प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल डॉक्टर्स डे के मौक़े पर गुरुवार को देशभर के डॉक्टर्स को संबोधित किया और उन्हें शुभकामनाएं दी.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, ''ये दिन हमारे डॉक्टर्स और मेडिकल फ्रेटरनिटी के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है. खासतौर पर पिछले डेढ़ साल में हमारे डॉक्टर्स ने जिस तरह देशवासियों की सेवा की है वो अपने आप में एक मिसाल है. मैं देशवासियों की ओर से देश के सभी डॉक्टर्स का आभार प्रकट करता हूं.''
इस दौरान पीएम मोदी ने देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, कोरोना से निपटने में लोगों की भागीदारी और योग के महत्व पर भी बात की.
पहले उन्होंने कोरोना से लड़ाई में डॉक्टर्स के योगदान को याद किया.
पीएम मोदी ने कहा, ''डॉक्टर्स को ईश्वर का दूसरा रूप ऐसे ही नहीं कहा जाता. कितने ही लोग ऐसे होंगे जिनका जीवन किसी संकट में पड़ा होगा, किसी बीमारी या दुर्घटना का शिकार हुआ होगा या फिर कई बार हमें ऐसा लगने लगता है कि क्या हम किसी हमारे अपने को खो देंगे? लेकिन हमारे डॉक्टर्स ऐसे मौक़ों पर किसी देवदूत की तरह जीवन की दिशा बदल देते हैं. हमें एक नया जीवन दे देते हैं.''
''आज जब देश कोरोना से इतनी बड़ी जंग लड़ रहा है तो डॉक्टर्स ने दिन रात मेहनत करके, लाखों लोगों का जीवन बचाया है. ये पुण्य कार्य करते हुए देश के कई डॉक्टर्स ने अपना जीवन भी न्योछावर कर दिया. मैं उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं.''
नेशनल डॉक्टर्स डे हर साल एक जुलाई को मनाया जाता है. ये दिन जानेमाने डॉक्टर और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर बीसी रॉय की याद में मनाया जाता है.
स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत ढांचे में हुआ विकास
पीएम मोदी ने मौजूदा सरकार में स्वास्थ्य क्षेत्र के आधारभूत ढांच में आए बदलाव और विकास का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, ''इतने दशकों में जिस तरह का मेडिकल आधारभूत ढांचा देश में तैयार हुआ था उसकी सीमाएं आप भली-भांति जानते हैं. पहले के समय में इसे कैसे अनदेखा किया गया था इससे भी आप जानते हैं.''
''हमारे देश में जनसंख्या का दबाव इस चुनौती को और भी कठिन बना देता है. बावजूद इसके कोरोना के दौरान अगर प्रति लाख जनसंख्या में संक्रमण और मृत्युदर को देखें तो भारत की स्थिति बड़े-बड़े विकसित और समृद्ध देशों की तुलना में कहीं संभली हुई रही है.''
उन्होंने कहा कि किसी एक जीवन का असमय समाप्त होना उतना ही दुखद है लेकिन भारत ने कोरोना से लाखों का जीवन बचाया भी है. इसका बहुत बड़ा श्रेय डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को जाता है.
वहीं अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी बताईं.
उन्होंने कहा, "पिछले साल पहली लहर के दौरान हमने लगभग 15 हज़ार करोड़ रुपये हेल्थकेयर के लिए आवंटित किए थे. इस साल हेल्थ सेक्टर के लिए बजट का आवंटन दोगुने से भी ज़्यादा यानी दो लाख करोड़ रुपये से भी अधिक किया गया."
"अब हम ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 50 हज़ार करोड़ रुपये की एक क्रेडिट गारंटी स्कीम लेकर आए हैं जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है."
"हमने बच्चों के लिए ज़रूरी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी 22 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा आवंटित किए हैं. आज देश में तेज़ी से नए एम्स खोले जा रहे हैं, नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं."
"2014 तक जहां देश में केवल 6 एम्स थे, इन 7 सालों में 15 नए एम्स का काम शुरू हुआ है. मेडिकल कॉलेज की संख्या भी करीब डेढ़ गुना बढ़ी है. इसी का परिणाम है कि इतने कम समय में जहां अंडरग्रेजुएट सीटों में डेढ़ गुने से ज़्यादा की वृद्धि हुई है वहीं पीजी सीटों में 80 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है."
पीएम ने डॉक्टर्स की सुरक्षा का मसला उठाते हुए ये भी कहा कि मेडिकल क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों के बीच डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है.
उन्होंने बताया, ''हमारी सरकार ने डॉक्टर्स के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकने के लिए पिछले साल ही क़ानून में कई कड़े बदलाव किए हैं. इसके साथ ही हम अपने कोविड वॉरियर्स के लिए फ्री इंश्योरेंस स्कीम भी लेकर आए हैं.''
उन्होंने वैक्सीन लगवानें पर भी जोर दिया. साथ ही लोगों को कोरोना से बचने के उपायों को अपनाने के लिए कहा जिससे दूसरों को भी प्रेरणा मिल सकें. उन्होंने लोगों से अपनी भूमिका को और सक्रियता निभाने की अपील की.
पीएम मोदी ने योग को लेकर जागरुकता लाने के लिए मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों की सराहना की.
उन्होंने ये भी कहा, ''योग को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए जो काम आजादी के बाद पिछली शताब्दी में किया जाना चाहिए था, वो अब हो रहा है. कोरोना के बाद कr समस्याओं से निकलने में योग कैसे मदद कर रहा है इस पर आधुनिक मेडिकल साइंस से जुड़े अध्ययन कराए जा रहे हैं.''
''जब आप लोग योग पर अध्ययन करते हैं तो पूरी दुनिया इसे गंभीरता से लेती है. क्या आईएमए इसे मिशन मोड में आगे बढ़ा सकती है? योग पर प्रमाण आधारित अध्ययन को वैज्ञानिक तरीके से आगे ले जा सकती है. एक तरीका ये भी हो सकता है कि योग पर हुए अध्ययनों को अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाए.''
इसके साथ ही पीएम ने डॉक्टर्स को अपने अनुभवों का दस्तावेजीकरण करने की सलाह दी जो भविष्य में पूरी मानवता के लिए मददगार साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि आपका ये अनुभव देश की मेडिकल रिसर्च को एक नई गति भी देगा.