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ब्रिटेन के आयरलैंड को हराने के बाद भारत अपने पूल के चौथे पायदान पर जगह बनाने में कामयाब रहा.
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भारत से ग़ायब कर दी गईं 14 कलाकृतियां लौटाएगा ऑस्ट्रेलिया
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ऑस्ट्रेलिया की नेशनल आर्ट गैलरी भारत की 14 कलाकृतियां
वापस करेगी.
इन कलाकृतियों को लेकर यह संदेह है कि या तो ये चोरी की गई थीं या लूटी गईं
या फिर इन्हें अवैध तरीक़े से निर्यात किया गया था.
इन धार्मिक और सांस्कृतिक कलाकृतियों में मूर्तियां, तस्वीरें और एक स्क्रॉल
शामिल हैं. जिनकी कुल क़ीमत क़रीब 16 करोड़ 36 लाख (2.2 मिलियन डॉलर) से अधिक है.
नेशनल आर्ट गैलरी के निदेशक निक मिट्जेविच ने इन कलाकृतियों
को वापस दिये जाने की पुष्टि की है.
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एक को छोड़कर बाकी सभी का संबंध सुभाष कपूर से है, जो न्यूयॉर्क के एक
पूर्व आर्ट डीलर और कथित तस्कर थे.
कपूर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हैं. भारत में
उन पर ट्रायल होना है.
कुछ विवादित कलाकृतियां 12वीं शताब्दी की हैं, जब चोल वंश के
राज में तमिलनाडु में हिंदू कला उत्कर्ष पर थी.
कैनबरा गैलरी ने कपूर के माध्यम से मिलीं कई अन्य कलाकृतियों
को पहले ही वापस कर दिया है, जिसमें हिंदू भगवान शिव की एक कांस्य प्रतिमा भी शामिल है, जिसे 2008 में क़रीब
37 करोड़ रुपये (पांच मिलियन डॉलर) में ख़रीदा गया था.
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मिट्जेविच ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि ये
कलाकृतियां भारत सरकार को कुछ महीनों के भीतर ही वापस कर दी जाएंगी.
ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त ने इस फ़ैसले का स्वागत
किया है.
उन्होंने कहा यह दोनों देशों के बीच सद्भावना का और दोस्ती
का संकेत है.
अमेरिकी संघीय जांच ने सुभाष कपूर को लेकर काफी जांच की, जिसे
ऑपरेशन हिडन आइडल के नाम से जाना जाता था.जिसके कारण सैकड़ों ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण
कलाकृतियों को ज़ब्त किया जा सका.
कोरोना: स्कूल खोलने के लिए 50 विशेषज्ञों ने लिखी राज्य सरकारों को चिट्ठी
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दुनिया को कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आए डेढ़ साल से
ज़्यादा हो चुके हैं और भारत भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
महामारी की पाबंदियों की वजह से देश में अब तक प्राइमरी और
प्री प्राइमरी स्कूल नहीं खुले हैं.
इस बारे में कई विशेषज्ञों की राय है कि
बच्चों में कोविड-19 संक्रमण का ख़तरा वयस्कों के मुकाबले कम है इसलिए स्कूल खोल
दिए जाने चाहिए.
अब 50 से ज़्यादा डॉक्टरों, बाल रोग विशेषज्ञों, सार्वजनिक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों, आईआईटी के प्रोफ़ेसरों और अर्थशास्त्रियों ने कुछ राज्य सरकारों को खुली चिट्ठी लिखकर स्कूल खोलने की अपील की है.
यह चिट्ठी लिखने वालों में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत
लहरिया, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफ़ेसर भास्करन रमन, अर्थशास्त्री ज्याँ द्रेज और
रितिका खेड़ा जैसे लोग शामिल हैं.
इन विशेषज्ञों ने अपनी चिट्ठी में स्कूल खोले जाने के पक्ष
में बाक़ायदा वैज्ञानिक साक्ष्य और सुझाव दिए हैं.
यह चिट्ठी महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कार्यालय को सम्बोधित करके
लिखी गई है.
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चिट्ठी का सार कुछ इस तरह
है:
·भारत में पिछले 16 महीने से ज़्यादा वक़्त से स्कूल बंद हैं जबकि वैज्ञानिक
साक्ष्यों से यह साबित हो चुका है कि सावधानी और बचाव के साथ स्कूलों का चलना संभव
है.
·स्कूलों के बंद होने से शिक्षा और करियर से सम्बन्धित गतिविधियों को भारी
नुक़सान हो रहा है.
·इस समय दुनिया के 170 देशों में स्कूल या तो पूर्ण या आंशिक रूप से खुले हुए
हैं. स्वीडन और फ़्रांस जैसे कुछ देशों ने तो महामारी के दौरान स्कूल बंद ही नहीं
किए.
·संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ़ ने कहा
था कि स्कूलों को सबसे आख़िर में बंद होना चाहिए और सबसे पहले खुलना चाहिए.
·वयस्कों के टीकाकरण में अभी समय लगेगा. दिल्ली में अब तक सिर्फ़ 13 फ़ीसदी और
महाराष्ट्र-कर्नाटक में सिर्फ़ सात फ़ीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी है.
ऐसे में पूरी आबादी के टीकाकरण तक स्कूलों के खोलने का इंतज़ार करने में बहुत देर
हो जाएगी.
·दुनिया के किसी भी देश में अभी 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कोरोना का टीका
नहीं लगाया जा रहा है. वहीं, भारत समेत कई देशों में 18 साल से कम उम्र वालों के
लिए टीका अभी बनने की प्रक्रिया में है.
·कोविड-19 अभी इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होने वाला है. ऐसे में ज़रूरी ऐहतियात
बरतते हुए स्कूल खोले जाने चाहिए.
विशेषज्ञों की टीम ने सरकारों को चरणबद्ध और
सुरक्षित तरीके से स्कूल खोलने के कुछ सुझाव भी दिए हैं. जैसे:
·अपने इलाके में अभी के लिए आंशिक और भविष्य में पूर्ण
रूप से स्कूल खोलने की योजना के मद्देनज़र तत्काल रूप से एक टास्क फ़ोर्स गठित किया जाए.
·जिन इलाकों में पॉज़िटिविटी दर कम है वहाँ धीरे-धीरे
स्कूल खोलने की योजना बनाई जाए.
·स्कूल के स्टाफ़ का प्राथमिकता से टीकाकरण किया दिया
जाए. उनमें वैक्सीन की दो ख़ुराकों के बीच का गैप भी कम किया जाए.
·शुरुआत में छात्रों का एक छोटा समूह हफ़्ते के एक या
दो दिन स्कूल आए.
·ऑनलाइन लर्निंग को जारी रखा जाए.
·मास्क पहनने, हाथ धोने और शारीरिक दूरी बनाने की
आदतों को अनिवार्यता से लागू किया.
·स्कूलों में खुली हवा का पर्याप्त इंतज़ाम हो.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल कह चुके हैं कि जब तक राज्य में पूरी आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक स्कूल नहीं खुलेंगे. लेकिन राज्य सरकारों के
स्कूल न खोलने के फ़ैसले को स्वास्थ्य विशेषज्ञ चुनौती दे रहे हैं.
पिछले हफ़्ते चौथे देशव्यापी
सीरो सर्वे में पता चला है कि 6 से 9 साल के 57 फ़ीसदी बच्चों में एंटीबॉडी मिली है.
वहीं 10 से 17 साल के 62 फ़ीसदी बच्चों में एंटीबॉडी मिली है.
इस आधार पर भी तर्क दिया जा
रहा है कि अब भारत में प्राइमरी क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खोले जा सकते हैं.
ब्रिटेन: कार्डिफ में खुलेगा सिखों और हिंदुओं के लिए अस्थि विसर्जन स्थल
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ब्रिटेन के साउथ वेल्स में बहुत जल्द एक ऐसी आधिकारिक जगह होगी जहां
सिख और हिंदू धर्म को मानने वाले अपनों की मौत के बाद उनकी अस्थियां विसर्जित कर
सकेंगे.
दोनों धर्मों में परंपरागत तौर पर शव का अंतिम संस्कार किया
जाता है और अस्थियों को बहते पानी में प्रवाहित किया जाता है. टैफ़ नदी पर कार्डिफ़ में लैंडैफ रोइंग क्लब की साइट वेल्स में
इस तरह के क्रिया-कर्म के लिए अपनी तरह की पहली जगह होगी.
अंतिम संस्कार ग्रुप वेल्स (एएसजीडब्ल्यू) के चन्नी कालेर ने
बताया कि वह वाकई बहुत खुश थे.
कालेर ने सिख और हिंदू समुदायों के लोगों के लिए एक ऐसी जगह
की तलाश करना तब शुरू किया था जब उनकी बहन 2012 में पोंट्सर्न पर अपने पिता की राख
को विसर्जित करने के दौरान नदी में लगभग फिसल ही गई थीं.
उन्होंने कहा, "मेरी बहन कैलिफोर्निया से आई थी और हम पिता की अस्थियां विसर्जित करने गए थे.”
वो बताते हैं, "बारिश का दिन था और तट पर काफी फिसलन
थी. हम अस्थियां नदी में बहा ही रहे थे कि तभी उसका पैर फिसल गया और वो लगभग नदीं
में गिर गई. उस दिन कुछ भी हादसा हो सकता था."
कालेर एक सिख हैं और उनका जन्म तंजानिया में हुआ.
साल 1961 में वेल्स आए और उन्होंने यहां हिंदू समुदाय के साथ मिलकर अंतिम संस्कार ग्रुप वेल्स का गठन किया.
इसके बाद इस समूह ने अपनों
के अंतिम संस्करा के लिए एक उपयुक्त स्थान की तलाश शुरू की. और अब जाकर उन्हें
एक जगह मिल गई है.
मिज़ोरम पुलिस ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ख़िलाफ़ क्रिमिनल केस दर्ज किया
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मिज़ोरम पुलिस ने राज्य के कोलासिब ज़िले के वैरेंगटे कस्बे के बाहरी इलाक़े
में हुई हिंसक झड़प को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य पुलिस के चार
वरिष्ठ अधिकारियों और दो अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं.
मिज़ोरम के पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) जॉन नेहलिया ने न्यूज़
एजेसी पीटीआई को बताया कि उन पर हत्या के प्रयास और आपराधिक साज़िश समेत कई आरोपों
के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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उन्होंने बताया कि सीमावर्ती कस्बे के पास मिज़ोरम और असम पुलिस
बलों के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ के बाद राज्य पुलिस ने सोमवार देर रात वैरेंगटे पुलिस
थाने में एफ़आईआर दर्ज करवायी.
जॉन नेहलिया ने बताया, एफ़आईआर में असम पुलिस के पुलिस महानिरीक्षकअनुराग अग्रवाल, कछार के उप महा निरीक्षक देवज्योति मुखर्जी, कछार के पुलिस अधीक्षक
चंद्रकांत निंबालकर और ढोलई पुलिस स्टेशन के प्रभारी साहब उद्दीन का नाम शामिल है.
कछार उपायुक्त कीर्ति जल्ली और कछार डिविज़नल वनाधिकारी सनीदेव
चौधरी पर भी इन्हीं आरोपों में मामला दर्ज किया गया है.
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इसके अलावा असम पुलिस के 200 अज्ञात पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़
भी मामले दर्ज किए गए थे.
जॉन नेहलिया ने बताया कि चार पुलिस अधिकारियों और दो प्रशासनिक
अधिकारियों को रविवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.
ईरान केवल इसराइल के लिए समस्या नहीं हैः इसराइली विदेश मंत्री
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इमेज कैप्शन, इसराइल के विदेश मंत्री यायिर लापिड
इसराइल ने एक तेल टैंकर पर हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है. इस हादसे में चालक दल के दो सदस्यों (एक ब्रिटिश नागरिक और एक रोमानियाई नागरिक) मारे गए थे.
जिस समय यह घटना हुई, लंदन स्थित कंपनी ज़ोडिएक मैरीटाइम संचालित एमवी मर्सर स्ट्रीट अरब सागर में ओमान के तट से दूर था. यह हादसा गुरुवार को हुआ. ये कंपनी इसराइली शिपिंग मैग्नेट ईयाल ओफ़र से संबद्ध है.
कंपनी का कहना था कि वो पता करने का प्रयास कर रहे थे कि आख़िर क्या हुआ था.
लेकिन इसराइल के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को इस घटना के लिए "ईरानी चरमपंथ" को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा, "ईरान केवल एक इसराइल के लिए समस्या नहीं है और दुनिया को इस पर शांत नहीं रहना चाहिए."
हालांकि, लाइबेरिया के झंडे वाले और जापानी स्वामित्व वाले इस टैंकर पर हमले को लेकर बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है.
ईरान ने अभी तक अपने ऊपर लगे आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
इस घटना से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इसमें एक ड्रोन भी शामिल था.
ब्रिटेन सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन भी जल्द से जल्द तथ्यों की पड़ताल करने की कोशिश कर रहा था.
बयान में कहा गया है, "हमारी संवेदनाएं उस ब्रिटिश नागरिक के नजदीक़ी लोगों के साथ हैं, जो ओमान के तट पर हुए टैंकर पर हमले की घटना में मारे गए हैं."
बयान में यह भी कहा गया है कि जहाजों को "अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से नेविगेट करने की अनुमति दी जानी चाहिए."
इसराइल और ईरान के बीच अघोषित "शैडो वॉर" एकबार
फिर गंभीर होता नज़र आ रहा है.
हाल के महीनों में इसराइल और ईरान, के जहाजों पर कई हमले हुए
हैं. दोनों देश एक-दूसरे पर हमले को लेकर आरोप लगाते हैं.
दोनों देश एक दूसरे पर व्यापार को नुकसान पहुंचाने के आरोप
लगाते हैं और खंडन करते हैं.
लेकिन बीते दिन हुए इस हादसे में दो लोगों की मौत से इस बार
गंभीरता पहले की तुलना में कहीं अधिक है.
इसराइल के विदेश मंत्री ने हादसे पर कड़ी प्रतिक्रिया
दी है और अपने ब्रिटिश समकक्ष डॉमिनिक राब के साथ चर्चा करके इस मामले को संयुक्त राष्ट्र
में तक ले जाएंगे.
ईरान-अरबी भाषा के एक टेलीविजन स्टेशन ने अज्ञात सूत्रों
के हवाले से कहा कि यह हमला ईरान के सहयोगी सीरिया के एक हवाई अड्डे पर एक कथित इसराइली
हमले की प्रतिक्रिया के तौर पर था.
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