दक्षिण अफ़्रीका में 45 लोगों की मौत, ज़ुमा को जेल भेजे जाने से जारी है हिंसा

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दक्षिण अफ़्रीका में पूर्व राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा को पिछले हफ़्ते जेल भेजे जाने के बाद शुरु हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है.
इनमें वो 10 लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत सोमवार रात सोवेटो (दक्षिण अफ़्रीका की सबसे बड़ी टाउनशिप) में एक शॉपिंग सेंटर में लूटपाट के दौरान भगदड़ मचने से हुई थी.
बीते गुरुवार शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों ने शनिवार-रविवार को हिंसक रूप ले लिया. शॉपिंग मॉल को आग के हवाले किया गया और दुकानों में तोड़-फोड़ की गई.
दक्षिण अफ़्रीकी सोशल मीडिया पर तोड़फोड़ और आग लगाने से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं. सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना की मदद ली है. सुरक्षाकर्मियों ने अब तक लगभग 800 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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90 के बाद सबसे भयानक हिंसा
दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने इन विरोध प्रदर्शनों को साल 1990 के बाद से दक्षिण अफ़्रीका में हुए सबसे हिंसक घटनाओं में से एक माना है.
पुलिस विभाग देखने वाले मंत्री भेकि सेले ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया है कि अगर लूटपाट इसी तरह जारी रही तो प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने के सामान की आपूर्ति संकट में पड़ सकती है.
हालांकि, रक्षा मंत्री नोज़िविवे पिसा काकुला ने कहा है कि क्वाज़ुलु-नतल और गौतेंग प्रांत में हिंसा की वजह से अब तक आपातकाल लागू करने की स्थिति नहीं बनी है.
वहीं, क्वाज़ुलु-नतल के प्रीमियर सिहले ज़ीकालाला ने कहा है कि उनके प्रांत में अब तक 26 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही गौतेंग प्रांत में 19 लोगों की मौत हुई है जिनमें शॉपिंग मॉल भगदड़ में मरने वाले 10 लोग शामिल हैं.
बीबीसी की सहयोगी वमनी खिज़े ने कहा है कि कभी नेल्सन मंडेला का गृह नगर रहे इस क्षेत्र में कई दुकानों को लूट लिया गया है. एटीएम मशीनों को तोड़ दिया गया है, रेस्त्रां, शराब की दुकानें और कपड़ों की दुकानों को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया गया है.
प्रदर्शनकारियों के सामने असहाय सुरक्षाकर्मी
सैनिकों ने पुलिसकर्मियों के साथ काम करते हुए कुछ दंगाइयों को गिरफ़्तार किया है. लेकिन सुरक्षाकर्मियों की संख्या प्रदर्शनकारियों की तुलना में बेहद कम है.
दक्षिण अफ्रीकी न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक़, क्वाज़ुलु-नटाल में प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस पर भी हमला बोला है.
इसी बीच अधिकारियों ने कुछ समूहों पर ज़ुमा की गिरफ़्तारी की वजह से जनता में पैदा हुए गुस्से का फायदा उठाकर आपराधिक कृत्य करने का आरोप लगाया है.
वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि बेरोजगारी और ग़रीबी की वजह से जनता गुस्से में है जो कि इस हिंसा को हवा दे रहा है.

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लेकिन सेले ने कहा है कि “हमारे लोगों से किसी भी तरह की नाराज़गी या निजी हालात लोगों को ये अधिकार नहीं देते हैं कि वे किसी को लूट लें, तोड़-फोड़ करें, जो चाहें वो करें और क़ानून तोड़ दें.”
उन्होंने ये भी बताया है कि हिंसा फैलाने के मामले में उनका विभाग 12 लोगों के ख़िलाफ़ जाँच कर रहा है.

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