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यूरोपीय संघ, अमेरिका और ब्रिटेन ने चीन पर लगाया एक बड़े साइबर हमले का आरोप

ये हमला माइक्रोसॉफ़्ट एक्सचेंज सर्वर पर किया गया था जिससे दुनिया भर में कम से कम 30 हज़ार सर्वर प्रभावित हुए थे. इस मामले में ब्रिटेन ने कहा है कि इस हमले के लिए चीनी सरकार द्वारा समर्थित पक्ष ज़िम्मेदार हैं. वहीं, यूरोपीय संघ ने कहा है कि ये हमला ”चीनी क्षेत्र” से किया गया है.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, सिंधुवासिनी, भूमिका राय and अपूर्व कृष्ण

  1. सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- शाम 5 बजे तक रिहा हों फ़ेसबुक पोस्ट से राजद्रोह मामले में बंद मणिपुरी कार्यकर्ता

    सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह मामले में गिरफ़्तार किये गए मणिपुर के राजनीतिक कार्यकर्ता लीचोम्बम एरेंड्रो को रिहा करने का आदेश दिया है.

    मई महीने में कुछ फ़ेसबुक पोस्ट के आधार पर 37 साल के एरेंड्रो को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

    उन्होंने अपनी एक पोस्ट में कहा था - "गोबर और गोमूत्र काम नहीं करते हैं".

    हालांकि सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय मांगा और मामले को कल तक के लिए स्थगित करने के लिए कहा लेकिन सुनवाई कर रही दो जजों की बेंच ने एरेंड्रो की तत्काल रिहाई का आदेश दे दिया.

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि – हमारे विचार से याचिकाकर्ता का लगातार हिरासत में रहना अनुच्छेद 21 का (जीने का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) उल्लंघन होगा. हम उन्हें आज शाम 5 बजे तक एक हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश देते हैं.

    एरेंड्रो के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह निर्देश सुनाया.

    एरेंड्रो को पत्रकार किशोरचंद्र वांगख़ेम के साथ तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सैखोम टिकेंद्र सिंह के निधन पर कमेंट पोस्ट करने के लिए गिरफ़्तार किया गया था. जिसके बाद मणिपुर भाजपा के उपाध्यक्ष और महासचिव ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करायी थी और उनकी पोस्ट को आपत्तिजनक बताया था.

    हालांकि इससे पहले भी जून 2020 में एरेंड्रो पर राज्य पुलिस ने एक अन्य फ़ेसबुक पोस्ट को लेकर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था. यह कथित विवादास्पद तस्वीर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से संबंधित थी.

    हालांकि इस मामले में उन्हें बाद में ज़मानत मिल गई थी.

    इससे पूर्व बीते सप्ताह ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि आज़ादी के 75 साल बाद क्या राजद्रोह के क़ानून की आवश्यकता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह औपनिवेशिक कानून है और स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ़ इसका इस्तेमाल किया गया था.

    चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा "आपकी सरकार ने कई पुराने क़ानूनों को निरस्त कर दिया है, मुझे नहीं पता कि आपकी सरकार आईपीसी की धारा 124 ए (जो राजद्रोह के अपराध से संबंधित है) को निरस्त करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है?"

  2. सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद पर ढील देने के लिए केरल सरकार से माँगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार से इस सप्ताह बकरीद के त्योहार के लिए कोरोना को लेकर लागू पाबंदियों में छूट देने के उसके फ़ैसले पर जवाब माँगा है.

    जस्टिस रोहिंटन एफ़ नरीमन की पीठ ने केरल सरकार को आज ही इस बारे में जवाब पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी.

    केरल में राज्य सरकार ने तीन दिनों के लिए कोविड प्रोटोकॉल से जुड़ी पाबंदियों में ढील देने का फ़ैसला किया है जिसका कई लोगों और संगठनों ने विरोध किया है.

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील देने की घोषणा की थी.

    उन्होंने कहा था कि राज्य में बकरीद 21 जुलाई को मनाई जा रही है, इसे देखते हुए कपड़े, जूते-चप्पलों, जूलरी, फैंसी सामानों, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, सभी तरह के रिपेयरिंग शॉप और अन्य ज़रूरी चीज़ों की दुकानें 18, 19 और 20 जुलाई को सुबह सात बजे से रात आठ बजे तक खुली रहेंगी.

  3. दानिश सिद्दीक़ी दिल्ली के जामिया नगर में सुपुर्द-ए-ख़ाक, रविवार को नम आंखों से विदाई

  4. ब्रिटेन: कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच आज से ज़्यादातर पाबंदियाँ ख़त्म

    कोरोना संक्रमण फैलने के लगभग डेढ़ साल बाद आख़िरकार ब्रिटेन में लगभग सभी तरह की पाबंदियाँ हटा दी गई हैं.

    लंबे समय तक लॉकडाउन में रहने वाले ब्रितानियों के लिए अब देर रात नाइट क्लब से लेकर रेस्तरां सब खुल गए हैं.

    इतना ही नहीं, मास्क लगाने को लेकर लगाई गई क़ानूनी बाध्यता भी अब ख़त्म कर दी गई है. हालाँकि ज़्यादा भीड़ वाली जगहों पर लोगों को मास्क लगाने का सुझाव ज़रूर दिया जा रहा है.

    किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए या किसी जगह पर इकट्ठा होने के लिए लोगों की संख्या पर लगाई गई सीमा भी अब हटा ली गई है.

    पीएम बोरिस जॉनसन ने चेताया

    इन सबके बीच प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा है.

    रविवार दोपहर को ट्विटर पर पोस्ट किए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लिए लॉकडाउन के आख़िरी पड़ाव पर पहुँचने का यह ‘सही समय’ नहीं है.

    बोरिस जॉनसन ने चेताया कि सर्दियों में वायरस ठंडे मौसम का ‘फ़ायदा उठाकर’ और तेज़ी से फैल सकता है.

    उन्होंने कहा, “हमें पाबंदियों से सतर्क होकर बाहर निकलना होगा. हमें यह याद रखना है कि वायरस अब भी मौजूद है. संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और बहुत तेज़ी से फैलना वाला डेल्टा वेरिएंट भी आ चुका है.”

    स्वास्थ्य मंत्री कोरोना पॉज़िटिव

    वहीं, ब्रितानी स्वास्थ्य मंत्री साजिद जावेद वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बावजूद रविवार को कोरोना पॉज़िटिव पाए गए.

    उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और कहा कि उन्हें हल्के लक्षण हैं.

    साजिद जावेद ने ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी एहतियात के तौर पर ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है.

    ब्रिटेन में अब तक 68 फ़ीसदी से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराकें लग चुकी हैं.

    ब्रिटेन में इन दिनों रोज़ाना लगभग 50 हज़ार मामले आ रहे हैं. कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गर्मी के आख़िर तक वहाँ रोज़ाना दो लाख मामले तक आ सकते हैं.

  5. मोदी लोकसभा में हंगामे पर बोले- दलित, ओबीसी, महिला को मंत्री नहीं देखना चाहता विपक्ष

    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.

    सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपनी मंत्रिपरिषद के नए मंत्रियों का परिचय कराना चाहा मगर इसी दौरान विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे.

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वो कुछ तबक़ों के लोगों को मंत्री बनते नहीं देखना चाहता.

    मोदी ने कहा, "मैं सोच रहा था कि आज सदन में उत्साह का वातावरण होगा क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में हमारी महिला सांसद, दलित भाई, ​आदिवासी, किसान परिवार से सांसदों को मंत्री परिषद में मौका मिला। उनका परिचय करने का आनंद होता."

    "लेकिन शायद देश के दलित, महिला, ओबीसी,​ किसानों के बेटे मंत्री बनें ये बात कुछ लोगों को रास नहीं आती है। इसलिए उनका परिचय तक नहीं होने देते."

  6. पाकिस्तान ने अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के 'अपहरण' मामले में भारत पर उठाई उंगली

    पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख़ रशीद अहमद ने अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के अपहरण की घटना पर संदेह जताया है और आरोप लगाया है कि इसमें भारत का हाथ है.

    शेख़ रशीद ने रविवार को पाकिस्ताने के निजी टीवी चैनल जियो पर कहा - "अफ़ग़ान राजदूत की बेटी पैदल घर से निकलीं और बाज़ार गईं, वहाँ से उन्होंने एक टैक्सी ली और खड्डा मार्केट जाकर ख़रीदारी की. हमारे पास इसकी फुटेज है."

    मंत्री ने कहा कि वहाँ से उन्होंने एक और टैक्सी और रावलपिंडी चली गईं और एक शॉपिंग मॉल गईं. इसके बाद वो एक तीसरी टैक्सी लेकर दामन-ए-कोह (एक पर्यटक स्थल) चली गईं.

    रशीद ने कहा - "हमारी जाँच में जो एक बात साफ़ नहीं हो पा रही वो ये है कि वो रावलपिंडी से दामन-ए-कोह कैसे चली गईं. शेख़ रशीद ने इस घटना के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया और कहा कि उसने पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए ऐसा किया है."

    उन्होंने कहा- "हम इस वाक़ये की पूरी और सच्ची तस्वीर सारी दुनिया के सामने पेश करेंगे."

    पाकिस्तान सरकार अफ़ग़ानिस्तान के फ़ैसले से नाख़ुश

    इस बीच पाकिस्तान सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के अपने राजनयिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले की निंदा की है और उम्मीद जताई है कि वो इसपर दोबारा विचार करेगा.

    अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा था कि उसने इस्लामाबाद में अपने राजदूत नजीबुल्ला अली खेल की बेटी के अपहरण और उनके साथ मारपीट की घटना के बाद अपने राजदूत समेत सभी राजनयिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है.

    इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है- "अफ़ग़ानिस्तान सरकार का अपने राजदूत और राजनयिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला निराशाजनक है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के निर्देश पर अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के कथित अपहरण की घटना की उच्चस्तरीय जाँच हो रही है."

    मंत्रालय ने साथ ही बताया कि राजदूत, उनके परिवार और अफ़ग़ान दूतावासों और कॉन्सुलेट के सभी लोगों की सुरक्षा सख़्त कर दी गई है.

    साथ ही, पाकिस्तान के विदेश सचिव ने अफ़ग़ान राजदूत से मिलकर उन्हें सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और पूरे सहयोग का भरोसा दिया.

    शनिवार को ये ख़बर आई कि इस्लामाबाद में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अग़वा करने की कोशिश की थी.

    पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल ने ख़ुद इस घटना की जानकारी दी.

    उन्होंने ट्वीट कर बताया, ''इस्लामाबाद से शनिवार को मेरी बेटी को अगवा किया गया और उसे बुरी तरह से पीटा गया है. लेकिन अल्लाह के करम से वो वहाँ से भागने में कामयाब रही. अभी वो ठीक है. यह अमानवीय कृत्य है. इस मामले की पर दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों की नज़र है.''

    पाकिस्तान की पुलिस ने भी इसके बाद कहा कि हमलावर राजदूत को अग़वा करना चाहते थे, पर वो ऐसा करने में कामयाब नहीं हो सके और राजदूत की बेटी के साथ मारपीट करने के बाद फ़रार हो गए.

  7. नमस्कार,

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