दुनिया को कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आए डेढ़ साल से
ज़्यादा हो चुके हैं और भारत भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
महामारी की पाबंदियों की वजह से देश में अब तक प्राइमरी और
प्री प्राइमरी स्कूल नहीं खुले हैं.
इस बारे में कई विशेषज्ञों की राय है कि
बच्चों में कोविड-19 संक्रमण का ख़तरा वयस्कों के मुकाबले कम है इसलिए स्कूल खोल
दिए जाने चाहिए.
अब 50 से ज़्यादा डॉक्टरों, बाल रोग विशेषज्ञों, सार्वजनिक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों, आईआईटी के प्रोफ़ेसरों और अर्थशास्त्रियों ने कुछ राज्य सरकारों को खुली चिट्ठी लिखकर स्कूल खोलने की अपील की है.
यह चिट्ठी लिखने वालों में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत
लहरिया, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफ़ेसर भास्करन रमन, अर्थशास्त्री ज्याँ द्रेज और
रितिका खेड़ा जैसे लोग शामिल हैं.
इन विशेषज्ञों ने अपनी चिट्ठी में स्कूल खोले जाने के पक्ष
में बाक़ायदा वैज्ञानिक साक्ष्य और सुझाव दिए हैं.
यह चिट्ठी महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कार्यालय को सम्बोधित करके
लिखी गई है.
चिट्ठी का सार कुछ इस तरह
है:
·भारत में पिछले 16 महीने से ज़्यादा वक़्त से स्कूल बंद हैं जबकि वैज्ञानिक
साक्ष्यों से यह साबित हो चुका है कि सावधानी और बचाव के साथ स्कूलों का चलना संभव
है.
·स्कूलों के बंद होने से शिक्षा और करियर से सम्बन्धित गतिविधियों को भारी
नुक़सान हो रहा है.
·इस समय दुनिया के 170 देशों में स्कूल या तो पूर्ण या आंशिक रूप से खुले हुए
हैं. स्वीडन और फ़्रांस जैसे कुछ देशों ने तो महामारी के दौरान स्कूल बंद ही नहीं
किए.
·संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ़ ने कहा
था कि स्कूलों को सबसे आख़िर में बंद होना चाहिए और सबसे पहले खुलना चाहिए.
·वयस्कों के टीकाकरण में अभी समय लगेगा. दिल्ली में अब तक सिर्फ़ 13 फ़ीसदी और
महाराष्ट्र-कर्नाटक में सिर्फ़ सात फ़ीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी है.
ऐसे में पूरी आबादी के टीकाकरण तक स्कूलों के खोलने का इंतज़ार करने में बहुत देर
हो जाएगी.
·दुनिया के किसी भी देश में अभी 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कोरोना का टीका
नहीं लगाया जा रहा है. वहीं, भारत समेत कई देशों में 18 साल से कम उम्र वालों के
लिए टीका अभी बनने की प्रक्रिया में है.
·कोविड-19 अभी इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होने वाला है. ऐसे में ज़रूरी ऐहतियात
बरतते हुए स्कूल खोले जाने चाहिए.
विशेषज्ञों की टीम ने सरकारों को चरणबद्ध और
सुरक्षित तरीके से स्कूल खोलने के कुछ सुझाव भी दिए हैं. जैसे:
·अपने इलाके में अभी के लिए आंशिक और भविष्य में पूर्ण
रूप से स्कूल खोलने की योजना के मद्देनज़र तत्काल रूप से एक टास्क फ़ोर्स गठित किया जाए.
·जिन इलाकों में पॉज़िटिविटी दर कम है वहाँ धीरे-धीरे
स्कूल खोलने की योजना बनाई जाए.
·स्कूल के स्टाफ़ का प्राथमिकता से टीकाकरण किया दिया
जाए. उनमें वैक्सीन की दो ख़ुराकों के बीच का गैप भी कम किया जाए.
·शुरुआत में छात्रों का एक छोटा समूह हफ़्ते के एक या
दो दिन स्कूल आए.
·ऑनलाइन लर्निंग को जारी रखा जाए.
·मास्क पहनने, हाथ धोने और शारीरिक दूरी बनाने की
आदतों को अनिवार्यता से लागू किया.
·स्कूलों में खुली हवा का पर्याप्त इंतज़ाम हो.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल कह चुके हैं कि जब तक राज्य में पूरी आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक स्कूल नहीं खुलेंगे. लेकिन राज्य सरकारों के
स्कूल न खोलने के फ़ैसले को स्वास्थ्य विशेषज्ञ चुनौती दे रहे हैं.
पिछले हफ़्ते चौथे देशव्यापी
सीरो सर्वे में पता चला है कि 6 से 9 साल के 57 फ़ीसदी बच्चों में एंटीबॉडी मिली है.
वहीं 10 से 17 साल के 62 फ़ीसदी बच्चों में एंटीबॉडी मिली है.
इस आधार पर भी तर्क दिया जा
रहा है कि अब भारत में प्राइमरी क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खोले जा सकते हैं.