पिछले दो
दिनों से अमेरिकी शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों के शेयरों में भारी
गिरावट देखी जा रही है.
इससे पहले ऐसी गिरावट साल 2008 की आर्थिक मंदी के समय देखी
गयी थी.
अमेरिकी शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध 98 बड़ी चीनी
कंपनियों के स्टॉक से जुड़े नैसडेक ड्रेगन चीन सूचकांक में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है.
बीती
फरवरी में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद से ये सूचकांक 45 फीसदी तक गिर
चुका है.
चीनी
सरकार ने टेक्नोलॉजी और शिक्षा क्षेत्र की कंपनियों के ख़िलाफ़ कई बड़े कदम उठाए हैं जिसके बाद ये गिरावट सामने आ रही है.
पिछले
पाँच महीनों में इन कंपनियों के स्टॉक को 770 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है.
चीन सरकार ने शिक्षा क्षेत्रों से जुड़ी अपनी नीतियों में एक बड़ा परिवर्तन किया है.
इसके बाद 120 अरब अमेरिकी डॉलर वाले निजी ट्यूशन सेक्टर के तहत आने वाली ऐसी कंपनियों को ग़ैर-लाभकारी संस्थाओं के रूप में पंजीकृत होना पड़ेगा जो स्कूल पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए ट्यूशन देती हैं,
नया नियम कहता है – "पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों को पढ़ाने वाले संस्थानों को धन के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं है; सूचीबद्ध कंपनियां (ऐसे) संस्थानों में निवेश न करें और ऐसे संस्थानों के लिए विदेशी पूंजी वर्जित है.”
इससे अमेरिका, हॉन्ग-कॉन्ग और चीन की निजी शैक्षणिक संस्थाओं की स्टॉक मार्केट वैल्यू पर नकारात्मक असर पड़ा है.
सरकार सख़्त कर रही है नियम
चीनी संस्थाएं कई तरह की ऑनलाइन सेवाओं के लिए नियम सख़्त कर रही हैं. इनमें खाना डिलीवरी करने वाली कंपनियों से लेकर म्युज़िक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं.
बीते सोमवार चीनी स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन ने डिलिवरी वर्कर्स के काम करने की स्थितियां सुधारने के लिए नए नियम जारी किए हैं.
एसएएमआर ने कहा है कि डिलिवरी करने वालों को न्यूनतम मजदूरी, उनके काम में कमी और बेहतर ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.
चीन की सबसे बड़ी खाना डिलिवर करने वाली ऐप मेइतुआन के शेयरों में मंगलवार को हॉन्ग–कॉन्ग ट्रेड में 17.6 फीसदी की गिरावट देखी गयी है. इससे पहले सोमवार को इसी कंपनी के शेयर में 14 फीसदी गिरावट देखी गयी थी.
इसके साथ ही चीन ने तकनीक क्षेत्र की बहुत बड़ी कंपनी टेनसेंट को दुनिया भर में म्युजिक रिकॉर्ड लेबल्स के साथ अपनी ख़ास म्युजिक लाइसेंसिंग डील को तोड़ने को कहा है. इसके बाद हॉन्गकॉन्ग में कंपनी के शेयरों में 9 फीसदी की गिरावट देखी गयी है.
नियामकों का कहना है कि इस कदम का मकसद चीनी ऑनलाइन म्युजिक स्ट्रीमिंग दुनिया में कंपनी के प्रभुत्व का सामना करना है.
इसी साल की शुरुआत में चीनी सरकार ई-कॉमर्स क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक अली बाबा पर 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगा चुकी है.
सरकार ने ये फैसला एक आधिकारिक जाँच का नतीजा सामने आने के बाद किया था. इस जाँच में सामने आया था अली बाबा ने कई सालों तक बाज़ार पर अपने वर्चस्व का दुरुपयोग किया.