिए भारत ने लाखों डॉलर का निवेश किया है.

    एफ़आईईओ के महानिदेशक डॉक्टर अजय सहाय ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, "अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर हम लगातार नज़र बनाए हुए हैं. वहां से आयात किया जाने वाला सामान पाकिस्तान के रास्ते हो कर भारत आता है. फ़िलहाल तालिबान से पाकिस्तान की तरफ़ जाने वाले सभी मालवाहक गाड़ियों को रोक दिया है. कहा जाए तो एक तरह से आयात पूरी तरह ठप पड़ गया है."

    अफ़ग़ानिस्तान की निर्यात रणनीति पर इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में ड्राई फ़्रूट के बड़े आयातकों में भारत एक है.

    ड्राई फ़्रूट आयात करने के मामले में अमेरिका, जर्मनी और हॉन्ग कॉन्ग के बाद भारत चौथे नंबर पर है.

    रिपोर्ट के अनुसार भारत बड़ी मात्रा में ड्राई फ़्रूट का आयात अफ़ग़ानिस्तान से करता है.

    भारत के अलावा पाकिस्तान भी अपनी ड्राई फ़्रूट की ज़रूरत यहीं से पूरी करता है.

    रिपोर्ट के अनुसार बादाम, किशमिश, पिस्ता, अंजीर निर्यात के मामले में भारत अफ़ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा खरीदार है.

  18. ऑस्ट्रेलिया के लिए काम करने वाले अफ़ग़ान इंटरप्रेटर को एयरपोर्ट के बाहर गोली मारी गई

    ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई सेना के लिए काम करने वाले अफ़ग़ान इंटरप्रेटर (दुभाषिया) को एयरपोर्ट के बाहर एक नाके पर गोली मारी गई है.

    उन पर मंगलवार गोली चलाई गई थी जब वो रात को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने वाली एक उड़ान के लिए काबुल हवाई अड्डे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे.

    'एसबीएस' और 'द गार्डियन ऑस्ट्रेलिया' में आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि डॉक्टर गोली लगे एक व्यक्ति का इलाज कर रहे हैं जिन्हें पैर में गोली लगी है.

    उनकी कहानी काबुल हवाई अड्डे के बाहर हुई हिंसा और भगदड़ की अनेकों कहानियों में से एक है. बड़ी संख्या में अफ़ग़ानिस्तान में फंसे विदेशी नागरिक और अफ़ग़ान नागरिक देश छोड़ कर बाहर जाने की कोशिश कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में काबुल हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए उन्हें कई नाकों से हो कर गुज़रना पड़ रहा है जिन पर तालिबान के लड़ाके पहरा दे रहे हैं.

    इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि ये लड़ाके केवल विदेशी नागरिकों को ही जाने का रास्ता दे रहे हैं.

    जिस व्यक्ति को गोली मारी गई है उनका कहना है कि वो ऑस्ट्रेलिया के लिए निकलने वाली पहली सैन्य उड़ान में जाने वाले थे, लेकिन उन्हें एक नाके पर गोली मार दी गई.

    एसबीएस के अनुसार उन्होंने साल 2010 और 2011 के बीच उरुज़्गान में ऑस्ट्रेलियाई सेना के लिए काम किया था.

    ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि की है कि लोगों को बाहर निकालने के लिए चलाई गई पहली उड़ान के ज़रिए उसने अफ़ग़ानिस्तान से 26 लोगों को बाहर निकाला है. हालांकि इस विमान में कुल 128 लोगों के बैठने की जगह थी.

    इधर अमेरिका ने कहा है कि वो हर उड़ान में 300 लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है.

  19. अफ़ग़ानिस्तान: इस फ़ैसले की क़ीमत हर हाल में चुकानी होती- बाइडन

    अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना से बाहर निकलने और उसके तालिबान के कब्ज़े में जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बार फिर अपने फ़ैसले का बचाव किया है.

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के बाद पहली बार दिए एक इंटरव्यू में बाइडन ने कहा कि इसके लिए अफ़ग़ान सरकार और अफ़ग़ान सुरक्षाबल ज़िम्मेदार हैं.

    बुधवार को एबीसी न्यूज़ के संवाददाता जॉर्ज स्टीफ़ानोपोलस को दिए इंटरव्यू में बाइडन ने कहा कि "अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सरकार का हिस्सा बनने को लेकर उम्मीद की जा रही थी कि इसमें अभी और कुछ महीने लगेंगे."

    उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से यही कहा गया था कि साल के आख़िर तक ऐसा होने की संभावना है. जॉर्ज ने बाइडन से सवाल किया था कि उन्होंने जुलाई में ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सत्ता के आने की आशंका 'लगभग नामुमकिन है.'

    अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा स्थिति के बारे में बाइडन ने कहा, "जिस तरह स्थिति से निपटा गया है मुझे नहीं लगता कि इससे बेहतर तरीके से ऐसा किया जा सकता था. अगर हम पीछे मुड़ कर देखें तो पाएंगे कि ऐसा कोई रास्ता नहीं था कि पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से ऐसा हो पाता. मुझे नहीं पता कि इससे अलग और क्या होता."

    बाइडन ने माना कि हर सूरतेहाल में इस फ़ैसले की कोई न कोई क़ीमत चुकानी होती.

    जब बाइडन से काबुल एयरपोर्ट पर हुई भगदड़ के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि "ये चार-पांच दिन पहले की घटना है."

    उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि हमें स्थिति पर काबू पाना होगा और हमने वही किया. हमने तेज़ी से क़दम उठाते हुए काबुल हवाई अड्डे पर नियंत्रण किया और उड़ानें चालू कीं."

    'अपने नागरिकों को निकालने के लिए अमेरिका प्रतिबद्ध'

    बाइडन ने कहा कि उनकी सरकार सभी अमेरिकी नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही इसके लिए पहले दी गई समयसीमा पार हो जाए.

    इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि 31 अगस्त तक वो अपनी सेना को पूरी तरह से अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाल लेगा.

    उन्होंने कहा, "अमेरिकी लोगों को ये बात समझनी है और हमारी पूरी कोशिश होगी कि इस काम को हम 31 अगस्त से पहले पूरा कर लें. लेकिन अगर हम ऐसा नहीं कर सके तो उस वक्त कितने लोग शेष बचे हैं ये देखते हुए इस पर फ़ैसला होगा."

    "जब तक हम सभी अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को वहां से बाहर नहीं निकाल लेंगे, हम वहां पर अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगे."

    माना जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अभी भी दस से पंद्रह हज़ार अमेरिकी नागरिक मौजूद हैं.

    साथ ही बाइडन ने कहा कि पचास हज़ार से 65 हज़ार ऐसे अफ़ग़ान नागरिक हैं जिन्होंने अमेरिकी प्रशासन के लिए काम किया था और जो अब अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलना चाहते हैं.

    तालिबान से लोगों को सुरक्षित जाने देने की अपील

    उधर दूसरी ओर, कुछ विद्रोहियों के काबुल एयरपोर्ट का रास्ता रोकने की ख़बर के बाद अमेरिका ने एक बार फिर तालिबान से अपील की है कि जो लोग अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर जाना चाहते हैं उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता दिया जाए.

    अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन ने कहा है, "तालिबान के बारे में ऐसी ख़बरें मिल रही हैं जो उनके वादों और हमारी सरकार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से अलग हैं. वो अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर जाना चाह रहे नागरिकों का रास्ता रोक रहे हैं और उन्हें काबुल एयरपोर्ट नहीं पहुंचने दे रहे."

    उन्होंने कहा, "अमेरिकी अधिकारी तालिबान से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. तालिबान को स्पष्ट कर दिया गया है कि हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान में फंसे अमेरिकियों, दूसरे देश के नागरिकों और अफ़ग़ान नागरिकों को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित बाहर जाने देंगे."

    उन्होंने कहा, "अमेरिकी अधिकारी तालिबान से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. तालिबान को स्पष्ट कर दिया गया है कि हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान में फंसे अमेरीकियों, दूसरे देश के नागरिकों और अफ़ग़ान नागरिकों को बिना किसी परेशानी से सुरक्षित बाहर जाने देंगे."

  20. नमस्कार! बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज पर आपका स्वागत है.

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