पंजाब: हरीश रावत ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह आलाकमान का हर फ़ैसला मानने को तैयार

हरीश रावत ने चंडीगढ़ में कैप्टन अमरिंदर से मुलाक़ात की जिसके बाद उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह ने कहा है वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्णय का सम्मान करेंगे.

लाइव कवरेज

शुभम किशोर

  1. पंजाब: हरीश रावत ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी का हर फ़ैसला मानने को तैयार

    सरबजीत धालीवाल

    बीबीसी संवाददाता

    कांग्रेस

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    एक तरफ पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत शनिवार की सुबह दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे और कैप्टन अमरिंदर से मुलाकात की तो वहीं दूसरी तरफ विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला से चंडीगढ़ पहुंचे और राज्य के कई नेताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की.

    हरीश रावत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनके आवास पर मुलाक़ात की जिसके बाद उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का जो निर्णय होगा, वो उसे मानेंगे.

    हरीश रावत ने मुलाक़ात के बाद ट्वीट किया,"मैं कैप्टन अमरिंदर सिंह जी से मिलकर अभी-अभी दिल्ली लौटा हूं. मुझे प्रसन्नता है कि बहुत सारी बातें जो बाहर चर्चा में हैं, वो बिल्कुल निर्मूल साबित हुई हैं. कैप्टन साहब ने फिर से अपने उस महत्वपूर्ण बयान को दोहराया है कि कांग्रेस अध्यक्ष पंजाब के विषय में अध्यक्ष के पद को लेकर जो भी निर्णय करेंगे वो उन्हें स्वीकार होगा."

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    इधर सिद्धू ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ से उनके पंचकूला स्थित आवास में मुलाक़ात की. दोनों नेता आपस में गले मिलते भी दिखे. इस दौरान सिद्धू ने कहा कि "जाखड़ मेरे बड़े भाई हैं और मेरे मार्गदर्शक हैं."

    इसके बाद सिद्धू ने पंजाब के कई नेताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्री से उनके घर जा कर मुलाक़ात की.

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    पंजाब कांग्रेस की कलह का कारण

    बताया जाता है कि सरकार बनने के दो साल बाद तक तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन उसके बाद सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तनाव पैदा होने लगे.

    नवजोत सिंह सिद्धू ने 10 जून, 2019 को पंजाब कैबिनेट के पद से इस्तीफा दे दिया. अमरिंदर सिंह ने उन्हें बिजली मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल करने का ऑफ़र दिया पर सिद्धू नहीं माने.

    पिछले कुछ महीनों में ये लड़ाई खुलकर सामने आती दिखी और सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ एक तरह से मोर्चा खोल दिया.

    सिद्धू ने कई मुद्दों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाए. सिद्धू ने बार-बार ट्वीट कर कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए.

    पार्टी में कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस आला कमान ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने मुख्यमंत्री समेत पंजाब कांग्रेस के 100 से अधिक नेताओं की राय ली और अपनी रिपोर्ट सौंपी.

    पिछले दिनों अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर अपना पक्ष रखा और कहा था की उन्हें पार्टी का हर फ़ैसला स्वीकार होगा.

  2. बीजेपी ख़ास समुदाय को निशाना बनाने के लिए उठा रही जनसंख्या का मुद्दा : शशि थरूर

    शशि थरूर

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    कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाकर बीजेपी एक "विशेष समुदाय" को निशाना बनाना चाहती है.

    पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर ने जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ी इस बहस को पूरी तरह से ग़लत है और आधी सदी पुराना बताया.

    समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि अगले 20 वर्षों में भारत के लिए बड़ी चुनौती बढ़ती आबादी नहीं बल्कि आबादी की बढ़ती उम्र के लिए तैयार होना है.

    उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे को ‘ग़लत इरादे' से उठा रही है और एक 'विशेष समुदाय' को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है.

    तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा, "यह कोई संयोग नहीं है कि जिन तीन राज्यों में सरकार जनसंख्या कम करने की बात कर रही है, वे हैं उत्तर प्रदेश, असम और लक्षद्वीप, और हर कोई जानता है कि उनका निशाना कौन है."

    उत्तर प्रदेश और असम में जनसंख्या नियंत्रण पर ज़ोर देने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमारी राजनीति के हिंदुत्व तत्व इस मुद्दे को समझ नहीं पाए हैं. उनका मकसद विशुद्ध रूप से राजनीतिक और सांप्रदायिक है."

    थरूर की टिप्पणी उत्तर प्रदेश के जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के मसौदे को सार्वजनिक किए जाने और असम सरकार द्वारा इस संबंध में एक नीति तैयार करने के प्रस्ताव के कुछ दिनों बाद आई है. दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है.

    यूपी ड्राफ्ट बिल में उन लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभों से वंचित करने का प्रावधान है, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं और दो बच्चों की नीति वालों को दूसरे लाभ देने का प्रस्ताव है.

    दोनों सदनों के सचिवालयों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ बीजेपी सांसद मानसून सत्र में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर निजी सदस्यों के बिल पेश करने की तैयारी में हैं. मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा.

  3. चीनी नागरिकों की मौत के बाद पाकिस्तान ने दिलाया सुरक्षा का भरोसा

    डासू

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    चीन और पाकिस्तान की एक संयुक्त टीम ने शनिवार को डासू में उस जगह का दौरा किया जहां एक बस में धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में नौ चीनी नागरिक भी थे.

    पाकिस्तान ने शुरू में इस घटना के लिए तकनीकी ख़राबी को जिम्मेदार ठहराया था लेकिन बाद में कहा कि घटनास्थल से विस्फोटकों के निशान मिले हैं और इसके पीछे चरमपंथियों के शामिल होने की बात को खारिज नहीं किया जा सकता है.

    गृह मंत्री शेख रशीद अहमद ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे चीनी नागरिकों को मुकम्मल सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और इसके लिए सरकारी एजेंसियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, चीन ने शुरू में इस घटना को बम हमला करार दिया था लेकिन पाकिस्तान ने जब इसे दुर्घटना कहा तो चीन अपने बयान से पीछे हट गया हालांकि बाद में उसने कहा कि इस मामले की संयुक्त जांच के लिए वो अपनी टीम भेजेगा.

  4. तालिबान से आख़िर क्या डर है?

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY:तालिबान से आख़िर क्या डर है?

    बीते 20 साल से अफ़ग़ानिस्तान में डटी विदेशी फ़ौजों की 11 सितंबर तक वापसी होनी है. इस बीच तालिबान वहां फिर ताक़तवर हो रहा है. उसके प्रभाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है. इस वजह से अफ़ग़ान सरकार के साथ-साथ दुनिया के कई देश चिंतित हैं.

    लेकिन सबसे बड़ा दर्द है.. दशकों से हिंसा की मार झेल रहे अफ़ग़ान लोगों का जिनका जीवन और मुश्किलों की ओर बढ़ता दिख रहा है. इन तमाम पहलुओं की पड़ताल कवर स्टोरी में...

  5. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की मौजूदगी पर इमरान ख़ान ने क्या कहा?

    वीडियो कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की मौजूदगी पर इमरान ख़ान ने क्या कहा?

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारत से बातचीत के सवाल पर आरएसएस का ज़िक्र छेड़ दिया. वहीं तालिबान पर पाकिस्तान के नियंत्रण के सवाल पर वो बिना जवाब दिए चलते बने.

    इमरान मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में हिस्सा लेने ताशकंद पहुंचे हैं. उन्होंने सम्मेलन में कहा कि तालिबान को बातचीत की मेज़ तक लाने के लिए सबसे ज़्यादा कोशिशें पाकिस्तान ने की हैं.

    इमरान ख़ान जब ये बातें बोल रहे थे वहां अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी भी मौजूद थे. इसी सम्मेलन में अशरफ़ ग़नी ने कहा कि पाकिस्तान ने चरमपंथी समूहों से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं.

    सम्मेलन में भारत समेत कुल 40 देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.

  6. मुसलमान ज़्यादा पिछड़े या ईसाई, क्या केरल खोज पाएगा इस सवाल का जवाब?

    केरल

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    केरल में कौन ज़्यादा पिछड़ा है- मुसलमान या ईसाई? इस सवाल के जवाब ने अल्पसंख्यक समुदायों के लिए स्कॉलरशिप के मुद्दे पर केरल के राजनीतिक दलों को पशोपेश में डाल दिया है.

    न तो सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और न ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट इन दोनों अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपना संबंध ख़राब करना चाहता है क्योंकि मुसलमान और ईसाई लोग राज्य की आबादी का 46 फीसदी हिस्सा हैं.

    राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों की चुनावी अहमियत को देखते हुए सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने ये फ़ैसला किया है कि वो केरल हाई कोर्ट के फ़ैसले का कड़ाई से पालन करेगी.

    केरल हाई कोर्ट ने मुसलमान और ईसाई छात्रों के बीच स्कॉलरशिप का बंटवारा 80:20 के अनुपात करने के साल 2015 के सरकारी आदेश को खारिज कर दिया था.

  7. बिहार के एक गांव में 16 लोगों की मौत, ज़हरीली शराब का अंदेशा

    सांकेतिक तस्वीर

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    बिहार के एक गांव में पिछले कुछ दिनों में 16 लोगों की मौत हो गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मौत के इन मामलों की वजह ज़हरीली शराब हो सकती है.

    पश्चिमी चंपारण ज़िला प्रशासन की ओर से जारी किए बयान के मुताबिक़ मृतकों में से केवल चार लोगों के परिजनों ने इस बात की पुष्टि की है कि मरने से पहले उन्होंने शराब पी थी.

    ज़िला प्रशासन का कहना है कि दो मृतकों के परिजनों ने जो दस्तावेज़ दिए हैं, उससे ये मालूम देता है कि उनकी मौत बीमारी के कारण हो सकती है जबकि दस मृतकों के परिजन मृत्यु के कारणों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं.

    ये सभी मौतें बेतिया के लौरिया पुलिस स्टेशन के देउरवा गांव में हुई हैं. आठ लोगों की मौत गुरुवार को हो गई थी. इसके दूसरे दिन आठ और लोगों की मौत हो गई.

    इस सिलसिले में ज़हरीली शराब पीकर बीमार पड़ने वाले एक पीड़ित के बयान के आधार पर एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है और पांच लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

    बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने अप्रैल, 2016 में शराबबंदी लागू कर दी दी. राज्य में शराब पीने और इसके व्यवसाय पर रोकथाम के लिए कड़े क़ानूनी प्रावधान लागू हैं.

    पश्चिमी चंपारण के ज़िलाधिकारी कुंदन कुमार ने गांववालों से इस घटना के बारे में बिना डर के जानकारियां देने की अपील की है.

  8. सीरिया: बशर अल-असद ने चौथी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली

    बशर अल-असद

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    लगातार तीन बार राष्ट्रपति रह चुके बशर अल-असद ने शनिवार को चौथी बार देश के राष्ट्रपति पद की शपथ ली है. सीरिया के सरकारी टेलीविज़न ने दमिश्क में हुए शपथग्रहण समारोह का लाइव टेलिकास्ट किया.

    शपथ लेने के बाद 55 वर्षीय बशर अल-असद ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सीरियाई लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि "लोगों ने अपना ख़ून देकर अपनी मातृभूमि की रक्षा की है."

    साल 2011 से सीरिया गृहयुद्ध के हालातों से जूझ रहा है. इस कारण यहां लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. अब सालों के संघर्ष के बाद रूस समर्थित सीरियाई सरकारी सेना ने देश के दो तिहाई हिस्से को अपने कब्ज़े में ले लिया है. लेकिन अब भी कई ऐसे इलाक़े हैं जो सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार देश की 80 फीसदी आबादी ग़रीबी का सामना कर रही है और डॉलर के मुक़ाबले सीरियाई पाउंड में आई गिरावट के कारण देश में महंगाई अपने चरम पर है.

    हाल के दिनों में सरकार ने यहां पेट्रोल, ब्रेड, चीनी और चावल की क़ीमतें बढ़ाई हैं.

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    सीरिया पर लेबनान के संकट का असर

    असद ने शनिवार को कहा कि पड़ोसी देश लेबनान के बैंकों में देश का काफी पैसा फंसा हुआ है और देश की तरक्की में निवेश न होने के पीछे ये मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि एक आकलन के अनुसार क़रीब 40 से 60 अरब डॉलर की रकम है जो फंसी हुई है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंधों से निपटने के लिए सीरिया की कंपनियां लेबनान की बैंकिंग व्यवस्था का फायदा उठाया करती थीं लेकिन आर्थिक संकट से जूझ रहे लेबनान ने साल 2019 में देश के बाहर होने वाले मनी ट्रांसफर पर रोक लगा दी जिससे उनके लिए नई मुश्किल खड़ी हो गईं.

    असद ने ये भी कहा कि पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंधों से बाहर निकलने के लिए सीरिया पूरी कोशिश करेगा. उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं हुआ कि प्रतिबंधों के कारण हम अपनी ज़रूरी चीज़ों की व्यवस्था नहीं कर पाए, लेकिन इसके कारण कुछ बड़ी मुसीबतें ज़रूर पैदा हुई हैं."

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    विपक्ष और पश्चिमी देशों का आरोप, चुनावों में हुई धांधली

    इस साल मई में हुए चुनावों में बशर अल-असद की सीरियाई बाथ पार्टी को 95 फीसदी वोटों के साथ बहुमत मिला था जिसके बाद लगातार चौथी बार वो सात सालों के लिए राष्ट्रपति बन गए हैं.

    पिता हाफ़िज़ अल-असद की मौत के बाद साल 2000 में एक रेफरेंडम के ज़रिए बशर अल-असद सबसे पहले राष्ट्रपति बने थे. उनके पिता ने 30 साल तक देश पर शासन किया था. ये चुनाव केवल सीरियाई सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़ों में हुए थे जबकि सीरिया में विपक्षी पार्टियों और कुर्दिश हथियारबंद समूहों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था.

    अमेरिका, फ्रांस, और इटली ने इन चुनावों को नकारते हुए कहा था कि इनमें धांधली हुई थी. उनका कहना था कि 'न तो ये चुनाव स्वतंत्र थे और न ही निष्पक्ष'.

    सीरिया

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  9. चीन से आई गोल्डफिश झीलों और नदियों के लिए 'राक्षस' क्यों बनती जा रही है?

    गोल्डफिश

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    अगर आपके घर के ड्रॉइंग रूम में रखे एक्वेरियम में गोल्डफिश हो और आप उससे छुटकारा पाना चाहते हों तो आप क्या करेंगे? क्या आप उसे बाथरूम में बहा देंगे? या फिर उसे पास की झील या नदी में ले जाकर छोड़ देंगे?

    अगर आप ये सबकुछ सोच रहे हैं तो थोड़ा ठहर जाइए और इस लेख को आख़िर तक पढ़िए क्योंकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि आप ऐसा करके एक 'राक्षस' पैदा कर सकते हैं.

    दोस्ताना से दिखने वाली ये मछलियां जिन्हें हम गोल्डफिश कहते हैं और विज्ञान में कैरेसियस ऑराटस कहा जाता है, हाल के सालों में दुनिया भर की नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों में मौजूद जलीय जीव प्रजातियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं.

    एक्वेरियम में नन्ही-सी दिखने वाली ये मछली बाहर की दुनिया में फुटबॉल की गेंद तक का आकार ले सकती हैं और इनका वजन दो किलो तक बढ़ता है.

  10. वेदों में नहीं लिखा, इसलिए चारधाम यात्रा की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं– पुष्कर सिंह धामी

    पुष्कर सिंह धामी

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    उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वो हाईकोर्ट में एफ़िडेविट देंगे कि चारधाम यात्रा की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम माननीय अदालत में एफ़िडेविट देने वाले हैं कि देवस्थानम बोर्ड की बैठक में सभी का ये मत है कि लाइव प्रसारण कहीं नहीं होता है. वेदों में भी नहीं लिखा गया है इसलिए लाइव प्रसारण हम नहीं करेंगे.”

    इधर राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, “देवस्थानम बोर्ड के सदस्यों से लाइव स्ट्रीमिंग के बारे में विचार देने के लिए कहा गया, उनकी राय को कोर्ट तक पहुंचाया जाएगा और भी शंकाएं हैं उन्हें दूर किया जाएगा.”

    देवस्थानम बोर्ड यानी मंदिर के प्रतिनिधियों की राय है कि लाइव स्ट्रीमिंग परंपराओं और मान्यताओं के ख़िलाफ़ है.

    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हाल में चारधाम यात्रा पर लगाई गई रोक को 28 जुलाई तक बढ़ा दिया है. इससे पहले यह रोक 7 जुलाई तक थी. साथ ही ने कोर्ट ने सरकार से बोर्ड से सलाह कर लाइव स्ट्रीमिंग पर फ़ैसला लेने के लिए कहा था.

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  11. टोक्यो ओलंपिक विलेज में मिला पहला कोविड पॉज़िटिव मामला

    ओलंपिक

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    टोक्यो के ओलंपिक विलेज में पहला कोविड पॉज़िटिव केस पाया गया है. शनिवार को टोक्यो ओलंपिक के आयोजकों ने इसकी जानकारी थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अधिकारियों ने पॉज़िटिव पाए गए व्यक्ति की पहचान को गोपनीय रखा है. हालांकि उन्होंने जानकारी दी है कि ये व्यक्ति खिलाड़ी नहीं है, लेकिन “खेलों से जुड़े हुए” हैं.

    ऑर्गनाईज़िंग कमेटी के अध्यक्ष सीको हाशिमोटो ने बीबीसी से कहा,"जापान आने वाले एथलीट शायद बहुत चिंतित हैं. मैं इस बात को समझता हूं. यही कारण है कि हम सारी जानकारियां साझा कर रहे हैं.”

    "हम कोविड के प्रकोप को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. अगर फिर भी महामारी फैलती है तो हम सुनिश्चित करेंगे की उसके लिए हमारे पास एक प्लान हो.”

    टोक्यो के ओलंपिक विलेज में 11,000 खिलाड़ी समेत हज़ारों स्टाफ़ रहेंगे.

  12. इंग्लैंड: प्रतिबंधों में ढील के बाद बढ़े नोरोवायरस संक्रमण के मामले

    नोरोवायरस

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    इंग्लैंड में नोरोवायरस यानी विंटर वोमिटिंग वायरस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के मुताबिक़ पिछले पांच हफ़्तों में यहां इस वायरस संक्रमण के 154 नए मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले पांच सालों में इसी दौरान औसतन 53 मामले दर्ज किए जाते थे.

    इनमें से ज़्यादातर मामले शिक्षण संस्थानों ख़ासतौर पर छोटे बच्चों के स्कूलों में दर्ज किए गए हैं.

    अचानक उल्टी होना और पेट ख़राब होना नोरोवायरस संक्रमण के लक्षण हैं. इस बीमारी के लक्षणों में तेज़ बुखार, पेट और बदन में दर्द के साथ-साथ उल्टियां करना भी शामिल हैं. संक्रमित होने के एक से दो दिन बाद ये लक्षण दिखाई देते हैं.

    ये वायरस बहुत तेज़ी से फैलता है क्योंकि एक व्यक्ति नोरोवायरस के करोड़ों कण फैल सकता है और किसी को बीमार करने के लिए इसके कुछ ही कण काफ़ी हैं.

    संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से और किसी सतह पर पड़े थूक के कणों से ये फैल सकता है.

    पीएचई के प्रोफ़सर साहिर घारबिया के मुताबिक़, "नोरोवायरस संक्रमण, जिसे आमतौर पर विंटर वोमिटिंग बग कहते, कोरोना महामारी के दौरान सामान्य से निचले स्तर था और लोगों के बीच फैलने का इसे कम अवसर मिला. लेकिन प्रतिबंधों में ढील के साथ ही मामलों में वृद्धि देखी जा रही है और सभी उम्र के लोग चपेट में आ रहे हैं.”

    पीएचई का कहना है कि जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र लगाए प्रतिबंधों में ढील देना शुरू किया तो वहां पर भी नोरोवायरस के कई मामले दर्ज किए गए थे.

    नोरोवायरस

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    बचाव के उपाय

    इससे बचने के लिए डॉक्टर बार-बार साबुन और गर्म पानी से हाथ धोने की राय देते हैं.

    साथ ही वो कपड़ों, शौचालयों को साफ़ रखने की और पानी में ब्लीच डाल जगहों की सफ़ाई करने की हिदायत देते हैं.

    नोरोवायरस कोरोना वायरस की तरह अल्कोहल से नहीं मरता. डॉक्टर कहते हैं कि अगर कपड़ों को साबुन से 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धोया जाए तो इससे फायदा होता है.

  13. सोशल मीडिया पर ग़लत जानकारियों के कारण मर रहे हैं लोग – जो बाइडन

    जो बाइडन

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर कोविड-19 से जुड़ी ग़लत सूचनाओं का प्रसार "लोगों को मार रहा है".

    बाइडन कोरोना वैक्सीन और महामारी के बारे में झूठ फैलाने में "फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म" की कथित भूमिका से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे.

    हाल के दिनों में व्हाइट हाउस सोशल मीडिया कंपनियों पर दुष्प्रचार से निपटने के लिए दबाव बढ़ा रहा है. बाइडन ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा "वे लोगों को मार रहे हैं... महामारी उन लोगों के बीच है जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है"

    इससे पहले शुक्रवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा था कि फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म कोरोना टीकों से जुड़ी भ्रामक जानकारियों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, “ज़ाहिर है, उन्होंने कुछ कदम उठाए हैं...यह स्पष्ट है कि और कदम उठाए जाने चाहिए."

    वहीं फेसबुक का कहना है कि वह लोगों की स्वास्थ्य की रक्षा के लिए "बड़े स्तर पर कार्रवाई" कर रहा है.

    फेसबुक के प्रवक्ता केविन मैकलिस्टर ने कहा कि कंपनी "उन आरोपों से प्रभावित नहीं होगी जो तथ्यों पर आधारित नहीं हैं"

    एक अलग बयान में कंपनी ने कहा है, "हमने कोविड की गलत सूचनाओं से जुड़ी 1.8 करोड़ से अधिक सामग्री हटाई है. और उन अकाउंट्स को हटा दिया है जो बार-बार नियम तोड़ते हैं."

  14. ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदुत्व जीने का तरीका, ईसाई, मुसलमान भी हिंदुओं के वंशज – हेमंत बिस्व सरमा

    हिमंत बिस्वा सरमा

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    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि हिंदुत्व जीने का एक तरीका है और दावा किया कि अधिकांश धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के ही वंशज हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ राज्य में अपनी सरकार के दो महीने पूरा होने के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की शुरुआत पांच हज़ार साल पहले हुई थी और इसे आगे बढ़ने से रोका नहीं जा सकता.

    उन्होंने कहा,"हिंदुत्व जीने का एक तरीका है. मैं या कोई और इसे कैसे रोक सकता है? यह युगों से चल रहा धर्म है. लगभग हम सभी, हिंदुओं के वंशज हैं. एक ईसाई या मुसलमान भी किसी समय हिंदुओं से ही आए हैं."

    उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को "हटाया" नहीं जा सकता क्योंकि इसका मतलब होगा "अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना."

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें ‘लव जिहाद’ शब्द से आपत्ति है लेकिन उन्होंने कहा कि किसी को भी किसी महिला को धोखा देने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

    उन्होंने कहा, "सरकार किसी भी महिला के साथ धोखा नहीं होने देगी, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम. हमारी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जाएगी"

  15. प्रधानमंत्री मोदी की अलग रक्षा नीति के बाद अब कोई भारत को चुनौती नहीं दे सकता- गृहमंत्री अमित शाह

    अमित शाह

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    बीएसएफ़ के अलंकरण कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को जो रक्षा नीति दी है उसके बाद कोई भी हमारे देश की सीमाओं को चुनौती नहीं दे सकता है.

    ड्रोन हमले के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह एक चुनौती है लेकिन इस महत्वपूर्ण चुनौती से पार पाने के लिए डीआरडीओ और अन्य एजेंसियां लगी हुई हैं.

    अमित शाह ने कहा क इस बात का पूरा यक़ीन है कि बहुत कम समय में ड्रोन विरोधी स्वदेशी प्रणाली के साथ हम सीमा पर अपनी तैनाती को बढ़ाएंगे और इस चुनौती से भी पार पा जाएंगे.

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले तक भारत की कोई अलग रक्षा नीति नहीं थी.

    या तो यह विदेश नीति थी जिससे रक्षा नीति को भी निर्देशित किया जाता था या फिर विदेश नीति ही रक्षा नीति भी थी. आज अलग रक्षा नीति के कारण कोई भी भारत की संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकता है.

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    अमित शाह ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स से निपटने के लिए तैयार रहना होगा. उन्होंने कहा कि हमें सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक तकनीकी स्तर पर भी आगे बढ़ने की ज़रूरत है.

    अमित शाह ने कहा, "मैं उन लोगों को सलाम करता हूँ, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया है. इन बहादुर लोगों को भुलाया नहीं जा सकता है. बीएसएफ़ और हमारे अर्धसैनिक बलों के कारण भारत विश्व मानचित्र पर गौरवांवित है."

  16. तालिबान के साथ वार्ता के लिए अफ़ग़ान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल दोहा रवाना, सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच जारी हिंसा के बावजूद अभी भी शांति की संभावना - अफ़ग़ानिस्तान प्रतिनिधिमंडल

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    अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा के बीच तालिबान के साथ बातचीत करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान नेतृत्व की 10 सदस्यीय एक टीम शुक्रवार दोपहर काबुल से दोहा के लिए रवाना हो गई है.

    टोलो न्यूज़ की ख़बर के अनुसार, इस दस सदस्यीय दल में राष्ट्रीय सुलह के लिए उच्च परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला, पूर्व उपाध्यक्ष मोहम्मद करीम ख़लीली, अता मोहम्मद नूर,मुख्य वार्ताकार मासूम स्टेनकज़ई, सलाम रहीमी, फ़ातिमा गिलानी और शांति मामलों के मंत्री सादात मंसूर नादेरी शामिल हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान

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    पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस प्रतिनिधिमंडल के साथ काबुल हवाई अड्डे तक गए जहां उन्होंने अब्दुल्ला अब्दुल्ला के साथ खड़े होकर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए.

    करज़ई ने कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह से आधिकारिक है. वे तालिबान के साथ बातचीत करेंगे और इसे उनका पूर्ण समर्थन है.

    इस बीच, अब्दुल्ला अब्दुला ने कहा कि दोहा में तालिबान से मिलने वाला अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधिमंडल एकजुट टीम की तरह है जो पूरे अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधित्व करती है.

    उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच जारी हिंसा के बावजूद अभी भी शांति की संभावना है.

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, शरद पवार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले, कई अटकलें

    शरद पवार और पीएम मोदी की मुलाक़ात

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार की मुलाक़ात हुई है.

    प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर अकाउंट से इस मुलाक़ात की एक तस्वीर पोस्ट की गई है.

    कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के साथ पवार की क़रीब एक घंटे तक मुलाक़ात चली. दोनों की मुलाक़ात नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई है.

    शरद पवार के राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने की भी बात चल रही है. हालांकि पवार ने इससे इनकार किया है.

    इससे पहले चुनावी अभियान रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी शरद पवार से मुलाक़ात की थी. बाद में प्रशांत किशोर की मुलाक़ात राहुल और प्रियंका गांधी से भी हुई थी.

    इस मुलाक़ात के कई राजनीति मायने भी लगाए जा रहे हैं. शरद पवार की पार्टी एनसीपी महाराष्ट्र में शिव सेना की नेतृत्व वाली सरकार में शामिल है.

    महाराष्ट्र में बीजेपी ने सरकार बनाने की नाकाम कोशिश की थी. बीजेपी ने शिव सेना के अलग होने के बाद एनसीपी से भी समर्थन लेने की कोशिश की थी. पवार के भतीजे अजीत पवार को आनन-फ़ानन में उपमुख्यमंत्री भी बना दिया गया था लेकिन शरद पवार का साथ नहीं मिलने के कारण यह सरकार आगे नहीं बढ़ पाई थी. देवेंद्र फडणवीस के दूसरी बार शपथ के कुछ ही दिनों में इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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  18. अफ़ग़ानिस्तान: पाकिस्तानी सांसद मोहसीन डावर की क्यों हो रही तारीफ़

    सांसद मोहसीन डावर

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    पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट के नेता और पाकिस्तान के सांसद मोहसीन डावर का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान की संसद में क्वेटा और पेशावर में तालिबान की रैलियों का मुद्दा उठाने की कोशिश की तो उन्हें बोलने से रोक दिया गया.

    नेशनल एसेंबली में बोलते हुए डावर ने कहा, 'अफ़ग़ानिस्तान में हालात इंतेहाई ख़तरनाक हैं, वहां पर जो हो रहा है ज़ाहिर तौर पर उसका यहां भी असर है. पिछले चंद दिनों से हम देख रहे हैं कि तहरीक-ए-तालिबान की क्वेटा और पेशावर में रैलियां हुई हैं. अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तानी एयरफोर्स पर संगीन आरोप लगाए हैं...'

    डावर संसद में बोल ही रहे थे कि अध्यक्ष ने उन्हें बात पूरी करने से रोक दिया.

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    इस बारे में किए गए डावर के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा, 'भाई डावर, हम आपकी बात सुन रहे हैं. अमुस से लेकर अब्बासिन तक दसियों लाख लोग आपकी बात साफ़ साफ़ सुन रहे हैं. आतंकवादी तालिबों ने जीएचक्यू (पाकिस्तान का सेना मुख्यालय) से मिल रहे सहयोग की वजह से ज़मीन पर कुछ बदलाव किया है. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के इरादों और हिम्मत वैसे ही है.'

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    इससे पहले मोहसीन डावर ने पाकिस्तान पर तालिबान लड़ाकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजने के आरोप लगाए थे.

    वहीं अमीरुल्लाह सालेह इससे पहले कह चुके हैं कि तालिबान को पाकिस्तानी सेना से क्वेटा और पेशावर से सहयोग मिल रहा है. सालेह का आरोप है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स तालिबानी लड़ाकों की मदद कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स ने अफ़ग़ानिस्तानी एयरफोर्स से कहा है कि यदि तालिबान को सीमा चौकी स्पिन बोलदाक से हटाने की कोशिश की गई तो पाकिस्तानी एयरफोर्स कार्रवाई कर सकती है.

    अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान पर तालिबान का समर्थन करने और उन्हें प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराने के आरोप लगाता रहा है.

    शुक्रवार को ही मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने तालिबान से अपने संपर्क नहीं तोड़े हैं. खुफ़िया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने संबोधन में कठोर शब्दों में कहा कि पिछले महीने 10,000 से अधिक 'जिहादी' लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान आए हैं जबकि पाकिस्तान सरकार तालिबान को शांति वार्ता में "गंभीरता से" भाग लेने के लिए मनाने में असफल रही है.

    अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैन्यबलों के जाने की स्थिति में तालिबान कई इलाकों पर तेज़ी से हमले कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी काबुल और प्रांतीय राजधानियों को छोड़कर अफ़ग़ानिस्तान के अधिकतर ग्रामीण इलाक़े पर तालिबान का नियंत्रण हो गया है. वहीं इसी सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि पाकिस्तान अब और संघर्ष नहीं चाहता है.

  19. पाकिस्तान में चीन के नौ नागरिकों की मौत पर ग्लोबल टाइम्स क्या कह रहा?

    पाकिस्तान

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    चीन में ग्लोबल टाइम्स को वहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का मुखपत्र माना जाता है. ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के डासू में 14 जुलाई को हुए बस हमले के पीछे बलूचिस्तान चरमपंथी या पाकिस्तानी तालिबान का हाथ हो सकता है.

    ग्लोबल टाइम्स ने जानकारों के हवाले से यह बात कही है.

    ग्लोबल टाइम्स ने सुरक्षा और आतंकवाद निरोधी कार्य के विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि बलूचिस्तान चरमपंथी और पाकिस्तानी तालिबान इस हमले की साज़िश रचने वाले हो सकते हैं. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, ''अभी तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है तो संभव ये भी है कि किसी तीसरे देश की सेना इस साज़िश के पीछे हो.''

    पाकिस्तान

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    डासू में एक बस में सवार 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 9 चीनी नागरिक भी शामिल थे. चीन ने पहले ही इस हमले को चरमपंथी हमला बताया था और बाद में पाकिस्तान ने भी विस्फोटकों के साक्ष्य होने की बात कही और माना की यह एक चरमपंथी हमला हो सकता है.

    चीन के प्रधानमंत्री संग हुई बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन की सरकार और इस हमले में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर की.

    इमरान ख़ान ने उन्हें यह भी बताया कि जांच अभी किस लेवल तक पहुंची है और अब तक क्या कुछ मालूम हो सका है.

    डासू बस हमला

    चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग ने ज़ोर देते हुए कहा कि चीन की सरकार के विदेशों में बसे और काम करने गए उसके नागरिक और संगठन बेहद महत्वपूर्ण हैं.

    ग्लोबल टाइम्स ने शिन्हुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रैटिजी इंस्टिट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फेंग के हवाले से लिखा है कि बलूचिस्तान चरमपंथी और पाकिस्तानी तालिबानी इस हमले के पीछे हो सकते हैं.

    अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''ख़ैबर पख़्तूनख़्वा पाकिस्तान का सबसे अधिक अशांत रहने वाला इलाक़ा है. इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि इसकी एक सीमा अफ़ग़ानिस्तान से लगती है और यह इलाक़ा पाकिस्तानी तालिबान का घर है.''

    ''हालांकि अबी तक किसी भी संगठन या समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है इसलिए यह तय तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि हमला पाकिस्तान तालिबान ने ही किया. लेकिन जिस तरह के हमले वे पहले करते रहे हैं यह उससे काफ़ी मिलता-जुलता था.''

    तालिबान

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    ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कियान फेंग अपनी बात के समर्थन में कहते हैं कि पाकिस्तानी तालिबान का रिकॉर्ड रहा है जिसमें उसने पाकिस्तानी सरकार, नागरिकों और सेना पर हमला किया है. बीते कुछ सालों में इस समूह ने पाकिस्तान में चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाया हैऔर चीनी पर्यटकों, व्यापारियों पर हमले किए हैं.

    वो कहते हैं पाकिस्तानी तालिबान अच्छे से जानता है कि पाकिस्तान के लिए चीन से संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं और उसका मक़सद ऐसे हमले करके इस रिश्ते को नुकसान पहुंचाना है.

    कियान मानते हैं कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की सरकार ने प्रयास किये हैं और इससे पाकिस्तानी तालिबान की गतिविधियां भी पहले से कम हुई हैं लेकिन हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में पैदा हुए हालात से वे दोबारा सक्रिय हो रहे हैं.

  20. अफ़ग़ानिस्तान के कारण पाकिस्तान को टालनी पड़ी बैठक

    पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान

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    पाकिस्तान में आज से अफ़ग़ान शांति सम्मेलन का आयोजन होना था लेकिन इसे टाल दिया गया है. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार इस सम्मेलन में शामिल होने के लेकर अफ़ग़ानिस्तान ने अनिच्छा ज़ाहिर की थी.

    पाकिस्तानी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि अफ़ग़ान सरकार इस सम्मेलन में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने को लेकर अनिच्छुक थी.

    इस सम्मेलन को तब टाला गया है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के बीच उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में एक सम्मेलन के दौरान कहासुनी हो गई. पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के कारण ही इसे टालना पड़ा.

    जियो टीवी के अनुसार सम्मेलन टालने पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है, ''अफ़ग़ान शांति सम्मेलन 17 जुलाई से 19 जुलाई तक होना था लेकिन इसे ईद तक टाल दिया गया है. नई तारीख़ तय होने के बाद घोषित की जाएगी.''

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    इस बैठक को टाले जाने पर पाकिस्तान ने निराशा जताई है.

    पाकिस्तान का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान में जैसे हालात हैं उनके राजनीतिक समाधान के लिए तत्काल क़दम उठाने की ज़रूरत है.

    एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफ़ीज़ चौधरी ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, "पाकिस्तान 17-19 जुलाई को अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए चल रहे प्रयासों को गति देने के लिए अफ़ग़ान शांति सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है."

    उन्होंने दावा किया था कि इसमें शामिल होने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक नेतृत्व ने आने की पुष्टि कर दी है.

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    टोलो न्यूज ने ख़बर दी थी कि इस बैठक के लिए, अब्दुल्ला अब्दुल्ला, करीम ख़लीली, मोहम्मद यूनुस कानूनी, गुलबुद्दीन हिक़मतयार, मोहम्मद हनीफ़ अतमार, सलाहुद्दीन रब्बानी, इस्माइल ख़ान, अता मोहम्मद नूर, सैय्यद हमीद गिलानी, सैय्यद इशाक़ गिलानी, बतूर दोस्तम और मीरवाइस यासिनी सहित 21 प्रमुख अफ़ग़ान नेताओं को इस्लामाबाद में सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया था.

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    इस बैठक में तालिबान को आमंत्रित नहीं किया गया था.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस संदर्भ में कहा था कि तालिबान पहले भी कई बार पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं और शांति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा भी कर चुके हैं.