अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बाइडन प्रशासन ने गुरुवार को रूस को इस बात का जानकारी दे दी है कि वो फिर से 1992 में हुए ओपन स्काईज़ करार का हिस्सा नहीं बनेगा.
ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब जून की 16 तारीख़ को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच स्विट्ज़रलैंड में मुलाक़ात होनी है. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बीते कई सालों से लगातार बिगड़ते रिश्तों को सुधारने को लेकर चर्चा होनी है.
ओपन स्काईज़ समझौते के तहत शॉर्ट नोटिस पर 35 देश अपने यहां चल रही सैन्य गतिविधि की निगरानी की इजाज़त देने के लिए बाध्य होते हैं.
इस करार से बाहर जाने का फ़ैसला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान ही कर लिया गया था.
उस वक्त अमेरिका ने कहा था कि इसके बारे में अमेरिका पुनर्विचार करेगा और आधिकारिक तौर छह महीनों के भीतर इससे बाहर निकलेगा. अमेरिका के इस फ़ैसले के बाद रूस ने कहा था कि वो भी इससे बाहर जाने के बारे में विचार कर रहा है.
उस वक्त राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर जो बाइडन ने इस फ़ैसले का विरोध किया था और कहा था कि ये फ़ैसला दूरदर्शी नहीं है. हालांकि इससे पहले सीनेटर के तौर पर बाइडन ने इस समझौते का समर्थन किया था.
राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद बाइडन ने रूस के साथ हथियारों पर लगाम लगाने से जुड़े स्टार्ट करार को पांच साल के लिए आगे बढ़ाने की मंज़ूरी दी थी. इस करार को न्यू स्टार्ट ट्रीटी कहा गया था.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार विदेश मंत्रालय के डिप्टी सचिव वेन्डी शरमन ने रूसी अधिकारियों को ये जानकारी दे दी है कि अमेरिका फिर से ओपन स्काईज़ समझौते का हिस्सा नहीं बनना चाहता.
गुरुवार को लिए गए इस फ़ैसले का अर्थ ये है कि परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच हथियारों पर नियंत्रण के लिए अब केवल न्यू स्टार्ट समझौता ही लागू रहेगा.
न्यू स्टार्ट समझौते की मियाद भी बीते साल ख़त्म होने वाली थी लेकिन बाइडन ने इसे पांच साल के लिए आगे बढ़ाया था. साथ ही ट्रंप के ओपन स्काईज़ करार से बाहर जाने के फ़ैसले पर पुनर्विचार का आदेश भी दिया था.
अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप के फ़ैसले पर पुनर्विचार किया जा चुका है जिसके बाद वेन्डी शरमन ने रूसी डिप्टी विदेश मंत्री सर्गेई रिबकॉफ़ को अमेरिका के फ़ैसले के बारे में जानकारी दी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार नाम न बताने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा है कि इस संबंध में विदेश मंत्रालय जल्द घोषणा कर सकता है.
मंत्रालय का कहना है कि, "अमेरिका को इस बात का दुख है कि रूस ने इस समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर इसे कमतर कर आंका है."
मंत्रालय ने कहा "रूस इस समझौते की शर्तों का पूरी तरह से पालन करने में नाकाम रहा है. ऐसे में इस समझौते शामिल होने के लेकर किए गए पुनर्विचार के बाद अमेरिका इसके साथ बने रहने का इच्छुक नहीं है. साथ ही हाल के दिनों में यूक्रेन को लेकर रूस का जो बर्ताव रहा है वो करार के भरोसेमंद साथी जैसा नहीं था."
क्या है ओपन स्काईज़ समझौता?
कनाडा, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कुल 35 देश इस समझौते में शामिल हैं. इसके तहत इसमें शामिल देश सैन्य गतिविधियों पर निगरानी रखने और सेना और उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए दूसरे सदस्य देशों की उड़ानों को अपने एयरस्पेस से गुज़रने की इजाज़त देते हैं.
2002 में लागू हुए इस समझौते के तहत अब तक देशों के बीच भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1,500 ऐसी उड़ानों को इजाज़त दी गई है.
माना जा रहा है कि रूसी संसद का ऊपरी सदन फेडेरेशन काउंसिल जून के पहले सप्ताह में इस करार से बाहर जाने से जुड़े बिल को मंज़ूरी दे सकता है. जिसके छह महीने बाद रूस की तरफ से भी ये फ़ैसला लागू हो जाएगा.
इससे पहले अमेरिका ने रूस के साथ हथियारों से जुड़े एक और अहम करार, इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस ट्रीटी से बाहर जाने का फ़ैसला किया था. सोवियत संघ और अमेरिका के बीच हुए इस करार के तहत कम दूरी और मध्यम दूरी के परमाणु और ग़ैरपरमाणु मिसाइलों पर रोक लगाई गई थी.