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किसानों के लिए 'मवाली' शब्द इस्तेमाल कर पीछे हटीं बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी

बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने किसानों पर की टिप्पणी वापस ले ली है. उन्होंने कहा है कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. लेकिन उनके शब्दों से अगर किसी को ठेस पहुँची है, तो वे अपने शब्द वापस लेती हैं.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, कमलेश मठेनी, दिलनवाज़ पाशा and अपूर्व कृष्ण

  1. येदियुरप्पा क्या इस सप्ताह के बाद कर्नाटक के सीएम नहीं रहेंगे?

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को कहा है कि वह इस हफ़्ते तक कर्नाटक के सीएम हैं, अगले हफ़्ते क्या होगा ये बीजेपी के अंतरिम अध्यक्ष जेपी नड्डा को पता है.

    पिछले कुछ हफ़्तों से कर्नाटक बीजेपी में येदियुरप्पा के भविष्य को लेकर उथल-पुथल जारी है. ख़बरों की मानें तो बीजेपी विधायकों में उनके प्रति नाराज़गी का भाव है.

    इस सबके बीच में 78 वर्षीय येदियुरप्पा चार्टेड फ़्लाइट से पीएम नरेन्द्र मोदी से मिलने के लिए दिल्ली आए थे.

    राजनीतिक हल्कों में येदियुरप्पा की इस आकस्मिक यात्रा को कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा गया.

    कई बार उनसे पूछा गया कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा. लेकिन अब तक आधिकारिक रूप से ये साफ़ नहीं हुआ था कि इस हलचल के पीछे क्या कुछ चल रहा है. और इस मसले पर बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व का रुख़ क्या है.

    मगर येदियुरप्पा ने गुरुवार को इस बारे में स्थिति स्पष्ट कर दी है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ उन्होंने कहा है, “आगामी 26 जुलाई को कर्नाटक के सीएम के रूप में दो साल पूरे करने के मौके पर एक कार्यक्रम है. इसके बाद मैं वो करूंगा जो जेपी नड्डा तय करेंगे. बीजेपी को सत्ता में वापस लाना मेरा कर्तव्य है. मैं पार्टी कार्यकर्ताओं और संतों से आग्रह करता हूं कि वे सहयोग करें.”

    अब तक मुझसे इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कहा गया है. जब भी निर्देश आएंगे तो मैं इस्तीफ़ा देकर पार्टी के लिए काम करूंगा. मैंने किसी का नाम नहीं सुझाया है. पार्टी आलाकमान ने मुझसे कुछ नहीं कहा है. चलिए देखते हैं कि 26 जुलाई के बाद क्या होता है.”

    कर्नाटक में विरोध के आसार

    येदियुरप्पा ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में संतों से सहयोग करने का आग्रह किया है.

    लेकिन ऐसा कहकर उन्होंने बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व को ये संकेत दे दिया है कि उनकी कुर्सी जाने पर ज़मीन पर किस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं.

    येदियुरप्पा कर्नाटक के बेहद प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं. ये एक राजनीतिक रूप से मजबूत समुदाय है जिसका एक बड़ा वोट प्रतिशत बीजेपी को जाता है.

    और उनको कुर्सी से हटाने की उड़ती-उड़ती ख़बरें आने के बाद से लिंगायत समुदाय ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है.

    ख़बरों की मानें तो येदियुरप्पा ने भी कर्नाटक पहुंचकर लिंगायत समुदाय के संतों से मुलाक़ात की है.

    लिंगायत समुदाय के बेक्किना काल मठ के संत मल्लिकार्जुन मुरुघराजेंद्रन ने कुछ दिन पहले एएनआई से बात करते हुए कहा है, “बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए. ये हमारा विचार है. वीरशैव और लिंगायत के साथ-साथ सभी समुदायों के संत उनका समर्थन करते हैं. हम अगले चुनाव में राजनीति में दखल नहीं देंगे.”

    लिंगायत समुदाय से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कांग्रेस नेता की ओर से येदियुरप्पा को न हटाए जाने की माँग उठाई गयी है.

    कर्नाटक कांग्रेस नेता एम बी पाटिल ने ट्वीट करके लिखा है, “बीजेपी को लिंगायत समुदाय का गुस्सा झेलना होगा. अगर उन्होंने येदियुरप्पा के साथ ग़लत व्यवहार किया. बीजेपी को येदियुरप्पा के योगदान का ठीक आकलन करना चाहिए. और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए. ये मेरा व्यक्तिगत विचार है. और मैं समझता हूं कि प्रस्तावित बदलाव बीजेपी का आंतरिक मामला है.”

    कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डी के सुधाकर ने कहा है कि येदियुरप्पा हमारे नेता हैं और हमें उनमें विश्वास है. इसके साथ ही हम बीजेपी की विचारधाराओं और सिद्धांतों में आस्था रखते हैं.”

    बताया जा रहा है कि बीजेपी के ज़्यादातर विधायक येदियुरप्पा को हटाए जाने की माँग कर रहे हैं.

  2. किसानों के लिए 'मवाली' शब्द इस्तेमाल कर पीछे हटीं बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी

    बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने किसानों पर की विवादित टिप्पणी वापस ले ली है. सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोगों ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताया था.

    लेखी ने कहा है कि “उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. लेकिन उनके शब्दों से अगर किसी को ठेस पहुँची है, तो वे अपने शब्द वापस लेती हैं.”

    उन्होंने कहा है कि प्रेस वार्ता दरअसल किसी और मुद्दे पर थी, लेकिन बात को घुमा दिया गया.

    गुरुवार को पेगासस जासूसी विवाद को लेकर संसद में हंगामे के बीच, बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने एक प्रेस वार्ता की, जिसमें किसानों के बारे में एक सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि “पहले तो आप उन्हें किसान कहना बंद करिये. क्योंकि वो किसान नहीं मवाली हैं.”

    उनकी इस टिप्पणी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर दिनभर काफ़ी हंगामा रहा. लोग उनसे यह बयान वापस लेने की माँग कर रहे थे.

    नई दिल्ली में प्रदर्शन करने आये किसानों को लेकर उनसे सवाल किया गया था. पहले तो उन्होंने किसानों के मुद्दे पर टिप्पणी को टालने की कोशिश की.

    लेकिन दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “पहले तो आप उन्हें किसान कहना बंद कीजिये, क्योंकि वो किसान नहीं हैं. वो षड्यंत्रकारी लोगों के हत्थे चढ़े हुए कुछ लोग हैं जोकि किसानों के नाम पर ये हरकतें कर रहे हैं. किसान के पास समय नहीं है जंतर-मंतर आकर बैठने का, वो अपने खेत में काम कर रहा है. ये आढ़तियों के द्वारा चढ़ाये गए लोग हैं. ये नहीं चाहते कि किसानों को किसी भी तरह का फ़ायदा मिले.”

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, दैनिक भास्कर पर छापेमारी को लेकर मायावती और राहुल गांधी ने क्या कहा?

    बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को दो मीडिया संस्थानों पर आयकर विभाग की छापेमारी की आलोचना की है.

    उन्होंने ट्वीट किया है कि “दैनिक भास्कर मीडिया ग्रुप व भारत समाचार चैनल पर आयकर विभाग की ज़बर्दस्त छापेमारी प्रथम दृष्ट्या द्वेषपूर्ण कार्रवाई लगती है, जो 1975 की कांग्रेसी इमरजेंसी की काली यादों को ताज़ा करती है. यह अति दुःखद व अति-निंदनीय है.”

    वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आयकर के छापों को फ़्री प्रेस पर हमला बताया है.

    उन्होंने ट्वीट किया है कि “काग़ज़ पर स्याही से सच लिखना, एक कमज़ोर सरकार को डराने के लिए काफ़ी है.”

  4. लद्दाख़ के विकास के लिए क्या करने जा रही है मोदी सरकार?

    केंद्र सरकार ने गुरुवार को लद्दाख़ के विकास के लिए एक कॉरपोरेशन बनाने का फ़ैसला किया है जो कि लद्दाख़ के पर्यटन, परिवहन, उद्योग और हैंडीक्राफ़्ट उत्पादों की मार्केटिंग करेगी.

    पीएम मोदी ने ट्वीट करके अपने इस कदम के बारे में बताया है.

    उन्होंने लिखा, “आज कैबिनेट में लिया गया फ़ैसला लद्दाख़ में सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा और वहां के डायनेमिक यूथ को बहुत सारे अवसर प्रदान करेगा.

    आख़िर क्या करेगा ये कॉरपोरेशन?

    कैबिनेट ने लद्दाख के लिए बहुउद्देश्यीय बुनियादी ढांचा विकास निगम की स्थापना को मंजूरी दी है.

    निगम का अधिकृत शेयर कैपिटल 25 करोड़ रुपये होगा और रिकरिंग एक्सपेंडिचर प्रति वर्ष लगभग 2.42 करोड़ रुपये होगा.

    • सरकार का दावा है कि फिलहाल लद्दाख़ में ऐसा कोई निगम नहीं है.
    • ये निगम उद्योग, पर्यटन, परिवहन और स्थानीय तथा हस्तशिल्प के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए काम करेगा.
    • लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निगम मुख्य निर्माण एजेंसी के रूप में भी काम करेगा.
    • निगम की स्थापना से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का समावेशी और एकीकृत विकास होगा.
    • यह पूरे क्षेत्र और केंद्र शासित प्रदेश की आबादी के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करेगा.
    • निगम के लिए 1,44,200 रुपये - 2,18,200 रुपये के वेतनमान के साथ प्रबंध निदेशक का एक पद सृजित करने को भी मंजूरी दी.
  5. जो बाइडन ने कहा, राष्ट्रपति बनने के बाद सजग हो गया हूँ

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को सीएनएन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि “राष्ट्रपति की भूमिका में आने के बाद से मैं सचेत हो गया हूँ.”

    ओहायो में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “चुनाव जीतने के बाद, जब मैं पहली बार सीढ़ियों से नीचे उतरा तो उन्होंने गाना बजाया, ‘हेल टू द चीफ़’, तो मैंने कहा कि चीफ़ हैं कहाँ?”

    “मैं मानता हूँ कि इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी मिलने के बाद आप सजग हो जाते हैं. आप सचेत महसूस करते हैं. हालांकि, मैं बताना चाहूँगा कि राष्ट्रपति पद के साथ मिलने वाली शक्तियों की वजह से ऐसा नहीं है.”

    उन्होंने इस अवसर पर अमेरिकी लोगों से कोविड वैक्सीन लगवाने की अपील की. जो बाइडन ने अमेरिका में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने पर चिंता ज़ाहिर की.

    उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगवा चुके अमेरिकी लोगों के लिए महामारी समाप्त हो चुकी है.

    बाइडन बोले, “मैं कोविड वैक्सीन को लेकर सवाल पूछे जाने के पक्ष में हूँ. लेकिन सवाल किये जायें, उनके जवाब लिये जायें और वैक्सीन लगवाई जाए. इससे बचना ठीक नहीं है.”

    उन्होंने कहा, “महामारी अभी ख़त्म नहीं हुई है. उनके लिए तो बिल्कुल भी नहीं, जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है. ये एक सामान्य बात है. इसे समझना चाहिए. दुनिया भर में वैक्सीन को लेकर कई भ्रामक थ्योरियाँ हैं जिनकी वजह से टीकाकरण की रफ़्तार कम हुई है.”

    इस कार्यक्रम में ही बाइडन ने व्हाइट हाउस के भीतर के जीवन पर बात की.

    उन्होंने कहा कि अपने पद का भार उन्हें पहली बार जून में जी7 समिट के दौरान महसूस हुआ था, जब वे अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर वैश्विक नेताओं से मिले थे.

    उन्होंने कहा, “मैं जी7 समिट में गया और कई मुद्दों पर लोगों की राय बदल पाया, ये बहुत अच्छा रहा.”

    बुधवार के कार्यक्रम में जो बाइडन ने दर्शकों से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई पहली मुलाक़ात के बारे में भी बात की.

  6. महाराष्ट्र में भारी बारिश: दस फ़ीट पानी में डूबा शहर, कई ज़िलों में रेड अलर्ट घोषित

    महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से जारी बारिश की वजह से रत्नागिरी, अकोला और कोल्हापुर जैसे ज़िलों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं.

    रत्नागिरी का चिपलुन शहर लगभग दस फीट पानी में डूब गया है. वहीं, अकोला और कोल्हापुर के कई इलाकों में तेजी से बाढ़ का पानी अंदर घुस रहा है.

    भारतीय मौसम विभाग ने गुरुवार दोपहर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ घंटों में रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, कोल्हापुर और सतारा में भारी बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने इन ज़िलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.

    दस फ़ीट पानी में डूबा शहर

    रत्नागिरी ज़िले के अंतर्गत आने वाले चिपलुन और खेड़ शहर में पानी आठ-दस फीट तक पहुंच चुका है जिससे कई घरों के पहली मंजिलें डूब गई हैं. कई बसें डूब गई हैं.

    राज्यसभा सदस्य विनयसहस्त्रबुद्धे ने चिपलुन की समस्या पर ट्वीट करते हुए कहा है कि "गृह सचिव अजय भल्ला जी से महाराष्ट्र, रत्नागिरी ज़िले और चिपलुन में आई बाढ़ की गंभीर समस्या पर बात की है.

    उनसे बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ़ टीमें और प्रभावित लोगों की मदद करने का आग्रह किया है. उन्होंने तत्काल क़दम उठाने का आश्वासन दिया है. कोंकण में रहने वाले लोगों की सलामती के लिए दुआ कर रहा हूं."

    इसके साथ ही रत्नागिरी ज़िले में परशुराम घाट पर भूस्खलन होने से तीन लोगों की मौत हो गयी है.

    रत्नागिरी ज़िला प्रशासन ने बाढ़ में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरु कर दिया है.

    शुरुआती स्तर पर दो नावों की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही एनडीआरएफ की दो टीमें पुणे से चिपलुन और खेड़ के लिए रवाना हुई हैं.

    कोल्हापुर में बाढ़ के आसार

    वहीं, कोल्हापुर ज़िले में भी बाढ़ के आसार बन रहे हैं. पंचगंगा नदी का जलस्तर 36 फीट तक पहुंच गया है जिससे कई निचले इलाकों में पानी जमा होने लगा है.

    अलमट्टी बांध से 97 हजार क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू किया. ऐसा माना जा रहा है कि इससे बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

    पंचगंगा नदी के कुछ हिस्सों में पलायन शुरू हो गया है और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है.

    वहीं, ख़तरे के निशान को पार कर चुकी उल्हास नदी का पानी ठाणे ज़िले के कल्याण और बदलापुर में घुसना शुरू हो गया है.

    कोल्हापुर-रत्नागिरी स्टेट हाईवे को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है.बाढ़ के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं.

    ट्रेनों में फंसे हज़ारों यात्री

    बारिश की वजह से कोंकड़ रेल मार्ग में रेल यातायात बाधित हुआ है. रत्नागिरी ज़िले से होकर बहने वाली नदी में बाढ़ आने से अब तक लगभग 9 ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कोंकड़ रेलवे ने बताया है कि आधे रास्ते में फंसी ट्रेनों में सवार यात्री दूसरे स्टेशनों पर रुकी हुई हैं और उन्हें खाना-पानी दिया जा रहा है.

    कोंकण रेलवे के प्रवक्ता गिरीश करंडिकर ने बताया है, “हमने फंसे हुए यात्रियों को चाय, स्नेक्स और पानी उपलब्ध कराने के इंतज़ाम किए हैं.

    कोंकड़ रेल सेवा एक 756 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग है जोकि कई नदियों, पर्वतों और गुफ़ाओं से होकर गुजरता है.

    इसके साथ ही महाराष्ट्र के थाणे ज़िले के कसारा घाट सेक्शन में बाढ़, जलभराव और पत्थर टूटकर गिरने से सेट्रल रेलवे की कई सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

  7. सिद्धू की ताजपोशी में आएंगे कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरीश रावत ने दिए संकेत

    कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने गुरुवार को कहा है कि कांग्रेस पार्टी कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में एकजुट होकर नव-निर्वाचित अध्यक्ष यानी नवजोत सिंह सिद्धू का स्वागत करेगी.

    पंजाब कांग्रेस में पिछले कई हफ़्तों से सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच वर्चस्व की जंग जारी थी. इस बीच दोनों पक्षों ने सोनिया गाँधी से लेकर प्रियंका गाँधी से मुलाक़ातें कीं.

    आख़िरकार कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गाँधी से सिद्धू की मुलाक़ात के बाद ये तय किया गया है कि नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस की कमान संभालेंगे.

    राजनीतिक हल्कों में इसे सिद्धू की एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया. सिद्धू ने पंजाब पहुँचकर कई लोगों से मुलाक़ात की लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनकी कोई मुलाक़ात नहीं हुई.

    बात यहाँ तक आई कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार द्वारा ट्वीट करके कहा गया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह तब तक सिद्धू से मुलाक़ात नहीं करेंगे जब तक सिद्धू माफ़ी नहीं मांग लेते.

    पंजाब सरकार के कई विधायकों और कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने इस माँग का विरोध किया.

    लेकिन अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि फौरी तौर पर ही सही लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच कलह मिटाने का प्रयास किया है.

    पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज हरीश रावत ने कहा है, “कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट होकर अपने नए अध्यक्ष का स्वागत करेगी.”

    इससे पहले सामने आया था कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अमरिंदर सिंह को शुक्रवार के बुलावे के लिए दो बार पत्र भेजा था जिसमें से पहले पत्र में 56 और दूसरे पत्र में 65 विधायकों के हस्ताक्षर थे.

    पंजाब कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष कुलजीत सिंह नागरा ने कहा है कि इस कार्यक्रम में हरीश रावत भी शामिल हो सकते हैं.

  8. भारत ने पाकिस्तान को अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के मामले में नाम घसीटने पर दिया जवाब

    भारत सरकार ने पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी के अपहरण मामले में अपने ऊपर उंगली उठाने पर पाकिस्तान को जवाब दिया है.

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ब्रीफ़िंग में इसे एक हैरान करने वाली घटना बताया.

    प्रवक्ता ने कहा, "चूँकि पाकिस्तान के गृह मंत्री ने भारत को इसमें घसीटा है, तो मैं ये कहना चाहूँगा कि पाकिस्तान के अपने स्तर के हिसाब से भी, इस घटना में पीड़ित की कही बातों को ख़ारिज करना, अपने आप में एक नए तरह की नीच हरकत है."

    पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने दावा किया था कि इस्लामाबाद से अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी का अपहरण नहीं हुआ था.

    उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि इस मामले में भारत का हाथ है.

    शेख़ रशीद ने मंगलवार को एक बार फिर भारत का नाम लेते हुए कहा था- ”हमारे अफ़ग़ान भाई और भारतीय तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.”

  9. तृणमूल सांसद ने मंत्री वैष्णव से पर्चा छीनकर फाड़ा, भिड़ गए हरदीप पुरी

    विपक्ष के हंगामे के बीच आज संसद के दोनों सदनों में कोई काम नहीं हो सका. राज्यसभा में केंद्रीय सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पेगासस विवाद पर सरकार का पक्ष रखने वाले थे जब हंगामा हो गया.

    जैसे ही उन्होंने अपनी जगह खड़े होकर बोलना शुरू किया, वैसे ही टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने उनके हाथ से पर्चा छीन लिया.

    इसके बाद इस पर्चे को फाड़कर सभापति हरिवंश नारायण सिंह की ओर भी उछाला गया. ऐसी स्थिति में वैष्णव ने अपने बयान को संसद के पटल पर रखा.

    लेकिन इसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और टीएमसी सांसद के बीच तीख़ी बयानबाज़ी हुई है.

    दोनों पक्षों के बीच टकराव इस हद तक बढ़ गया कि मार्शलों को बीच-बचाव के लिए सामने आना पड़ा.

    इसके बाद सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ओर से इस घटना को अपने-अपने ढंग से पेश करने की कोशिश की जा रही है.

    राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने एएनआई से कहा, “मंत्री के हाथ से कागज़ छीना गया था, फाड़ा नहीं गया, जिसके बाद एक वरिष्ठ मंत्री का जो व्यवहार था वो आज तक संसद में नहीं हुआ. सब स्तब्ध थे जिस तरह के शब्द मंत्रीजी ने कहे.”

    वहीं, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है, “संसद में बवाल होना काफ़ी दुखी करने वाली बात है. कुछ लोग कोविड के समय में भी राजनीति करना चाहते हैं और मिल-जुलकर मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं. ये काफ़ी दुर्भाग्यशाली है. अगर एक बयान दिया जा रहा है तो पेपर फाड़ा जाना काफ़ी शर्मनाक है.”

  10. आंदोलनकारी किसानों को 'मवाली' कहा केंद्रीय मंत्री ने, क्या बोले किसान

    केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कृषि क़ानूनों का महीनों से विरोध कर रहे किसानों को मवाली कहा है.

    आज दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा- उन्हें किसान क्यों कह रहे हैं, वे किसान नहीं मवाली हैं.

    उन्होंने कहा,"ये आपराधिक गतिविधियां हैं, जो कुछ 26 जनवरी को हुआ वो भी शर्मनाक था, आपराधिक गतिविधियां थी, उसमें विपक्ष द्वारा ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया गया."

    मीनाक्षी लेखी ने ये टिप्पणी ऐसे दिन की जब दिल्ली की सीमा पर कृषि क़ानूनों का महीनों से विरोध कर रहे किसानों ने संसद के पास विरोध शुरू किया है.

    गुरूवार को 200 किसानों का एक दल किसान नेता राकेश टिकैत की अगुआई में संसद भवन के पास जंतर मंतर पहुँच धरने पर बैठा.

    राकेश टिकैत ने उनकी इस टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा- "मवाली नहीं किसान हैं, किसान के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए, किसान देश का अन्नदाता है."

    टिकैत ने किसान संसद लगाने के बारे में पूुछे जाने पर कहा, "शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का ये भी एक तरीका है. जब तक संसद चलेगी हम यहां आते रहेंगे. सरकार चाहेगी तो बातचीत शुरू हो जाएगी."

    कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक बार फिर कहा है कि वो किसानों से चर्चा के लिए तैयार है.

    उन्होंने कहा,"हमने किसानों से नए कृषि क़ानूनों के संदर्भ में बात की है।किसानों को कृषि क़ानूनों के जिस भी प्रावधान में आपत्ति हैं वे हमें बताए, सरकार आज भी खुले मन से किसानों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है."

  11. अफ़ग़ान उपराष्ट्रपति को 'लकड़बग्घा' और 'गिद्ध' कहा पाकिस्तान के मंत्री ने

    अफ़ग़ानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय की एक तस्वीर लगाने पर पाकिस्तान के एक मंत्री ने जवाब दिया है.

    अमरुल्लाह सालेह ने बुधवार को ट्विटर पर यह तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, "हमारे इतिहास में ऐसी कोई तस्वीर नहीं है और ना ही कभी होगी. हाँ, कल मैं एक बार को हिल गया था क्योंकि एक रॉकेट मेरे ऊपर से उड़कर गया और कुछ मीटर की दूरी पर गिरा. लेकिन पाकिस्तान के प्रिय ट्विटर हमलावरों, तालिबान और आतंकवाद इस तस्वीर के आघात को ठीक नहीं कर सकते. कोई और तरीक़े खोजिए."

    इस पोस्ट के बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई.

    इसके एक दिन बाद अब पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी ने उनकी ट्वीट का जवाब दिया है.

    फ़वाद चौधरी ने लिखा है- "अफ़ग़ानिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान के बहादुर लोगों का है, आपके जैसे लकड़बग्घों का नहीं, आपके जैसे लोगों को अफ़ग़ानिस्तान में या इस क्षेत्र में ही रत्ती भर दिलचस्पी नहीं, आप बस एक गिद्ध हैं जो सुरक्षित पनाहगाहों में उड़ा करते हैं..."

    अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में खटास बढ़ती जा रही है.

    कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान में अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के कथित अपहरण की घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकट का रंग ले लिया है.

    अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान से अपने राजदूत समेत सभी राजनयिकों को वापस बुला लिया है जिसके बाद पाकिस्तान ने भी अपने राजदूत को चर्चा के लिए वापस बुलाया है.

    अफ़ग़ान राजदूकत नजीबुल्ला अलीख़ेल ने शनिवार को ख़ुद ट्वीट कर बताया था कि उनकी बेटी सिलसिला अलीख़ेल को शुक्रवार को अग़वा किया गया और उनके साथ मारपीट हुई.

    लेकिन पाकिस्तान के गृह मंत्री लगातार इस घटना को लेकर संदेह जताते रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने एक बार फिर कहा कि राजदूत की बेटी के अपहरण की घटना में कोई सच्चाई नहीं है.

    इसके एक दिन बाद अफ़ग़ान सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर पाकिस्तानी गृहमंत्री शेख़ रशीद की टिप्पणियों को ग़ैर-पेशेवर बताते हुए उनके लगातार बयान देते जाने पर गहरी चिंता प्रकट की है.

  12. केंद्र सरकार ने दैनिक भास्कर पर आयकर छापे को लेकर दिया जवाब

    केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश के एक न्यूज़ चैनल के ख़िलाफ़ आयकर छापों से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है.

    उन्होंने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "एजेंसियाँ अपना काम करती हैं, हम उनके काम में दख़ल नहीं देते."

    उन्होंने साथ ही कहा, "मैं आग्रह करना चाहता हूँ कि किसी भी घटना की रिपोर्ट देते समय तथ्यों को हासिल करना चाहिए. कई बार जानकारी की कमी से भ्रामक बातें कही जाती हैं."

    आयकर विभाग ने गुरुवार सुबह भारत के प्रमुख मीडिया समूह दैनिक भास्कर के कई ठिकानों पर छापेमारी की है.

    आयकर विभाग की कई टीमों ने दैनिक भास्कर के अलग-अलग राज्यों में स्थित दफ्तरों पर एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की है. भास्कर के भोपाल स्थित मुख्यालय और प्रबंधकों के घर भी टीमें पहुंची हैं.

    उत्तर प्रदेश से संचालित समाचार चैनल 'भारत समाचार' के दफ़्तर और संपादक ब्रजेश मिश्रा के घर पर भी इनकम टैक्स की छापेमारी की रिपोर्ट है. इस संबंध में आयकर विभाग ने कोई अधिकारिक जानकारी नहीं दी है.

    लेकिन भारत समाचार ने अपनी रिपोर्टों में कहा है कि आयकर विभाग के कई दल संस्थान और उसके कर्मचारियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं.

    इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए गए रिपोर्ट के लिंक पर क्लिक करें -

  13. चीन ने कोरोना जाँच की WHO की नई योजना पर जताई हैरानी

    चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोरोना महामारी के जन्म के बारे में जाँच की नई योजना को ठुकरा दिया है.

    संगठन के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस ऐढेनॉम गिब्रिएसस ने इसका प्रस्ताव करते हुए चीन से माँग की थी कि वो महामारी के शुरूआती चरण की जाँच को लेकर और सहयोग करे.

    चीन के स्वास्थ्य उप मंत्री ज़ेंग यिक्सिन ने इस पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि ये पूरी योजना राजनीतिक है और चीन इसे स्वीकार नहीं कर सकता.

    गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में चीनी मंत्री ने कहा कि वो जाँच के नए प्रस्ताव पर हैरान हैं क्योंकि इसमें चीन की प्रयोगशालाओं के कथित नियम तोड़ने की जाँच पर ज़ोर दिया गया है.

    उन्होेंने इसे 'कॉमन सेन्स का अपमान' और 'विज्ञान को लेकर अहंकार' बताया.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस साल जनवरी में विशेषज्ञों की एक टीम को केवल वुहान भेज चुका था जहाँ सबसे पहले कोरोना वायरस का पता चला था.

    उसके जाँचकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष में कहा कि इस बात की आशंका बहुत कम लगती है कि वायरस किसी प्रयोगशाला से लीक हुआ. मगर इसके बाद भी ऐसे दावे बंद नहीं हुए.

    इस महीने डॉक्टर टेड्रोस ने दूसरे चरण की जाँच का प्रस्ताव किया और उसकी शर्तें बताईं. इनमें उन इलाक़ों के प्रयोगशालाओं की ऑडिट जाँच का भी प्रस्ताव किया गया जहाँ सबसे पहले वायरस पाया गया था.

  14. लोकसभा में पेगासस और कृषि बिल जैसे मु्द्दों पर हंगामा, नहीं हुआ कोई काम

    विपक्ष के हंगामे के बीच आज संसद के दोनों सदनों में कोई काम नहीं हो सका. लोकसभा और राज्यसभा को कई बार करना पड़ा.

    आज 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के बाद से ही हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद पहले सदन को 12 बजे तक, फिर 2 बजे तक और अब 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया है.

    राज्यसभा में भी ज़बरदस्त हंगामा हुआ जिसके बाद सदन की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

    विपक्षी सदस्य कई मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है. इनमें कृषि बिल, पेगासस जासूसी मुद्दे के अलावा दैनिक भास्कर समाचार समूह पर छापेमारी का मामला भी शामिल है.

    लोकसभा की बैठक शुरू होने पर प्रश्नकाल मुश्किल से 12 मिनट तक चला, जिसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया था.

    सदन में संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे पर चाहे सरकार उस पर चर्चा करने के लिए तैयार है.

    उन्होंने कहा, “राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा हुई... हम किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं. प्रश्नकाल हर सदस्य का अधिकार होता है.”

    हंगामे के बीच दो विधेयक, अंतर्देशीय पोत विधेयक 2021 और आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 सदन में पेश किए गए.

    लेकिन, हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

  15. पाकिस्तान के मंत्री शेख़ रशीद के बयानों से अफ़ग़ानिस्तान नाख़ुश, बताया 'अनप्रोफ़ेशनल'

    अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान में अपने राजदूत की बेटी के अपहरण मामले में पाकिस्तानी गृहमंत्री शेख़ रशीद की टिप्पणियों को ग़ैर-पेशेवर बताते हुए उनके लगातार बयान देते जाने पर गहरी चिंता प्रकट की है.

    पिछले शुक्रवार को बताई जा रही इस कथित अपहरण की घटना को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है.

    अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान से अपने राजदूत समेत सभी राजनयिकों को वापस बुला लिया है जिसके बाद पाकिस्तान ने भी अपने राजदूत को चर्चा के लिए वापस बुलाया है.

    अफ़ग़ान राजदूकत नजीबुल्ला अलीख़ेल ने शनिवार को ख़ुद ट्वीट कर बताया था कि उनकी बेटी सिलसिला अलीख़ेल को शुक्रवार को अग़वा किया गया और उनके साथ मारपीट हुई.

    लेकिन पाकिस्तान के गृह मंत्री लगातार इस घटना को लेकर संदेह जताते रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने एक बार फिर कहा कि राजदूत की बेटी के अपहरण की घटना में कोई सच्चाई नहीं है.

    इसके अगले दिन अफ़ग़ान सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस तरह के पूर्व निर्धारित फ़ैसलों से आपसी अविश्वास बढ़ेगा.

    मंत्रालय ने एक बयान में कहा,” जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती और लिप्त लोगों को गिरफ़्तार नहीं किया जाता, ऐसे एकतरफ़ा बयानों और ग़ैर-पेशेवर फ़ैसलों से जाँच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे और आपसी अविश्वास बढ़ेगा.”

    अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ़ अतमार ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कु़रैशी से भी बात की और पाकिस्तानी गृह मंत्री के बयानों पर चिंता प्रकट की.

  16. जंतर-मंतर पर आज से 'किसानों की संसद'. ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता सलमान रावी (कैमरा-पीयूष नागपाल)

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, 200 किसान पहुँचे दिल्ली, संसद के पास कृषि क़ानून का विरोध शुरू

    दिल्ली की सीमा पर कृषि क़ानूनों का महीनों से विरोध कर रहे किसानों में से 200 किसानों का एक दल किसान नेता राकेश टिकैत की अगुआई में संसद भवन के पास जंतर मंतर पहुँच गया है.

    हरियाणा से लगी सिंघु सीमा पर धरना दे रहे पहचान पत्र लगाए और अपनी यूनियनों का झंडा लिए ये किसान बस से से दिल्ली पहुँचे. इन बसों को पुलिस सुरक्षा दे रही थी.

    संसद भवन से थोड़ी ही दूर किसानों का धरना 11 बजे से शुरू होना था मगर उन्हें पहुँचते लगभग साढ़े बारह बज गए.

    किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि पुलिस ने रास्ते में उनकी बस को तीन जगहों पर रोका और उनके आधार कार्ड की जाँच की.

    जंतर मंतर पहुँचकर किसानों ने नारे लगाए और सरकार से तीनों कृषि क़ानूनों को निरस्त करने की माँग की.

    राकेश टिकैत ने दिल्ली पहुँचकर कहा, "किसान अपनी अलग संसद चलाएँगे, सारे सांसद, चाहे वो किसी भी पार्टी के हों, उन्हें अपने क्षेत्र में आलोचना का सामना करना पड़ेगा अगर उन्होंने सदन में हमारी आवाज़ नहीं उठाई."

    इस बीच सरकार ने एक बार फिर कहा है कि वो किसानों से चर्चा के लिए तैयार है.

    कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,"हमने किसानों से नए कृषि क़ानूनों के संदर्भ में बात की है।किसानों को कृषि क़ानूनों के जिस भी प्रावधान मे आपत्ति हैं वे हमें बताए, सरकार आज भी खुले मन से किसानों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है."

    आंदोलनकारी किसानों ने किसान संसद का एलान काफ़ी पहले कर दिया था और कहा था कि दिल्ली जाने वाले किसानों के पास पहचान पत्र होगा और वो पुलिस की सुरक्षा में जाएँगे,

    इस साल 26 जनवरी को किसानों के दिल्ली में लाल क़िले पर जाकर विरोध करने के दौरान हिंसा हुई थी जिसे देखते हुए पुलिस इस बार सतर्क है.

  18. लोकसभा में हंगामा, दोपहर दो बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही

    विपक्ष के हंगामे के बीच आज लोकसभा में सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.

    कई मुद्दों को लेकर विपक्ष की नारेबाजी के चलते दो बार सदन स्थगित किया गया.

    12 बजे फिर से कार्यवाही शुरू होने पर पीठासीन सभापति भरतृहरी महताब ने विरोध प्रदर्शन कर रहे सदस्यों को अपने सीटों पर वापस जाने और चर्चा में हिस्सा लेने के लिए कहा.

    संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे पर चाहे सरकार उस पर चर्चा करने के लिए तैयार है.

    उन्होंने कहा, “राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा हुई... हम किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं. प्रश्नकाल हर सदस्य का अधिकार होता है.”

    हंगामे के बीच दो विधेयक, अंतर्देशीय पोत विधेयक 2021 और आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 सदन में पेश किए गए.

    लेकिन, हंगामे के चलते पीठासीन सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

    कुछ ऐसा ही नज़ारा सुबह भी देखने को मिला. सदन की बैठक शुरू होने पर प्रश्नकाल मुश्किल से 12 मिनट तक चला, जिसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया था.

  19. ओलंपिक शुरु होने से एक दिन पहले ही हटाए गए शो डायरेक्टर

    ओलंपिक शुरू होने के एक दिन पहले ही उद्घाटन समारोह के शो डायरेक्टर को बर्खास्त कर दिया गया है.

    शो डायरेक्टर केनटारो कोबायाशी की 1990 की एक वीडियो फुटेज हाल ही में सामने आई थी जिसमें वो होलोकॉस्ट का मज़ाक उड़ाते हुए दिख रहे हैं.

    होलोकॉस्ट वो नरसंहार था, जिसमें पूर्व जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर के शासनकाल में करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी.

    केनटारो कोबायाशी ओलंपिक के उद्घाटन और समापन समारोह के क्रिएटिव डायरेक्टर थे. वो एक कॉमेडियन रह चुके हैं और पहले भी उनके बयानों के लिए उनकी आलोचना होती रही है.

    जापान की ओलंपिक प्रमुख सेको हाशिमातो ने इस वीडियो को "इतिहास के दर्दनाक तथ्यों" का मज़ाक उड़ाने वाला बताया था.

    ओलंपिक शुरू होने से पहले ही नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं.

    इससे पहले एक कंपोज़र को आयोजन के लिए काम रही टीम से निकाल दिया गया था. उन पर ये आरोप लगा था कि वो स्कूल में अपने दिव्यांग सहपाठियों को धमकाया करते थे.

    इसके अलावा खिलाड़ियों और अधिकारियों में कोरोना के बढ़ते मामले भी खेलों में परेशानी की वजह बने हुए हैं.

    रविवार को आयोजकों ने बताया था कि ओलंपिक से जुड़े 91 लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया है.

    केनटारो कोबायाशी को हटाने के बाद अब आयोजकों को देखना है कि शुक्रवार का समारोह किस तरह आयोजित किया जाएगा.

    सेको हाशिमातो ने एक बयान जारी कर कहा है, “उद्घाटन समारोह के इतने नज़दीक होने पर हम ओलंपिक में शामिल लोगों, टोक्यो के नागरिकों और जापानी जनता के लिए चिंता की स्थिति पैदा होने के लिए माफ़ी चाहते हैं.”

  20. जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा हो रहे किसान

    कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के लिए किसान आज दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं.

    दिल्ली आने के लिए किसान सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठे हो रहे हैं. वहां से बसों में किसानों को जंतर-मंतर लाया जाएगा.

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी किसान संसद लगाएंगे और कृषि क़ानूनों का विरोध करेंगे.

    किसान नेता प्रेम सिंह भंगू ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, ''हम वहां विस्तार से चर्चा करेंगे, हम स्पीकर भी बनाएंगे, चर्चा होगी और प्रश्नकाल भी होगा. 200 से अधिक किसान नहीं जाएंगे.''

    वहीं, किसान नेता मंजीत सिंह ने बताया, ‘’जंतर-मंतर पर हमारी बसें रुकेंगी, वहां से हम पैदल जाएंगे. जहां पर भी हमें पुलिस रोकेगी वहीं पर हम अपनी संसद लगाएंगे. जिन किसानों के आईकार्ड बन गए हैं वे आगे जाएंगे.’’

    किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. जंतर-मंतर पर बढ़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया है.

    डीसीपी बाहरी दिल्ली परविंदर सिंह ने बताया, ‘’किसानों के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर टिकरी बॉर्डर पर प्रतिबंध की व्यवस्था की गई है. सिर्फ सिंघु बॉर्डर से आने-जाने की अनुमति है. टिकरी बॉर्डर से किसानों के प्रदर्शन से संबंधित आवाजाही की अनुमति नहीं है. बाकी अन्य तरह की आवाजाही पर रोक नहीं है.’’