राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार
और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शनिवार को दिल्ली में मुलाक़ात हुई. बताया गया है
कि दोनों के बीच क़रीब पचास मिनट तक बातचीत हुई.
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी
और दोनों नेताओं की मुलाक़ात की एक तस्वीर भी साझा की.
दोनों नेताओं के बीच इस मुलाक़ात में क्या बात हुई, इस बारे
में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने ताज़ा
राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की.
शनिवार को,
मुलाक़ात के दिन ही शरद पवार ने पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा जिसमें उन्होंने
बताया कि नए सहकारिता मंत्रालय के बनने से उन्हें क्या परेशानियाँ हैं जिसकी कमान
अमित शाह को सौंपी गई है.
दोनों नेताओं की इस मुलाक़ात के समय को लेकर कई तरह के सवाल
उठ रहे हैं. ये मुलाक़ात संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से दो दिन पहले हुई है और
वो भी ऐसे समय में, जब महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में कुछ चीज़ों को लेकर तनाव
दिख रहा है. एनसीपी महाराष्ट्र के गठबंधन में एक प्रमुख पार्टी है.
इस हफ़्ते की शुरुआत में, शरद पवार और राजनीतिक रणनीतिकार
प्रशांत किशोर की मुलाक़ात के बाद ऐसी अफ़वाहें थीं कि वो अगले साल होने वाले
राष्ट्रपति चुनाव में एक उम्मीदवार हो सकते हैं. हालांकि, पवार ने ऐसी सभी अटकलों
को सिरे से ख़ारिज कर दिया.
शरद पवार और पीएम मोदी की मुलाक़ात के बाद, एनसीपी के प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता माजिद मेमन ने कहा कि बेवजह की अटकलें लगाई जा रही हैं जिनकी कोई बुनियाद नहीं है. हर चीज़ को राजनीतिक गठजोड़ के नज़रिये से देखना ज़रूरी नहीं. शरद पवार जैसे बड़े नेता के सामने कई मुद्दे हैं जिन्हें उन्हें सुलझाना है. आपको क्या लगता है कि उन्हें सिर्फ़ इसलिए प्रधानमंत्री से मुलाक़ात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वे विपक्ष के नेता हैं?
मेमन ने दावा किया कि शरद पवार ने पीएम मोदी से बातचीत में सहकारिता मंत्रालय, किसानों के आंदोलन और मराठा रिज़र्वेशन समेत कई मुद्दों पर बात की.
बताया गया है कि पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में शरद पवार ने सहकारी बैंकों की कार्यशैली में बदलाव का मुद्दा भी उठाया.
पवार ने अपने पत्र में लिखा कि देश के विकास के लिए सहकारी क्षेत्र का विकास महत्वपूर्ण है.
उन्होंने दलील दी कि यह मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मज़बूत करता है क्योंकि सहकारी बैंकों के पास पहली बार कर्ज़ लेने वालों को उधार देने और लघु व सूक्ष्म उद्योगों को उनके कुल अग्रिमों का 23 प्रतिशत से अधिक योगदान करने की विशेषज्ञता है.
इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को शरद पवार और ए के एंटनी से मुलाक़ात की थी.
इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे भी मौजूद थे.
ये मुलाक़ातें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि 19 जुलाई से संसद का मानसून सत्र आरंभ हो रहा है.