अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी पर क्या बोल रहे हैं पाकिस्तानी?
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद से पाकिस्तान में इसे लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
काबुल पर तालिबानी कब्जे के ठीक एक दिन बाद इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान ने ग़ुलामी की ज़ंजीरें तो तोड़ दी, लेकिन जो ज़हनी ग़ुलामी की ज़ंजीरे हैं वो नहीं टूटती.''
जहां एक ओर तसलीमा नसरीन समेत कुछ लोगों ने इमरान ख़ान के इस बयान की निंदा की.
लेकिन पाकिस्तान में इस मौके पर कुछ लोग अपनी ख़ुशी छिपा नहीं पा रहे हैं.
पाकिस्तान की बड़ी धार्मिक पार्टियों जमात-ए-इस्लामी और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम ने खुलकर काबुल पर कब्जा करने के लिए तालिबान को बधाई दी है.
इसके साथ ही इन पार्टियों ने तालिबान को अपना पूरा सहयोग देने की बात भी कही है.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को उनकी हाल की कामयाबियों के लिए बधाई दी है और उन्हें पूरा सहयोग देने की बात की है.
इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी भी कुछ लोगों के लिए जश्न का विषय है. इसके साथ ही इस मौके पर कई लोग अपनी पीठ ठोंक रहे हैं.
बीबीसी उर्दू के लिए सहर बलूच का विश्लेषण
पाकिस्तान के न्यूज़ चैनलों पर जब काबुल में तालिबान की जीत की ख़बरें आना शुरू हुईं तो प्रतिक्रियाएं मिली जुली थीं.
लेकिन कुछ पाकिस्तानी नेताओं और अधिकांश धार्मिक पार्टियों समेत ज़्यादातर लोग अपनी ख़ुशी नहीं छिपा सके कि अमेरिका हार गया.
इसके बाद कई लोगों ने पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी के पूर्व महानिदेशक हामिद गुल के एक वीडियो का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका का काबुल से वापस जाना गुल का ‘विज़न’ यानी सोचथी.
‘तालिबान के जनक’ कहे जाने वाले हामिद गुल साल 2014 के एक वीडियो में कहते हुए दिख रहे हैं कि “जब इतिहास लिखा जाएगा, तब ये भी लिखा जाएगा कि आईएसआई ने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की मदद से सोवियत संघ को हरा दिया.
लेकिन ये भी लिखा जाएगा कि आईएसआई ने (अफ़ग़ानिस्तान) मेंअमेरिका की मदद से अमेरिका को हरा दिया”
सीमा पार जो कुछ भी हो रहा है, उससे सभी लोग खुश नहीं हैं. और कई लोगों ने उन लोगों को चेतावनी देना शुरू कर दिया है जो कि दूर बैठकर कठपुतली का खेल खेलना चाहते हैं.
एक लंबे समय से पाकिस्तान पर अफ़ग़ानिस्तान में विरोधाभासी भूमिका निभाने का आरोप लगाया जाता है.
अमेरिका और भारत ही नहीं, सबसे अहम बात ये है कि खुद पाकिस्तान के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने वाले चरमपंथियों को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करने के लिए अफगानिस्तान को "पिछवाड़े" के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
सीनेटर शेरी रहमान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान के लिए एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान को “रणनीतिक पिछवाड़े” के रूप में देखना एक बड़ी ग़लती होगी.
इसी बीच मानवाधिकारों पर पाकिस्तान की सीनेट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अफ़रासायब खट्टक को पाकिस्तान की पुरानी ग़लतियों की मुख़र आलोचना करने के बाद सरकार की ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा रहा है.
उन्होंने कहा, “मूल बात ये है कि तालिबान एक आधुनिक राज्य के विचार के ख़िलाफ़ हैं. दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें बाहर से समर्थन मिल रहा है. और जो उन्हें समर्थन दे रहे हैं, वे इसकी भारी कीमत चुकाएंगे जैसी कि उन्होंने इससे पहले चुकाई है.”