उत्तर प्रदेश में
जनसंख्या नियंत्रण के लिए 'दो बच्चों की नीति' लागू किए जाने को लेकर बहस शुरू हो गई
है.
राज्य के विधि आयोग
ने चर्चा में आए "उत्तर प्रदेश पॉपुलेशन (कंट्रोल, स्टैबिलाइज़ेशन एंड वेलफ़ेयर) बिल" का मसौदा तैयार कर लिया है.
जिसे लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की राय है कि प्रस्तावित मसौदे का हर कोई स्वागत
करेगा.
वहीं आज, 11 जुलाई
को विश्व जनसंख्या दिवस के मौक़े पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके
जनसंख्या नियंत्रण को विकास की पहली शर्त बताया है.
उन्होंने ट्वीट किया है कि बढ़ती हुई जनसंख्या समाज में
व्याप्त असमानता समेत प्रमुख समस्याओं का मूल है. समुन्नत समाज की स्थापना के लिए
जनसंख्या नियंत्रण प्राथमिक शर्त है.आइये, इस 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर बढ़ती जनसंख्या से बढ़ती समस्याओं के प्रति स्वयं व समाज
को जागरूक करने का प्रण लें.
इससे एक दिन पूर्व आयोग ने जो ड्राफ़्ट तैयार किया है, उसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया और
लोगों से कहा गया है कि वो 19 जुलाई तक इस पर अपनी राय रखें. अपने
सुझाव भी दें.
बिल में क्या है प्रस्ताव?
बिल में कहा गया है कि राज्य के सतत विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण ज़रूरी है.
मसौदे में कहा गया है, "दो बच्चों के नियम का पालन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा काल के दौरान दो अतिरिक्त इनक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) मिलेंगे. मां या पिता बनने पर पूरे वेतन और भत्तों के साथ 12 महीने की छुट्टी मिलेगी. नेशनल पेंशन स्कीम के तहत नियोक्ता के अंशदान में तीन फ़ीसदी का इजाफा होगा."
मसौदे में कहा गया है, "उत्तर प्रदेश में पारिस्थितिकी और आर्थिक संसाधनों की मौजूदगी सीमित है. सभी नागरिकों को मानवजीवन की मूलभूत आवश्यकताओँ भोजन, साफ़ पानी, अच्छा घर, गुणवत्ता वाली शिक्षा, जीवन यापन के अवसर और घर में बिजली की मिलनी चाहिए. "
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.
समाजवादी पार्टी के नेता अनुराग भदौरिया ने कहा, "बढ़ती जनसंख्या देश के लिए समस्या है, इसमें कोई दो राय नहीं. लेकिन बीजेपी की सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया. अब चुनाव आ गया है तो असर मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मार्केटिंग इवेंट किया जा रहा है."
वहीं, कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने भी कहा है कि ये मुद्दा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है.