गोवा और उत्तराखंड ने कहा है कि वह अपने राज्य में लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने के लिए एंटी-पैरास्टिक ड्रग आइवरमेक्टिन का इस्तेमाल करेंगे.
दोनों राज्यों में हाल में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड-19 मरीज़ों में इस दवा को न इस्तेमाल करने की चेतावनी के वाबजूद राज्यों ने ये क़दम उठाने का फ़ैसला लिया है.
ये जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दी है.
मार्च महीने के आख़िर में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बयान जारी कर कहा था, "कोविड-19 के मरीज़ों के इलाज में आइवरमेक्टिन के इस्तेमाल को लेकर जो प्रमाण अभी मौजूद हैं उनसे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है. जब इस दवा को बनाने वाली कंपनी मर्क का भी कहना है कि इस एंटी-पैरास्टिक ड्रग का इस्तेमाल कोविड के इलाज में नहीं करना चाहिए इसे लेकर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है."
संक्रमण से होने वाली बीमारियों की जानकार अनीता मैथ्यू ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "हमारे पास पर्याप्त डेटा नहीं है जिसकी बुनियाद पर इस दवा को इस्तेमाल किया जाए."
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मनाही फिर भी इस्तेमाल की इजाज़त
इस दवा को बनाने वाली कंपनी मर्क का कहना है कि इस एंटी-पैरास्टिक ड्रग का इस्तेमाल कोविड के इलाज में नहीं करना चाहिए इसे लेकर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है.
संक्रमण से होने वाली बीमारियों की जानकार अनीता मैथ्यू ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "हमारे पास पर्याप्त डेटा नहीं है जिसकी बुनियाद पर इस दवा को इस्तेमाल किया जाए."
इस सप्ताह की शुरूआत में गोवा ने कहा कि वह अपने राज्य में 18साल की उम्र से अधिक आयु वाले लोगों को आइवरमेक्टिन की डोज़ देगा.
वहीं, उत्तराखंड ने कहा है कि वह अपने राज्य में 2 साल उम्र से अधिक आयु वाले सभी लोगों को ये दवा देगा. हालांकि उत्तराखंड में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं महिलाओं को ये दवा नहीं दी जाएगी.
उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव ओम प्रकाश ने समचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि "एक्सपर्ट के एक पैनल ने इस दवा के इस्तेमाल की सलाह दी है, हम सप्लाई का इंतज़ार कर रहे हैं जैसे ही सप्लाई मिल जाएगी हम लोगों को ये दवा देना शुरू कर देंगे."
कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र गोवा में इस सप्ताह लॉकडाउन 15 दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है, यहां हर तीन में से एक मरीज़ कोविड पॉज़िटिव पाया जा रहा है.
हाल ही में गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा था कि यूरोप के एक एक्सपर्ट पैनल ने पाया है कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीज़ रिकवर जल्दी कर रहे हैं और मौत होने का ख़तरा भी कम हो रहा है.
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी दवा नियामक एफ़डीए का कहना है कि इसे लेकर बेहद कम साक्ष्य उपलब्ध हैं.
भारत के आईसीएमआर ने मध्यम लक्षण वाले कोरोना मरीज़ों पर इस दवा के इस्तेमाल की इजाज़त दी है लेकिन साथ ही चेताया है कि इसके ‘प्रमाण की निश्चितता बेहद कम’ है.