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अफग़ान राजदूत के वापस जाने से परेशान है पाकिस्तान

पाकिस्तान ने भारत का नाम लिए बग़ैर कहा कि दुश्मन काबुल और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते ख़राब करने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है.

लाइव कवरेज

रजनीश कुमार, सिंधुवासिनी and अपूर्व कृष्ण

  1. ‘पेगासस का बाप कौन?’: शिवसेना का मोदी सरकार पर हमला

    महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’के संपादीकय में पेगासस मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है.

    ‘पेगासस का बाप कौन?’ शीर्षक से लिखे इस संपादकीय में गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी निशाना साधा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेगासस जासूसी वाली रिपोर्ट ‘अंतरराष्ट्रीय साज़िश’ बताया था.

    संपादकीय में लिखा है, “‘देश और लोकतंत्र को बदनाम करने की यह अंतर्राष्ट्रीय साजिश है!’ गृहमंत्री द्वारा ऐसा बयान दिया जाना आश्चर्यजनक है. देश को बदनाम निश्चित तौर पर कौन कर रहा है, यह श्रीमान गृहमंत्री बता सकते हैं क्या? सरकार आपकी, देश और लोकतंत्र आपका.फिर ये सब करने की हिम्मत किसमें निर्माण हुई?”

    भारत और इसराइल के रिश्तों पर तंज़

    जासूसी के ज़रिए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की आशंका जताई है.

    इसराइल की कंपनी एनएसओ के बनाए स्पाईवेयर पेगासस के निशाने पर रहे लोगों की लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम भी है.

    इस लेख में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और इसराइल के सम्बन्धों पर भी कटाक्ष किया गया है.

    संपादकीय में कहा गया है, “इसराइल हिंदुस्तान का मित्र देश है, ऐसा हम मानते थे. प्रधानमंत्री मोदी के दौर में यह मित्रता कुछ ज़्यादा ही मज़बूत हुई.”

    शिवसेना ने पेगासस जासूसी मामले की जाँच संयुक्त संसदीय समिति (जेसीपी) से कराने की माँग भी की है.

  2. पेगासस जासूसी: लिस्ट में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, फ़्रांस ने जाँच शुरू की

    फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों भी दुनिया के उन कई नेताओं की लिस्ट में हैं जो इसराइली स्पाईवेयर पेगासस के ज़रिए जासूसी के निशाने पर थे.

    अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सॉफ़्टवेयर मैक्रों के फ़ोन में इंस्टॉल किया गया था या नहीं.

    राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स के दावे सच हैं तो यह काफ़ी गंभीर मसला हो सकता है.

    फ़्रांसीसी सरकार के अधिवक्ता कार्यालय ने एक बयान में कहा है कि उसने निजता के हनन, डेटा के ग़ैरक़ानूनी इस्तेमाल और ग़ैरक़ानूनी तरीके से स्पाईवेयर बेचने के आरोपों को आधार बनाकर जाँच शुरू कर दी है.

    मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को ‘डराने वाली’ कहा है.

    एम्नेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा, “ये अभूतपूर्व पर्दाफ़ाश है...इससे दुनिया भर के नेताओं को चिंता होनी चाहिए.”

    फ़्रांस के अख़बार 'ला मोंदे' की रिपोर्ट के अनुसार मोरक्को की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने उस फ़ोन की पहचान कर ली थी जिसका इस्तेमाल मैक्रों साल 2017 से कर रहे थे.

    हालाँकि मोरक्को का कहना है कि वो पेगासस बनाने वाली इसराइली कंपनी एनएसओ का क्लाइंट नहीं है.

    वहीं, एनएसओ ने भी ला मोंदे के हवाले से कहा है कि उसके क्लाइंट्स ने एमैनुएल मैक्रों को कभी निशाना नहीं बनाया.

    किस देश के सबसे ज़्यादा लोग लिस्ट में?

    खोजी पत्रकारों के समूह का कहना है कि उन्हें दुनिया के 50 देशों में 1,000 से ज़्यादा ऐसे नंबरों की लिस्ट मिली है जिनके पेगासस के ज़रिए जासूसी का निशाना बनाए जाने की आशंका है.

    इस लिस्ट में 600 से ज़्यादा नेता, सरकारी अधिकारी और 189 पत्रकार हैं. जिन देशों के सबसे ज़्यादा लोग इस लिस्ट में हैं. वो हैं- मेक्सिको और सऊदी अरब.

    भारत से इस लिस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, भारतीय वायरॉलजिस्ट गगनदीप कंग और भारत के पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला समेत कई पत्रकारों के नाम भी हैं.

  3. चीन में बाढ़ का कहर: कम से कम 12 की मौत, हज़ारों घर छोड़ने को मजबूर

    भारी बारिश के कारण केंद्रीय चीन के कई हिस्सों में बाढ़ आ गई है.

    बाढ़ से अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है और हज़ारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

    पानी भर जाने के कारण स्टेशन और सड़कें डूब गई हैं.

    अकेले हेनन प्रांत में 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है.

    अधिरकरियों ने जेंग्जाऊ प्रांत में बाढ़ की शुरुआत से लेकर अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि की है.

    जलवायु परिवर्तन का असर

    बाढ़ के कारण 12 से ज़्यादा शहर प्रभावित हुए हैं जहाँ सड़कों में पानी भर जाने के कारण उन्हें बंद करना पड़ा है और उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं.

    लगभग साढ़े नौ करोड़ लोगों की आबादी वाले हेनन प्रांत में असाधारण रूप से हो रही बरसात के कारण मौसम से जुड़ी सबसे गंभीर चेतावनी जारी कर दी गई है.

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बाढ़ के वैसे तो कई कारण हो सकते हैं लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान को माना जा रहा है.

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