भारत ने कहा है कि मार्च महीने में पाए जाने वाला कोरोना वायरस का नया वेरिएंट देश में भयावह होती कोरोना की दूसरी लहर के पीछे बड़ा कारण हो सकता है.
कई राज्य जहां कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहां के सैंपल में डबल म्यूटेंट या B.1.617 वेरिएंट पाया गया है.
ये बात नेशनल सेंटर फॉर डिज़िज़ कंट्रोल के एक अधिकारी ने कही है. हालांकि उनका कहना है कि अब तक बढ़ते केस और नए म्यूटेंट के सह-संबंध को ‘पूरी तरह स्थापित नहीं’ किया जा सका है.
दरअसल, डबल म्यूटेंट वो होता है जब एक ही वायरस में दो म्यूटेंट शामिल हो जाते हैं.
बुधवार को भारत में 412,000 नए केस सामने आए हैं और 24 घंटों में 3,980 लोगों की मौत हुई है.
सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक सलाहकार ने भी चेताया है कि देश में तीसरी लहर आनी तय है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस में के.विजयराघवन ने माना कि जानकार इस का अंदाज़ा नहीं लगा पाए कि दूसरी लहर इतनी ‘प्रभावी’ होगी और इतने ज़्यादा लोगों को संक्रमित कर देगी.
इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘’जिस तरह का संक्रमण फैल चुका है, उससे साफ़ है कि देश में आने वाली तीसरी लहर को कोई नहीं रोक सकता. हालांकि ये कब आएगी इसका कोई अंदाज़ा नहीं है लेकिन हमें इसके लिए तैयार रहना होगा. ’’
मौजूदा वक़्त में भारत में कोरोना ने भयंकर हालात पैदा कर दिए हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, अस्पतालों में बेड नहीं है, जिन्हें बेड मिल गए हैं वो ऑक्सीज़न की कमी से जूझ रहे हैं.
लगभग हर दिन राजधानी में कोई ना कोई अस्पताल ऑक्सीज़न के लिए एसओएस कॉल जारी करते हैं.
विपक्ष सहित वायरोलॉजिस्ट देश में लॉकडाउन लगाने की सलाह दे रहे हैं.
डबल म्यूटेंट वेरिएंट कहां मिला?
आठ राज्यों से लिए गए लगभग13,000 सैंपल सीक्वेंस करने पर 3,500 से ज्यादा सैंपल में परेशान करने वाले म्यूटेंट वायरस पाए गए हैं जिसमे B.1.617 भी शामिल है.
B.1.617 वेरिएंट गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के सैंपल में पाए गए हैं. इन सभी राज्यों में संक्रमण बढ़ रहे हैं.
बीते एक महीने से भारत इस नए वेरिएंट और बढ़ते केस के बीच किसी भी संबंध को मानने इंकार करता रहा है.
हालांकि अब केंद्र सरकार ये मान रही है कि भारतीय वेरिएंट बढ़ते केस के पीछे की संभव वजह हैं लेकिन फिर भी इसे ‘पूरी तरह स्थापित’ ना किए जाने की भी बात की जा रही है.
कुछ दिनों पहले बीबीसी से बात करते हुए वायरोलॉजिस्ट शाहीद जमील ने बताया था कि भारत कुल सेंपल का केवल 1% सेंपल सीक्वेंस कर रहा है, वहीं ब्रिटेन अपने पीक समय में 5-6% सैंपल सीक्वेंस करता था.
हालांकि वे ये भी मानते हैं कि दोनों देशों की क्षमताओं में काफ़ी अंतर है तो रातोंरात इसे कम नहीं किया जा सकता.