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फ़ेसबुक ने ट्रंप के अकाउंट को दो सालों के लिए निलंबित किया
ट्रंप पर प्रतिबंध सात जनवरी से माना जाएगा और सात जनवरी 2023 तक रहेगा. ट्रंप के फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर इससे पहले जनवरी महीने में अनिश्चितकालीन पाबंदी लगाई गई थी.
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ब्रेकिंग न्यूज़, फ़ेसबुक ने ट्रंप के अकाउंट को दो सालों के लिए निलंबित किया

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फ़ेसबुक इंक ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट को दो सालों के लिए निलंबित कर दिया है. ट्रंप के फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर इससे पहले जनवरी महीने में अनिश्चितकालीन पाबंदी लगाई गई थी.
इसी साल जनवरी महीने में यूएस कैपिटल में दंगों के बाद उनके अकाउंट बंद किए गए थे. ट्रंप पर यूएस कैपिटल में दंगा भड़काने का आरोप था. लेकिन पिछले महीने फ़ेसबुक की निगरानी बोर्ड की बैठक हुई थी और इसमें ट्रंप के अकाउंट पर बेमियादी पाबंदी की आलोचना हुई थी.
यूएस कैपिटल में जनवरी में दंगों को लेकर फ़ेसबुक ने कहा था कि ट्रंप की हरकतों से नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ था. फ़ेसबुक उस नीति को भी ख़त्म करने जा रही है जिसके तहत नेताओं को कॉन्टेंट की निगरानी से छूट मिली थी. अब यह छूट नहीं मिलेगी.
फ़ेसबुक ने कहा है कि अब नेताओं की पोस्ट को भी कोई सुरक्षा कवच नहीं मिलेगी. ट्रंप पर प्रतिबंध सात जनवरी से माना जाएगा और सात जनवरी 2023 तक रहेगा.

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कश्मीर में 124 साल की महिला को दिया गया कोरोना का टीका

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इमेज कैप्शन, 124 वर्षीय रेहती बेग़म जम्मू और कश्मीर में हर दरवाज़े पर जाकर कोरोना की वैक्सीन दी जा रही है.
इसी अभियान के तहत गुरुवार को बारामूला में 124 वर्षीय एक महिला को कोविड वैक्सीन की पहली खुराक दी गई.
जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के कार्यालय ने एक ट्वीट कर बताया कि बारामूला की 124 वर्षीय रेहती बेग़म कोरोना वैक्सीन लेने वाली सबसे उम्रदराज़ महिला बन गई हैं.
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बारामूला के श्रकवारा स्थिक प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर के मेडिकल ऑफिसर तजामुल मलिक ने बताया कि "हम दो हफ्तों से डोर टू डोर वैक्सीनेशन कैम्पेन चला रहे हैं. हमने 124 साल की एक महिला को कोविड का टीका लगाया. खुदा के रहम से वे स्वस्थ हैं. लेकिन वैक्सीन देने के बाद हम उनकी खोज खबर लेने वहां गए. वे अच्छे से हैं."
रेहती बेगम पिछले बीस साल से अपने सबसे छोटे बेटे के साथ रह रही हैं.
कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को कानूनी छूट देने पर अभी कोई फैसला नहीं: केंद्र सरकार

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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि किसी विदेशी या भारतीय वैक्सीन निर्माता को 'हर्जाने से क्षतिपूर्ति से क़ानूनी संरक्षण' देने पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.
नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि ऐसे फैसले 'देश और लोगों के हित में लिए' जाते हैं.
डॉक्टर वीके पॉल का ये बयान भारतीय वैक्सीन निर्माताओं को 'हर्जाने से क्षतिपूर्ति से क़ानूनी संरक्षण' की पेशकश करने के सवाल पर आया है.
उन्होंने कहा कि इसका संदर्भ विदेशी कंपनियों से जुड़ा है, ख़ासकर फाइज़र से.... और सरकार इस अमेरिकी कंपनी और ऐसी ही मांग करने वाली अन्य कंपनियों से बातचीत कर रही है.
"सैद्धांतिक रूप से विदेशी वैक्सीन निर्माताओं को ये उम्मीद है कि उन्हें 'हर्जाने से क्षतिपूर्ति से क़ानूनी संरक्षण' दिया जाना चाहिए. उनकी दलील है कि दुनिया भर में उन्हें ये क़ानूनी संरक्षण दिया जा रहा है."
"हमने दूसरे देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन से इसकी पुष्टि करने के लिए कहा है. ये सच है कि उन्होंने इस तरह के कानूनी संरक्षण के बाद ही वैक्सीन की आपूर्ति की है. ये बात हकीकत लगती है. कुछ कंपनियों ने इसके लिए आग्रह किया है और हम उनके साथ बात कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है."
कहा जा रहा है कि स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने भी कोरोना वैक्सीन के मामले में सरकार से ऐसी ही छूट मांगी है. सीरम इंस्टिट्यूट का कहना है कि नियम सबके लिए समान होना चाहिए.
वैक्सीन कंपनियों को दी जा रही एंडेम्निटी क्या है, आपके लिए इसके क्या मायने हैं?

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कई दिनों से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि भारत सरकार वैश्विक दवा कंपनी फ़ाइज़र और मॉडेर्ना को वैक्सीन के निर्यात के लिए एंडेम्निटी दे सकती है.
इसका मतलब ये है कि अगर इन कंपनियों की वैक्सीन लगाने से किसी व्यक्ति पर दुष्प्रभाव होते हैं तो वो भारत में उन पर मुक़दमा नहीं कर सकेगा.
रिपोर्टों के मुताबिक फ़ाइज़र और मॉडेर्ना ने भारत के लिए अपनी वैक्सीन के निर्यात के लिए एंडेम्निटी की शर्त रखी है.
इस साल दिसंबर के अंत तक अपनी समूची बालिग आबादी का टीकाकरण करने की घोषणा करने वाला भारत इस समय वैक्सीन की भारी किल्लत का सामना कर रहा है.
ये लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को रोजाना औसतन 86 लाख लोगों को टीके लगाने होंगे.
इन्हीं हालात में भारत सरकार ने फ़ाइज़र और मॉडेर्ना की वैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी है. हालांकि अभी दोनों ही कंपनियों की वैक्सीन भारत नहीं पहुंची है.
कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक के मामले में अमेरिका से आगे निकला भारत: केंद्र सरकार

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कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक पा चुके लोगों की संख्या के मामले में भारत अमेरिका से आगे निकल गया है.
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ये जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में वैक्सीनेशन अभियान और तेज किया जाएगा.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि 60 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों में 43 फीसदी आबादी को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है.
साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि 45 साल से अधिक उम्र के लोगों में 37 फीसदी हिस्सा टीकाकरण अभियान के दायरे में आ चुका है.
गुरुवार के वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते गुए उन्होंने कहा कि भारत में 17.2 करोड़ लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है जबकि अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 16.9 करोड़ है.
वीके पॉल ने कहा, "इससे ये विश्वास मजबूत होता है कि हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और वैक्सीनेशन अभियान तेज किया जा रहा है."
योगी आदित्यनाथ का क्या बीजेपी-संघ के पास कोई विकल्प नहीं है?

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उत्तर प्रदेश में दो हफ़्ते की गर्मागर्म राजनीतिक हलचल के बाद फ़िलहाल माहौल कुछ शांत दिख रहा है लेकिन इस शांति की अवधि कितनी लंबी होगी, इसे लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं.
यूपी के नेताओं के साथ बैठकों के बाद बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने भले ही किसी बदलाव को अटकलबाज़ी बताया हो और 'सब कुछ ठीक-ठाक' होने का संदेश देने की कोशिश की हो लेकिन यह संदेश इसी रूप में न तो बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचा है और न ही आम लोगों के पास. यानी सरकार और संगठन के स्तर पर बदलाव की चर्चाएं जारी हैं.
राजनीतिक जगत में इस बात की भी चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेताओं को अब ऐसा फ़ैसला समझ में आ रहा है, जिसे अब बदलना और बनाए रखना, दोनों ही स्थितियों में घाटे का सौदा दिख रहा है. दूसरे, पिछले चार साल के दौरान बतौर मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ की जिस तरह की छवि उभर कर सामने आई है, उसके सामने चार साल पहले के उनके कई प्रतिद्वंद्वी काफ़ी पिछड़ चुके हैं.
पाकिस्तानः फेसबुक ने 'संदिग्ध गतिविधियों' के लिए एक बार फिर बंद किए दर्जनों एकाउंट

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दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने संदिग्ध खातों पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है.
इसके अनुसार फेसबुक ने पाकिस्तान से जुड़े 40 एकाउंट्स, 25 पेजे, 6 ग्रुप्स और 28 इंस्टाग्राम एकाउंट को संदिग्ध गतिविधियों के लिए बंद कर दिया है.
फेसबुक ने कहा कि ये संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे और इसमें 'निश्चित पैटर्न और ग़ैरवाजिब व्यवहार' शामिल था.
तीन जून को प्रकाशित इस रिपोर्ट में फेसबुक ने कहा कि हटाए गए सोशल एकाउंट्स से जुड़े लोग इस्लामाबाद और रावलपिंडी में स्थित एक जनसंपर्क कंपनी 'अल्फा प्रो' के थे.
फेसबुक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि उसके शोध से पता चला है कि "इनमें से कुछ सोशल एकाउंट्स उसी नेटवर्क के हैं जिसे फेसबुक ने अप्रैल 2019 में हटा दिया था" और जिस समय आरोप लगाया गया था, "ये पेज और अकाउंट 'अल्फा प्रो' के कर्मियों से जुड़े हुए पाए गए हैं."
फेसबुक 'कोऑर्डिनेटेड इन ऑथेंटिक बिहेवियर' ऐसे खातों के रूप में परिभाषित करता है जो एक व्यवस्थित तरीके से चलाए जाते हैं और एक रणनीति के हिस्से के रूप में अप्रमाणित व्यवहार को अपनाकर सार्वजनिक बहस की ओर ले जाते हैं.
भिखारी महिला की झुग्गी में मिले इतने रुपये, लोग दंग रह गए
वीडियो कैप्शन, भिखारी महिला की झुग्गी में मिले इतने रुपए, लोग दंग रह गए एक बूढ़ी भिखारी महिला के पास दो लाख रुपये मिलने से लोग दंग हैं. ये रुपये जम्मू कश्मीर में राजौरी ज़िले में महिला भिखारी की झुग्गी में मिले.
महिला कई दशकों से सड़कों पर भटकती रहती थी और भीख मांगती थी. महिला को वृद्धाश्रम शिफ़्ट करने की कोशिश के दौरान रुपयों का पता चला.
जब नगर समिति की टीम महिला की झुग्गी हटाने गई तभी उन्हें रुपयों से भरे डिब्बे और सिक्कों से भरे बैग मिले.
बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 4 जून 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ.
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बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 4 जून 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ.
कोरोना से ज़्यादा वैक्सीन से क्यों डर रही हैं ये महिलाएं?
वीडियो कैप्शन, कोरोना से ज़्यादा वैक्सीन से क्यों डर रही हैं ये महिलाएं? अपनी बात, अपने आसपास के बारे में अपनी राय रखने, अपनी ज़िंदगी और अपने सपनों के बारे में अपनी ज़बान से बताने के लिए महिलाओं के पास मौक़े हमेशा कम होते हैं.
माइक देखकर मर्दों की ही टोली सामने आ जाती है और औरतों की बात रह जाती है.
प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम के पास मेंडरा गांव की दलित बस्ती में जब बीबीसी की रूपा झा ने माइक औरतों के बीच पहुंचाया, तो वो क्या बोलीं?
कोरोना काल में दूसरों की मदद में जुटी महिला से मिलिए
वीडियो कैप्शन, कोरोना काल में मदद की मुहिम चला रही महिला जब ख़ुद को बचाना ही सबसे बड़ी जंग हो गई, जब कोरोना मरीज़ों से जुड़ी खबरें डराने लगीं, तब कई लोगों ने अजनबी लोगों के लिए रात दिन एक कर दिया.
ऐसी ही एक लड़की से मिलिए. दिल्ली में रहने वाली अनु शक्ति सिंह बीते कई महीनों से कोविड वॉलंटियर के तौर पर सक्रिय हैं. उन्होंने सैकड़ों लोगों की मदद की है.
इस सफ़र की शुरुआत उन्होंने अकेले ही की थी लेकिन अब उनके पास एक बड़ी टीम है.
अनु ने कैसे इस काम की शुरुआत की और उनके क्या अनुभव हैं, देखिए बीबीसी संवाददाता नेहा शर्मा की इस रिपोर्ट में.
हांगकांग में नौ करोड़ साठ लाख रुपये में बिकी कार पार्किंग की जगह

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हांगकांग में एक कार पार्किंग की जगह के 1.3 मिलियन डॉलर में बिकने की ख़बर है. भारतीय मुद्रा में ये रकम 9 करोड़ साठ लाख रुपये से भी ज्यादा है.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के पॉश रिहाइशी इलाके 'द पीक' में बिकी कई जगहों में से ये एक जगह है.
शहर के विक्टोरिया हार्बर क्षेत्र में एशिया के सबसे कीमती आशियानों में से कई घर हैं.
हांगकांग में इतनी सघन आबादी है कि वो चाहे पार्किंग की जगह हो या रहने की जगह, उसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.
विश्व व्यापार के केंद्रों में से एक हांगकांग रहने के लिहाज से दुनिया के सबसे महंगे शहरों में गिना जाता है.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ हांगकांग में पार्किंग स्लॉट बिकने का पिछला रिकॉर्ड साल 2019 का है. उस वक्त कार पार्किंग की एक जगह 980,000 डॉलर (भारतीय मुद्रा में सात करोड़ पंद्रह लाख रुपये के करीब) में बिकी थी.
पीएम मोदी के फ़ोन के बाद भी क्या मुकुल राय टीएमसी में लौट जाएंगे?

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क्या चुनाव से पहले टीएमसी से बीजेपी में गए ज़्यादातर नेता अब घर वापसी करने वाले हैं? अब तक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सोनाली गुहा समेत कम से चार नेता तो सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी से माफ़ी मांगते हुए दोबारा पार्टी की सेवा का मौका देने की अपील कर चुके हैं.
लेकिन टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया है कि बीजेपी के दस विधायक और तीन सांसद टीएमसी के संपर्क में हैं. ख़ासकर मुकुल राय की कथित नाराज़गी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उनको फ़ोन किए जाने के बाद बंगाल की राजनीति में कयासों का दौर अचानक तेज़ हो गया है.
इतिहास के खुद को दोहराने वाली कहावत तो पुरानी है. लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह इतिहास इतनी ज़ल्दी ख़ुद को दोहराएगा, इसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी. विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी से बीजेपी में जाने की होड़ मची थी. लगभग हर दिन कोई न कोई नेता बीजेपी में शामिल हो रहा था.
अमित शाह की रैली से लेकर चार्टर्ड विमान से दिल्ली जाकर बीजेपी मुख्यालय में लोग पार्टी की सदस्यता ले रहे थे. अब चुनावी नतीजों के बाद से ही ऐसे नेता वापसी की कोशिशों में हैं.
ब्रिटेन में बच्चों पर फाइज़र की कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी

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ब्रिटेन में दवाओं का नियमन करने वाली एजेंसी ने शुक्रवार को फाइज़र की कोरोना वैक्सीन को 12 साल से 15 साल के बच्चों पर इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है.
फाइज़र और बायोनटेक की इस वैक्सीन को बच्चों पर इस्तेमाल की मंजूरी अमेरिका और यूरोप पहले ही दे चुके हैं.
दवा नियामक एजेंसी ने कहा है कि अब ये ज्वॉयंट कमेटी ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्युनाइजेशन पर निर्भर करता है कि ब्रिटेन के टीकाकरण कार्यक्रम में वो इस उम्र के बच्चों को शामिल करते हैं या नहीं.
अमेरिका में 12 साल से 15 साल की उम्र के बच्चों को फाइज़र की वैक्सीन पहले से दी जा रही है. जबकि फ्रांस और जर्मनी इस उम्र के बच्चों को इस महीने से टीका देने की योजना पर काम कर रहे हैं.
गूगल ने कन्नड़ बोलने वालों से क्यों मांगी माफ़ी

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इमेज कैप्शन, गूगल गूगल पर 'सबसे भद्दी भारतीय भाषा' सर्च करने पर नतीजे में गुरुवार को भारतीय भाषा कन्नड़ दिख रही थी. इसके बाद कन्नड़ बोलने वालों ने सोशल मीडिया पर इस सर्च रिज़ल्ट के स्क्रीन शॉट्स के साथ 2000 साल से अधिक पुरानी इस भाषा का अपमान करने के लिए कंपनी की जम कर खिंचाई की.
यहाँ तक कि कर्नाटक सरकार ने गूगल को लीगल नोटिस भेजने की बात भी कही है.
हालांकि गूगल ने 'ग़लतफ़हमी और भावनाएं आहत करने के लिए' आधिकारिक रूप से माफ़ी मांगी है. साथ ही आलोचनाओं के बाद इस दिग्गज टेक कंपनी ने कहा कि उसने सर्च के नतीजों को सुधार दिया है.
गुरुवार को आम लोगों के अलावा दक्षिण भारत के कई नेताओं ने भी इस सर्च नतीजे की आलोचना की.
कर्नाटक के मंत्री अरविंद लिंबावली ने माफ़ी की मांग करते हुए कहा कि गूगल ने कन्नड़िगा (कन्नड़ बोलने वाले) के गौरव का अपमान करने का प्रयास किया है.
केरल के कोच्ची शहर में मॉनसून की बारिश
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केरल के कोच्ची शहर में मॉनसून की बारिश शुरू हो गई है.
फाइज़र की वैक्सीन लेने वालों में कोरोना के डेल्टा वर्जन के खिलाफ़ कम एंटीबॉडीज़ का निर्माणः लांसेट जर्नल

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लांसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में ये दावा किया गया है कि फाइज़र की वैक्सीन लेने वाले लोगों में मूल कोरोना वायरस की तुलना में उसके डेल्टा वर्जन के खिलाफ़ कम एंटीबॉडीज़ का निर्माण होता है.
कोरोना के डेल्टा वर्जन की पहचान सबसे पहले भारत में हुई थी. रिसर्च के मुताबिक़ फाइज़र की वैक्सीन लेने वालों में कोरोना के डेल्टा वर्जन के खिलाफ एंटीबॉडीज़ का स्तर पांच गुना तक कम हो सकता है.
स्टडी में ये भी कहा गया है कि कोरोना वायरस की पहचान करने और उससे लड़ने में सक्षम एंटीबॉडीज़ का ये स्तर बढ़ती उम्र के साथ लोगों में कम होने लगता है और ये गुजरते वक्त के साथ खत्म हो जाता है. जिन लोगों के संक्रमित होने का जोखिम अधिक है, उन्हें बूस्टर डोज़ दिए जाने के पक्ष में इसे अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है.
इस नई जानकारी से ब्रिटेन की उस योजना को समर्थन मिला है जिसके तहत फाइज़र की वैक्सीन की दो खुराकों के बीच समय अंतराल कम करने पर विचार किया जा रहा है.
स्टडी के अनुसार फाइज़र वैक्सीन की पहली खुराक के बाद कोरोना के B.1.617.2 वर्जन के लिए एंटीबॉडीज़ के कम मात्रा में बनने के आसार होता हैं जबकि B.1.1.7 (अल्फा) वैरिएंट के खिलाफ़ ज्यादा एंटीबॉडीज़ बनती है.
ब्रिटेन की फ्रैंसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल एंटीबॉडीज़ के स्तर से वैक्सीन के असर के बारे में पक्के तौर पर कोई दावा नहीं किया जा सकता है, इसके लिए सुनिश्चित आबादी समूहों पर स्टडी करने की ज़रूरत होती है.
चीन: थियानमेन स्क्वेयर गोलीकांड की बरसी पर हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी

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इमेज कैप्शन, चाउ हांग तुंग को गिरफ्तार करती हांगकांग पुलिस थियानमेन स्क्वेयर गोलीकांड की 32वीं बरसी पर हांगकांग पुलिस ने लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता चाउ हांग तुंग को गिरफ्तार कर लिया है.
चाउ हांग तुंग लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर चीन की दमनात्मक कार्रवाई में मारे गए लोगों की याद में सालाना कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था हांगकांग अलायंस की उपाध्यक्ष हैं.
उन पर ग़ैरकानूनी तौर पर सभा आयोजित करने का आरोप लगाया गया है.
कोरोना महामारी की वजह से लगाई गई पाबंदियों के मद्देनज़र हांगकांग में किसी तरह का जुलूस निकालने पर पिछले साल से ही रोक है.
हांगकांग और मकाउ चीन के भूभाग का वो हिस्सा हैं, जहां लोग थियानमेन स्क्वेयर पर हुई हिंसा में मारे गए लोगों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

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इमेज कैप्शन, चाउ हांग तुंग इस बार हांगकांग की तरह मकाउ में भी जुलूस निकालने पर पांबदी है लेकिन वहां ये दलील दी गई है कि ऐसा करना स्थानीय क़ानूनों का उल्लंघन होगा.
हालांकि इस सब के बावजूद चाउ हांग तुंग ने लोगों से अपने तरीके से थियानमेन स्क्वेयर गोलीकांड की बरसी मनाने की अपील कर रही थीं.
अपनी गिरफ्तारी से एक दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया था, "आप जहां कहीं भी हों, रोशनी जलाएं. चाहे वो आपका फोन हो, मोमबत्ती हो या बिजली से चलने वाले कैंडल."
रिपोर्टों के अनुसार चाउ हांग तुंग को सादी वर्दी में अधिकारियों ने उनके दफ्तर के बाहर सुबह में गिरफ्तार किया.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार उन्हें काले रंग की कार में ले जाया गया था.
वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता चाउ हांग तुंग ने गिरफ्तारी से पहले बीबीसी को बताया था कि वो इस होनी के लिए तैयार थीं.
