म्यांमार में इस साल
फ़रवरी में हुए तख़्तापलट की अगुआई करने वाले सेना के जनरल ने ख़ुद को देश का
प्रधानमंत्री घोषित कर दिया है.
जनरल मिन आंग व्हाइंग ने
कहा कि म्यांमार में आपातकाल अगस्त 2023 यानी अगले दो साल के तक के लिए बढ़ाया जा
सकता है.
अपने करीब एक घंटे लंबे भाषण
में जनरल आंग ने ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष बहुदलीय चुनाव’ कराने का वादा भी
किया.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सेना ने जिस चुनी हुई पार्टी (नेशनल लीग
फ़ॉर डेमोक्रेसी) को सत्ता से बेदख़ल किया वो ‘आतंकवादी’ थी.
उन्होंने बेदख़ल की गई
पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के समर्थकों को भी ‘उग्रवादी’ बताया.
म्यांमार की सेना ने तख़्तापलट कर आंग सान सू ची की अगुआई वाली पार्टी एनएलडी
की चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था.
सू ची तब से गिरफ़्तार हैं और उन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं.
म्यांमार में तख़्तापलट
के बाद हुए प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी.
इन प्रदर्शनों में मारे गए
कई लोग स्वास्थ्यकर्मी थे. इनकी मौत के कारण म्यांमार में स्वास्थ्य व्यवस्था
चरमरा गई और कोरोना महामारी संक्रमण तेज़ी से फैला.
इलाज के लिए गए लोगों को अस्पताल से लौटा रही है सेना
बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड के मुताबिक़, म्यांमार में तख़्तापलट के ख़िलाफ़
प्रदर्शन करने वाले दर्जनों स्वास्थ्यकर्मियों को गिरफ़्तार किया गया है और उनमें
से कई अब तक छिपे हुए हैं.
लोग इलाज के अस्पतालों में जा रहे हैं और सेना उन्हें वापस लौटा दे रही है
जिसके कारण ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों की घर पर ही मौत हो जा रही है.
इन सबके बावजूद जनरल आंग ने ज़ोर देकर कहा कि म्यांमार कि हालत 'स्थिर' है और वो
चुनाव कराएंगे.
हालाँकि चुनाव में कौन-कौन सी पार्टियाँ हिस्सा ले पाएंगी, अभी यह स्पष्ट नहीं
है.
म्यांमार के मानवाधिकार कार्यकर्ता आंग क्या मोई ने बीबीसी से कहा कि जनरल का चुनाव कराने का वादा सिर्फ़ एक झूठ है और चुनाव नहीं होने वाले हैं.
उन्होंने कहा कि म्यांमार के लोग ऐसे वादों पर भरोसा नहीं करेंगे.
टीवी पर दिए अपने भाषण
में जनरल आंग ने कहा कि तख़्तापलट के विरोधियों ने ‘जानबूझकर कोविड-19
फैलाया.’
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की कोविड रणनीति को लेकर सोशल मीडिया पर फ़ेक
न्यूज़ और ग़लत जानकारी फैलाई जा रही है. जनरल ने इसे ‘जैव आतंकवाद का
हथियार’ बताया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जनरल आंग का भाषण ‘अजीब सा' था.
अपने भाषण
में उन्होंने ज़्यादा प्याज़ और कपास उगाने को कहा और ‘म्यांमार की
परंपराओं को नष्ट करने की कोशिश करने वालों’ की निंदा की.