मेहुल चोकसी की कंपनियों ने पीएनबी को 6,344 करोड़ रुपये का चूना लगाया
मुंबई के एक स्पेशल कोर्ट में दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी जांच के बाद ये दावा किया है.
लाइव कवरेज
मोहम्मद शाहिद, रजनीश कुमार and आदर्श राठौर
इसराइल ने ग़ज़ा पर फिर किया हमला
वीडियो कैप्शन, इसराइल ने ग़ज़ा पर फिर किया हमला
इसराइल ने कहा है कि उसने ग़ज़ा पट्टी में हमास के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स का कहना है कि यह कार्रवाई ग़ज़ा पट्टी से आग लगाने वाले गुब्बारे भेजने के बाद की गई.
बुधवार तड़के ग़ज़ा शहर धमाकों से गूंज उठा. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स (आईडीएफ़) ने कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने ख़ान यूनुस और ग़ज़ा शहर में हमास के परिसरों को निशाना बनाया.
आईडीएफ़ की ओर जारी बयान में कहा गया है, “इन परिसरों में आतंकवादी गतिविधि चल रही थी. ग़ज़ा पट्टी से जारी आतंकवादी हरकतों को देखते हुए आईडीएफ़ युद्ध शुरू करने समेत सभी तरह के हालात के लिए तैयार है.”
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसराइली हमलों से जान-मान का नुक़सान हुआ है या नहीं.
भारत में कहां लग रहे हैं कोरोना के सबसे ज़्यादा और सबसे कम टीके?
इमेज स्रोत, Mahima Gulati
इमेज कैप्शन, महिमा गुलाटी को अब वैक्सीन की दोनों डोज़ लग गई हैं.
कोरोना वायरस से बचाव के लिए आपको टीका लगा है या नहीं, ये काफ़ी हद तक इस पर निर्भर करता है कि आप भारत के किस ज़िले में रहते हैं. बीबीसी ने भारत के 729 ज़िलों का, जिनके लिए टीकाकरण की जानकारी उप्लब्ध है, अध्ययन किया है.
हमने पाया कि आबादी के अनुपात में टीकाकरण की दर में बहुत अंतर है. कुछ ज़िले अपनी आधी आबादी को टीके की एक डोज़ लगा चुके हैं और कुछ सिर्फ़ तीन प्रतिशत को.
भारत का ये टीकाकरण अभियान इस साल 16 जनवरी से डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के लोगों के लिए शुरू हुआ था.
सब सही ही चल रहा था लेकिन एक मई से जब इसे 18 वर्ष से ऊपर सभी वयस्कों के लिए खोल दिया गया तब कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच टीकों की बढ़ी मांग के लिए उनके स्टॉक कम पड़ने लगे.
पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में लोजपा नेता मनोनीत करने पर चिराग पासवान ने जताया विरोध
इमेज स्रोत, ANI
लोकसभा में लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल के नेता के रूप में पशुपति कुमार पारस को मान्यता देने के स्पीकर ओम बिरला के फ़ैसले पर पार्टी नेता चिराग पासवान ने विरोध जताया है.
चिराग पासवान का कहना है कि ये उनके संगठन के नियमों के ख़िलाफ़ है.
मंगलवार को चिराग पासवान ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर पांच सांसदों को बर्खास्त करने के पार्टी के फ़ैसले के बारे में सूचित किया था.
अब चिराग पासवान ने लोकसभा अध्यक्ष से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है और कहा है कि वे लोकसभा में लोजपा के नेता के तौर पर उन्हें मान्यता देने से संबंधित सर्कुलर जारी करें.
इमेज स्रोत, ANI
अपनी चिट्ठी में चिराग पासवान ने लिखा है, "लोक जनशक्ति पार्टी के संविधान के अनुच्छेद 26 के मुताबिक़ पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ही ये तय करने के लिए अधिकृत है कि लोकसभा में पार्टी का नेता कौन होगा. इसलिए पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में पार्टी का नेता घोषित करने का फ़ैसला हमारी पार्टी के संविधान के प्रावधानों के ख़िलाफ़ है."
चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस को पार्टी के छह में से पांच सांसदों ने उनकी जगह पर अपना नेता चुन लिया है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
पार्टी के दोनों धड़े ये दावा कर रहे हैं कि पार्टी की कमान उनके हाथ में हैं और उनका समूह ही असली लोक जनशक्ति पार्टी है जिसकी स्थापना चिराग पासवान के पिता राम विलास पासवान ने की थी.
चिराग पासवान के नेतृत्व वाले धड़े ने पांच सांसदों को पार्टी से निकाल दिया है जबकि विरोधी खेमे ने उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया है.
पाकिस्तान ने कैसे किया था परमाणु बम का परीक्षण?
नताशा नरवाल की ज़मानत के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस की अपील
इमेज स्रोत, Getty Images
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आसिफ़ इक़बाल तन्हा, देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को ज़मानत देने के दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की बेंच ने मंगलवार को तीनों अभियुक्तों को ज़मानत दे दी थी. इस ज़मानत के ख़िलाफ़ बुधवार सुबह स्पेशल लीव पीटिशन (अपील) दायर की गई है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
ट्विटर और मोदी सरकार में बढ़ा टकराव, रविशंकर प्रसाद ने पूछे कई सवाल
इमेज स्रोत, Getty Images
केंद्रीय क़ानून,
संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर से टकराव के बीच
कई सवाल पूछे हैं. रविशंकर प्रसाद ने एक साथ कई ट्वीट कर ट्विटर को निशाने पर लिया
है.
रविशंकर प्रसाद ने
अपने ट्वीट में लिखा है, ''26 मई को भारत सरकार
की ओर से जारी की गई इन्टरमीडियरी गाइडलाइन का पालन करने में ट्विटर नाकाम रहा है.
ट्विटर को कई मौक़े दिए गए कि वो हमारे नियमों का पालन करे लेकिन उसने जानबूझकर नहीं
मानने का रास्ता चुना.’’
‘’भारत की सांस्कृतिक विविधता भौगोलिक संरचना के हिसाब से है.
कुछ ख़ास मामलों में सोशल मीडिया से फैली चिंगारी भी आग का रूप धारण कर सकती है. ख़ास
कर फ़र्ज़ी ख़बरों के ज़रिए. इसी को रोकने के लिए हमने नया नियम बनाया है.’’
‘’ट्विटर ख़ुद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडाबरदार बताता
है लेकिन जब गाइडलाइन की बात आई तो जानबूझकर अनदेखी कर रहा है. इसके अलावा ट्विटर भारत
की क़ानून-व्यवस्था को मानने से इनकार कर रहा है और यूज़र्स की शिकायतों की भी अनदेखी
कर रहा है. इसके साथ ही ट्विटर अपनी सुविधा और पसंद-नापंसद के हिसाब से किसी पोस्ट
को मैनिपुलेटेड मीडिया की श्रेणी में डाल देता है.’’
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 2
रविशंकर प्रसाद ने कहा,‘’उत्तर प्रदेश में जो कुछ हुआ उसमें ट्विटर की फ़र्ज़ी
ख़बरों को रोकने में मनमानी साफ़ तौर पर दिखी. ट्विटर तथ्यों की पुष्टि को लेकर बहुत
उत्साहित नज़र आता है लेकिन उत्तर प्रदेश समेत कई मामलों में उसकी लापरवाही परेशान
करने वाली है.’’
क़ानून मंत्री ने कहा,‘’भारतकी कंपनियां चाहे वो फार्मा की हों या आईटी सेक्टर की,
अगर ये अमेरिका या किसी और देश में कारोबार करने
जाती हैं तो वहां के नियम-क़ानूनों का पालन करती हैं. जब भारत ने प्रताड़ितों को आवाज़
देने के लिए नियम बनाया तो ट्विटर इसके पालन में अनिच्छा दिखा रहा है.’’
‘’क़ानून का राज भारतीय समाज का आधार है. भारत अभिव्यक्ति की आज़ादी
को लेकर संवैधानिक गारंटी देता है और जी-7 में इसे ही दोहराया है. कोई भी विेदेशी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़
में भारत के क़ानूनों का पालन करने से नहीं बच सकती.’’
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, ट्विटर के संस्थापक जैक डोर्सी
ट्विटर ने भी पूरे मामले को लेकर एक बयान जारी किया है. अपने बयान में ट्विटर ने कहा, ''हम प्रक्रिया के हर चरण में प्रगति के बारे में, भारत के आईटी मंत्रालय को अवगत करा रहे हैं. एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी को नियुक्त किया गया है. इसके बारे में जानकारी सीधे मंत्रालय के साथ साझा की जाएगी. ट्विटर नए दिशानिर्देशों का पालन करने का हर संभव प्रयास कर रहा है."
प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें रवि शंकर प्रसाद के बयान या एफ़आईआर के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करनी है.
मिथुन चक्रवर्ती से भड़काऊ भाषण देने के मामले में पूछताछ, प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, Sanjay Das
इमेज कैप्शन, बीजेपी के लिए विधानसभा चुनावों में प्रचार करते मिथुन चक्रवर्ती
कोलकाता में मानिकतला थाने
की पुलिस ने बुधवार को अभिनेता और बीजेपी के नेता मिथुन चक्रवर्ती से विधानसभा चुनाव
अभियान के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के मामले में पूछताछ की.
कोरोना को ध्यान
में रखते हुए पुलिस की एक टीम ने उनसे वर्चुअली लगभग 45 मिनट तक पूछताछ की.
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने मिथुन की
उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को खारिज करने
की मांग की थी.
उनकी दलील थी कि उन्होंने सिर्फ़ अपनी फ़िल्मों के डायलॉग बोले थे. अदालत
ने उनसे वर्चुअल तरीके से होने वाली पूछताछ में पुलिस का सहयोग करने को कहा था. इसी
के मुताबिक, आज उनसे पूछताछ की गई.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
मानिकतला में एफ़आईआर
बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान मिथुन चक्रवर्ती पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए महानगर के मानिकतला थाने में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
इसमें कहा गया था कि सात मार्च को बीजेपी में शामिल होने के बाद आयोजित रैली में चक्रवर्ती ने अपनी फिल्मों के कुछ मशहूर डायलाग बोले थे.
उनमें ‘‘मारबो एखाने लाश पोड़बे शशाने’ (तुम्हें मारूंगा यहां, लाश श्मशान में गिरेगी) और ‘ एक छोबोले चाबी’ (सांप के एक दंश से तस्वीर में बदल जाओगे) शामिल थे.
आरोप है कि उनके ऐसे डायलॉग की वजह से से राज्य में चुनाव के बाद हिंसा हुई. यह एफआईआर टीएमसी की उत्तर कोलकाता शाखा की ओर से दर्ज कराई गई थी.
चुनाव का नतीजा घोषित होने जाने के एक माह बाद मिथुन चक्रवर्ती ने उक्त प्राथमिकी के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर उस एफआईआर को खारिज करने का अनुरोध किया था.
लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए मिथुन को निर्देश दिया कि वह सरकार को अपना ई-मेल पता बताएं ताकि इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पुलिस उनसे पूछताछ कर सके.
अब हाईकोर्ट में 18 जून को इस मामले की अगली सुनवाई होगी.
अरब मुर्दाबाद के नारे से अपनों पर ही भड़के इसराइली विदेश मंत्री
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, इसराइली विदेश मंत्री येर लेपिड
इसराइल के हज़ारों
दक्षिणपंथी राष्ट्रवादियों ने पूर्वी यरुशलम में अपना राष्ट्रध्वज लेकर मार्च किया.
इस मार्च से एक बार फिर इसराइल और फ़लस्तीनियों में तनाव बढ़ गया है. इसराइल की में
नई गठबंधन सरकार बने दो दिन ही हुए हैं और नई चुनौती सामने आ गई है.
पिछले महीने पूर्वी
यरुशलम से ही तनाव की शुरुआत हुई थी और 11 दिनों तक चरमपंथी इस्लामिक संगठन हमास और इसराइली सुरक्षा बलों के बीच हिंसक संघर्ष
चला था. इसमें क़रीब 250 लोगों की जान गई
थी.
इमेज स्रोत, Getty Images
मंगलवार को इसराइल
की पुलिस इस मार्च को लेकर काफ़ी सतर्क थी. पुलिस ने यरुशलम के मशहूर दमिश्ट गेट वाले
इलाक़े को पहले ही फ़लस्तीनियों से ख़ाली करवा दिया था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार
मार्च में शामिल ज़्यादातर लोग दक्षिणपंथी यहूदी थे. ये अपने हाथों में इसराइल का राष्ट्रध्वज
लेकर आगे बढ़ रहे थे.
1967 के युद्ध में इसराइल
ने पूर्वी यरुशलम को अपने नियंत्रण में ले लिया था और तब से उसके पास ही है. हालांकि
इसे अभी अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है कि इसराइल का पूर्वी यरुशलम है. फ़लस्तीनियों
की मांग है कि भविष्य में फ़लस्तीन एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बनेगा तो पूर्वी
यरुशलम उसकी राजधानी होगी. इसमें वेस्ट बैंक और ग़ज़ा को भी शामिल करने की बात है.
इमेज स्रोत, Reuters
गज़ा में हमास का
शासन है और उसने यरुशलम में मार्च को लेकर इसराइल की नेफ़्टाली बेनेट सरकार को चेतावनी
दी है. हमास ने कहा है कि फिर से अशांति हो पैदा हो सकती है. इस मार्च में अरब मुर्दाबाद
के नारे भी लगाए गए.
बेनेट नेफ़्टाली की
सरकार में येर लेपिड विदेश मंत्री हैं और इस सरकार में सबसे बड़ी पार्टी भी इन्हीं
की है. लेपिड को नेफ़्टाली के दो साल के कार्यकाल के बाद पीएम बनना है. उन्होंने इस
मार्च में अरब मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने की निंदा की है.
येर लेपिड ने अरब
मुर्दाबाद के नारे पर नाराज़गी जताते हुए अपने ट्वीट में कहा, ''यहूदी ऐसे नहीं होते. एक इसराइली के लिए भी यह ठीक
नहीं है. निश्चित तौर पर हमारा राष्ट्र ध्वज भी इसकी अनुमति नहीं देता है.''
इसराइली विदेश मंत्री
ने कहा, ''हाथ में इसराइली ध्वज लेकर
हम नफ़रत की भाषा नहीं बोल सकते़. यह माफ़ी लायक नहीं है. ये कैसे हो सकता है कि आपने
हाथ में इसराइली झंडा लिया है और अरब मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
उत्तर कोरिया में खाने-पीने की चीज़ों को लेकर 'चिंताजनक' हालात: किम जोंग उन
इमेज स्रोत, Reuters
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक़,
किम जोंग उन ने कहा है कि इस साल देश की अर्थव्यवस्था में तो सुधार हुआ है
मगर खाने-पीने की चीज़ों को लेकर 'चिंताजनक' स्थिति पैदा हो गई
है.
उत्तर करिया के शासक ने इसके लिए कोरोना महामारी
और पिछले साल आए चक्रवाती तूफ़ानों को ज़िम्मेदार बताते हुए इससे प्राथमिकता से
निपटने पर ज़ोर दिया.
किम ने मंगलवार को सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की सेंट्रल कमिटी की
बैठक की अध्यक्षता की थी. सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक़, इस बैठक में
आर्थिक मसलों को सुलझाने के लिए बनाई नीतियों की समीक्षा की गई.
इस दौरान अगली पंचवर्षीय आर्थिक योजना के लिए लक्ष्य तय किए गए,
जिनमें खाद्यान्न और धातु का उत्पादन बढ़ाना शामिल है.
किम ने कहा, “इस
साल की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था सुधरी है और कुल औद्योगिक उत्पादन पिछले साल
की तुलना में 25 फ़ीसदी बढ़ा है. लेकिन, कई अड़चनों के कारण पार्टी अपनी
योजनाओं को लागू नहीं कर पाई.”
केएनसीए के मुताबिक़, किम जोंग उन ने कहा
कि ‘पिछले
साल आए चक्रवाती तूफ़ान से पहुँचे नुक़सान के कारण कृषि क्षेत्र योजना के मुताबिक़
प्रदर्शन नहीं कर सका, जिससे खाने की स्थिति गंभीर हो गई है.’
इस बैठक में कृषि क्षेत्र पर फ़ोकस करने
और कोरोना महामारी से निपटने का संकल्प
दोहराया गया और किम ने कहा कि ‘पिछले
साल आई प्राकृतिक आपदाओं से सबक़ लेकर इस साल नुक़सान क़म किया जाए.”
जनवरी में किम ने कहा था कि पिछली पंचवर्षीय आर्थिक योजना लगभग हर
सेक्टर में नाकाम रही. इसके लिए उन्होंने बिजली और खाने की कमी, प्रतिबंधों, महामारी और
बाढ़ को ज़िम्मेदार ठहराया था.
उत्तर कोरिया का कहना है कि अभी तक उसके यहाँ कोविड-19 का एक भी मामला सामने नहीं आया है मगर इस दावे को लेकर
सवाल उठते रहते हैं.
उत्तर कोरिया ने अपने यहाँ कड़े नियम लागू किए हैं.अंतरराष्ट्रीय सीमाएं तो बंद हैं ही, देश के अंदर भी यात्राओं पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई
हैं.
इमेज स्रोत, Reuters
मायावती ने अपने विधायकों को लेकर अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला
इमेज स्रोत, Getty Images
2022 में उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव से पहले जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है.
मंगलवार को ख़बर आई
कि बहुजन समाज पार्टी के पाँच से ज़्यादा विधायकों ने समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाक़ात की है.
इस बैठक के बाद अटकलें
शुरू हो गईं कि ये विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. हालाँकि इन विधायकों
को बीएसपी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी से अक्टूबर
2020 में ही निलंबित कर दिया था.
ये विधायक हैं- असलम
अली, हरगोविंद भार्गव, मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीक़ी, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद असलम राइनी, सुषमा पटेल और वंदना सिंह.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 1
इस मुलाक़ात को समाजवादी
पार्टी और बीएसपी के निलंबित विधायकों ने सार्वजनिक नहीं किया है. कहा जा रहा है कि
इन सात विधायकों में पाँच ने अखिलेश यादव से मुलाक़ात की है. ये विधायक यूपी विधानसभा
के मॉनसून सत्र के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.
मायावती ने मीडिया
में चल रही इन मुलाक़ातों की ख़बरों को लेकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है.
मायावती ने बुधावार
को ट्वीट कर कहा, ''घृणित जोड़तोड़,
द्वेष और जातिवाद की संकीर्ण राजनीति में माहिर
समाजवादी पार्टी मीडिया के सहारे यह प्रचारित कर रही है कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट
कर सपा में जा रहे हैं. यह बात घोर छलावा है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 2
मायावती ने अपने ट्वीट
में कहा है, ''जिन विधायकों के सपा
में शामिल होने की बात कही जा रही है उन्हें काफ़ी पहले ही राज्यसभा के चुनाव में एक
दलित के बेटे को हराने के के मामले में बीएसपी से निलंबित किया जा चुका है.’’
‘’सपा में इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार
होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती. इनको यह मालूम है कि बीएसपी के इन विधायकों
को लिया तो सपा में बग़ावत होगी क्योंकि कई लोग बीएसपी में आने को आतुर हैं.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 4
मायावती ने कहा,
''जगज़ाहिर तौर पर सपा चाल, चरित्र और चेहरा के मामले में दलित-विरोधी रही है.
इसमें सुधार के लिए वह तैयार नहीं है. इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित
के कामों को बंद किया और भदोई को नया संत रविदास नगर ज़िला बनाने को भी बदल डाला.’’
‘’वैसे बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने का मीडिया में प्रचारित
करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष
और ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज़्यादा लगती है.''
मुस्लिम बुज़ुर्ग वीडियो मामले में ट्विटर, राना अयूब और कई पत्रकारों के ख़िलाफ़ FIR
इमेज स्रोत, YT
उत्तर प्रदेश की ग़ाज़ियाबाद
पुलिस ने सांप्रदायिक सद्भावना तोड़ने के आरोप में ट्विटर और कई पत्रकारों के ख़िलाफ़
एफ़आईआर दर्ज की है.
पाँच जून को एक मुस्लिम
बुज़ुर्ग पर हमले के मामले में यह कार्रवाई की गई है. बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा
से ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने एफ़आईआर की पुष्टि की है.
हालाँकि अब्दुल समद
नाम के एक उस बुज़ुर्ग ने एक वीडियो में दावा किया है कि उनकी दाढ़ी काटी गई और 'वंदे मातरम' के साथ जय श्रीराम बोलने पर मजबूर किया गया था.
अब्दुल समद ने
ये आरोप भी लगाया था
कि उन्हें जंगल की ओर ले जाया गया था और वहीं बंधक बनाकर रखा गया था.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
लेकिन ग़ज़ियाबाद
पुलिस ने इसमें किसी भी तरह के सांप्रदायिक एंगल को ख़ारिज किया है. पुलिस की एफ़आईआर
में पत्रकार राना अयूब, सबा नक़वी और मोहम्मद
ज़ुबैर नामज़द अभियुक्त के तौर पर शामिल हैं.
इसके अलावा ऑनलाइन
न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर', कांग्रेस नेता सलमान निज़ामी, समा मोहम्मद और मस्कूर उस्मानी को भी नामज़द अभियुक्त
बनाया गया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने बिना तथ्य की पुष्टि किए इस मामले को सांप्रदायिक
रंग दिया.
पुलिस का कहना है
कि ट्वीट्स का मक़सद सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था. एफ़आईआर के अनुसार ये ट्वीट्स
हज़ारों बार रीट्वीट किए गए.
इमेज स्रोत, UP Police
पुलिस की शिकायत में
कहा गया है कि पुलिस की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण भी दिया गया फिर ट्वीट डिलीट
नहीं किए गए और न ही ट्विटर ने इस पर कोई कार्रवाई की.
ट्विटर के ख़िलाफ़ भी ग़ाज़ियाबाद
पुलिस ने मुक़दमा दर्ज किया है और यह केंद्र सरकार के नए नियम के बाद ट्विटर के ख़िलाफ़
पहला मुक़दमा है.
पाँच जून को ही केंद्र
सरकार ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेफॉर्म ट्विटर को विस्तार से नए नियमों के बारे में बताया
था और उसे लागू करने के लिए कहा था.
इसे एक हफ़्ते में ही लागू करना था लेकिन आश्वासन
के बाद भी यह समय सीमा समाप्त हो गई है. द हिन्दू के अनुसार ट्विटर इन्टरमीडियरी का दर्जा
खो सकता है. अब ट्विटर किसी भी कॉन्टेंट के लिए ख़ुद ही ज़िम्मेदार होगा.
पाकिस्तानी संसद में भद्दी गालियां, विपक्ष ने कहा- यही रियासत-ए-मदीना है
इमेज स्रोत, Getty Images
पाकिस्तान की नेशनल
असेंबली में मंगलवार को वो सब कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिए था. सत्ता पक्ष और विपक्ष
के सांसद आपस में भिड़ गए और हाथापाई करते दिखे.
विपक्षी नेता शहबाज़
शरीफ़ मंगलवार को नेशनल असेंबली में बजट पर जारी बहस में दूसरे दिन बोलने की कोशिश
कर रहे थे तभी सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद आपस में भिड़ गए.
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी
संसद में उपद्रव का वीडियो जमकर शेयर किया गया है. वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री
इमरान ख़ान की सत्ताधारी पार्टी तहरीक़-ए-इंसाफ़ के अल्वी अवान एक विपक्षी सदस्य को
भद्दी गालियां दे रहे हैं. सांसद एक दूसरे पर किताब भी फेंकते दिख रहे हैं. उसी बजट
बुक से एक दूसरे को लोग मारते दिखे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 1
संसद में हिंसा बढ़ती
देख नेशनल असेंबली के सचिव ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाने का अनुरोध किया. लेकिन
अतिरिक्त सुरक्षा बलों के आने के बाद भी हालात काबू में नहीं हुए.
दोनों पक्ष संसद हॉल
में एक दूसरे को निशाने पर लेते रहे. शहबाज़ शरीफ़ ने संसद के सत्र के बाद पूरे वाक़ये
पर ट्वीट कर कहा, ''आज टीवी पर पूरा मुल्क
ने देखा कि कैसे सत्ताधारी पार्टी ने गुंडागर्दी की. यहाँ तक की भद्दी गालियाँ भी दी
गईं. इससे पता चलता है कि इमरान ख़ान और उनकी पार्टी फासीवादी हो गई है और विपक्ष के
साथ गुंडागर्दी कर रही है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 2
पाकिस्तान मुस्लिम
लीग- नवाज़ (पीएमएलएन) की सांसद मरियम औरंगज़ेब ने पूरे घटनाक्रम के लिए प्रधानमंत्री
इमरान ख़ान को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने ट्वीट कर
कहा, ''इमरान ख़ान ने जो नया पाकिस्तान
बनाया है, उसकी यह हक़ीक़त है. यह फासीवादी
मानसिकता की झलक है. इमरान ख़ान संसद को अप्रासंगिक और लोकतंत्र को कमज़ोर बनाने में
कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. विपक्ष पर बजट बुक फेंकी गई. यही इमरान ख़ान की रियासत-ए-मदीना
है.''
इमरान ख़ान अक्सर अपने भाषणों में पाकिस्तान को रियासत-ए-मदीना बनाने की बात करते हैं.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 3
हालाँकि सत्ता पक्ष
वाले संसद में उपद्रव के लिए विपक्षी सांसदों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. पीटीआई के सांसद अवान ने ट्वीट कर कहा कि भले उनके गाली-गलौज
का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है लेकिन पहले विपक्षी सांसद ने सीमा तोड़ी थी.
अवान का कहना है कि पहले पीएमएल-एन के सांसदों ने गाली दी, उसके बाद उन्होंने जवाब में गाली दी थी.
पाकिस्तान के सूचना
मंत्री फ़वाद चौधरी ने कहा कि संसद में हिंसा की शुरुआत पीएमएल-एन सदस्य गौहर ख़ान
के नारों से शुरू हुई. फ़वाद ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''पीएमएल-एन के सदस्य ने पहले संसद की मर्यादा तोड़ी और गाली की
शुरुआत भी उन्होंने ही की. इसके बाद कुछ नौजवान सदस्यों ने भावुक होकर बजट बुक फेंकी.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 4
भारत में कोरोना का एक नया वेरिएंट मिला, हो सकता है ख़तरनाक
इमेज स्रोत, Getty Images
भारत ने मंगलवार को
औपचारिक रूप से स्वीकार किया कि AY.1 कोरोना वायरस का एक वेरिएंट मौजूद है जो कि डेल्टा वेरिएंट के क़रीब है.
AY.1 या B.1.617.2.1 का एक म्यूटेशन है, जिसे K417N कहा जा रहा है. इसे
काफ़ी संक्रामक बताया जा रहा है और बीटा वेरिएंट से जुड़ा है. पहली बार इसकी पहचान
दक्षिण अफ़्रीका में हुई थी.
मंगलवार को कोविड-19 टीकाकरण पर बने राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह के प्रमुख
वीके पॉल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''पहली बार इसकी पहचान मार्च महीने में यूरोप में हुई थी लेकिन
दो दिन पहले ही यह लोगों में पाया गया है. हाँ, नया कोरोना का नया वैरिएंट पाया गया है. लेकिन अभी चिंता की
कोई बात नहीं है. हमें इसके बारे में अभी बहुत कुछ पता नहीं है. हम इसे लेकर अध्ययन
कर रहे हैं. भारत में इसके संक्रमण को लेकर भी अध्ययन किया जा रहा है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
सोमवार को अंग्रेज़ी
अख़बार द हिन्दू में एक रिपोर्ट छपी थी कि भारत की पाँच प्रयोगशालाओं की ओर से नए वेरिएंट
का डेटा मई और जून में GISAID को सौंपा गया था.
GISAID एक वैश्विक संस्था है.
ब्रिटेन के निकाय
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा है कि GISAID में भारत से 63 जीनोम सात जून तक आए हैं. इनमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक
में AY.1 वेरिएंट के सबूत मिले हैं.
डॉ पॉल ने कहा,
''म्यूटेशन एक जैविक तथ्य है. हमें बचाव के तरीक़े
अपनाने हैं. हमें इसे फैलने का अवसर मिलने से रोकना होगा.''
इमेज स्रोत, Getty Images
डॉ पॉल ने कहा कि
भारत में सोमवार को नोवावैक्स वैक्सीन आ गई. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि नोवावैक्स
वैक्सीन का उत्पादन भारत में बड़े पैमाने पर होगा.
डॉ पॉल ने कहा,
''हम जानते हैं कि नोवावैक्स बिल्कुल सुरक्षितहै और इसकी एफिकेसी दर भी काफ़ी उच्च स्तर की है.
हमें गर्व होना चाहिए कि भारत में अब एक और वैक्सीन मोजूद है.''
नोवावैक्स अमेरिकी कंपनी है और वो भारत में सीरम इंस्टिट्यूट
ऑफ इंडिया के साथ मिलकर NVX-CoV2373वैक्सीन बना रही है.
बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पेज पर आपका स्वागत है. हम यहाँ आपको दिन भर की बड़ी ख़बरें और लाइव अपडेट्स देते रहेंगे. यह लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध है. 15 जून, मंगलवार के सभी बड़े अपडेट्स के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं.