अमेरिकी और अफ़गानिस्तानी
सेना की ओर से लगातार हवाई हमलों के बावजूद तालिबान के लड़ाकों ने हेलमंद प्रांत
की राजधानी लश्कर गाह पर हमला कर दिया है.
बताया जा रहा है कि
तालिबान ने एक टीवी स्टेशन पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है और हज़ारों लोग गाँवों से
भागकर इमारतों में शरण ले रहे हैं.
अस्पताल में मौजूद एक
डॉक्टर ने बीबीसी को बताया, “यहाँ चारों तरफ़ लड़ाई चल रही है.”
हेलमंद प्रांत पहले से ही
अमेरिकी-ब्रितानी सेना के अभियान का केंद्र था ऐसे में अगर इसकी राजधानी लश्कर गाह
पर तालिबान का क़ब्ज़ा हो जाता है तो यह अफ़गानिस्तान सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका
होगा.
अगर लश्कर गाह तालिबान के
नियंत्रण में आया तो साल 2016 के बाद यह तालिबान के क़ब्ज़े में आने वाला किसी
प्रांत का पहला राजधानी शहर होगा.
रेडियो और टीवी चैनलों का काम बंद
इससे पहले सोमवार को
अफ़गानिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि हेलमंद में 11 रेडियो और चार टीवी चैनलों ने तालिबान के ‘हमले’ और ‘धमकी’ की वजह से काम करना बंद कर दिया है.
जब से यह घोषणा हुई है कि
सितंबर तक क़रीब सभी विदेशी सैनिक चले जाएंगे, तब से तालिबान ग्रामीण इलाक़ों पर तेज़ी से कब्ज़ा बढ़ा रहा है.
अब हमले की मार झेल रहे इन प्रमुख शहरों की किस्मत
अहम मोड़ पर खड़ी है.
मानवीय संकट के डर के साथ-साथ इस बात की भी आशंका है कि सरकारी
सुरक्षाबल आख़िर कब तक टिक पाएंगे.
बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी का विश्लेषण
तालिबान का पूरा फ़ोकस अब अफ़ग़ानिस्तान के शहरों पर है.
स्थितियां बदल रही हैं
लेकिन हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह, जहाँ कई अमेरिकी और ब्रिटिश
सैनिकों ने अपनी जान गंवाई, अभी सबसे कमज़ोर स्थिति में लग रही
है.
तालिबान समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स से ऐसे वीडियो अपलोड किए गए हैं जिनमें उनके
लड़ाके शहर के बीचों-बीच दिख रहे हैं.
अफ़ग़ान विशेष बलों को उन्हें पीछे खदेड़ने में मदद के लिए भेजा जा रहा है, लेकिन एक स्थानीय निवासी ने हमें बताया कि अगर ऐसा होता भी है तो भी तालिबान का आगे बढ़ना उनकी ताक़त को मज़बूती से दिखाता है.
समझा जाता है कि चरमपंथियों ने आम परिवारों के घरों में पनाह ली है, जिससे उन्हें हटाना मुश्किल हो जाएगा. आगे और लंबी ख़ूनी लड़ाई होती दिख रही है.