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इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्षः युद्धविराम के लिए तैयार हुआ इसराइल

इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट ने गज़ा में युद्धविराम को मंज़ूरी दे दी है. हमास ने कहा है कि स्थानीय समयानुसार सुबह 2 बजे (भारतीय समय के मुताबिक़ सुबह साढ़े चार बजे) से युद्धविराम होगा.

लाइव कवरेज

  1. कोरोना के कारण इलेक्शन ड्यूटी पर मरने वाले शिक्षकों के लिए गाइडलाइंस बदले निर्वाचन आयोगः योगी सरकार

    उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को ये सुझाव दिया है कि पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी पर लगाए गए वैसे शिक्षक और शिक्षा मित्र जिनकी मौत कोरोना के कारण हो गई है, उन्हें मुआवजे में शामिल करने करने के लिए निर्वाचन आयोग को अपनी गाइडलाइंस में बदलाव करना चाहिए.

    उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ये सुझाव ऐसे समय में जब राज्य के शिक्षक यूनियन ये दावा कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर लगाए जाने के कारण 1621 शिक्षकों और अन्य विभागीय कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो गई है और इन्हें मुआवजा दिया जाए.

    कर्मचारी यूनियन इन शिक्षकों और अन्य विभागीय कर्मचारियों के प्रत्येक परिवार के लिए मुआवजे में एक करोड़ रुपये और साथ में उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं.

    हालांकि उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने मंगलवार को इन दावों को खारिज कर दिया था और कहा था कि मौजूदा नियमों के अनुसार केवल तीन शिक्षकों की मौत इलेक्शन ड्यूटी के दौरान हुई है.

    वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य तौर पर सरकार निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार ही इलेक्शन ड्यूटी पर होने वाली मौत के मामलों पर कार्रवाई करती है लेकिन ये गाइडलाइंस ऐसे समय की हैं, जब महामारी नहीं थी, इसलिए इन मामलों पर गंभीरतापूर्वक विचार किए जाने की ज़रूरत है.

    उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस सिलसिले में एक रिपोर्ट तैयार करने और निर्वाचन आयोग को गाइडलाइंस में बदलाव के लिए आग्रह करने को कहा है.

  2. कोरोना: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने माना, भारत मुश्किल दौर से गुजर रहा है

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कोरोना महामारी की तुलना ऐसी स्थिति से की जो कल्पना से परे है और जिसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं.

    उन्होंने माना कि भारत ख़ासतौर से मुश्किल स्थिति से गुजर रहा है.

    उन्होंने कहा, "मुमकिन है कि कोरोना महामारी हमारी याद की सबसे गंभीर घटना हो लेकिन इसे बार-बार आने वाली चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए न कि एक बार हुई घटना के रूप में."

    जयशंकर ने कहा कि महामारी की प्रकृति ऐसी है कि इसने विश्वास और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं को सामने लाकर रख दिया है.

    उन्होंने चेतावनी दी कि इन जटिलताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका बाक़ी दुनिया पर असर पड़ने वाला है.

  3. बिटक्वॉइन के गिरने का एलन मस्क से क्या कनेक्शन

    चीन के क्रिप्टोकरेंसी पर लगाए नए प्रतिबंध के बाद बुधवार को तीन महीने में पहली बार बिटक्वॉइन की क़ीमतें गिर कर 34,000 डॉलर से कम हो गई हैं.

    चीन ने हाल में बैंकों और पेमेन्ट फ़र्म्स पर क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेनदेन करने पर पाबंदी लगा दी थी. मंगलवार को चीन ने निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेनदेन को लेकर चेतावनी भी दी.

    इससे पहले कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला ने भी कहा था कि वो ख़रीदफ़रोख़्त के लिए बिटक्वॉइन का इस्तेमाल नहीं करेगा. इसके बाद बीते सप्ताह बिटक्वॉइन की क़ीमतों में दस फ़ीसद से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है.

    बुधवार को इसकी क़ीमतें थोड़ी संभली ज़रूर लेकिन ये अभी भी 10.4 फ़ीसद की गिरावट के बाद 38,131 डॉलर पर है.

  4. पिनराई विजयन दूसरी बार बने केरल के मुख्यमंत्री

    केरल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की अगुवाई करने वाले पिनराई विजयन ने गुरुवार को दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली.

    राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 76 वर्षीय पिनराई विजयन को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में शपथ दिलाई.

    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इस वेटरन राजनेता की ये दूसरी पारी है.

    कोरोना महामारी को देखते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ़ के नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाए रखी.

    केरल हाई कोर्ट ने बुधवार को सरकार को ये निर्देश दिया था कि महामारी की वजह से शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने वालों की संख्या को सीमित रखा जाए.

  5. ब्लैक फंगस की बीमारी पर केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया निर्देश

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि ब्लैक फंगस या म्यूकरमायकोसिस रोग को महामारी अधिनियम के तहत 'नोटिफाइअबल डिजीज' का दर्जा दिया जाए. इसका मतलब ये हुआ अब सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को इस रोग की जांच और इलाज के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के निर्देशों का पालन करना होगा.

    सरकार ने अपने निर्देश में कहा है, "सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को ये निर्देश दिया जाता है कि ब्लैक फंगस के सभी संदिग्ध और पुष्ट मामलों की रिपोर्ट ज़िला स्तर के चीफ़ मेडिकल ऑफिसर के जरिये स्वास्थ्य विभाग और इंटीग्रेटेड डिज़ीज सर्विलेंस प्रोग्राम के तहत चलाए जा रहे सर्विलेंस सिस्टम को भेजें."

    मंत्रालय ने कहा है कि इसके संक्रमण की वजह से कोविड-19 के मरीज़ों को लंबी अस्वस्थता का सामना करना पड़ रहा है और यहां तक कि उनकी मौत भी हो रही है.

    मंत्रालय ने एक चिट्ठी में कहा है, "हाल के समय में फंगल इन्फेक्शन के रूप में एक नई चुनौती सामने आई है जिसका नाम म्यूकरमायकोसिस है. कई राज्यों से कोविड-19 के मरीज़ों में ख़ासकर जो लोग स्टेरॉयड थेरेपी पर हैं और जिनका शुगर अनियंत्रित है, इसके मामले रिपोर्ट हुए हैं."

    स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने एक चिट्ठी में लिखा है कि इस फंगल इन्फेक्शन के इलाज में कई तरह के मेडिकल एक्सपर्ट्स- आंख के सर्जन, न्यूरोसर्जन, जेनरल सर्जन, डेंटल सर्जन और ईएनटी स्पेशलिस्ट के शामिल होने की ज़रूरत पड़ती है. साथ ही इसके इलाज में एंटी फंगल मेडिसिन एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की भी ज़रूरत पड़ती है.

  6. चीन पर भड़का इसराइल; चीन बोला - सुरक्षा परिषद को पंगु बना दिया गया

    मध्य-पूर्व में इसराइल और फ़लस्तीनियों के टकराव में चीन खुलकर फ़लस्तीनियों के समर्थन में बोल रहा है.

    चीनी मीडिया में भी जो कुछ छप रहा है, उससे भी स्पष्ट होता है कि सरकार के साथ मीडिया की सहानुभूति भी फ़लस्तीनियों के पक्ष में है.

    हालांकि चीन में मीडिया सरकारी नियंत्रण में काम करता है इसलिए दोनों की लाइन अलग-अलग नहीं होती. 18 मई को चीन में इसराइली दूतावास ने ट्वीट कर चीनी मीडिया में इसराइल-फ़लस्तीनियों के टकराव पर कवरेज को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी.

    इसराइली दूतावास ने अपने ट्वीट में कहा है, ''हमें उम्मीद है कि 'यहूदियों का दुनिया पर नियंत्रण है' वाला सिद्धांत अब पुराना पड़ चुका होगा. ज़ाहिर है कि ये सिद्धांत साज़िशन गढ़ा गया था. दुर्भाग्य से यहूदी विरोधी चेहरा फिर से सामने आया है. चीन के सरकारी मीडिया में खुलेआम यहूदी विरोधी कवरेज परेशान करने वाली है.''

  7. चीन को क्वाड में भारत, अमेरिका वाले गुट से क्या परेशानी है?

    "हम सभी जानते हैं कि क्वाड किस तरह का तंत्र है. एक अलग गुट बनाने, चीन को एक चुनौती के रूप में पेश करने, क्षेत्र के देशों और चीन के बीच कलह पैदा करने के कुछ देशों के प्रयासों का चीन विरोध करता है."

    यह टिप्पणी 12 मई को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की. एक अन्य प्रश्न के जवाब में चुनयिंग ने कहा, "जहां तक क्वाड का संबंध है, मुझे लगता है कि भारत इस तंत्र की मंशा को हमसे बेहतर जानता है. क्या इसका इरादा चीन के खिलाफ एक छोटे-से गुट को खड़ा करना नहीं है?"

    कुछ ही दिन पहले ढाका में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने बांग्लादेश को अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड गठबंधन में शामिल होने के खिलाफ आगाह करते हुए कहा था कि बीजिंग विरोधी "क्लब" में ढाका की भागीदारी के वजह से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को "काफी नुक़सान" होगा.

  8. इसराइल फ़लस्तीनी हिंसा: 'सीज़फ़ायर की योजना नहीं'

    ग़ज़ा पर इसराइली हमलों की तीव्रता में थोड़ी कमी ज़रूर आई है लेकिन हमले जारी हैं. और फ़लस्तीनी संगठन भी लगातार इसराइल पर रॉकेट दाग़ रहे हैं.

    अब हमास के अलावा कई दूसरे फ़लस्तीनी संगठनों में भी इस बात की होड़ मच गई है कि वो अपने आपको फ़लस्तीनियों का रक्षक साबित कर सकें. जेरेमी बोवेन की रिपोर्ट.

  9. इसराइल पर बोला पाकिस्तान- वीटो पावर वालों को सोचना पड़ेगा

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अंकारा में अनादोलु को दिए इंटरव्यू में कहा है कि फ़लस्तीनियों लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं बन पाई, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है.

    क़ुरैशी ने कहा कि वीटो पावर के कारण कोई साझा बयान भी नहीं जारी किया जा सका लेकिन अब संयुक्त राष्ट्र की आम सभा से उम्मीद है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि हाँ, संयुक्त राष्ट्र के पाँच स्थायी सदस्य देशों के पास वीटो पावर है लेकिन जनसमर्थन वीटो पावर पर भारी पड़ेगा.

    क़ुरैशी ने कहा, ''जनशक्ति सबसे बड़ी शक्ति होती है. अगर जनसमर्थन से सरकारें बदल सकती हैं तो वीटो पावर वालों को भी विचार करना होगा. मैं ये कह रहा हूँ कि लोग मानवाधिकारों पर भरोसा करते हैं. लोग ही सरकारों को फिर से सोचने पर मजबूर करेंगे.''

  10. पुतिन ने माना, चीन से संबंध ऐतिहासिक रूप से मज़बूत हुए

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने वीडियो लिंक के ज़रिए चीन में रूसी तकनीक से लैस थर्ड जेनरेशन के चार न्यूक्लियर रिएक्टर की शुरुआत की. रूस ने चीन में इन चारों न्यूक्लियर पावर प्लांट को बनाया है.

    पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये चार नए न्यूक्लियर रिएक्टर चीन और रूस के बीच ऊर्जा परियोजना में सबसे बड़ी साझेदारी है. इसे परमाणु ऊर्जा सहयोग के मामले में मील का पत्थर माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि रूस और चीन की क़रीबी लगातार बढ़ रही है.

    चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स से चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि उर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी है. दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और दोनों की यह नज़दीकी काफ़ी मायने रखती है. रूस ने कहा है कि दोनों देशों के सहयोग के लिए यह मिसाल है.

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि ये न्यूक्लियर पावर प्लांट शक्तिशाली और आधुनिक हैं और संयुक्त उपक्रम के लिए ये अपने आप में मिसाल हैं. पुतिन ने कहा कि ये रिएक्टर सुरक्षा के सभी पैमानों पर दुरुस्त हैं. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन के साथ अभी और पावर प्लांट बनाए जाएंगे. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के संबंध ऐतिहासिक रूप से मज़बूत हुए हैं.

    पुतिन ने कहा, ''रूस और चीन की साझेदारी आपसी भरोसे के साथ राजनीतिक मामलों में, व्यापार, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और मानवीय सहयोग में पूरी तरह से सफल रही है. हम कह सकते हैं कि रूस और चीन का संबंध ऐतिहासिक रूप से सबसे ऊंचाई पर पहुँच चुका है.''

  11. इसराइल बोला- बीमारी से मुक्ति चाहिए न कि मरहम पट्टी

    इसराइल और फ़लस्तीनी हथियारबंद इस्लामिक चरमपंथी संगठन हमास के बीच लड़ाई अभी थमती नहीं दिख रही है.

    सारी अंतरराष्ट्रीय कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं. इस बीच इसराइल ने कहा है कि यह जंग इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच की नहीं है बल्कि हमास से है.

    अमेरिका में इसराइल के राजदूत गिलैड अर्दान ने सीबीएस रेडियो को दिए इंटरव्यू में कहा, ''हमें समझने की ज़रूरत है कि यह युद्ध फ़लस्तीनियो से नहीं है. यह युद्ध केवल इसराइल और आतंकवादी संगठन हमास के बीच है.’’

    ‘’हम यह टकराव नहीं चाहते हैं. यहाँ तक कि हमने तनाव कम करने की हर कोशिश की. लेकिन हमास हिंसा भड़काने को लेकर प्रतिबद्ध है. और अभी हम आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर रहे हैं. ज़ाहिर है कि हम युद्धविराम की ओर देख रहे हैं. लेकिन हम बीमारी से मुक्ति की ओर देख रहे हैं न कि मरहम पट्टी तक रुकना चाहते हैं.''

  12. इसराइल के विरोध में हज़ारों पाकिस्तानी सड़क पर उतरे

    पाकिस्तान के कराची शहर में बुधवार को फ़लस्तीनियों के समर्थन और इसराइल के विरोध में हज़ारों पाकिस्तानी सड़क पर उतरे.

    पाकिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शन में ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई तत्काल रोकने और युद्धविराम की मांग की. इस विरोध प्रदर्शन में कराची पत्रकार संघ, पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट, पाकिस्तान मेडिकल असोसिएशन, नेशनल ट्रेड यूनियन एसोसिएशन और आम लोग शामिल हुए.

    प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अल-अक़्सा मस्जिद से इसराइल अपना नियंत्रण ख़त्म करे और यरुशलम से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालना बंद हो.

    प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानियों मीडिया से कहा कि इसराइल जो कुछ भी कर रहा है वो अमानवीय है और उसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए. इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संसद में पाकिस्तानियों से फ़लस्तीनियों के समर्थन में सड़क पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए कहा था.

    पाकिस्तान खुलकर फ़लस्तीनियों का समर्थन कर रहा है. पाकिस्तान ने इसराइल को आज तक मान्यता नहीं दी है. पाकिस्तान का कहना है कि जब तक फ़लस्तीनियों के लिए एक स्वतंत्र मुल्क नहीं बन जाता है तब वो इसराइल को मान्यता नहीं देगा.

    पिछले साल जब बहरीन और यूएई ने इसराइल से रिश्ते सामान्य किए तो पाकिस्तान में भी बहस उठी कि जब अरब के देश ही इसराइल को गले लगा रहे हैं तो पाकिस्तान क्यों सख़्त रुख़ बनाए हुए है. कहा जाता है कि पाकिस्तान में इस्लामिक धड़ा बहुत मज़बूत है और किसी भी सरकार के लिए इसराइल से रिश्ता सामान्य करने का फ़ैसला लेना मुश्किल है.

  13. कोरोनाः 24 घंटे में 2.76 लाख नए मामले, 3.874 की मौत

    भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आँकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में देश भर में कोरोना संक्रमण के 2,76,110 नए मामले सामने आए हैं.

    पिछले एक दिन में 3,874 मरीज़ों की मौत हुई है.

    मंत्रालय के अनुसार देश में अभी कुल 31,29,878 सक्रिय मामले हैं.

    भारत में महामारी से अब तक कुल 2,87,122 लोगों की मौत हो चुकी है.

    देश में अब तक कुल ढाई करोड़ से ज़्यादा (2,57,72,400) लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं.

    भारत में अब तक 18,70,09,792 लोगों को वैक्सीन दिया जा चुका है.

    पिछले 24 घंटे में 11,66,090 लोगों को वैक्सीन दिया गया.

  14. इसराइल के लिए अमेरिका फ़्रांस को भी नकार देने की तैयारी में

    अमेरिका ने बुधवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ़्रांस के उस प्रस्ताव का वो समर्थन नहीं करेगा, जिसमें इसराइल और फ़लस्तीनियों में युद्धविराम की बात है.

    अमेरिका का कहना है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव से तनाव को कम करने की कोशिश को धक्का लग सकता है.

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, ''हम इसराइल और फ़लस्तीनियों के संकट को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट हैं. हमारा ध्यान हिंसा ख़त्म करने के लिए जारी राजनयिक कोशिशों पर है. ऐसे में हम सुरक्षा परिषद में किसी भी तरह के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे. अगर ऐसा करते हैं तो हमारी कोशिश पटरी से उतर सकती है.''

    इससे पता चलता है कि अमेरिका यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल में फ़्रांस के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वीटो के लिए तैयार है.

    फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी की इसराइल-फ़लस्तीनी संकट पर युद्धविराम पर प्रस्ताव को लेकर वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह द्वितीय से सहमति बनी थी.

    मिस्र के राष्ट्रपति अफ़्रीका पर आयोजित पेरिस शिखर सम्मेलन में शरीक होने फ़्रांस गए हैं. मंगलवार देर रात फ़्रांस और मिस्र के प्रस्ताव को लेकर बयान जारी किया गया था.

    इसराइल और फलस्तीनियों में जारी हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक सामान्य प्रस्ताव तक पास नहीं हो पाया है. अमेरिका इसराइल का निष्ठावान सहयोगी है और किसी भी प्रस्ताव को लेकर वो वीटो कर दे रहा है.

    इससे पहले चीन, नॉर्वे और ट्यूनीशिया की ओर से इसराइल और फ़लस्तीनियों की हिंसा रोकने के लिए तीन प्रस्ताव लाए गए थे और तीनों पर अमेरिका ने वीटो कर दिया था.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका, चीन, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन हैं. किसी भी प्रस्ताव को पास होने के लिए पाँचों का एकमत होना अनिवार्य है. अगर एक भी सदस्य देश असहमत होता है तो वो अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को रोक देता है.

    फ़्रांस के प्रस्ताव को लेकर अमेरिका पर दबाव होने की बात कही जा रही है. फ़्रांस भी अमेरिका का सहयोगी है. फ़्रांस ने छोटा और सामान्य प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें दुश्मनी रोकने और मानवीय राहत बचाव के काम को अंजाम देने की बात कही गई है.

    बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को फ़ोन भी किया था और उन्होंने कहा कि वे हिंसा रोकने पर कोई ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं.

    गज़ा प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 10 मई के बाद से इसराइली हमले में अब तक 219 फ़लस्तीनियों की जान गई है. इस हिंसा में इसराइल के 12 लोगों की जान गई है.

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