पीएम मोदी की आलोचना वाले पोस्टर लगाने पर 17 एफ़आईआर, 15 गिरफ़्तारियां
पुलिस अधिकारी के अनुसार फिलहाल मामले की जांच की जा रही है कि किसके कहने पर ये पोस्टर्स लगाए गए हैं.
लाइव कवरेज
कर्नाटक के तट पर पहुंचा चक्रवाती तूफ़ान 'टोकटे'
चक्रवाती तूफ़ान 'टोकटे 'कर्नाटक
में तट से टकरा गया है. राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम वहां पहुंच चुकी है.
कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोमई
ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ की
टीम भी प्रभावित इलाक़े में भेजी जा रही है.
उन्होंने बताया कि कर्नाटक के तीन तटीय जिलों में चौबीसों घंटे एक
हज़ार लोग काम में जुटे रहेंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार
प्रधानमंत्री ने इस चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए शीर्ष
अधिकारियों और एनडीएमए की बैठक बुलाई थी.
चक्रवाती तूफ़ान जैसे-जैसे पश्चिमी
तटों की ओर बढ़ रहा है, प्रशासन की चिंता भी बढ़ती जा रही है.
भारतीय नौसेना ने प्रशासन को हर संभव
मदद का आश्वासन दिया है. भारतीय नौ सेना ने अपने ट्वीट में कहा है, ''भारतीय नौसेना के
जहाज़, पोत, हेलिकॉप्टर, गोताखोर और आपदा राहत टीम पश्चिमी तट पर मदद के लिए मुस्तैद हैं.''
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ब्रेकिंग न्यूज़, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रघुनंदन लाल भाटिया का निधन
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और अमृतसर
से छह बार सांसद रहे रघुनंदन लाल भाटिया का शुक्रवार को निधन हो गया. उनकी उम्र
100 साल थी.
उनके परिवार ने शनिवार को इसकी
जानकारी दी.
रघुनंदन लाल भाटिया की मृत्यु
शुक्रवार रात को बीमारी के चलते एक निजी अस्पताल में हुई. उनके दो बेटे रमेश
भाटिया, जेएल भाटिया और एक बेटी सरोज मुंजाल हैं.
उनके निधन पर पंजाब के
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट किया, “पूर्व राज्यपाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छह बार सांसद रह
चुके रघुनंदन लाल भाटिया को खोने का दुख है. इस दुख की घड़ी में मेरी भावनाएं और प्रार्थनाएं
उनके परिवार के साथ हैं. उनकी आत्मा को शांति मिले.”
रघुनंदन लाल भाटिया साल 2004 से
2008 के बीच केरल और 2008 से 2009 के बीच बिहार के राज्यपाल रहे थे. वह साल 1992
में विदेश राज्य मंत्री भी रहे थे.
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वैक्सीन को लेकर ट्वीट कर फंसी किरण मजूमदार-शॉ, स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जवाब
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन और नागर विमानन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने
किरण मज़ूमदार-शॉ के एक ट्वीट के जवाब में तंज कसा है और कहा है कि देश में वैक्सीन की स्थिति की तुलना शादी से करने वाला उनका ट्वीट दिलचस्प है.
डॉक्टर हर्ष वर्धन ने लिखा, "आप चिंता न करें किरण जी, वैक्सीन की कोई कमी नहीं होगी और सभी को वैक्सीन मिलेगी."
उन्होंने लिखा, "सप्लाई बाधित न हो इसके लिए हमारे साथ निर्माता काम कर रहे हैं और विदेश से आने वाली वैक्सीन की भी ट्रैकिंग की जा रही है. नई वैक्सीन जो देश में लाई जा सकती है उस पर भी काम चल रहा है. हो सकता है कि लोगों को पसंद की वैक्सीन चुनने का मौक़ा मिले."
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बायोफ़ार्मा कंपनी बायोकोन की एग्ज़िक्यूटिव चेयरमैन किरण मज़ूमदार-शॉ के एक ट्वीट के जवाब में तंज कसते हुए हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, "अरेंज़्ड मैरिज से तुलना करने वाला ट्वीट दिलचस्प है. लेकिन सभी शादियां पहली नज़र का प्यार नहीं होतीं."
उन्होंने दो ट्वीट किए और लिखा, "बायोटेक इंडस्ट्री की मदद से देश में कोरोना वैक्सीन की 18 करोड़ डोज़ दी जा चुकी हैं. मई से जुलाई के बीच और 40 करोड़ डोज़ तैयार हो जाएगी और इस साल अगस्त से दिसंबर के बीच वैक्सीन की 216 करोड़ डोज़ तैयार होंगी."
उन्होंने तंज कसा, "ये सभी बेहतर सप्लाई और अच्छी चल रही शादी की निशानी ही तो है!"
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इससे पहले किरण मज़ूमदार-शॉ ने ट्वीट करके कहा था कि भारत में वैक्सीन की स्थिति एक अरेंज मैरिज की तरह है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “भारत में वैक्सीन की स्थिति एक अरेंज मैरिज जैसी है. पहले आप तैयार नहीं होते, फिर आपको कोई पसंद नहीं आता, उसके बाद आपको कोई नहीं मिलता. जिनको मिल जाता है वे नाख़ुश रहते हैं कि शायद कोई और अच्छा मिल जाता. जिनको नहीं मिलता वे चाहते हैं कि उन्हें कोई मिल जाए.”
हालांकि, बाद में एक ट्वीट के उत्तर में किरण ने एक अन्य ट्वीट में माना है कि ये उनके विचार नहीं हैं.
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सोशल मीडिया पर उनके इस बयान की आलोचना की जा रही है.
एक ट्विटर यूज़र मनोज कुमार डि शेनॉय ने उनके बयान को ग़ैर-ज़िम्मेदार बताया है.
उन्होंने लिखा "एक बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह का बयान देना बेहद गैर-ज़िम्मेदारना है."
वेन्कटेश कृष्णमूर्ति ने वैक्सीन को अरेंज्ड मैरिज से जोड़ किरण मजूमदार ने ओछा जवाब दिया था.
सिद्धार्थ गिगी नाम के एक अन्य ट्विटर यूज़र ने लिखा, "कृपया अपना घटिया जोक वापिस लें. आपसे बेहतर की उम्मीद करते हैं."
इसी सप्ताह मज़ूमदार-शॉ ने कोविड-19 वैक्सीन की कमी को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि सरकार की ओर से बेहतर पारदर्शिता की ज़रूरत है ताकि लोगों को वैक्सीन मिले.
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को टैग करते हुए ट्वीट किया था, “वैक्सीन की कमी को लेकर बेहद चिंता है. क्या हम जान सकते हैं कि हर महीने 7 करोड़ कोरोना वैक्सीन की डोज़ कहां गईं? स्वास्थ्य मंत्रालय हमें दुविधा से बचने के लिए हमें बेहतर पारदर्शिता की ज़रूरत है. अगर सप्लाई का टाइमटेबल सार्वजनिक हो तो लोग अपनी बारी का इंतज़ार आराम से कर सकते हैं.”
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बीबीसी इंडिया बोल: कोरोना से कैसे लड़ रहे हैं आप?
बीबीसी इंडिया बोल, 15 मई 2021: कोरोना से कैसे लड़ रहे हैं आप? इंडिया बोल में हम आज इसी विषय पर चर्चा करेंगे मोहनलाल शर्मा के साथ.
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पीएम मोदी की आलोचना वाले पोस्टर लगाने पर 17 एफ़आईआर, 15 गिरफ़्तारियां
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दिल्ली पुलिस ने कोरोना टीकाकरण
अभियान के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना वाले पोस्टर कथित तौर पर चिपकाने को
लेकर 17 एफ़आईआर दर्ज की हैं और 15 लोगों को गिरफ़्तार किया है.
इन पोस्टर्स में लिखा था, “मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी?”
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये पोस्टर दिल्ली के कई हिस्सों में लगे हुए थे. गुरुवार को पुलिस को इन पोस्टर्स की सूचना मिली जिसके बाद ज़िले के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया
गया.
शिकायतों के आधार पर आईपीसी की धारा
188 (लोक सेवक द्वारा लागू विधिवत आदेश की अवज्ञा) और संपत्ति विरूपण रोकथाम अधिनियम
की धारा तीन सहित कुछ और धाराओं के तहत 17 एफ़आईआर दर्ज की गई हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के
मुताबिक, “इस संबंध में और शिकायतें आने पर
और एफ़आईआर दर्ज की जा सकती हैं. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है कि किसके कहने
पर ये पोस्टर्स लगाए गए हैं. इसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.”
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"500 रुपये लेकर चिपकाया पोस्टर"
पुलिस अधिकारी ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में तीन एफ़आईआर दर्ज की गई हैं और दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. पश्चिमी और बाहरी दिल्ली में इस संबंध में तीन-तीन एफ़आईआर दर्ज की गई हैं.
केंद्रीय दिल्ली में दो एफ़आईआर दर्ज हुई हैं और चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. रोहिणी में दो एफ़आईआर हुई हैं और दो लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.
पूर्वी दिल्ली में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है और चार लोग गिरफ़्तार हुए हैं. द्वारका में एक एफ़आईआर और दो गरिफ्तारियां हुई हैं.
पीटीआई के अनुसार उत्तरी दिल्ली में एक एफ़आईआर दर्ज हुई है और एक शख़्स को गिरफ़्तार किया गया है. इस शख़्स ने दावा किया है कि उसे ये पोस्टर लगाने के लिए 500 रुपये दिए गए थे.
शहादरा में दर्ज हुए एक मामले में पुलिस को पोस्टर लगाने की सीसीटीवी फुटेज मिली है और इसमें शामिल व्यक्ति को पकड़ने की कोशिश की जा रही है.
जापान के लिए टोक्यो ओलंपिक रद्द करना क्यों है मुश्किल?
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इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों को केवल दो महीनों का वक़्त
बाक़ी है. इस बीच कोरोना महामारी के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ
इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं.
हाल में जापान में किए गए एक ओपिनियन पोल में सत्तर फीसदी लोगों ने खेलों को
रद्द किए जाने के पक्ष में वोट किया. हाल में टोक्यो और तीन और प्रांतों में संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण
इमर्जेंसी लागू की गई है.
लेकिन, जापान ने अब तक इसे रद्द करने को लेकर कोई फ़ैसला नहीं किया
है. इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी भी इसके आयोजन को लेकर आगे बढ़ रही है.
लेकिन क्या ओलंपिक खेलों को रद्द करना वाकई मुश्किल है?
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क्या हैं मुश्किलें?
इसी सप्ताह जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सूगा ने पहली बार आम लोगों की राय को मानते हुए कहा कि "सरकार ओलंपिक को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाएगी". हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ओलंपिक खेलों के आयोजन या उसे रद्द करने का फ़ैसला आख़िर में इंटरनेशल ओलंपिक कमिटी (आईओसी) को लेना होता है.
अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स लॉयर एलेक्ज़ेंडर मिगुएल मेस्त्रे कहते हैं कि आईओसी और टोक्यो शहर के बीच हुए समझौते के अनुसार ओलंपिक खेल आईओसी की "विशेष संपत्ति" है और इस समझौते को रदद् करने का फ़ैसला केवल वही ले सकता है.
वो कहते हैं कि युद्ध या गृह युद्ध जैसी स्थिति हो या फिर इगर आईओसी को लगे कि किसी कारण से खेल में हिस्सा लेने वालों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है तो वो खेलों को रद्द कर सकता है. लेकिन महामारी को इस तरह के ख़तरे के रूप में देखा नहीं जा रहा है.
वो कहते हैं कि अगर जापान इसे रद्द करने का फ़ैसला करता है तो ये एकतरफा फ़ैसला होगा और इसके लिए उसे आईओसी के विरोध में जाना होगा. इसके बाद इसका खामियाज़ा स्थानीय आयोजकों को भुगतना पड़ेगा.
अगर ओलंपिक खेल रद्द नहीं हुए तो वो इस साल 23 जुलाई से शुरू होंगे.
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अर्थव्यवस्था का सवाल भी
मेलबर्न युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जैक एंडरसन कहते हैं कि जापान को पहले से समझौते की शर्तों के बारे में पता था लेकिन उसे इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि कोरोना महामारी पूरी दुनिया को इस तरह प्रभावित करने वाली है.
वो कहते हैं, “चूंकि ये खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होते हैं, इनमें अरबों डॉलर खर्च किए जाते है. ऐसे में फिलहाल जापान समझौते में बने रहते हुए आईओसी के फ़ैसले का इंतज़ार कर सकता है.“
जानकार मानते हैं कि खेल आयोजन के लिए किये गये अधिकतर काम का इंश्योरेंस किया गया है और खेल रद्द हुए तो इंश्योरेंस कंपनियों को बड़ा झटका लग सकता है.
लेकिन मामला केवल पैसों का ही नहीं है. आख़िरी बार साल 1964 में जापान ने समर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया था. उस वक़्त जापान दूसरे विश्व युद्ध के बाद पुनर्वास के काम में लगा था और ये उसके लिए उसकी प्रगति का प्रतीक माना गया.
इस बार भी जापान के लिए खेलों का आयोजन सम्मान की बात है. क्योंकि अगले अंतरराष्ट्रीय खेल, विंटर ओलंपिक फरवरी 2022 में होंगे और इसका आयोजन चीन के बीजिंग में होने वाला है जिसे जापान अपना प्रतिद्वंदी मानता है.
प्रोफ़ेसर जैक एंडरसन के अनुसार, “बीते कुछ सालों में जापान में आर्थिक ठहराव देखा जा रहा है. पहले यहां सूनामी आई और फिर फुकुशिमा परमाणु हादसा हुआ. इन खेलों को जापान के विकास के तौर पर देखा जा रहा है. इसलिए ये सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं.“
ब्रेकिंग न्यूज़, पहली लहर के मुक़ाबले ज्यादा तेज़ी से कम हो रहे हैं कोरोना के मामले : डॉ. वीके पॉल
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इमेज कैप्शन, नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की
प्रेस वार्ता में आज नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि देश में कोरोना महामारी के कारण
मृत्यु दर में ठहराव देखा जा रहा है जो अच्छी बात है.
संक्रमण के मामले अब कम होने लगे
हैं और मामले कम होने की रफ़्तार पहली लहर के मुक़ाबले तेज़ है.
फरवरी में रोज़ाना छह लाख तक कोरोना टेस्टिंग की जा रही थी लेकिन
ज़रूरत बढ़ने पर हमने इसे रोज़ाना 18 लाख तक बढ़ाया. इसी के साथ हमने
कुछ दिनों में 19 लाख 80 हज़ार तक टेस्ट किए जो विश्व रिकॉर्ड है.
वैक्सीन के उत्पादन को लेकर डॉक्टर वीके पॉल ने बताया कि फिलहाल हर महीने कोवैक्सीन की डेढ़ करोड़ डोज़ का उत्पादन हो रहा है. सरकार की योजना इसे बढ़ाकर हर महीने 10 करोड़ डोज़ करने की है.
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कोविशील्ड की दो डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ाने के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि वैक्सीन कम पड़ रही है और ये फ़ैसला दबाव में आ कर लिया गया है, लेकिन ये दुख की बात है.
ये फ़ैसला पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर किया गया है और वैज्ञानिकों के समूह की राय पर लिया गया है.
उन्होंने ब्रिटेन के फ़ैसले का ज़िक्र किया और कहा कि जिस वक़्त ब्रिटेन ने वैक्सीन के बीच के अंतर को लेकर फैसला किया था वो उस वक़्त के डेटा पर आधारित था.
ब्रिटेन के फ़ैसले के पीछे की वजह के बारे में उन्होंने बताया कि डेटा में पाया गया था कि असल ज़िंदगी में यह 60 से 65 फीसदी तक प्रभावी है और इससे संक्रमण होने से रोका जा सकता है. इसी के आधार पर अंतराल बढ़ाने के लिए फ़ैसला लिया गया है.
वैक्सीन की कमी और कोविशील्ड की दो डोज़ के बीच के अंतराल को लेकर किसी तरह के कयास न लगाए जाएं. हमें वैक्सीन को लेकर भारत की संस्थाओं की रीसर्च और कोशिशों का सम्मान करना चाहिए.
म्यूकरमायकोसिस को लेकर बताया गया कि ये अधिकतर उन्हें प्रभावित करता है जिन्हें डायबिटीज़ है. ऐसा व्यक्ति अगर कोविड संक्रमित हो जाता है तो उसे फंगल इन्फेक्शन हो सकता है जो घातक हो सकता है. ऐसे लोगों में स्टेरॉयड के इस्तेमाल से भी ख़तरा पैदा हो सकता है. ऐसे मेंजितना ज़रूरत हो उतना ही स्टेरॉयड इस्तेमाल करें और ज़िम्मेदारी से करें.
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उल्फ़ा (आई) ने 3 महीने के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, प्रतिबंधित उग्रवादी
संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (इंडिपेंडेंट) ने एकतरफ़ा संघर्ष विराम की
घोषणा की है.
पीटीआई के मुताबिक़, उल्फ़ा (आई) ने कोविड-19 की स्थिति के
कारण 3 महीनों के लिए यह संघर्ष विराम किया है.
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चीन ने तिब्बत की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ाई से लगाई रोक
इमेज स्रोत, AFP
चीन ने तिब्बत की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने से रोक लगा दी
है.
चीन ने ये कदम कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के चलते लगाया है.
चीन के पड़ोसी देश नेपाल में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे
हैं. नेपाल में एवरेस्ट के बेस कैंप से लौट रहे कई पर्वतारोही कोरोना
पॉज़िटिव पाए गए हैं.
चीन ने भी अपने कई दर्जन नागरिकों को एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए परमिट जारी
किया था.
इस हफ़्ते कई पर्वतारोही एवरेस्ट शिखर पर पहुंच चुके हैं. इस महीने और
पर्वतारोही शिखर पर पहुंचने वाले हैं.
मई का महीना आमतौर पर एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए सबसे अच्छा मौसम माना
जाता है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते एवरेस्ट चढ़ाई के लिए आ रहे पर्वतारोहियों को लेकर चिंता जताई जा रही है.
ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी का निधन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी का
शनिवार को निधन हो गया.
असीम बनर्जी कोरोना संक्रमित थे और कोलकाता के एक अस्पताल में
उनका इलाज चल रहा था.
टीएमसी सांसद और राज्य सरकार में मंत्री रतिन घोष ने ट्वीट किया, “ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी दा के निधन पर ममता बनर्जी,
अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं.”
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट कर अपनी संवेदना जताई है. उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी के निधन पर मेरी गहरी संवदेनाएं. शोकाकुल परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं हैं. भगवान उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति दें और दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें.”
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ब्रेकिंग न्यूज़, पश्चिम बंगाल में 30 मई तक के लिए लगा लॉकडाउन
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में 16 से
30 मई तक के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं. ये प्रतिबंध 16 मई सुबह 6 बजे से 30 मई शाम 6 बजे तक लागू होंगे.
प्रतिबंधों के तहत स्कूल, सरकारी व निजी दफ़्तर, मॉल, सिनेमा हॉल,
रेस्टोरेंट, जिम बंद रहेंगे. मेट्रो सेवाएं, अंतर्राज्यीय परिवहन सेवाएं निलबंत रहेंगी. निजी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक होगी.
लेकिन, आपातकालीन सेवाओं को प्रतिबंध से छूट दी गई है.
अतिआवश्यक सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, पशुचिकित्सा, क़ानून व्यवस्था, अदालत,
सामाजिक कल्याण गृह, जल आपूर्ति, टेलिकॉम, इंटरनेट, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक
मीडिया, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा, साफ-सफाई और अंतिम-संस्कार आदि
प्रतिबंध से बाहर रहेंगे.
जेवर और साड़ी की दुकानें दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक खुली रह सकती
हैं. मिठाई की दुकानों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलने की अनुमति होगी.
किराने की दुकानें और सब्जी व फल के बाज़ार सुबह 7 से सुबह 10 बजे तक
ही खुल सकेंगे.
बैंक और वित्तीय संस्थान सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक खुले
रहेंगे. पेट्रोल पंप, ऑटो रिपेयर की दुकानें, एलपीजी गैस ऑफिस और वितरण केंद्र
दिनभर खुले रहेंगे.
शादियों में 50 से ज़्यादा और अंतिम संस्कार में 20 से ज़्यादा लोगों
को आने की अनुमति नहीं होगी.
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मलेरकोटला को अमरिंदर सिंह ने बनाया नया ज़िला, योगी ने बताया असंवैधानिक
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पंजाब के मुख्यमंत्री
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 14 मई को ईद के मौक़े पर मलेरकोटला शहर को नया ज़िला बनाने
की घोषणा की थी.
मलेरकोटला मुस्लिम
बहुल शहर है. पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा था, ''ईद के शुभ मौक़े पर मुझे यह साझा करते हुए ख़ुशी हो रही है कि
मेरी सरकार ने मलेरकोटला को नया ज़िला बनाने का फ़ैसला किया है. यह पंजाब का 23वां
ज़िला होगा, जिसका ऐतिहासिक महत्व
है. मैंने आदेश दिया है कि तत्काल किसी ऐसी जगह की तलाश की जाए, जहाँ ज़िला प्रशासन का दफ़्तर बनाया जा सके.''
अमरिंदर सिंह की इस
घोषणा पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी आपत्ति जताई है.
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योगीने 15 मई
को ट्वीट कर कहा, ''मत और मज़हब के आधार
पर किसी प्रकार का विभेद भारत के संविधान की मूल भावना के विपरीत है. इस समय,
मलेरकोटला ज़िला (पंजाब) का गठन किया जाना,
कांग्रेस की विभाजनकारी नीति का परिचायक है.''
संगरूर ज़िला मुख्यालय
से मलेरकोटला की दूरी 35 किलोमीटर है. कांग्रेस ने चुनाव के दौरान इस शहर को ज़िला
बनाने की वादा किया था. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मलेरकोटला में 500 करोड़ के एक
मेडिकल कॉलेज, एक महिला कॉलेज,
एक नया बस स्टैंड और महिला पुलिस स्टेशन बनाने की
घोषणा की है.
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क्या है कोरोना के ख़िलाफ़ केजरीवाल की ओसीबी योजना?
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज से दिल्ली में
ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर बैंक (ओसीबी) सर्विस शुरू करने की घोषणा की है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली के हर ज़िले में ऐसा कंसेंट्रेटर
बैंक बनाया जायेगा जिनमें 200-200 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर होंगे.
केजरीवाल ने कहा कि जिन भी लोगों को होम आइसोलेशन के दौरान ऑक्सीजन
की ज़रूरत होगी, उनके घर पर दो घंटे के भीतर ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर भेजा जायेगा. जो टीम ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर देने जायेगी, उसमें एक टेक्नीशियन भी होगा जो परिजनों को मशीन के बारे में समझायेगा. ज़रूरत पूरी होने पर वो मशीन एक परिवार से वापस ली जायेगी, उसे सेनेटाइज़ किया जायेगा और उसे दूसरे ज़रूरतमंद परिवार को दिया जायेगा.
केजरीवाल ने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों में दिल्ली सरकार ने
एक हज़ार नये आईसीयू बेड जोड़े हैं.
दिल्ली सरकार के अनुसार, दिल्ली में कोरोना की संक्रमण दर
अब 11 प्रतिशत हो गई है और कोरोना के नये मामले लगातार घट रहे हैं.
कोरोना की वजह से पश्चिम बंगाल में 16-30 मई तक संपूर्ण लॉकडाउन
कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए पश्चिम बंगाल की
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेश में 16 मई से 30 मई तक संपूर्ण लॉकडाउन लागू
करने की घोषणा की है.
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इसराइल से रिश्ता कायम करने वाले यूएई ने भी जताई गहरी चिंता
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संयुक्त अरब अमीरात के विदेश
मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाह्यान ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच
बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता ज़ाहिर की है. उन्होंने उन परिवारों के लिए संवेदना
व्यक्त की है जिनके अपनों ने इस हिंसक संघर्ष में जान गंवा दी है.
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि तनाव
को जल्द से जल्द कम किया जाना चाहिए, हिंसक कार्रवाई रोकी जानी चाहिए और इसके लिए
सभी पक्षों को मिलकर हल निकालना होगा.
संयुक्त अरब अमीरात ने इसराइल और
फ़लस्तीनियों के बीच राजनीतिक वार्ता शुरू किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.
संयुक्त अरब अमीरात द्वारा जारी
किये गए बयान में कहा गया है कि “इस सप्ताह जो हिंसक
संघर्ष देखने को मिला है, वो शांति पूर्वक ढंग से, बातचीत के ज़रिये ही हल किया जा
सकता है. इसकी शुरुआत की जानी चाहिए. हम चाहते हैं कि पड़ोसी देश एक दूसरे से शांति
और परस्पर सम्मान बनाये रखें. इस वक़्त दोनों पक्षों के नेताओं को चाहिए कि वो
स्थिति को सामान्य करें और भड़काने वाली कोई कार्रवाई ना करें, तभी तनाव कम किया
जा सकता है.”
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पिछले साल अगस्त में, इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रिश्तों को सामान्य करने को लेकर सहमति बनी थी जिसकी घोषणा अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. यूएई ने तमाम विरोधो के बावजूद इसराइल से राजनयिक रिश्ता कामय कर लिया था. यूएई के बाद बहरीन ने भी इसराइल से औपचारिक संबंध कायम कर लिया था.
तब एक संयुक्त बयान में डोनाल्ड ट्रंप, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और अबु धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद अल नाह्यान ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि "इस ऐतिहासिक सफलता से मध्य-पूर्व में शांति बढ़ेगी."
तब ये भी कहा गया था कि इस समझौते के परिणामस्वरूप इसराइल वेस्ट बैंक के बड़े हिस्सों को मिलाने की अपनी योजना स्थगित कर देगा.
इस समझौते से पहले इसराइल का खाड़ी के अरब देशों के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं था.
इस समझौते के बाद अमेरिका में यूएई के राजदूत यूसुफ़ अल ओतैबा ने एक बयान में कहा था कि ये कूटनीति और क्षेत्र के लिए एक जीत है. ये अरब-इसराइल रिश्तों में एक महत्वपूर्ण बढ़त है जो तनाव कम करेगी और सकारात्मक बदलाव के लिए नई ऊर्जा का निर्माण करेगी.
लेकिन मौजूदा संघर्ष के दौरान, फ़लस्तीनियों के समर्थन में इसराइल में रहने वाले अल्पसंख्यक अरब समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और इसराइल की सरकार ने इस संकट के दौरान उन्हें एक मुसीबत बताया है, साथ ही देश में आंतरिक अशांति की वजह बताया है. ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, इसराइल में रहने वाले 400 से ज़्यादा अरब लोगों को फ़लस्तीनियों के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए गिरफ़्तार किया गया है.
जिस वक़्त इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच यह समझौता हुआ था, तब फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराज़गी जताई थी.
फ़लस्तीनी नेतृत्व ने उस समय एक बयान में कहा था कि इस समझौते से फ़लस्तीनियों के अधिकारों और अरब की ओर से उठाये गए संयुक्त क़दमों को नुक़सान पहुँचेगा.
चक्रवात टोकटे को लेकर मौसम विभाग ने किया आगाह
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इमेज कैप्शन, चक्रवात टोकटे से केरल में प्रभावित लोग
भारतीय मौसम विभाग
के अनुसार चक्रवाती तूफ़ान 'टोकटे' का केंद्र अभी लक्षद्वीप है जो शनिवार सुबह और तीव्रता
से आगे बढ़ रहा है. यह चक्रवाती तूफ़ान तेज़ होता जा रहा है. इसका प्रभाव लक्षद्वीप
के साथ दक्षिणी-पूर्वी और पूर्वी-मध्य अरब सागर में है. इस चक्रवात को लेकर दक्षिणी
गुजरात और दीव के समुद्री तटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री ने इस चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए शीर्ष अधिकारियों और एनडीएमए की बैठक बुलाई है.
चक्रवाती तूफ़ान जैसे-जैसे पश्चिमी तटो की ओर बढ़ा रहा है, प्रशासन की चिंता भी बढ़ती जा रही है. भारतीय नौसेना ने प्रशासन
को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. भारतीय नौ सेना ने अपने ट्वीट में कहा है, ''भारतीय नौसेना के जहाज़, पोत, हेलिकॉप्टर, गोताखोर और आपदा राहत टीम पश्चिमी तट पर मदद के लिए मुस्तैद
हैं.''
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मौसम विभाग ने शुक्रवार
को अंदेशा जताया था कि 17 मई तक यह चक्रवाती
तूफ़ान 150 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तबाही मचा सकता
है. मौसम विभाग के अनुसार यह चक्रवाती तूफ़ान शुरू में उत्तरी-पूर्व की ओर से बढ़ेगा
और फिर उत्तर और उत्तर-पश्चिम से होते हुए गुजरात के तटों तक 18 मई की सुबह तक पहुँचेगा.
इस चक्रवाती तूफ़ान
को लेकर केरल के पाँच ज़िलों- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलप्पु्ज्हा,
पथानमिट्टा और एर्नाकुलम में रेड अलर्ट जारी किया
गया है. इन इलाक़ों में आपदा प्रबंधन टीम को तैनात कर दिया गया है. मुंबई और ठाणे में
भी इसी वीकेंड में चक्रवाती तूफ़ान के पहुँचने की आशंका है. मौसम विभाग ने इन्हें भी
सतर्क कर दिया है.
मौसम विभाग के अनुसार
महाराष्ट्र में तूफ़ान का असर 18मई तक धीरे-धीरे कमज़ोर
पड़ सकता है. 18मई के बाद यह गुजरात की ओर
बढ़ेगा.
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इसराइल के ख़िलाफ़ एकजुट हों इस्लामिक देश: महातिर मोहम्मद
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इमेज कैप्शन, मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ महातिर मोहम्मद
मलेशिया के पूर्व
प्रधानमंत्री डॉ महातिर मोहम्मद ने कहा है कि अरब-इसराइल संघर्ष का समाधान मुस्लिम
देशों की संयुक्त कार्रवाई और जो फ़लस्तीनियों के हक़ों के साथ उनके संघर्ष समर्थन
करते हैं, की मदद से किया जा सकता है.
महातिर मोहम्मद ने
कहा कि अगर आप प्रतिशोध की भावना से लड़ रहे हैं तो इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा. उन्होंने
कहा कि मानवाधिकारों का समर्थन करने वालों और इस्लामिक देशों कोफ़लस्तीनियों के समर्थन में साथ आना चाहिए.
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महातिर मोहम्मद ने
कहा, ''मुझे उम्मीद है कि अरब वर्ल्ड
और फ़लस्तीनी एक साथ बैठकर इसराइल को लेकर कोई ठोस रणनीति बनाएंगे. मुझे उम्मीद है
कि मुस्लिम वर्ल्ड वर्तमान हालात को देखते हुए जागेगा. इसराइल का हमला मानवता के ख़िलाफ़
है. दुनिया को लगता है कि फ़लस्तीनी इसराइल को उकसा रहे हैं लेकिन आज तो सच यह है कि
फ़लस्तीनी अपनी मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे और इसराइल ने इन पर हमला किया.''
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96 साल के महातिर मोहम्मद
ने कहा कि अल-अक्शा मस्जिद में फ़लस्तीनी नमाज़ अदा कर रहे थे और ऐसे में इसराइली सुरक्षाबलों
के हमले का कोई मतलब नहीं था.
महातिर मोहम्मद ने
कहा, ''नमाज़ पढ़ रहे लोग किसी के
लिए ख़तरा कैसे हो सकते हैं? अरब के देशों को अपने
में लड़ने के बजाय फ़लस्तीनियों के बारे में सोचना चाहिए. पूरी दुनिया देख रही है कि
इसराइल मानवाधिकारों की चिंता बिल्कुल नहीं कर रहा है.’’
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WHO प्रमुख बोले- भारत में कोरोना की स्थिति बेहद चिंताजनक
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विश्व स्वास्थ्य संगठन
यानी WHO के प्रमुख डॉ टेड्रोस एडनोम
गेब्रिएसेस ने शुक्रवार को कहा कि भारत में कोरोना संक्रमण की स्थिति अब भी बेहद चिंताजनक
है.
उन्होंने कहा कि भारत
के कई राज्यों में अब भी कोरोना के मामले कम नहीं हो रहे हैं. WHO प्रमुख ने कहा कि भारत के कई राज्यों में अब भी
अस्पतालों में मरीज़ों की भर्ती के लिए मारामारी की स्थिति है और मौतें भी नहीं थम
रही हैं.
वीडियो कैप्शन, कोरोना से ठीक होने के कितने दिन बाद लगवाएं वैक्सीन?
डॉ टेड्रोस ने कहा
कि दूसरे साल की कोरोना महामारी पहले साल की तुलना में ज़्यादा ख़तरनाक और जानलेवा
है. WHO प्रमुख ने कहा कि भारत में
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन मदद कर रहा है.
उन्होंने कहा
कि भारत में हज़ारों ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स, मोबाइल फील्ड हॉस्पिटल के लिए टेंट, मास्क और मेडिकल आपूर्ति भेजी जा रही है.
डॉ टेड्रोस ने कहा,
''भारत में हालात अब भी बेहद चिंताजनक हैं. कई राज्यों
में संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं और मृतकों की संख्या भी बढ़ रही है.''
डॉ टेड्रोस ने ये बाते दैनिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस
में कही. WHO प्रमुख ने कहा कि
मैं उन सभी मुल्कों को शुक्रिया कहूंगा जो मुश्किल वक़्त में भारत को मदद पहुँचा रहे
हैं.
वीडियो कैप्शन, भारत पर आए कोरोना संकट के बारे में क्या बोले पीएम मोदी?
भारत में हर दिन कोरोना
के नए मामले लाखों में आ रहे हैं. शुक्रवार को भारत में कोविड के 3,40,000 नए मामले दर्ज किए गए थे. भारत में पिछले साल 19 दिसंबर को कोरोना संक्रमण की तादाद एक करोड़ पहुँच
गई थी और अगले छह महीने में चार मई को दो करोड़ हो गए.
डॉ टेड्रोस ने कहा
कि कोरोना को लेकर आपातकालीन स्थिति केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. उन्होंने कहा,
''नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, थाईलैंड और मिस्र जैसे देश भी कोरोना के बढ़ते मामलों
से परेशान हैं. इन मुल्कों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हालात ठीक नहीं हैं. लातिन
अमेरिकी देशों में कोरोना के नए मामले बढ़ रहे हैं.''
वीडियो कैप्शन, कोरोना से बेहाल उत्तर प्रदेश, क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह?
डॉ टेड्रोस ने कहा
कि पिछले हफ़्ते कोरोना से जितनी मौतें हुईं उनमें लातिन अमेरिकी देशों का हिस्सा 40 फ़ीसदी है.
WHO प्रमुख ने कहा कि
कुछ अफ़्रीकी देशों में भी कोरोना के नए मामले बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन देशों
में WHO मदद पहुँचाता रहेगा. डॉ टेड्रोस
ने कहा कि कोरोना से अब तक दुनिया भर में 33 लाख लोगों की जान जा चुकी है. उन्होंने कहा कि वैक्सीन की आपूर्ति
अब भी पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है.
वीडियो कैप्शन, कोरोना वैक्सीन को लेकर आदिवासी इलाकों में कैसी ग़लतफ़हमी है?
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