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कोरोना: सिर्फ मई में 88 लाख संक्रमित हुए और एक लाख से ज्यादा लोग मरे

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान केवल मई के महीने में कोरोना संक्रमण के 88.82 लाख मामले रिपोर्ट हुए हैं. अब तक देश में संक्रमण के दर्ज हुए 2.8 करोड़ मामलों का ये 31.67 फीसदी है.

लाइव कवरेज

  1. कोरोना: सिर्फ मई में 88 लाख संक्रमित हुए और एक लाख से ज्यादा लोग मरे

    भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान केवल मई के महीने में कोरोना संक्रमण के 88.82 लाख मामले रिपोर्ट हुए हैं. अब तक देश में संक्रमण के दर्ज हुए 2.8 करोड़ मामलों का ये 31.67 फीसदी है.

    ये कहा जा सकता है कि महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला महीना रहा.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सिर्फ़ मई में कोरोना के कारण 117,247 लोगों की जान गई. अब तक देश में इस महामारी ने 329,100 लोगों की जान ली है. मई में मरने वाले लोगों की संख्या कुल आंकड़ों का 35.63 फीसदी है.

    सात मई को महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले रिपोर्ट रिपोर्ट हुए. उस दिन 414,188 केस दर्ज किए गए. 19 मई को कोरोना के कारण रिकॉर्ड संख्या में 4529 लोगों की मौत रिपोर्ट हुई.

    हालांकि 17 मई के बाद से रोज़ रिपोर्ट होने वाले मामले तीन लाख से कम रहे हैं और चार दिनों से हर रोज दो लाख से कम मामले रिपोर्ट हो रहे हैं. 10 मई को देश में संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या अपने उच्चतम स्तर 3745237 पर पहुंच गई थी.

    सोमवार सुबह आठ बजे जारी किए गए स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में 152,734 मामले रिपोर्ट हुए. ये पिछले 50 दिनों की सबसे कम संख्या थी. फिलहाल सक्रिय मामलों की संख्या कम होकर 2026092 हो गई है.

  2. जीडीपी में गिरावट अनुमान से कम, क्या मोदी सरकार को ख़ुश होना चाहिए?

    सांस रोककर जिसका इंतज़ार हो रहा था, वो ख़बर आ ही गई. पिछले साल भारत की जीडीपी में गिरावट आशंका से कम रही है और साल की चौथी तिमाही में जितने सुधार का अनुमान लगाया गया था, उससे कुछ बेहतर आंकड़ा सामने आया है.

    लेकिन यह जीडीपी के मोर्चे पर पिछले 40 साल से भी ज़्यादा वक़्त का सबसे ख़राब प्रदर्शन है.

    फिर भी आंकड़ों पर नज़र रखने वाले अर्थनीति के जानकार कुछ चैन की सांस ले रहे हैं.

    वजह यह है कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जहां क़रीब 8 फ़ीसदी गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा था. वहीं यह आंकड़ा 7.3 प्रतिशत पर ही थम गया है. और उस साल की चौथी तिमाही में यानी जनवरी से मार्च के बीच जहां 1.3% बढ़त का अंदाज़ा था वहां 1.6% बढ़त दर्ज हुई है.

    साल की पहली दो तिमाहियों में ज़बर्दस्त गिरावट के बाद तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत की जीडीपी में मामूली बढ़त दर्ज हुई थी.

    0.4% की यह बढ़त उत्साहजनक तो नहीं थी लेकिन इतना संतोष ज़रूर देती थी कि लगातार तीसरी तिमाही मंदी में नहीं बीती. अब संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा 0.5% हो गया है. यानी कुछ और बेहतर. और यही भारत की अर्थव्यवस्था के मंदी से उबरने का औपचारिक संकेत भी था.

  3. कोरोना: बच्चों को हो रही नई बीमारी MIS-C क्या है?

    दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नलों में से एक 'द लैंसेट' के अनुसार, बच्चों में होने वाला 'मल्टीसिस्टम इनफ़्लामेट्री सिंड्रोम' यानी एमआईएस-सी एक ऐसा गंभीर रोग है जिसे फ़िलहाल कोविड-19 (सार्स-कोविड-2) से जोड़कर देखा जा रहा है.

    पेशे से अध्यापक सूरज का पूरा परिवार अमन के बीमार पड़ने से पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ था. मई के दूसरे सप्ताह में ही पूरे परिवार ने इलाज के बाद अपना आइसोलेशन पूरा किया और सभी कोविड की जाँच में नेगेटिव आ गये.

    कोरोना संक्रमण के दौरान परिवार के बाकी सदस्यों से अलग, अमन को आँखों में इनफ़ेक्शन के अलावा कोई और गंभीर लक्षण नहीं था. अमन की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव थी, लेकिन एंटीबॉडी टेस्ट में अमन के शरीर में पर्याप्त मात्रा में कोविड की एंटीबॉडी मिली थीं.

    अमन का इलाज कर रहे नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अजीत कुमार ने बताया कि "अमन का ईसीजी ख़राब था. उनकी ईको (हृदय की जाँच) रिपोर्ट भी ठीक नहीं थी. कुछ अन्य हेल्थ मार्कर भी हिले हुए थे जिनका इस उम्र में अचानक गड़बड़ाना असामान्य बात है."

  4. कोरोना के दौर में क्यों ज़्यादा ख़तरे में हैं धूम्रपान करने वाले?

    धूम्रपान करने वालों में कोरोना के घातक परिणामों का ख़तरा 40 से 50 फ़ीसदी तक अधिक है.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’ पर यह जानकारी दी है.

    उन्होंने कहा कि तंबाकू का सेवन करने वालों और ख़ासकर धूम्रपान करने वालों पर कोरोना से मौत का ख़तरा भी अधिक है.

  5. कोरोना का असर, अर्थव्यवस्था 2020-21 में 7.3 फीसदी की दर से सिकुड़ी

    साल 2020-21 की आखिरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 1.6 फीसदी की दर से बढ़ी.

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ पूरे वित्तीय वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था 7.3 फीसदी की दर से संकुचित हो गई. ये आंकड़े तीसरी तिमाही के आंकड़ों से 0.5 फीसदी ज्यादा हैं.

    नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2019-20 में अर्थव्यवस्था चार फीसदी की दर बढ़ी जबकि 2020-21 में ये 7.3 फीसदी की दर से सिकुड़ गई.

    ये कोरोना महामारी का अर्थव्यवस्था पर असर दिखलाता है.

    इस साल जनवरी में एनएसओ ने ये अनुमान लगाया कि साल 2020-21 में अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की दर से कम होगी.

    हालांकि इसके बाद एनएसओ ने एक बार संशोधित अनुमान सामने रखे जिसमें अर्थव्यवस्था के 8 फीसदी की दर से संकुचित होने का अनुमान लगाया गया था.

  6. बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन दिनभर, सुनिए संदीप सोनी के साथ.

  7. कोरोना से ठीक होने के बाद, क्या वैक्सीन की एक डोज़ ही काफ़ी?

    वैक्सीन की क़िल्लत की ख़बरों के बीच अगर ऐसी खब़र आ जाए जिसमें सिंगल डोज़ से काम चलने की बात हो, तो ज़ाहिर है सब बड़े ध्यान से और दिलचस्पी से उस पढ़ेंगे. ऐसी ही एक ख़बर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से आई है.

    उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरों ने शोध में पाया है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों में वैक्सीन की एक डोज़ ही पर्याप्त है.

    अपने शोध के नतीजों के बारे में बीएचयू के प्रोफ़ेसरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है. उन्होंने अपने शोध के नतीजों के आधार पर सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो गए हैं उन्हें वैक्सीन की एक ही डोज़ लगाई जाए.

    उनका तर्क है कि ऐसा करने से 2 करोड़ वैक्सीन की डोज़ बचाई जा सकती है. ग़ौरतलब है कि भारत में कोरोना संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या 2 करोड़ से ज़्यादा है. भारत में वैक्सीन की क़िल्लत की ख़बरों के बीच इस ख़बर ने काफ़ी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

  8. जर्मन चांसलर की जासूसी में डेनमार्क ने की थी अमेरिका की मदद

    जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल समेत यूरोप के राजनेताओं की जासूसी में डेनमार्क की सीक्रेट सर्विस ने अमेरिका की मदद की थी.

    डैनिश मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक़ ये मामला साल 2012 से 2014 के बीच का है. डेनमार्क के पब्लिक सर्विस ब्रोडकास्टर डीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि डिफेंस इंटेलीजेंस सर्विस ने अमेरिकी की नेश्नल सिक्योरिटी एजेंसी के साथ मिलकर सूचनाएं जुटाईं.

    कथित तौर पर ये खुफिया जानकारी जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और नॉर्वे के अधिकारियों के बारे जुटाई गई थी.

    इसके बाद अमेरिकी व्हिसल ब्लोअर एडवर्स स्नोडेन ने जो जानकारियां सार्वजनिक कीं, उससे ये पता चला कि जर्मन चांसलर का फोन कथित तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए टेप कर रही थी.

    जब ये आरोप लगाए गए तो व्हाइट हाउस ने इसका सीधे तौर पर खंडन नहीं किया था बल्कि ये कहा कि जर्मन चांसलर का फोन उस वक्त टेप नहीं किया गया था और ना ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा.

    जर्मनी अमेरिका का करीबी सहयोगी है.

    जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वॉल्टर स्टीनमिएर और एंगेला मर्केल के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें डेनमार्क की सरकारी मीडिया में इसकी रिपोर्ट पब्लिश होने तक डैनिश सरकार के इसमें शामिल होने की जानकारी नहीं थी.

  9. सरसों का तेल इतना महंगा क्यों हो गया?

    इस समय सरसों के तेल के दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं. बाज़ार में एक लीटर तेल के दाम 175 रुपए तक पहुंच गए हैं, वहीं शुद्ध कच्ची घानी सरसों का तेल तो दो सौ रुपए किलो तक बिक रहा है.

    भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक़ अप्रैल 2020 में भारत में एक किलो सरसों के तेल की औसतन क़ीमत 117.95 रुपए थी जबकि नवंबर 2020 में यही दाम 132.66 रुपए प्रति किलो था.

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक़ मई 2021 में भारत में सरसों के तेल की औसतन क़ीमत 163.5 रुपए प्रति किलो थी.

  10. चीन में फिर बढ़े कोरोना के मामले, ब्रिटने में तीसरी लहर का डर

    चीन में कोरोना संक्रमण के मामले सोमवार को अचानक तेजी से बढ़ते हुए दिखे. देश के दक्षिणी इलाके के शहर ग्वांझो में 30 मई को 18 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं.

    इसकी वजह से शहर को जाने वाली कई उड़ान सेवाएं रद्द कर दी गई हैं. चीन की नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने जिन 27 नए मामलों के रिपोर्ट होने की बात कही है, उनमें केवल सात ऐसे मामले हैं जो बाहर से आए हैं.

    हेल्थ अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि 30 मई को संक्रमण के जिन 20 स्थानीय मामलों की रिपोर्ट हुई है, उनमें 18 ग्वांझो शहर के हैं और दो फोशान के.

    इसकी वजह से ग्वांझो बायुन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 519 फ्लाइट्स को रद्द कर दिया गया है. विमानन क्षेत्र के आंकड़ों के मुताबिक़ ग्वांझो के कुल एयर ट्रैफिक का ये 37 फीसदी हिस्सा है.

    इस बीच ब्रिटेन में सरकार को सलाह देने वाले एक वैज्ञानिक ने कहा है कि देश में महामारी की तीसरी लहर के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं.

    यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंब्रिज के प्रोफेसर रवि गुप्ता ने कहा है कि संक्रमण के नए मामले फिलहाल कम हैं लेकिन भारतीय वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है.

  11. आज का कार्टून: तैयारी पूरी है!

    दिसंबर तक सभी को वैक्सीन लगा देने के केंद्र सरकार के बयान पर आज का कार्टून.

  12. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वैक्सीन: केरल के सीएम पी विजयन ने ग़ैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखी चिट्ठी, इमरान क़ुरैशी, बीबीसी हिंदी के लिए

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ग़ैर-भाजपा शासित 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि केंद्र सरकार राज्यों के लिए वैक्सीन खरीदने की अपनी जिम्मेदारी से बच रही है.

    उनका कहना है कि ये सहकारी संघवाद की अवधारणा के ख़िलाफ़ है और इससे राज्यों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

    अपनी चिट्ठी में पी विजयन ने अपील की है कि अपनी वाजिब मांग के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना समय की मांग है ताकि केंद्र सरकार जल्द कार्रवाई करे.

    उन्होंने गैर-भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों को लिखा है कि राज्यों की ज़रूरत के मुताबिक़ वैक्सीन खरीदने और उसके निशुल्क वितरण के लिए केंद्र को मिलजुल कर कहने की ज़रूरत है. ऐसा करने से लागत के दृष्टिकोण से भी फायदा होगा.

    उन्होंने कहा है, "ऐसे वक्त में जब राज्य महामारी की दूसरी लहर से गुजर रहे हैं, ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें वैक्सीन पर्याप्त खुराक मुहैया कराने की अपनी जिम्मेदारी से केंद्र सरकार बचने की कोशिश करती दिख रही है."

    "अगर वैक्सीन का इंतजाम करने की पूरी जिम्मेदारी या काफी हद तक इसका जिम्मा राज्यों पर छोड़ दिया जाता है तो उनकी आर्थिक स्थिति मुश्किल में पड़ जाएगी. राज्यों की वित्तीय क्षमता एक स्वस्थ संघीय ढांचे का अनिवार्य हिस्सा है."

    "अगर राज्यों के वित्तीय संसाधन अशक्त पड़ जाएंगे तो संघीय ढांचा अपने आप कमज़ोर पड़ जाएगा. और ये हमारे जैसी लोकतांत्रिक राजनीति वाली व्यवस्था के लिए अच्छी बात नहीं होगी. इसके अलावा हर्ड इम्यूनिटी के जल्द निर्माण की कोशिशों में भी इससे बाधा पहुंचेगी."

    उन्होने लिखा है, "केंद्र सरकार ने ये स्टैंड लिया है कि राज्य सरकारों कोविड वैक्सीन का इंतजाम अपने संसाधनों से करना होगा. वैक्सीन की आपूर्ति इसकी मांग की तुलना में कम है. और ये हम सभी जानते हैं कि कोरोना महामारी के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी विकसित करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि सबको वैक्सीन दी जाए."

    पिनराई विजयन ने ये चिट्ठी तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों को लिखी है.

    इसी मुद्दे पर वे पहले ही एक चिट्ठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले हफ्ते लिख चुके हैं. हालांकि उनकी चिट्ठी पर केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, जिसके बाद उन्होंने ग़ैरभाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ये चिट्ठी लिखी है.

  13. चीन-अमेरिका के बीच कोरोना पर फिर तक़रार

    कोरोना वायरस महामारी पर बिलकुल जुदा राय रखने के साथ-साथ अमरीका और चीन के बीच व्यापार को लेकर भी ज़बरदस्त तनाव चल रहा है.

    पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मानवाधिकारों और तकनीकी को लेकर बेहद तल्ख़ रिश्ते रहे.

    लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन का भी चीन के प्रति वही सख़्त रवैया जारी है. तो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते कैसे रह सकते हैं. बीबीसी संवाददाता ज़िएन फ़ेंग की रिपोर्ट.

  14. इसराइल को सालों से चकमा दे रहे हैं एक आँख वाले हमास प्रमुख

    इसी महीने फ़लस्तीनी लड़ाकों की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से इसराइल को चेतावनी दी गई.

    ऑडियो में कहा गया है कि अगर हमास की मांगे पूरी नहीं की गईं, तो इसराइल को इसकी 'बड़ी क़ीमत' चुकानी पड़ेगी.

    हमास ग़ज़ा पट्टी पर शासन करने वाला एक चरमपंथी संगठन है और ये आवाज़ मोहम्मद ज़ाएफ़ की थी, जो हमास के सैन्य विंग के प्रमुख हैं. वो इसराइल के मोस्ट वॉन्डेट लिस्ट में हैं और उन्होंने सात सालों के बाद चुप्पी तोड़ी है.

    लेकिन उनकी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया गया. इसराइल और ग़ज़ा के बीच युद्धविराम से पहले 11 दिनों तक लड़ाई चली.

  15. कोरोना की दूसरी लहर में कंपनी जगत की उम्मीदें कमज़ोर हुईं: फिक्की सर्वे

    कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच भारत के कंपनी जगत की उम्मीदों में तेजी से गिरावट देखी गई है.

    फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चेंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के ताजा सर्वे में कहा गया है कि बिज़नेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स गिरकर 51.5 पर पहुंच गया है जबकि इससे पहले के सर्वे में ये दशक के सबसे उच्च स्तर 74.2 पर था.

    सर्वे में कहा गया है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण हालात जिस तरह से बिगड़ रहे हैं, उससे आने वाले समय की संभावनाओं पर पानी फिरता हुआ दिख रहा है.

    यही कारण है कि बिज़नेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स में 20 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है. ताजा सर्वे में मांग की कमज़ोर स्थिति का हवाला देने वाले प्रतिभागियों की संख्या पिछले सर्वे की तुलना में बढ़ी है.

    सर्वे में 70 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि डिमांड में कमी परेशान करने वाली बात है. पिछले सर्वे में ऐसी शिकायत करने वाले 56 फीसदी लोग ही थे.

    सर्वे के मुताबिक आम लोगों की कमाई पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है. कोरोना की पहली लहर में लोगों की पुरानी बचत खत्म हो चुकी है. लंबे समय तक मांग की स्थिति कमज़ोर बने रहने की संभावना है.

    महामारी की मौजूदा लहर से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है. कोरोना के कारण कई लोगों की नौकरियां गई है और कई लोगों की जानें, ऐसे में बहुत से परिवारों की आमदनी हमेशा के लिए रुक गई है.

    फिक्की के मुताबिक इन हालात में मांग की स्थिति को उठाने के लिए जो कदम उठाए जाएंगे, वो अर्थव्यवस्था के लिए अहम होंगे.

    इसके अलावा हालात को सामान्य बनाने की दिशा में टीकाकरण की रफ्तार भी काफी तेज करनी होगी. हालांकि सर्वे में भाग लेने वाली कंपनियों का कहना है कि मांग की कमी के बावजूद वे अपनी क्षमता के इस्तेमाल में सुधार कर पाए हैं.

  16. ब्रेकिंग न्यूज़, पाकिस्तान की जेल से चार साल की कैद के बाद रिहा हुए प्रशांत

    पाकिस्तानी जेल में पिछले चार साल से कैद प्रशांत वैंदम को रिहा कर दिया गया है.

    पाकिस्तान रेंजर्स के जवानों ने प्रशांत को अटारी-वाघा बोर्डर पर सोमवार को सीमा सुरक्षा बल के हवाले किया.

    भारत के हैदराबाद शहर के रहने वाले प्रशांत पर साल 2017 में अवैध रूप से पाकिस्तान में दाखिल होने का आरोप था.

    बीबीसी के सहयोगी पत्रकार रवींदर सिंह रॉबिन ने बताया कि प्रशांत अपनी महिला मित्र से मिलने के लिए पाकिस्तान के रास्ते स्विटज़रलैंड जाना चाहते थे.

    पाकिस्तानी मीडिया में प्रशांत की गिरफ़्तारी की ख़बर छपने के बाद भारत ने पाकिस्तान से संपर्क किया था और उन्हें काउंसल एक्सेस दिए जाने की मांग की थी.

    प्रशांत को पाकिस्तान के पंजाब सूबे के बहावलपुर शहर में गिरफ्तार किया गया था.

    उनेक पास पाकिस्तान में रहने के लिए ज़रूरी वैध दस्तावेज़ नहीं थे.

  17. कोरोना में सेक्स वर्कर्स के लिए उम्मीद की किरण

    सेक्स वर्कर्स और ट्रांसजेंडरों को कोरोना वैक्सीन देने के लिए हरियाणा के गुरुग्राम में विशेष टीकाकरण केंद्र की शुरुआत की गई है.

    यह वैक्सीन सेंटर गुड़गांव के डुंडाहेड़ा इलाके में है. ज़िला प्रशासन की ओर से शुरू किए गए इस सेंटर में मुफ़्त वैक्सीन दी जा रही है.

    गुरुग्राम के सिविल सर्जन वीरेंद्र यादव ने इस सेंटर का उद्घाटन किया.

  18. कोविड वैक्सीन की अलग-अलग कीमतें क्यों, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन की खरीदारी पर केंद्र सरकार की दोहरी नीति को लेकर सोमवार को सवाल उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूरे देश के लिए वैक्सीन की एक कीमत करने की ज़रूरत है.

    जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस रवींद्र भट की बेंच ने कहा कि पूरे देश के लिए कोविड वैक्सीन की एक समान मूल्य नीति अपनाई जानी चाहिए.

    कोर्ट ने कहा, "केंद्र का कहना है कि एकमुश्त खरीदारी करने की वजह से उसे कम कीमत में वैक्सीन मिल रही है. अगर ये वाजिब दलील है तो राज्य सरकारों को ऊंची कीमत में वैक्सीन क्यों खरीदनी पड़ रही है? पूरे देश के लिए वैक्सीन की एक समान कीमत तय किए जाने की ज़रूरत है."

    कोर्ट ने सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि "केंद्र सरकार ने केवल 45 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन देने की जिम्मेदारी ली है जबकि 45 साल से कम उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन का इंतजाम करने के लिए राज्यों को कहा है. आप इसे कैसे वाजिब ठहराएंगे."

    सुप्रीम कोर्ट ने कोविन ऐप पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की शर्त को लेकर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा, "आप के पास डिजिटल डिवाइड को लेकर क्या जवाब है. आप कैसे सुनिश्चित करेंगे कि एक प्रवासी मजदूर को वैक्सीन मिले."

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया, "अगर किसी ग्रामीण व्यक्ति के पास मोबाइल फोन नहीं हुआ तो वो वैक्सीन सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकता है. कोविन पोर्टल पर चार लोगों का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है और ग्राम पंचायतों के पास इंटरनेट की सुविधा है. जिन लोगों के पास इंटरनेट नहीं है, वे दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद ले सकते हैं."

    "ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फैसला इसलिए लिया गया था क्योंकि वैक्सीन की असीमित उपलब्धता नहीं है. अगर लोगों को लाइन लगाकर वैक्सीन लेने की इजाजत दी जाती तो भीड़ बढ़ जाती. लेकिन वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर अब इसकी इजाजत भी दे दी गई है."

  19. इसराइल में नेतन्याहू दौर ख़ात्मे की ओर, ग़ज़ा का वास्ता दे सरकार बचाने की कोशिश

    इसराइल में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. वहाँ एक नई गठबंधन सरकार बनने की संभावना और मज़बूत हो गई है जिसके बाद नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि ऐसा हुआ तो यह 'देश की सुरक्षा के लिए ख़तरनाक' होगा.

    उन्होंने यह चेतावनी एक महत्वपूर्ण दक्षिणपंथी नेता नेफ़्टाली बेनेट के प्रस्तावित गठबंधन में शामिल होने के एलान के बाद दी है.

    बेनेट को किंगमेकर माना जाता है. उनकी यामिना पार्टी के गठबंधन में शामिल होने से नेतन्याहू की 12 साल से जारी सत्ता का अंत हो सकता है.

    71 वर्षीय नेतन्याहू इसराइल में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता हैं और इसराइल की राजनीति में एक पूरे दौर में उनका दबदबा रहा है.

    मगर रिश्वत खोरी और धाँधली के आरोपों का सामना कर रहे नेतन्याहू की लिकुड पार्टी मार्च में हुए आम चुनाव में बहुमत नहीं जुटा पाई और चुनाव के बाद भी वो सहयोगियों का समर्थन नहीं हासिल कर सके.

  20. ट्विटर को नए आईटी नियम मानने ही होंगे: दिल्ली हाई कोर्ट

    दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि डिजिटल मीडिया के बनाए गए इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी नियमों पर अगर स्टे ऑर्डर नहीं दिया गया है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को इसे मानना ही होगा.

    जस्टिस रेखा पल्ली ने एडवोकेट अमित आचार्य की याचिका पर इस सिलसिले में केंद्र सरकार और ट्विटर को अपना पक्ष रखने के लिए कहा. याचिकाकर्ता का दावा है कि ट्विटर ने इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी नियमों पर अमल नहीं किया है.

    दूसरी तरफ़, ट्विटर ने कोर्ट के सामने ये दावा किया कि उसने नए नियमों पर अमल किया है और इसके तहत एक रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर भी नियुक्त किया गया है जबकि केंद्र सरकार ने ट्विटर के दावे को गलत बताया है.

    कोर्ट ने कहा, "अगर नियमों पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया गया है तो उन्हें इसे मानना ही होगा."

    याचिकाकर्ता का कहना है कि जब कुछ ट्वीट्स के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश करने पर उन्हें इसके बारे में पता चला कि ट्विटर ने नए नियमों को कथित तौर पर अमल नहीं किया है.

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील रिपुदमन सिंह भारद्वाज ने कोर्ट को बताया कि ट्विटर ने इन पर अमल नहीं किया है.

    एडवोकेट अमित आचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि नए आईटी नियम 25 फरवरी से ही प्रभावी हैं और केंद्र सरकार ने इन पर अमल करने के लिए ट्विटर समेत हरेक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तीन महीने का समय दिया था.

    उनकी दलील थी कि तीन महीने की ये मोहलत 25 मई को खत्म हो गई जबकि ट्विटर ने अभी तक किसी रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की है जो उसके प्लेटफॉर्म पर ट्वीट्स को लेकर की जाने वाली शिकायतों को देखे.