बीजेपी के झंडे के साथ आए लोगों ने दी गाली, फेंके पत्थर: राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया है कि बुधवार को ग़ाजीपुर बॉर्डर पर कुछ लोगों ने किसान आंदोलनकारियों पर हमला किया जिसमें कई किसान घायल हो गए.
लाइव कवरेज
विभुराज, वात्सल्य राय, प्रशांत चाहल and मोहम्मद शाहिद
नसीरूद्दीन शाह अस्पताल में भर्ती, निमोनिया की शिकायत
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मशहूर अभिनेता नसीरूद्दीन शाह को निमोनिया है और उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उनकी पत्नी और अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह ने बुधवार को बताया कि नसीरूद्दीन शाह को मुंबई के खार हिंदुजा अस्पताल में मंगलवार को भर्ती कराया गया है.
70 वर्षीय अभिनेता के फेफड़ों में निमोनिया के लक्षण पाए गए थे और उनका इलाज किया जा रहा है.
रत्ना पाठक शाह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि "उनकी हालत में सुधार हो रहा है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी."
नसीरूद्दीन शाह के अभिनय जीवन की शुरुआत साल 1975 में श्याम बेनेगल की 'निशांत' से शुरू हुई थी और जल्द ही वे 70 और 80 के दशक में समांतर सिनेमा में एक बड़ा नाम बन गए.
नसीरूद्दीन शाह ने 'स्पर्ष (1979), 'जाने भी दो यारो' (1983) जैसी फिल्मों में काम किया है. शेखर कपूर के निर्देशन में बनी 'मासूम' और 'मिर्च मसाला' में भी नसीरूद्दीन की यादगार भूमिका थी.
सौ से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके नसीरूद्दीन शाह तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं. बीते दो दशक में नसीरूद्दीन शाह ने कुछ बड़ी कामयाब फिल्मों में काम किया है जिनमें विशाल भारद्वाज की 'इश्किया' (2009), 'द डर्टी पिक्चर' और ज़ोया अख्तर की 'ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा' जैसी फिल्में शामिल हैं.
दिलीप कुमार एक बार फिर अस्पताल में भर्ती, साँस लेने में हो रही थी तकलीफ़
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बॉलीवुड के नामी अभिनेता दिलीप कुमार को साँस में तकलीफ़ के
बाद एहतियात के तौर पर एक बार फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उन्हें क़रीब 10 दिन पहले ही अस्पताल से छुट्टी मिली थी.
98 वर्षीय कुमार को मुंबई के हिन्दुजा अस्पताल में भर्ती
कराया गया है.
उनके परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि
उन्हें कल यानी मंगलवार शाम को भर्ती कराया गया था. घर में रहते हुए किसी तरह की
शारीरिक दिक्कत ना बढ़ जाये, इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें अस्पताल के आईसीयू
सेक्शन में भर्ती कराया गया.
उन्होंने कहा कि अभी चिंता की कोई बात नहीं है.
विदेश जाने वाली फ़्लाइटों पर प्रतिबंध 31 जुलाई तक बढ़ा
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कोरोना महामारी के चलते, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी
डीजीसीए ने भारत में शेड्यूल अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों की आवाजाही पर प्रतिबंध
31 जुलाई 2021 तक बढ़ा दिया है.
यह प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय ऑल-कार्गो संचालन और विशेष रूप से
विमानन नियामक द्वारा अनुमोदित उड़ानों पर लागू नहीं होगा.
चुनिंदा देशों के साथ द्विपक्षीय एयर बबल समझौतों के तहत चलने
वाली उड़ानें जारी रहेंगी.
देश भर में 23 मार्च 2020 से लॉकडाउन लागू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक
यात्री उड़ानें निलंबित हैं.
लेकिन मई 2020 से विशेष अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ‘वंदे भारत मिशन’के तहत उड़ रही हैं.
उत्तर कोरिया में कोरोना से जुड़ी लापरवाही के कारण 'बड़ा संकट'
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उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ किम जोंग उन ने शीर्ष अधिकारियों को फटकार लगाई है, क्योंकि उनकी चूक के कारण कोविड-19 से संबंधित एक बड़ा संकट पैदा हुआ.
ये संकट क्या था, इस बारे में जानकारी नहीं है.
ये उत्तर कोरिया में महामारी की गंभीरता का एक संकेत है, उत्तर कोरिया ने पहले इसे ख़ारिज करते हुए कहा था कि वहाँ कोविड के कोई मामले नहीं हैं.
कोरोना वायरस के कारण उत्तर कोरिया ने अपनी सीमाएँ बंद कर दी हैं. लेकिन उसके इस फ़ैसले औऱ कुछ अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के कारण देश में खाद्यान्न की कमी हो गई और अर्थव्यवस्था और बिगड़ गई.
किम जोंग उन ने पहले ये स्वीकार किया था कि देश में खाद्यान्न की स्थिति गंभीर है और उन्होंने नागरिकों से कहा था कि वे बुरी स्थिति के लिए तैयारी करें.
उन्होंने इसकी तुलना 1990 के दशक में देश में आए अकाल से की थी.
इस सप्ताह के शुरू में सरकारी टेलीविज़न ने एक आम नागरिक की किम के कमज़ोर दिखाई देने पर टिप्पणी प्रसारित की थी.
किम को देखकर ऐसा लग रहा था कि उनका वज़न काफ़ी कम हुआ है.
सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक़ किम ने पार्टी नेताओं की एक विशेष बैठक में शीर्ष अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया.
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नतीजतन, उन्होंने "देश की सुरक्षा और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में एक बड़ा संकट पैदा कर दिया और इसके गंभीर नतीजे सामने आए." रिपोर्ट के मुताबिक़ पार्टी के कई सदस्यों को वापस बुला लिया गया है. इनमें शक्तिशाली स्टैडिंग कमेटी के एक सदस्य भी शामिल हैं.
इस कमेटी में पाँच सदस्य होते हैं, जिनमें ख़ुद किम जोंग उन भी हैं. हालाँकि इस रिपोर्ट में घटना के बारे में ज़्यादा विवरण नहीं दिया गया है और न ही ये बताया गया है कि अधिकारी कौन हैं.
उत्तर कोरिया से भाग कर आए और शोधकर्ता आहन चान इल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि रिपोर्ट का मतलब ये है कि देश में शायद कोविड के पुष्ट मामले आए हैं.
उनका कहना है कि इस रिपोर्ट से ये भी संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया को शायद अंतरराष्ट्रीय मदद की आवश्यकता है.
उन्होंने बताया, "अन्यथा वे ऐसा नहीं करते, क्योंकि इसमें महामारी से निपटने के प्रयासों में सरकार की विफलता को स्वीकार किया गया है."
दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में इवा वीमेन्स यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉक्टर लीफ़ एरिक इस्ले ने कहा कि ये रिपोर्ट उत्तर कोरिया में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था का संकेत है.
उन्होंने कहा, "इसकी संभावना है कि किम जोंग उन इस घटना के लिए बलि का बकरा ढूँढ़ लेंगे, वे अपने विरोधी अधिकारियों को हटाएँगे और उनकी वैचारिक ख़ामियों पर सारा दोष मढ़ देंगे. ये विदेशों से वैक्सीन स्वीकार करने की राजनीतिक तैयारी भी हो सकती है."
कोरोना वायरस को लेकर उत्तर कोरिया ने कई पाबंदियाँ लगा रखी हैं और सरकारी मीडिया लगातार ये कहता रहा है कि नागरिकों को लगातार सतर्क करने को कहा गया है.
उत्तर कोरिया का प्रमुख व्यापारिक पार्टनर चीन है. लेकिन सीमाएँ सील करने के कारण चीन के साथ व्यापार में गिरावट आई है. इसकी वजह से कुछ खाद्यान्न और दवाएँ देश में नहीं आ पा रही हैं.
सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि देश में गंभीर खाद्य और आर्थिक संकट आ सकता है. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हाल के महीनों में उत्तर कोरिया में अनाज की क़ीमतों में भारी उछाल आई है. देश में भूखमरी की भी ख़बरें हैं.
ब्राज़ील में कोवैक्सीन के सौदे पर विवाद के बीच भारत बायोटेक ने दी सफ़ाई
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भारत की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन कोवैक्सीन की ख़रीद में अनियमितता के आरोपों
के बाद ब्राज़ील में भारत बायोटेक कंपनी के साथ इसका सौदा रद्द किए जाने का फ़ैसला
लिया गया है जिसके बाद कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने बयान जारी किया
है.
कंपनी ने कहा है कि ब्राज़ील में ‘स्टेप बाय स्टेप’ प्रक्रियाएं चलीं और नियामकों ने इसकी अनुमति दी जिसके बाद सौदा किया गया था.
2 करोड़
कोवैक्सीन की ख़ुराक ख़रीदने के मामले में 32.4 करोड़ डॉलर का यह सौदा रद्द करने
का ब्राज़ील ने फ़ैसला किया है. इस सौदे में अनियमितता की छीटें राष्ट्रपति जायर
बोलसोनारो तक पहुंच चुकी हैं.
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कंपनी ने बयान में क्या कहा
भारत बायोटेक ने
अपने बयान में कहा है, “ब्राज़ील के
स्वास्थ्य मंत्रालय का कोवैक्सीन को ख़रीदना एक विशिष्ट मामला था जिसमें नवंबर
2020 में पहली बैठक हुई है और 29 जून तक बैठकें होती रही हैं. एक-एक क़दम आगे
बढ़ाते हुए समझौता हुआ और आठ महीने की लंबी प्रक्रिया के दौरान नियामक ने अनुमति
दी.”
“4 जून को वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी गई. 29 जून तक भारत
बायोटेक को ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय से न ही एडवांस्ड पेमेंटमिली और न ही कोई वैक्सीन अब तक उन्हें
सप्लाई की गई है. भारत बायोटेक ने दुनियाभर के कई देशों में समझौतों के लिए इसी
नियामक अनुमति की प्रक्रिया को अपनाया है जहां पर कोवैक्सीन सफलतापूर्वक सप्लाई की
गई है.”
ब्राज़ील के संघीय
अभियोजकों ने वैक्सीन ख़रीद के समझौतों की जांच शुरू की है जिसमें फ़रवरी में हुए
समझौतों में ऊंची दाम पर वैक्सीन ख़रीदने, तुरंत बातचीत करने और नियामक अनुमतियों
के न दिए जाने के आरोप हैं.
भारत बायोटेक ने इस पर कहा
था कि बीते कुछ हफ़्तों से आ रही रिपोर्टें ब्राज़ील और दूसरे देशों में हुए
समझौतों को ग़लत तरीक़े से पेश कर रही हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा, कोरोना से मरे लोगों के परिवारवालों को मुआवाज़ा दिया जाये
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक अहम फ़ैसला
सुनाते हुए केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया कि जिन लोगों की मौत कोरोना संक्रमण (कोविड-19)
से हुई, उनके परिवार को कुछ मुआवज़ा दिया जाये. हालांकि, मुआवज़े की रकम कितनी
होगी, ये ख़ुद सरकार को तय करना होगा.
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह
निर्देश दिया कि एनडीएमए अगले छह सप्ताह में मुआवज़े की राशि तय करे और एक ऐसा
सिस्टम बनाये जिसके ज़रिये मुआवज़ा दिया जा सके.
वकील गौरव बंसल और रीपक कंसल की याचिका पर सुनवाई के बाद,
सर्वोच्च अदालत ने यह आदेश दिया.
इन दोनों वकीलों ने सर्वोच्च अदालत के सामने यह अपील की थी वो
केंद्र सरकार को निर्देश दे कि कोविड-19 के कारण मारे गये लोगों के परिजनों को 4
लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाये.
इससे पहले, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर
कर, ये कहा था कि आर्थिक तंगी और दूसरे कई अन्य कारणों से वो कोविड-19 के कारण जान
गंवाने वालों के परिवारों को चार लाख रुपये की सहायता राशि नहीं दे सकती.
हलफ़नामें में ये भी कहा गया कि सरकार ने कोविड महामारी से निपटने
के लिए और उससे पीड़ित परिवारों के लिए कई तरह की लाभकारी योजनाएं लागू की हैं.
सरकार ने ये भी कहा था कि महामारी से निपटने के लिए कई कल्याणकारी
योजनाएं शुरू की गई हैं जिनका लोगों को फ़ायदा भी मिला है.
ये हलफ़नामा सहायता राशि के संबंध में पीड़ित परिवारों की ओर
से दी गई याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने ये
भी कहा कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए ज़रूरतमंद
व्यक्तियों के लिए काफ़ी कुछ किया है और इसमें काफ़ी ख़र्च हुआ हैजिससे आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है.
अमेरिकी कमांडर ने कहा, अफ़ग़ानिस्तान में हो सकता है गृह युद्ध
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अमेरिका के एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने कहा है कि अमेरिकी
सेना के लौटने के बाद, अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ जाने का ख़तरा होगा.
दरअसल, पिछले महीने से अमेरिकी सैनिकों ने अपने देश वापस
लौटना शुरू कर दिया है. इसी बीच तालिबान लड़ाकों ने भी अफ़ग़ानिस्तान के कई ज़िलों
पर फिर से अपना कब्ज़ा जमा लिया है. ऐसे में इस तरह की कई चिंताएं पैदा हो गई है.
बताया गया है कि 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान
से वापस लौट जायेंगे.
मौजूदा परिस्थिति पर बात करते हुए अमेरिकी जनरल स्कॉट मिलर
ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान का राजनैतिक नेतृत्व अगर लोगों को एकजुट नहीं कर पाया, तो
देश को आने वाले समय में बहुत मुश्किल दौर का सामना करना पड़ सकता है.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने भी तालिबान के बढ़ते प्रभाव
पर चिंता ज़ाहिर की थी. संयुक्त राष्ट्र ने
कहा था कि अभी अमेरिकी सैनिक पूरी तरह से लौटे भी नहीं हैं और तालिबान ने कई
ज़िलों पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है.
बताया गया है कि तालिबान लड़ाकों ने 370 में से
क़रीब 50 ज़िलों पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है और वो धीरे-धीरे राजधानी काबुल की ओर
बढ़ रहे हैं. तालिबान दावा कर रहा है कि क़रीब 100 ज़िले अब उसके कब्ज़े में हैं.
इस पर मिलर ने कहा कि
अफ़ग़ानिस्तान में परिस्थिति ठीक नहीं लग रही. गृह युद्ध का ख़तरा सिर पर है. और अगर
तालिबान इसी तरह बढ़ता रहा, तो ऐसा होने की संभावना और बढ़ती जायेगी.
लेकिन मिलर ने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि अमेरिका अब
भी तालिबान पर हवाई हमले कर रहा है.
उन्होंने कहा, “मैं चाहूँगा कि हमें हवाई हमले
देखने को ना मिलें. लेकिन पहले हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं हिंसा भी ना
हो. आपको ये सब बंद करना होगा.”
कुछ दिन पहले ही, अमेरिकी
राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि “अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को ख़ुद ही
अपना भविष्य तय करना होगा.”
ब्राज़ील ने सस्पेंड की भारत बायोटेक के साथ कोवैक्सीन डील
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ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि राष्ट्रपति
ज़ाएर बोलसोनारो पर वैक्सीन सौदे में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद, मंत्रालय
ने भारत के साथ हुए 324 मिलियन डॉलर के वैक्सीन अनुबंध को मुअत्तल करने का निर्णय
लिया है.
इस अनुबंध के तहत ब्राज़ील, भारत से दो करोड़ वैक्सीन डोज़
खरीदने वाला था.
हालांकि, राष्ट्रपति बोलसोनारो अनियमितताओं के सभी आरोपों
से इनकार करते रहे हैं.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ लोगों ने राष्ट्रपति पर
सार्वजनिक रूप से अनियमितता के आरोप लगाये थे. तभी से यह डील बोलसोनारो के लिए सिर
का दर्द बनी हुई है.
बताया गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की एक टीम सौदे के निलंबन
के दौरान राष्ट्रपति पर लगे आरोपों की जाँच करेगी.
मंत्रालय के अनुसार, सीजीयू के शुरुआती विश्लेषण में कोई भी
अनियमितता नहीं पाई गई है, लेकिन अनुपालन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये अनुबंध
निलंबित करने का निर्णय लिया है.
ब्राज़ील में बढ़ी क़ीमतों, जल्दी बातचीत और नियामकों
की तरफ से अटकी हुई मंज़ूरियों का हवाला देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सौदे की
जाँच शुरू कर दी है.
इसके अलावा सरकार के महामारी से निपटने के तरीक़ों की जाँच
में जुटा सीनेट पैनल भी इस मामले की जाँच कर रहा है.
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ का दावा, डेल्टा वेरिएंट पर भी असरदार है कोवैक्सीन
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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी ने कोरोना के लिए कोवैक्सीन ही लगवाई थी. उन्हें वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं.
भारतीय फ़ार्मा कंपनी ‘भारत बायोटेक’द्वारा विकसित कोरोना
वैक्सीन, ‘कोवैक्सीन’को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (एनआईएच) ने
कोरोना के एल्फ़ा और डेल्टा वेरिएंट के ख़िलाफ़ प्रभावशाली पाया है.
एनआईएच ने कहा है कि दो अलग-अलग अध्ययनों से पता चलता है कि
कोवैक्सीन से मिलीं एंटी-बॉडी सार्स-कोव-2 (कोविड-19) के एल्फ़ा और डेल्टा वेरिएंट
के ख़िलाफ़ बढ़िया काम करती हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमेरिका के इस टॉप हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट ने ये भी कहा
है कि कोवैक्सीन एक सुरक्षित वैक्सीन है.
कोवैक्सीन, सार्स-कोव-2 वायरस के एक अक्षम रूप पर ही आधारित
है, जो इस वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित
करती है.
इसी बीच, टीका निर्माता कंपनी भारत बायोटेक के अध्यक्ष कृष्ण
एला को केंद्र सरकार द्वारा ‘वाई-श्रेणी’की सशस्त्र सुरक्षा प्रदान
की गई है.
52 वर्षीय एला, हैदराबाद स्थित बायो-टेक्नोलॉजी
कंपनी के संस्थापक भी हैं जो कोविड-19 के ख़िलाफ़ टीकाकरण के लिए भारत द्वारा मंज़ूर
कोवैक्सीन टीके का उत्पादन कर रही है.
साथ ही कंपनी दवा की खोज, दवा के विकास, विभिन्न
अन्य टीकों, जैव-चिकित्सीय, फ़ार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों
के निर्माण में भी लगी हुई है.
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