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धमाके की वजह क्या है जिससे हिल गया दुबई

इस धमाके से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट्स में सामने आया था कि ये धमाका इतना शक्तिशाली था कि बंदरगाह से 25 किलोमीटर दूर तक आवाज़ सुनाई दी और इमारतें और खिड़कियाँ हिलने लगीं थीं.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, भूमिका राय and अपूर्व कृष्ण

  1. इमरान के बाद, पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भी भारत पर लगाए गंभीर आरोप

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने भारत पर अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 'हाइब्रिड युद्ध' में शामिल होने और पाकिस्तान में चरमपंथ का समर्थन करने का आरोप लगाया है.

    भारत पर हाल ही में लगभग ऐसे ही आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी लगाए थे. भारतीय विदेश मंत्रालय पहले ही पाकिस्तान के इन आरोपों का खंडन कर चुका है.

    आरिफ़ अल्वी के कार्यालय से जारी एक बयान में भारत पर चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है. जिसमें हाल ही में पाकिस्तान के लाहौर शहर के जोहर टाउन में हाफ़िज़ सईद के घर के बाहर हुए धमाके में भी भारत के समर्थन का आरोप है.

    हाफ़िज़ सईद 2008 मुंबई हमले के मुख़्य साज़िशकर्ता हैं और प्रतिबंधित संगठन जमात उद दावा के प्रमुख हैं.

    अल्वी के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत, पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए देश में चरमपंथी गतिविधियों करवा रहा है.

    भारत का खंडन

    पाकिस्तान के आरोपों का खंडन करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान में हुए चरमपंथी हमलों में भारत का हाथ होने का कथित ‘सबूत’ होने का दावा कल्पना मात्र है.

    भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान की रणनीति से अवगत है और इस्लामाबाद के 'टेरर स्पॉन्सरशिप' की बात किसी और ने नहीं बल्कि उनके ख़ुद के लीडरशिप ने स्वीकार की है.

    विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था, “यह भारत के ख़िलाफ़ एक और बेकार प्रयास है. भारत के ख़िलाप़ सुबूत होने के तथाकथित दावों में कोई सच्चाई नहीं है. यह पूरी तरह से मनगढंत और कल्पना है.”

    भारत के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने नवंबर में यह बात तब कही थी जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत पर आरोप लगाया था कि उनके देश में हुए कुछ चरमपंथी हमलों के पीछे भारत का हाथ है.

    बलूचिस्तान पर 7वीं नेशनल वर्कशॉप के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अल्वी ने यह भी कहा कि भारत अपने बुरे इरादों में कामयाब नहीं होगा क्योंकि पाकिस्तानी की सशस्त्र सेना हर तरह की चुनौती पर काबू पाने में सक्षम है.

    बलूचिस्तान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सरकार प्रांत के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को लेकर गंभीर है ताकि इसे देश के अन्य प्रांतों के बराबर लाया जा सके.

  2. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निधन

    हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार सुबह निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे.

    पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के सम्मान में, हिमाचल प्रदेश सरकार ने 8 जुलाई से 10 जुलाई तक राजकीय शोक की घोषणा की है.

    शिमला में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने बताया कि उन्होंने सुबह क़रीब 3.40 बजे अंतिम सांस ली.

    उन्हें सोमवार को दिल का दौरा पड़ा था. जिसके बाद से ही उनकी हालत नाज़़ुक बनी हुई थी. वह आईजीएमसी की क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती थे.

    डॉ. जनक राज ने बताया कि वीरभद्र सिंह को सांस लेने में तक़लीफ के बाद बुधवार को कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की निगरानी में वेंटिलेटर पर रखा गया था.

    पीएम मोदी ने वीरभद्र सिंह के निधन पर दुख ज़ाहिर करते हुए ट्वीट किया है- "वीरभद्र सिंह का लंबा राजनीतिक जीवन था, उनके पास व्यापक प्रशासनिक और विधायी अनुभव था. उन्होंने हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य के लोगों की सेवा की. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदना."

    नौ बार के विधायक और पांच बार सांसद रहे वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

    वीरभद्र सिंह इस दौरान दो बार कोविड पॉज़ीटिव भी हुए. 11 जून को उनकी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आयी थी और इससे दो महीने पहले भी वह संक्रमित हुए थे.

    12 अप्रैल को जब उनकी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आयी थी तो उन्हें इलाज के लिए चंडीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

    पहली बार कोरोना को मात देते हुए वह ठीक होकर वह 30 अप्रैल को चंडीगढ़ अस्पताल से घर लौट आए थे.

    लेकिन उन्हें घर पहुंचने के कुछ ही घंटों के भीतर ही सांस लेने में तकलीफ़ के बाद दोबारा आईजीएमसी में भर्ती कराना पड़ा था. तब से उनका इसी अस्पताल में इलाज चल रहा था.

    वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह भी राजनीति में ही हैं. प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद हैं, जबकि विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से विधायक हैं.

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता छह बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे. वह मार्च 1998 से मार्च 2003 तक विपक्ष के नेता भी रहे.

    उन्होंने केंद्रीय उप-मंत्री, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री,उद्योग राज्य मंत्री, केंद्रीय इस्पात मंत्री और केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं.

    दिसंबर 2017 में वह सोलन ज़िले के अर्की विधानसभा क्षेत्र से 13 वीं विधानसभा के लिए फिर से चुने गए थे.

  3. नमस्कार,

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