पंजाब: हरीश रावत ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी का हर फ़ैसला मानने को तैयार
सरबजीत धालीवाल
बीबीसी संवाददाता

इमेज स्रोत, @harishrawatcmuk/ Twitter
एक तरफ पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत शनिवार की सुबह दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे और कैप्टन अमरिंदर से मुलाकात की तो वहीं दूसरी तरफ विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला से चंडीगढ़ पहुंचे और राज्य के कई नेताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की.
हरीश रावत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनके आवास पर मुलाक़ात की जिसके बाद उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का जो निर्णय होगा, वो उसे मानेंगे.
हरीश रावत ने मुलाक़ात के बाद ट्वीट किया,"मैं कैप्टन अमरिंदर सिंह जी से मिलकर अभी-अभी दिल्ली लौटा हूं. मुझे प्रसन्नता है कि बहुत सारी बातें जो बाहर चर्चा में हैं, वो बिल्कुल निर्मूल साबित हुई हैं. कैप्टन साहब ने फिर से अपने उस महत्वपूर्ण बयान को दोहराया है कि कांग्रेस अध्यक्ष पंजाब के विषय में अध्यक्ष के पद को लेकर जो भी निर्णय करेंगे वो उन्हें स्वीकार होगा."
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इधर सिद्धू ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ से उनके पंचकूला स्थित आवास में मुलाक़ात की. दोनों नेता आपस में गले मिलते भी दिखे. इस दौरान सिद्धू ने कहा कि "जाखड़ मेरे बड़े भाई हैं और मेरे मार्गदर्शक हैं."
इसके बाद सिद्धू ने पंजाब के कई नेताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्री से उनके घर जा कर मुलाक़ात की.
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पंजाब कांग्रेस की कलह का कारण
बताया जाता है कि सरकार बनने के दो साल बाद तक तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन उसके बाद सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तनाव पैदा होने लगे.
नवजोत सिंह सिद्धू ने 10 जून, 2019 को पंजाब कैबिनेट के पद से इस्तीफा दे दिया. अमरिंदर सिंह ने उन्हें बिजली मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल करने का ऑफ़र दिया पर सिद्धू नहीं माने.
पिछले कुछ महीनों में ये लड़ाई खुलकर सामने आती दिखी और सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ एक तरह से मोर्चा खोल दिया.
सिद्धू ने कई मुद्दों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाए. सिद्धू ने बार-बार ट्वीट कर कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए.
पार्टी में कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस आला कमान ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने मुख्यमंत्री समेत पंजाब कांग्रेस के 100 से अधिक नेताओं की राय ली और अपनी रिपोर्ट सौंपी.
पिछले दिनों अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर अपना पक्ष रखा और कहा था की उन्हें पार्टी का हर फ़ैसला स्वीकार होगा.

























