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म्यांमार में फिर हिंसा, सुरक्षा बलों के साथ झड़प में 20 लोगों की मौत का दावा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ एयेयारवाडी नदी से लगे इलाकों में सुरक्षा बल हथियारों की तलाश कर रहे थे, तभी ये झ़ड़प हुई. गांव वालों के पास गुलेल और तीर-कमान जैसे हथियार थे.

लाइव कवरेज

  1. सर्च इंजन से ग़ायब हुई 'टैंक मैन' की तस्वीरें, माइक्रोसॉफ़्ट ने दी सफ़ाई

    माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने सर्च इंजन बिंग पर 'टैंक मैन' सर्च किये जाने पर कोई नतीजा ना दिखाए जाने को एक 'आकस्मिक मानवीय भूल' क़रार दिया है.

    माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि ये मामला 'एक आकस्मित मानवीय भूल का नतीजा था और हम इसे ठीक करने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं.'

    'टैंक मैन' नाम अकेले प्रदर्शन कर रहे उस व्यक्ति से जुड़ा रहा है, जो जून 1989 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान में चीन के थियानमेन चौक पर एक टैंक के सामने खड़ा हो गया था. लेकिन उसकी कभी पहचान नहीं हो पाई.

    बाद में ये तस्वीर सरकार की उस कड़ी कार्रवाई की पहचान बन गई, जिसमें हज़ारों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है.

    शुक्रवार को जब यूज़र्स ने बिंग पर 'टैंक मैन' सर्च किया, उन्होंने जवाब मिला कि 'टैंक मैन के लिए कोई रिज़ल्ट नहीं है'.

    इसके बाद इस तस्वीर को सर्च से ग़ायब करने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट की कइयों ने आलोचना की. इससे विरोध प्रदर्शन की बरसी पर संभावित सेंसरशिप के आरोपों को भी बल मिला है.

    लेकिन, शुक्रवार को इन विरोध प्रदर्शनों की 32वीं सालगिरह पर जब अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर के यूज़र्स ने बिंग पर इस तस्वीर को खोजने का प्रयास किया, तो ये मिली ही नहीं.

    चीन थियानमेन चौक पर हुई कार्रवाई पर ऑनलाइन होने वाली किसी भी चर्चा को सेंसर करता है.

    इस साल अधिकारियों द्वारा जुलूस पर पाबंदी लगाए जाने के बाद हॉन्ग कॉन्ग में इन विरोध प्रदर्शनों की याद में बड़े स्तर पर आयोजन नहीं किए जा सके.

    माना जाता है कि चीन अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सर्च इंजन पर दिखाई जाने वाली सामग्री को सेंसर करता है, लेकिन बाक़ी दुनिया में ये पाबंदियां बमुश्किल की लागू होती हैं.

    वहीं ह्यूमन राइट वाच के डायरेक्टर केनेथ रॉथ ने कहा है कि उनके लिए ये मानना बहुत मुश्किल है कि ऐसा ग़लती से हुआ है.

    इस मामले की पहली शिकायत आने के कई घंटों बाद बिंग में टैंक मैन की तस्वीरें फिर से दिखने लगी थीं.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना: दिल्ली में लॉकडाउन पर ढील, मेट्रो सेवा और बाज़ारों को मिली छूट

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि सात जून के बाद भी लॉकडाउन जारी रहेगा लेकिन साथ ही कई रियायतें भी दी जाएंगी.

    - दिल्ली मेट्रो की सेवाएं 50 फ़ीसदी क्षमता के साथ शुरू हो जाएंगी और मॉल, बाज़ार, हाट ऑड-ईवन व्यवस्था के आधार पर चालू होंगे. दुकानें सुबह 10 बजे से शाम आठ बजे तक खुल रह सकेंगी.

    - स्टैंडअलोन दुकानें रोज़ाना खुल सकेंगी.

    - दिल्ली में सरकारी दफ़्तरों में काम करने वाले ग्रुप ए के अधिकारी 100 फ़ीसदी क्षमता के साथ काम करेंगे और बाकी 50 फ़ीसदी क्षमता के साथ.

    - एसेंशियल सर्विसेज़ 100 फ़ीसदी क्षमता के साथ काम करना जारी रखेंगे. वहीं, निजी दफ़्तर भी अब 50 फ़ीसदी क्षमता के साथ खोले जा सकते हैं.

    अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में अब रोज़ाना 500 से भी कम मामले सामने आ रहे हैं और पॉज़िटिविटी दर घटकर 0.5 फ़ीसदी रह गई है.

    ऐसे में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए धीरे-धीरे लॉकडाउन की पाबंदियों में छूट दी जा रही है.

    इससे पहले केजरीवाल ने कंस्ट्रक्शन और फ़ैक्ट्री के कामों को चालू करने की छूट दी थी.

    उन्होंने कहा कि अगर संक्रमण के मामले नियंत्रण में रहे तो आने वाले दिनों में और सेवाएं शुरू की जा सकती हैं.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, वेंकैया नायडू के ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक वापस, हटने की वजह क्या थी?

    भारत के उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के निजी ट्विटर हैंडल पर ‘ब्लू टिक’ एक बार फिर दिखाई दे रहा है.

    शनिवार सुबह नायडू के निजी अकाउंट से ब्लू टिक हट गया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये मामला ट्रेंड करने लगा था.

    माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर प्लेफ़ॉर्म पर ‘ब्लू टिक’एक सत्यापित ट्विटर अकाउंट का प्रतीक होता है.

    ब्लू टिक हटने के बाद यह माना गया कि भारत सरकार और ट्विटर के बीच पिछले कुछ दिनों से आईटी क़ानूनों को लेकर जारी विवाद के दौरान ट्विटर ने कोई कार्रवाई की है.

    लेकिन ट्विटर के एक प्रवक्ता ने बताया कि “एम वेंकैया नायडू का निजी ट्विटर हैंडल जुलाई 2020 से निष्क्रिय था जिसकी वजह से ब्लू टिक अपने आप हट गया था. ट्विटर की यह नीति है कि अगर कोई अकाउंट काफ़ी समय तक सक्रिय ना रहे, तो कंपनी उस हैंडल से ब्लू टिक हटा देती है.”

    कंपनी ने बताया है कि उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के निजी हैंडल पर ब्लू टिक लौट आया है.

    अमेरिकी कंपनी ट्विटर के अनुसार, किसी यूज़र के अकाउंट को ब्लू टिक यह जताने के लिए दिया जाता है कि ये अकाउंट सत्यापित है ताकि लोगों के बीच उसे लेकर विश्वास पैदा हो सके.

    ऐसा देखा गया है कि ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक हासिल करने के लिए यूज़र्स में होड़ रहती हैं और लोगों को इसके लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ता है.

  4. नाइजीरिया ने ट्विटर को ‘अनिश्चित काल के लिए’ निलंबित किया

    नाइजीरिया के सूचना मंत्री लाई मोहम्मद ने घोषणा की है कि उनकी सरकार देश में ‘अनिश्चित काल के लिए’ ट्विटर का संचालन निलंबित कर रही है.

    सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि “ट्विटर का इस्तेमाल लगातार ऐसी गतिविधियों में होता रहा है जो नाइजीरिया के कॉरपोरेट अस्तित्व के लिए ख़तरा हैं.”

    ट्विटर ने नाइजीरिया की सरकार द्वारा की गई इस घोषणा को ‘बहुत चिंताजनक’ बताया है.

    कुछ दिन पहले ही ट्विटर ने नाइजीरिया के राष्ट्रपति मोहम्मदू बुहारी का एक ट्वीट अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया था.

    ट्विटर ने एक जून को 78 वर्षीय राष्ट्रपति बुहारी का एक ट्वीट ये कहते हुए हटा दिया था कि वो वेबसाइट के नियमों के ख़िलाफ़ था.

    बुहारी ने अपने ट्वीट में 1967-70 के नाइजीरियाई गृह युद्ध का ज़िक्र किया था और लिखा था कि "जो आज बुरा बर्ताव कर रहे हैं, उन्हें उसी भाषा से समझाया जाना चाहिए, जो वो समझते हैं."

    हालांकि, नाइजीरियाई सरकार के बयान में कहीं भी राष्ट्रपति के ट्वीट हटाये जाने की घटना का ज़िक्र नहीं है. लेकिन सूचना मंत्री ने अमेरिकी कंपनी ट्विटर की ये कहते हुए आलोचना की है कि कंपनी ‘दोहरे मापदण्ड’ अपनाती है.

    नाइजीरिया की सरकार ने अब तक ये नहीं बताया है कि ट्विटर पर लगा ये ‘अनिश्चितकालीन प्रतिबंध’ आख़िर लागू कैसे होगा और ना ही सरकार ने ट्विटर पर लगाये आरोपों के बारे में कुछ भी बताया कि कैसे नाइजीरिया के कॉरपोरेट अस्तित्व को इस अमेरिकी कंपनी से ख़तरा है.

    नाइजीरिया में एमनेस्टी इंटरनेशनल की निदेशक ओसाई ओजीघो ने सरकार के इस निर्णय की निंदा की है.

    उन्होंने कहा, “हम सरकार से तुरंत इस घोषणा को वापस लेने की अपील करते हैं. यह अनैतिक है. ये उन आवाज़ों को दबाने की एक कोशिश है जो सोशल मीडिया के ज़रिये बाहर आ पाती हैं.”

    जानकारों का कहना है कि नाइजीरिया की सरकार लंबे समय से सोशल मीडिया और मीडिया पर अपना नियंत्रण करना चाहती थी, लेकिन राष्ट्रपति का ट्वीट हटाने की घटना ने उन्हें स्पष्ट रूप से एक बड़ा अवसर दे दिया.

  5. कोरोना: 24 घंटे में 1 लाख से ज़्यादा मामले और 3,000 से ज़्यादा मौतें

    भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,20,529 नए मामले आए हैं और इस दौरान 3,380 लोगों की मौत हुई है.

    स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ पिछले 24 घंटे में 1,97,894 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी भी मिली है.

    आईसीएमआर के अनुसार इस दौरान 20,84,421 सैंपल्स का कोविड टेस्ट किया गया.

    इसी के साथ देश में कोविड-19 के कुल मामले 2,86,94,879 हो गए हैं जिनमें से 15,55,248 मामले एक्टिव हैं.

    बीमारी की चपेट में आकर अब तक कुल 3,44,082 लोगों ने अपनी जान गँवाई है और 2,67,95,549 लोग इलाज के बाद ठीक हो गए हैं.

    देश में अब तक कुल 22,78,60,317 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है.

  6. अमेरिकी कंपनी कर रही है यात्रियों के लिए सुपरसॉनिक विमान लाने की तैयारी

    अमेरिकी विमान कंपनी यूनाइटेड ने घोषणा की है कि वो साल 2029 में 15 नये सुपरसॉनिक विमान खरीदेगी और विमानन उद्योग को फिर से सुपरसॉनिक रफ़्तार देगी.

    सुपरसॉनिक यात्री उड़ानें साल 2003 में तब बंद हो गई थीं, जब एयर फ़्रांस और ब्रिटिश एयरवेज़ ने कॉनकोर्ड नामक विमान की सेवाएं बंद कर दी थीं.

    इस नये सुपरसॉनिक विमान - द ओवरट्यूर का उत्पादन डेनवर स्थित बूम नामक एक कंपनी करने वाली है, जिसने अभी तक इस विमान की टेस्ट उड़ान नहीं की है.

    यूनाइटेड कंपनी ने इन विमानों को खरीदने का सौदा इस शर्त पर किया है कि नया विमान सुरक्षा मापदण्डों पर पूरी तरह खरा उतरना चाहिए.

    सुपरसॉनिक फ़्लाइट क्या होती है?

    जब एक विमान आवाज़ की गति से तेज़ उड़े, तो उसे सुपरसॉनिक फ़्लाइट कहा जाता है.

    यानी 18,300 मीटर की ऊंचाई पर विमान 1060 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से उड़ पाये, तो उसे सुपरसॉनिक फ़्लाइट कहते हैं.

    एक सामान्य यात्री विमान जहाँ लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से उड़ता है, वहीं ओवरट्यूर से उम्मीद की जा रही है कि वो 1805 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से उड़ सकेगा.

    यानी उस रफ़्तार पर लंबी दूरी की उड़ानों, जैसे लंदन से न्यूयॉर्क तक के सफ़र का समय आधा हो जायेगा.

    इन विमानों को लेकर चिंता

    बूम कंपनी के मुताबिक़, द ओवरट्यूर विमान से लंदन तक से न्यूयॉर्क तक का सफ़र महज़ साढ़े तीन घंटे में कर सकेगा, जो अभी के समय से क़रीब तीन घंटा कम होगा.

    यात्री सेवा में कॉनकोर्ड सुपरसॉनिक विमान को साल 1976 में शामिल किया गया था.

    हालांकि इन विमानों को लेकर कुछ चिंताएं भी हमेशा से रही हैं, जैसे- ये आवाज़ बहुत करते हैं और प्रदूषण भी.

    जानकारों के अनुसार, आवाज़ से तेज़ इन सुपरसॉनिक विमानों की रफ़्तार हवा में एक ‘सॉनिक बूम’ पैदा करती है जिसे ज़मीन पर सुना जा सकता है. कई बार यह आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि ये बादलों के गड़गड़ाने और किसी धमाके से भी तेज़ सुनाई देती है.

    हालांकि, बूम कंपनी ने इसका भी समाधान सुझाया है. कंपनी का कहना है कि जब तक विमान समंदर के ऊपर ना पहुँच जाये, तब तक इसकी रफ़्तार को कम रखा जा सकता है, ताकि लोगों को इसकी आवाज़ से परेशानी ना हो.

    कंपनी का दावा है कि उनका सुपरसॉनिक विमान सामान्य विमानों के बराबर ही आवाज़ किया करेगा.

    पर सवाल ये है कि क्या सुपरसॉनिक उड़ानों की माँग है?

    कॉनकोर्ड सुपरसॉनिक विमान को एक लग्ज़री सुविधा समझा जाता था जिसका टिकट सामान्य उड़ानों के फ़र्स्ट क्लास से भी ज़्यादा महँगा था.

    कई जानकार मानते हैं कि मौजूदा समय में अगर विमान में सफ़र करने के लिए इतना महँगा टिकट लेना हो, तो अमीर लोग प्राइवेट जेट से सफ़र करना शायद ज़्यादा पसंद करें.

    हालांकि बूम कंपनी ने अपने एक शोध में पाया कि लोग रफ़्तार और तेज़ विमान चाहते हैं ताकि वो लंबी दूरियाँ जल्दी तय कर सकें जिससे उनके व्यापार को फ़ायदा हो.

  7. ब्रिटेन में एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहे हैं कोरोना संक्रमण के मामले

    ब्रिटेन के ऑफ़िस फ़ॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) ने कहा है कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या तकरीबन दो तिहाई बढ़ गई है.

    ब्रिटेन में आधिकारिक आंकड़ों का हिसाब-किताब करने वाली सबसे बड़ी स्वतंत्र संस्था ओएनएस का आकलन है कि 29 मई वाले सप्ताह में क़रीब एक लाख लोग कोरोना संक्रमित पाए गए, जो इससे पहले सप्ताह से 60,000 अधिक है.

    इसका मतलब है कि हर 660 लोगों में एक व्यक्ति कोरोना पॉज़िटिव पाया गया है.

    ओएनएस का कहना है कि ऐसा लगता है कि कोरोना मामलों में बढ़ोतरी का कारण कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट है जो सबसे पहले भारत में पाया गया था.

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में शुक्रवार को कोरोना के 6,278 नए मामलों की पुष्टि हुई है. इसमें से 954 लोग अस्पताल में भर्ती हैं जबकि 11 की मौत हुई है.

    ब्रिटेन में डेल्टा वेरिएंट की भरमार

    कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद पहले के सप्ताह के मुक़ाबले अस्पतालों में मरीज़ों की भर्ती और मौतों के आंकड़ों में थोड़ी कमी देखी गई है.

    ओएनएस का कहना है कि जिन इलाक़ों में कोरोना संक्रमण के अधिक मामले पाए जा रहे हैं. वहां अगर डेल्टा वेरिएंट की जांच की व्यवस्था की जाए तो वहां पहले से अधिक मामले मिल सकते हैं.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने हाल ही में कोरोना वायरस के वेरिएंट के नामकरण के लिए एक नए सिस्टम का ऐलान किया था.

    इसके तहत भारत, ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका समेत दूसरे देशों में पाये जाने वाले कोरोना वेरिएंट का नाम रखने के लिए ग्रीक भाषा के अक्षरों का इस्तेमाल किया जाना है.

    भारत में सबसे पहले पाये गए B.1.617.1 वैरिएंट को कप्पा और B.1.617.2 वेरिएंट को डेल्टा कहा जाएगा.

    साथ ही ब्रिटेन में पाये गए वेरिएंट को अल्फ़ा और दक्षिण अफ़्रीका में पाये गए वेरिएंट को बीटा नाम दिया गया है.

  8. बेलारूस: पत्रकार की गिरफ़्तारी के बाद यूरोपीय संघ ने लगाई नई पाबंदी

    यूरोपीय संघ ने बेलारूस से आने वाले सभी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने या अपने हवाई अड्डों तक पहुँचने पर रोक लगा दी है.

    इसके अलावा यूरोपीय एयरलाइंस को भी बेलारूस के हवाई क्षेत्र में न जाने की सलाह दी जा रही है.

    ईयू के सदस्य देश पिछले महीने बेलारूस की राजधानी मिंस्क में एक यात्री को जबरन लैंड कराने और विमान में सवार पत्रकार को गिरफ़्तार किए जाने से ख़फ़ा हैं.

    हालाँकि कुछ एयरलाइंस ने ईयू के इस फ़ैसले को हवाई यात्रा का ‘राजनीतिकरण’ बताकर इसकी आलोचना की है.

    पत्रकार के साथ क्या हुआ था?

    बेलारूस में सरकार विरोधी पत्रकार और एक्टिविस्ट रोमान प्रोतासेविच और उनकी रूसी गर्लफ़्रेंड सोफ़िया को 23 मई को ग्रीस से लिथुआनिया जाने वाली फ़्लाइट से गिरफ़्तार कर लिया गया था.

    पहले इस विमान में बम मिलने का दावा करके इसे डायवर्ट किया गया लेकिन फिर मिंस्क में लैंडिंग के बाद 26 वर्षीय प्रोतासेविच और उनकी गर्लफ़्रेंड को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

    शुक्रवार को प्रोतासेविच ने सरकारी टीवी चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में सरकार विरोधी प्रदर्शन आयोजित करने की बात कबूली थी. इंटरव्यू के दौरान रुआँसे हुए प्रोतासेविच ने राष्ट्रपति लुकाशेंको की तारीफ़ भी की थी.

    हालाँकि प्रोतासेविच के परिवार का दावा है कि उन पर ये बात कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया था.

    मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इंटरव्यू के दौरान उनकी कलाई पर चोट के निशान थे, जिससे लगता है कि उन्हें टॉर्चर किया गया था.

    प्रतिबंध से बेलारूस को कितना नुक़सान?

    बेलारूस के ख़िलाफ़ एयरलाइंस पर यूरोपीय संघ का यह बैन शुक्रवार स्थानीय समयानुसार रात 10 बजे से लागू हो गया है.

    इस प्रतिबंध के अनुसार ईयू के सदस्य देशों को बेलारूस के किसी भी विमान को अपने हवाई क्षेत्र में लैंड करने, टेक-ऑफ़ करने और उड़ान भरने से रोकना होगा.

    बेलारूस की सरकारी एयरलाइन बेलाविया, यूरोप में करीब 20 हवाई अड्डों से लोगों को लाती-ले जाती है. इनमें मिलान, बर्लिन, पैरिस, रोम और वियना एयरपोर्ट शामिल हैं.

    यूरोपीय एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल एजेंसी यूरोकंट्रोल के मुताबिक़ इस प्रतिबंध से बेलारूस के लगभग 400 नागरिक विमानों को रोज़ाना नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

  9. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना: अपने दावे पर अड़ा चीन, बोला- वुहान लैब में अब तक कोई संक्रमित नहीं

    अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने चीन से वुहान लैब के तीन शोधकर्ताओं समेत कुल नौ चीनी नागरिकों के मेडिकल रिकॉर्ड जारी करने को कहा है.

    ये तीन शोधकर्ता वो हैं, जिनके कोरोना महामारी की शुरुआत से पहले बीमार पड़ने का दावा अमेरिका की ख़ुफ़िया रिपोर्ट में किया गया है.

    इसके अलावा डॉक्टर फ़ाउची ने साल 2012 में चीन के युनान प्रांत में ताँबे की खदान में काम करने वाले उन छह मज़दूरों की मेडिकल रिपोर्ट भी माँगी है, जिनकी एक रहस्यमय बीमारी से मौत हो गई थी.

    शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की रोज़ाना होने वाली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कुछ पत्रकारों ने इससे जुड़े कई सवाल पूछे लेकिन उन्हें कोई सीधा जवाब नहीं मिला.

    लंदन से छपने वाले अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स के पत्रकार ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से तीन बार यह सवाल पूछा कि क्या चीन अपने उन नौ नागरिकों के मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा?

    जवाब में वेनबिन ने बार-बार वही बात कही जो चीन अब तक कहता आया है.

    वेनबिन कहा, “वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी ने इस साल 23 मार्च को एक बयान जारी किया था. बयान में कहा था कि लैब को 30 दिसंबर 2019 से पहले सार्स-CoV-2 के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.”

    उन्होंने कहा, “बयान में यह भी कहा गया था कि लैब का एक भी स्टाफ़ या छात्र अब तक कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ है. जहाँ तक बात इस रिकॉर्ड के सार्वजनिक करने की है तो इसे सिर्फ़ लैब के स्टाफ़ और शोधकर्ताओं तक ही रखा जाता है.”

    चीन ने की अमेरिकी लैब की जाँच की माँग

    चीनी प्रवक्ता ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की मार्च में आई उस रिपोर्ट का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस लैब से लीक है, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और इसकी ‘बहुत कम आशंका’ है.

    उन्होंने कहा, “टीम के विशेषज्ञों ने वुहान लैब का दौरा किया था और लंबी पड़ताल के बाद वो एकमत हुए थे कि वायरस की 'लैब लीक थ्योरी' में कोई दम नहीं है.”

    वांग वेनबिन ने उन रिपोर्ट्स का भी बार-बार ज़िक्र किया जिनमें दावा किया गया है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में साल 2019 में वुहान से पहले ही कोरोना वायरस महामारी के संकेत मिले थे.

    उन्होंने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय फ़ोर्ट डेट्रिक बायोलॉजिक लैब और विदेशों में स्थित 200 से ज़्यादा जैविक प्रयोगशालाओं को लेकर बहुत चिंतित है. मानवता के लिए, इस बारे में अमेरिका को बिना देरी किए अपना सही इरादा बताना चाहिए.”

    अमेरिका और ब्रिटेन की ख़ुफ़िया रिपोर्ट

    हाल में दुनिया भर में कोरोना वायरस की लैब लीक थ्योरी पर चर्चा बढ़ी है.

    कुछ दिनों पहले अमेरिका की एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नवंबर 2019 में कोरोना महामारी फैलने के कुछ समय पहले वुहान लैब के तीन शोधकर्ता बीमार पड़ गए थे और उनके लक्षण कोविड-19 से मिलते-जुलते थे.

    चीन ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह ‘झूठ’करार दिया था और कहा था कि वुहान लैब का कोई भी स्टाफ़ आज तक कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ है.

    रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ख़ुफ़िया टीमों को 90 दिनों के भीतर कोरोना वायरस के स्रोत को लेकर एक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था.

    अमेरिका के बाद ब्रिटेन की भी एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह संभव है कि कोरोना वायरस वुहान लैब से लीक हुआ हो.

    डॉक्टर एंथनी फ़ाउची के निजी ईमेल्स

    इसके बाद अमेरिका के मशहूर संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची के कुछ निजी मेल सामने आए, जिन्होंने लैब लीक थ्योरी को बल दिया.

    जनवरी 2020 में एक ईमेल जो डॉक्टर फ़ाउची को अमेरिका की सबसे बड़ी बायोमेडिकल रिसर्च टीम के डायरेक्टर ने भेजा था, उसमें कहा गया कि इस वायरस के कुछ फ़ीचर असामान्य हैं और ऐसा लगता है कि इसे तैयार किया गया है. इसके जवाब में डॉक्टर फ़ाउची ने लिखा कि वे फ़ोन पर उनसे इस बारे में बात करेंगे.

    अप्रैल 2020 में अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ के डायरेक्टर फ्रांसिस कॉलिन्स ने भी इसी बारे में डॉक्टर फ़ाउची को एक ईमेल लिखा. उनके ईमेल का विषय था: 'वुहान वाली षड्यंत्र की थ्योरी को बल मिल रहा है.'

    इस पर डॉक्टर फ़ाउची का जवाब उन्हें नहीं मिल पाया.

    इसी साल मई में, डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि वो इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि ये वायरस क़ुदरती तौर पर पैदा हुआ और उन्होंने कहा कि इसकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए.

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