अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के तेज़ी से बढ़ते कब्ज़े के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति पर सवाल उठने लगे हैं, लेकिन बाइडन सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले पर अडिग हैं और उनका मानना है कि जनता उनके साथ है.
20 साल में दो ट्रिलियन डॉलर ख़र्च करने के बाद और 2,500 अमेरिकियों की जान गंवाने के बाद अमेरिका अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है. इस बीच तालिबान बिना प्रतिरोध के अफ़ग़ानिस्तान के कई बड़े शहरों पर कब्ज़ा कर चुका है और राजधानी काबुल के क़रीब पहुँच गया है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने बाइडन पर कई सवाल उठाए हैं, अमेरिकी टीवी पर अफ़ग़ानिस्तान की तस्वीरों के साथ बाइडन का क़रीब एक महीने पुराना वो बयान भी चलाया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था, "तालिबान सब कुछ चलाएगा और देश में सभी जगहों पर उसका कब्ज़ा होगा,इसकी उम्मीद बहुत कम है."
अमेरिकी अख़बार द वॉशिंगटन पोस्ट ने एक संपादकीय में लिखा है कि बाइडन ने 2001 से अफगानिस्तान में हुई प्रगति को ख़तरे में डाल दिया था, जिसमें लड़कियों की शिक्षा भी शामिल थी.
अखबार ने लिखा, "अफ़ग़ानों की बर्बाद और ख़त्म होती ज़िंदगी बाइडन की विरासत का हिस्सा होगी, वैसे ही जैसे कि इस फ़ैसले के कारण बचने वाले अमेरिकी डॉलर."
अमेरिका 3,000 सैनिकों को वापस बुला रहा है और क़रीब इतने इस महीने वापस आ चुके हैं. इसके अलावा वो दूतावास के कर्मचारियों और उन अफग़ानों को वहाँ से बाहर निकाल रहा है, जिन्होंने अमेरिकी सुरक्षा बलों की मदद की थी और उनकी जान को ख़तरा है.
सालों से बाइडन और अमेरिकी ओपिनियन पोल ऐसे क़दम की वकालत करते रहे हैं.
वोटवेट्स नाम की समर्थन करने वाली संस्था ने "अंतहीन युद्ध चाहने वालों के सामने खड़े होने की ताकत रखने वाले" बाइडन की सराहना की है.
बाइडन का तर्क है कि अमेरिका ने 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद अल-क़ायदा को हराने के अपने मुख्य लक्ष्य को बहुत पहले हासिल कर लिया था और 3,00,000 अफ़ग़ान सैनिकों को प्रशिक्षण देना पर्याप्त था.
बाइडन ने मंगलवार को कहा, "उन्हें अपने लिए लड़ना है, अपने देश के लिए लड़ना है"
लेकिन जून में दौरा करने वाले अफ़ग़ानिस्तान विशेषज्ञ एंड्रयू वाइल्डर ने एएफ़पी से कहा था कि प्रशासन अपेक्षित प्रभावों की तैयारी के लिए और अधिक समय दे सकता था और यह "एक व्यवस्थित और ज़िम्मेदार वापसी" नहीं है.
यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में एशिया स्टडीज के उपाध्यक्ष वाइल्डर ने कहा, "मुझे लगता है कि यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल नहीं है कि अमेरिका की वापसी नहीं, बल्कि वापसी के तरीक़े का बड़ा असर हुआ है."
रिपब्लिकन सीनेट मिच मैककोनेल ने कहा कि बाइडन ने "बड़े पैमाने पर, एक रोके जाने योग्य आपदा" को होने दिया. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस "दुखद घटना" की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया और लिखा, "क्या आपको मेरी कमी महसूस होती है?"
हालांकि ट्रंप ने ख़ुद तालिबान के साथ फरवरी 2020 में समझौते किया था, जिसके सेना की वापसी में तेज़ी आई.
बाइडन अफ़ग़ानिस्तान में हो रहे ख़र्चे की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, इस वक़्त अमेरिका को चीन से बड़ी चुनौती पर ध्यान देने की ज़रूरत है.
वामपंथी झुकाव वाले सीनियर फ़ेलो सी ब्रायन कैटुलिस चिंता व्यक्त करते हैं कि तालिबान को बढ़त से बाइडन का लोकतंत्र को बचाने वाला घोषित मिशन कैसे प्रभावित होगा.
कैटुलिस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि बाइडन को इसकी कितनी बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकानी होगी. 2011 में इराक़ से अमेरिका की वापसी का फ़ैसला, जिसमें बाइडन का अहम योगदान था, वो लोकप्रिय हुआ लेकिन तभी तक जब तक इस्लामिक स्टेट चरमपंथी आंदोलन का उदय नहीं हो गया.
कैटुलिस ने कहते हैं, "यह वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितनी ख़राब शक्ल लेता है."
उन्होंने कहा, "अगर यह अत्याचारों की एक श्रृंखला है, जिसका सिर्फ़ अफ़गान लोगों पर असर होगा, तो सीरिया का उदाहरण देख सकते हैं, जहाँ यह कहा जाता है कि हम कुछ नहीं कर सकते,"
"लेकिन अगर इसमें अमेरिकी शामिल हैं, तो हालात कैसे बदलेंगे ये बता पाना मुश्किल है."