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इथियोपिया के टिग्रे इलाके में करीब 33 हज़ार बच्चों की भूख और कुपोषण की मौत हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाल संस्था यूनिसेफ़ ने यह चेतावनी दी है.
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इथियोपिया के टिग्रे इलाके में करीब 33 हज़ार बच्चों की भूख और कुपोषण की मौत हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाल संस्था यूनिसेफ़ ने यह चेतावनी दी है.
सरकारी सुरक्षाबलों और विद्रोहियों के बीच लगातार चले संघर्ष ने टिग्रे को जर्जर कर दिया है.
नवंबर 2020 में शुरू हुई इस लड़ाई के बाद से अब तक टिग्रे से करीब 17 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं.
अब संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन में पता चला है कि इस इलाके में रहने वाले करीब 3 लाख 43 हज़ार लोगों पर ‘गंभीर संकट’ है.
इतना ही नहीं, अध्ययन में करीब 33,000 बच्चों की भूख से मौत होने की आशंका जताई गई है.
हालाँकि इथियोपिया ने इस रिसर्च के दावों से असहमति जताई है और कहा है कि टिग्रे में मदद पहुँचाई जा रही है.
वहीं, यूनिसेफ़ का कहना है कि टिग्रे में भोजन की कमी के कारण ‘तबाही’ जैसी स्थिति आ पहुँची है और इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग (ख़ासकर बच्चे) भुखमरी का शिकार हो सकते हैं.
यूनिसेफ़ टिग्रे के सुदूर हिस्सों में मानवीय मदद पहुँचाने की अपील कर रहा है.

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प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक चल रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स में अनुमान जताया जा रहा है कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश के नेतृत्व को लेकर कोई अहम फ़ैसला हो सकता है.
इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात की थी.
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि साल 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में कैबिनेट में विस्तार या बदलाव किया जा सकता है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी छोटे-छोटे समूहों में मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं.
इन बैठकों में मंत्रियों के पिछले दो साल के कामों की समीक्षा की जा रही है.
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बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’ 11 जून 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’ 11 जून 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी के दिग्गज नेता और पार्टी उपाध्यक्ष मुकुल रॉय वापस अपनी पुरानी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनके साथ उनके बेटे और विधायक शुभ्रांशु रॉय भी पार्टी में लौट आए हैं
सांसद पार्थ चटर्जी ने कोलकाता में पार्टी मुख्यालय में हुए प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान इसका ऐलान किया.
मुकुल रॉय की वापसी का एलान कोलकाता मे तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालय में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनके भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में हुआ.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय को पार्टी का पुराना सदस्य बताते हुए कहा 'घर का लड़का, घर लौट आया'.
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लिखित में विस्तार से बताऊंगा वापसी की वजह: मुकुल रॉय
ममता बनर्जी ने कहा, “मुकुल घर का लड़का है और घर लौट आया है.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी अभियान के दौरान मुकुल रॉय ने कभी उनके ख़िलाफ़ कभी कोई बात नहीं की और न ही कभी ‘गद्दारी’ की.
ममता ने कहा कि उनके और मुकुल रॉय के बीच कभी कोई मतभेद नहीं रहा.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ममता ने बीजेपी पर भी हमला बोला और कहा कि वहाँ हर किसी को शोषण होता है.
ममता ने बीजेपी को ‘ज़मींदारों की पार्टी’ बताते हुए कहा कि मुकुल रॉय पर दबाव डालकर उन्हें अपने साथ किया गया था.
वहीं, मुकुल रॉय ने कहा कि टीएमसी में वापसी के बारे में वो लिखित में विस्तार से जानकारी देंगे.

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि अमेरिका और ब्रिटेन के गठबंधन को ‘अटूट साझेदारी’के तौर पर पहचाना जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री जॉनसन ने यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ मुलाक़ात के बाद कही.
बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाक़ात थी.
जॉनसन ने बीबीसी से कहा कि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत ‘शानदार’रही.
बोरिस जॉनसन अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन से मुलाकात के बाद बीबीसी की पॉलिटिकल एडिटर लॉरा कुएन्सबर्ग से बात कर रहे थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं. इस सम्मेलन में प्रमुख रूप से वैक्सीन और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा होनी है.
जॉनसन ने कहा कि ब्रेक्ज़िट के बाद उत्तरी आयलैंड की स्थिति पर बाइडन ने ‘गहरी चिंता’ज़ाहिर की.
जी-7 सम्मेलन में ब्रिटेन और अमेरिका के अलावा कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान हिस्सा ले रहे हैं.
माना जा रहा है कि सम्मेलन में कोविड वैक्सीन की एक अरब डोज़ मुहैया कराने पर सहमति बनेगी ताकि साल 2022 तक कोरोना महामारी को ख़त्म किया जा सके.

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टीएमसी में वापसी के संकेतों के बीच मुकुल रॉय पार्टी के दफ़्तर पहुंच गए हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार यानी आज तीन बजे पार्टी की मीटिंग बुलाई है.
मुकुल रॉय किसी वक़्त ममता बनर्जी के काफी करीब थे लेकिन उसके बाद पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.
भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल में विस्तार में उनकी प्रमुख भूमिका रही है. लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव के बाद से मुकुल रॉय के बीजेपी से ‘मोहभंग’ की ख़बरें सामने आई थीं.
मुकुल रॉय और उनकी पत्नी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए तो लंबे वक़्त तक बीजेपी नेताओं ने उनकी खोज-ख़बर नहीं ली.
बाद में जब ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी उन्हें मिलने पहुंचे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुकुल रॉय से फोन पर बात की.
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इससे पहले बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने मुकुल रॉय के पार्टी में वापस लौटने के संकेत दिए थे.
उन्होंने कहा था, “मुकुल रॉय भले ही टीएमसी छोड़कर बीजेपी में गए लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ कभी कुछ नहीं कहा.”
मुकुल रॉय साल 2017 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और इस साल राज्य में हुए विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी के कई नेताओं बीजेपी में शामिल कराने में उनकी अहम भूमिका बताई जा रही थी.

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दिल्ली सरकार के घर-घर राशन पहुंचाने की योजना के केंद्र सरकार से खारिज किए जाने के बाद अब केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार राशन माफ़िया के नियंत्रण में है.
अब से थोड़ी देर पहले एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि फूड सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत भारत सरकार बड़ी संख्या में दिल्ली के लिए अनाज देती है लेकिन केजरीवाल सरकार केंद्र सरकार पर बिना कारण घर-घर राशन योजना रोकने का आरोप लगा रही है.
उन्होंने दिल्ली सरकार से कहा कि अगर उनके पास इसका कोई विकल्प है तो सरकार के पास प्रस्ताव भेजे, केंद्र सरकार खुले मन से इस पर विचार करेगी.
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'वन नेशन वन राशन' को क्यों रोका?
क़ानून मंत्री ने कहा कि 2013 में मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले से लागू किए गए फूड सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत राशन की दुकानों के ज़रिए सामान लोगों तक पहुंचाया जाता है. इसी क़ानून के तहत राशन की सभी दुकानों का नियमित तौर पर ऑडिट करने का प्रावधान है.
मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद देश में 'वन नेशन वन राशन कार्ड' को लागू किया है. इसे देश के सभी राज्यों ने लागू नहीं किया, लेकिन अब तक केवल तीन राज्यों में लागू नहीं किया है- असम, दिल्ली और पश्चिम बंगाल.
उन्होंने कहा "जनवरी 2018 में दिल्ली में राशन वितरण में ई-ऑथेन्टिकेशन लागू किया गया लेकिन इसे चार महीनों बाद रोक दिया गया और अब तक शुरू नहीं किया गया. इस दौरान चार लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए."
"लेकिन तर्क ये दिया गया कि तकनीक सही तरीके से काम नहीं कर रही है. यदि ऐसा था तो दूसरे राज्यों में ये कैसे लागू हो रहा है?"
उन्होंने कहा कि फर्जी राशन कार्ड पकड़े जाने के बाद राशन माफ़िया ने दवाब डालकर इस योजना को लागू होने से रोक दिया है.
उन्होंने कहा कि राशन लेने की प्रक्रिया में दुकान से इसे खरीदने और दुकान पर ई-ऑथेन्टिकेशन का महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन अगर इसे घर-घर पहुंचाया जाए लेकिन इसका आंकड़ा न रखा जाए तो इससे राशन के हिसाब में गड़बड़ी होगी.
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कितने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को राशन दिया गया है दिल्ली सरकार के पास इसका भी कोई आंकड़ा नहीं है.
उन्होंने कहा, "अगर आप तकनीक के ज़रिए अनाज नहीं किसे मिल रहा है ये सुनिश्चित नहीं कर सकते, इसका ई-ऑथेन्टिकेशन नहीं करा सकते तो आप किस आधार पर घर-घर राशन व्यवस्था शुरू कर रहे हैं? "
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केजरीवाल का केंद्र सरकार पर आरोप
इससे पहले दिल्ली सरकार ने घर-घर राशन व्यवस्था शुरू होने से पहले ही उसे रोकने का आरोप लगाया था.
केजरीवाल ने सवाल किया था कि अगर पिज़्ज़ा, बर्गर, स्मार्टफ़ोन और कपड़ों की घरों पर डिलिवरी हो सकती है तो ग़रीबों के घरों में राशन की डिलिवरी क्यों नहीं हो सकती?
केजरीवाल का कहना था कि सरकार की दलील है कि राशन दुकान वाले इस योजना के ख़िलाफ़ दिल्ली हाई कोर्ट गए थे इसलिए सरकार ने ये योजना खारिज की है.
उन्होंने केंद्र सरकार पर राशन माफ़िया का समर्थन देने का आरोप लगाया है और कहा, "राशन दुकानदार इसके ख़िलाफ़ कोर्ट में स्टे लेने गए थे. कोर्ट ने इन्हें स्टे देने से मना कर दिया. जब कोर्ट ने स्टे नहीं दिया तो आपके इस योजना पर कैसे स्टे लगा दिया?"
केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में कोर्ट में केंद्र सरकार भी एक पक्ष है लेकिन उन्होंने कोर्ट में उसका विरोध नहीं किया.
उन्होंने सवाल किया, "अगर कोर्ट में आपने विरोध नहीं क्या तो बाहर क्यों विरोध कर रहे हैं?"
केजरीवाल ने राशन की दुकानों को कोरोना सुपर स्पेडर कहा और कहा कि कोरोना काल में पूरे देशों में घर-घर पर राशन पहुंचाया जाना चाहिए, इससे कोरोना पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की तस्वीर ट्वीट की है और समय देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने अपने व्यस्त समय से उनके लिए थोड़ा वक्त निकाला, इसके लिए वो उनके आभारी हैं.
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प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के बाद योगी आज दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात करने वाले हैं.
समाचार एजेेंसी एएनआई के अनुसार वो जेपी नड्डा के घर पहुंच चुके हैं.
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पिछले कुछ समय से बीमार अभिनेता दिलीप कुमार की सेहत में सुधार हुआ है और अब वो घर लौट रहे हैं.
उनके ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी गई है.
वहाँ फ़ैसल फ़ारूक़ी ने लिखा है - "आप सब की दुआओं, प्यार और प्रार्थना से दिलीप साहब अस्पताल से घर लौट रहे हैं."
हिंदी फ़िल्म जगत के दिग्गज कलाकार को इस महीने 6 जून को साँस में तकलीफ़ के बाद मुंबई के हिंदुजा खार अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
बाद में उन्हें आईसीयू में भी भर्ती कराया गया मगर वो वेंटिलर पर नहीं थे.
98 वर्षीय अभिनेता को पिछले महीने भी नियमित जाँच के लिए इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
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दिल्ली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाक़ातों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि वो बीजेपी का हाथ फिर से नहीं थामेंगे यानी एनडीए में फिर शामिल नहीं होंगे.
उन्होंने थोड़ी देर पहले ट्वीट कर कहा, "भाजपा डूबती हुई नैया है, जिसको इनके रथ पर सवार होना है हो जाये पर हम सवार नहीं होंगे. हम जिन मुद्दों को लेकर समझौता किये थे साढ़े चार साल बीत गया एक भी काम पूरा नहीं हुआ."
राजभर ने 2019 मई में योगी कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया था. वो योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण-दिव्यांग जन कल्याण मंत्री थे.
इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी उनकी पार्टी को ख़त्म करना चाहती है.
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उत्तर प्रदेश की सियासत में राजभर पूर्वांचल में राजभर समुदाय और दलित और पिछड़े वर्गों का जाना माना चेहरा हैं.
यूपी के उत्तर पूर्व हिस्से में उनका खासा दबदबा माना जाता है. पूर्वी यूपी की जनसंख्या का 20 फीसदी हिस्सा इसी वर्ग से आता है, जबकि यूपी में 3 फीसदी जनसंख्या राजभर समुदाय से है.
दिल्ली पहुँचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा के लिए उनके आवास 7, रेसकोर्स रोड (7, लोक कल्याण मार्ग) पर पहुँच गए हैं.
दो दिन के अपने दौरे में योगी आज बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिल सकते हैं. कल दिल्ली में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी.
इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा था - "आज आदरणीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी से नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया."
योगी का दिल्ली दौरा ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों को एक साल से भी कम समय बचा है और उससे पहले राज्य में काफ़ी हलचल देखने को मिल रही है.
पिछले कुछ हफ़्तों से लगातार ऐसी अटकलें लग रही हैं कि क्या प्रदेश के बीजेपी खेमे में मुख्यमंत्री को लेकर कोई असंतोष है. हालाँकि, पार्टी ने इससे इनकार किया है.
मई के आख़िर और जून की शुरुआत में आरएसएस और बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के बीच बैठकों का दौर भी चला था. इस दौरान सरकार और संगठन में बदलाव की संभावनाओं के बीच दोनों स्तरों पर नेतृत्व परिवर्तन तक की चर्चा ज़ोर-शोर से रही.
इस पूरे घटनाक्रम बाद दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ योगी की यह पहली मुलाक़ात हो रही है.
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बीसीसीआई ने श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा कर दी है. एकदिवसीय और टी-20 मैचों की सिरीज़ के लिए शिखर धवन को टीम का कप्तान और भुवनेश्वर कुमार को उप-कप्तान चुना गया है.
बीसीसीआई ने एक बयान जारी कर कहा है कि तीन-तीन मैचों की एकदिवसीय और टी-20 सिरीज़ जुलाई के महीने में होगी और सभी मैच कोलोंबो के प्रेमदासा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे.
भारतीय टीम में शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, देवदत्त पड्डीकल, रितुराज गायकवाड, सूर्यकुमार यादव, मनीष पांडे, हार्दिक पांड्या, नीतीश राणा, इशान किशन (विकेट-कीपर), संजू सैमसन, युजवेंद्र चहल, राहुल चाहर, के गौतम, कृणाल पांड्या, वरुण चक्रवर्ती, भुवनेश्वर कुमार, दीपक चाहर, नवदीप सैनी और चेतन सकारिया शामिल होंगे.
बीसीसीआई के अनुसार एकदिवसीय मैच 13, 16 और 18 जुलाई को खेले जाएंगे, वहीं टी-20 मैच 21, 23 और 25 जुलाई को खेले जाएंगे.
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भारत में बीते चौबीस घंटों में कोरोना संक्रमण के 91,702 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि संक्रमण से 3,403 लोगों की मौत हुई है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ये लगातार चौथा दिन है जब देश में चौबीस घंटों में कोरोना के एक लाख से कम मामले दर्ज किए गए हैं.
देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या 11,21,671 हो गई है, वहीं रिकवरी दर 94.93 फीसदी हो गई है.
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हाल में एलोपैथी इलाज पद्धति और डॉक्टरों के विरोध में बोलने के बाद, अब बाबा रामदेव ने कहा है कि वो कोविड-19 वैक्सीन लेंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गुरुवार को बाबा रामदेव ने कहा है कि वो जल्द ही कोरोना की वैक्सीन लेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि 'डॉक्टर धरती पर ईश्वर के दूत हैं'.
इससे पहले रामदेव ने कहा था कि योग और आयुर्वेद अपनाने के कारण वो सुरक्षित हैं और उन्हें कोविड-19 के टीके की कोई ज़रूरत नहीं है.
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जून 21 तारीख से सभी को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का स्वागत करते हुए रामदेव ने कहा कि ये सरकार का 'ऐतिहासिक कदम' है.
उन्होंने अपील की कि सभी को कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए और कहा कि वो खुद भी जल्द ही वैक्सीन की डोज़ लेंगे.
पीटीआई के अनुसार हरिद्वार में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "वैक्सीन के दोनों डोज़ लगवा कर योग और आयुर्वेद के साथ कोरोना के ख़िलाफ़ आप दोगुनी सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं. ये दोनों मिल कर आपको मज़बूत सुरक्षा कवच देंगे और फिर किसी की मौत कोविड से नहीं होगी."
उन्होंने एलोपैथी डॉक्टरों की तारीफ़ की और कहा कि वो "धरती पर स्वयं ईश्वर के दूत हैं."
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ जारी विवाद पर उन्होंने कहा कि वो किसी भी संस्था से किसी तरह का बैर नहीं रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वो किसी इलाज पद्धति का विरोध नहीं कर रहे बल्कि वो दवा के नाम पर ग़रीबों का शोषण किए जाने के ख़िलाफ़ हैं.
उन्होंने कहा कि डॉक्टर सस्ती जेनेरिक दवाएं देने की जगह पर महँगी दवाएं देते हैं. इसलिए अधिक संख्या में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, "मैं किसी संस्था के ख़िलाफ़ नहीं. अच्छे डॉक्टर देवदूत के समान हैं लेकिन कुछ ऐसे भी डॉक्टर हैं जो सही तरीके से काम नहीं करते."
रामदेव ने ये भी कहा कि इमर्जेंसी स्थिति में इलाज और सर्जरी के लिए एलोपैथी बढ़िया पद्धति है.
उन्होंने कहा, "इमर्जेंसी स्थिति में इलाज और सर्जरी की ज़रूरत पड़ने पर एलोपैथी सबसे बेहतर है. इस बारे में कोई दोराय नहीं है."
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एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पर उठाए थे सवाल
हाल में रामदेव ने एलोपैथी की चिकित्सा पद्धति पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि एलोपैथिक दवाएँ खाने से लाखों लोगों की मौत हुई है. उन्होंने एलोपैथी को 'स्टुपिड और दिवालिया साइंस' भी कहा था.
उनके इस बयान का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने विरोध किया. बाद में स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें ख़त लिख कर अपना बयान वापस लेने को कहा था. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनका बयान डॉक्टरों का मनोबल तोड़ने और कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमज़ोर करने वाला साबित हो सकता है.
रामदेव ने माफी मांगते हुए अपना बयान तो वापस ले लिया लेकिन जवाबी ख़त में लिखा कि "एलोपैथी के डॉक्टर्स से कोरोना काल में अपनी जान दांव पर लगा कर करोड़ों लोगों की जान बचाई है, हम उसका सम्मान करते हैं. हमने भी आयुर्वेद और योग से करोड़ों लोगों की जान बचाई है, इसका भी सम्मान होना चाहिए."

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिन के दौरे पर गुरुवार को राजधानी दिल्ली पहुंचे है. आज वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात करने वाले हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार मोदी से उनकी मुलाक़ात सुबह 10.45 हो सकती है, जिसके बाद 12.00 पार्टी अध्यक्ष से उनकी मुलाक़ात तय है.
इससे पहले गुरुवार को योगी ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी.
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योगी के दिल्ली दौरे और मुलाक़ातों के सिलसिले को प्रदेश में बीजेपी की छवि से जोड़ कर देखा जा रहा है.
प्रदेश में हाल के हुए पंचायत चुनावों के बाद, आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी के आला नेताओं में चिंता बढ़ गई हैं. साथ ही कोरोना महामारी पर लगाम लगाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों की भी कई हलकों में कड़ी आलोचना की गई है, जिसका असर पार्टी की छवि पर पड़ा है.
हालांकि पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े गए थे लेकिन बीजेपी समर्थित उम्मीदवार अपेक्षा के मुताबिक़ प्रदर्शन नहीं कर पाए थे.
इन चुनावों में बीजेपी दूसरे नंबर पर आई थी, जबकि समाजवादी पार्टी पहले नंबर पर थी और बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव जीता था. बहुजन समाज पार्टी ने भी बड़ी संख्या में सीटें जीत कर मैदान में वापसी की थी.
पंचायत चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा था. ऐसे में पार्टी में उत्तर प्रदेश में नेतृत्व को लेकर चिंता बढ़ी है.
इस सप्ताह की शुरूआत में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष और पार्टी में उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी राधा मोहन सिंह प्रदेश के मंत्रियों और नेताओं से मुलाक़ात करने लखनऊ पहुंचे थे. इस दौरान कई नेताओं के साथ वन-टू-वन रिव्यू मीटिंग आयोजित की गई थी.
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बुधवार को कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल हुए थे.
इसके बाद इस तरह कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश में पार्टी की स्थिति को और मज़बूत करने के लिए पार्टी उत्तर प्रदेश मंत्रीमंडल में बड़े फेरबदल कर सकती है.
इससे पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी गठबंधन में सहयागी अपना दल (सोनेलाल) की नेता अनुप्रिया पटेल ने भी अमित शाह से मुलाक़ात की थी.
पीटीआई के अनुसार ये मुलाक़ात इस बात का संकेत है कि पार्टी प्रदेश में अनपी स्थिति मज़बूत करने के लिए अपने गठबंधन सहयोगियों की तरफ हाथ बढ़ा रही है.
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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. साल 2017 में यहां हुए चुनावों में बीजेपी ने 403 सदस्यीय विधानसभा की 300 से अधिक सीटें जीती थीं.
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