मुंबई एयरपोर्ट पर बिना पहिए के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

एक एयर एंबुलेंस ने गुरुवार रात को मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की. नागपुर से उड़ान भरने के बाद विमान का पहिया टूट गया था.

लाइव कवरेज

  1. इमरान ख़ान ने पाकिस्तानी राजदूतों को लगाई डांट, भारतीय राजनयिकों की तारीफ़ की

    इमरान खान

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    कोरोना महामारी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत भी बदतर होती जा रही है. ऐसे में पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि विदेशों में काम कर रहे पाकिस्तानियों के लिए दूतावास सक्रिय रहे.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब स्थित पाकिस्तानी राजदूतों को फ़टकार लगाते हुए भारतीय दूतावासों की तारीफ़ की है.

    उन्होंने कहा कि हमारे दूतावास,ख़ासकर रियाद और जेद्दा के दूतावास में ना तो आम पाकिस्तानियों की मदद की जा रही है और ना ही निवेश को लेकर कोई कोशिश की जाती है, वहीं भारतीय दूतावास इसे लेकर काफ़ी सक्रिय रहते हैं और निवेश भी लाते हैं.

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पाकिस्तानी राजदूतों से की गई बैठक में इमरान ख़ान ने कहा,‘’रियाद और जेद्दा में जो दूतावास का हाल है वो विचलित करने वाला है. सऊदी अरब के दूतावास के रवैये पर उच्च स्तरीय जांच की जा रही है. जल्द ही उसके नतीजे सामने होंगे और कई सारी बातें भी सामने आएंगी.’’

    ‘’मैं ख़ुद 20 सालों तक लंदन में रहा हूँ और दूतावास-उच्चायोग में मेरा आना-जाना रहा है. लेकिन हमारा दूतावास विदेशों में रह रहे मेहनतकश मज़दूर पाकिस्तानियों के प्रति बड़ा बुरा रवैया रखता है. मैंने अपने जानने वाले सऊदी के लोगों से पाकिस्तानी दूतावास को लेकर फीडबैक मांगा और जिस तरह की जानकारी मुझे मिली उससे मैं हैरान रह गया. दूतावास पाकिस्तानियों के प्रति बड़ा लापरवाह रवैया रखता है.''

    इसके बाद हमने सिटीज़न पोर्टल के ओवरसीज़ पाकिस्तानी सेक्शन से आम लोगों की शिकायतों की एक लिस्ट निकाली. उससे भी समझ में आया कि किस तरह हमारे दूतावास का ग़रीबों के प्रति रवैया निराश करने वाला है. मैं लिस्ट आपसे साझा कर रहा हूँ और आपको बताना है कि आगे क्या करना है क्योंकि इस तरह का औपनिवेशिक रवैया अब अख्तियार नहीं किया जा सकता.’’

    इमरान ख़ान

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    ‘’दूतावास का काम विदेशों में रह रहे हमारे लोगों की मदद करना है और मुल्क़, जो इस वक़्त बेहद मुश्किल आर्थिक हालात में है उसमें निवेश के लिए काम करना है. वो वक्त अब चला गया जब इंग्लैंड में पाकिस्तान के राजदूत अंग्रेज़ों से मिल कर ख़ुश हो जाया करते थे और उन्हें नहीं लगता था कि इस मुल्क को निवेश की ज़रूरत है. मैं ये कहना चाहूंगा कि भारत के राजदूत इस मामले में हमसे कहीं ज़्यादा सक्रिय रहते हैं, वे निवेश भी लाते हैं.’’

    ‘’ख़ासकर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के दूतावास से सबसे ज्यादा शिकायतें मिलती हैं. यहां लोगों को मुलाक़ात का वक़्त दे कर मिलते नहीं हैं. ग़रीब अपने पैसे जोड़ कर दूतावास आता है लेकिन यहाँ का स्टाफ़ उन्हें सुनता नहीं है. इन दो देशों से ही सबसे ज़्यादा हमारे लोग रहते हैं.’’

    ‘’हमें शिकायत मिली है कि कई बार एक ही तरह की शिकायत मिलने पर भी दूतावास की ओर से इसे सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की जाती. हम अपने लोगों को पाकिस्तान में नौकरी दे नहीं सकते लेकिन जब वो दो पैसे कमाने बाहर जाते हैं तो उन्हें सुनना उनकी मदद करना हमारी ज़िम्मेदारी है.’’

    ‘’हम जांच कर रहे हैं और अब इस पर निगरानी की जाएगी,

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  2. कोरोना: केरल और हिमाचल में लगा 16 मई तक लॉकडाउन

    corona

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    कोरोना संक्रमण के गहराते संकट को देखते हुए केरल में 8 मई से 16 मई तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया है.

    8 मई को सुबह 6 बजे से ये लॉकडाउन लागू होगा. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के कार्यालय ने इसकी घोषणा की है.

    केरल के अलावा कई अन्य राज्य भी लॉकडाउन की ओर बढ़ रहे हैं.

    हिमाचल प्रदेश ने भी सात मई से 16 मई तक कोरोना कर्फ्यू की घोषणा की है. राज्य में शिक्षण संस्थान 31 मई तक बंद रहेंगे. इसके अतिरिक्त दसवीं क्लास के विद्यार्थी प्रमोट किए जाएंगे.

    यह निर्णय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया.

    दिल्ली और महाराष्ट्र, में पहले से ही लॉकडाउन जारी है. वहीं यूपी, ओड़िशा जैसे राज्यों में नाइट कर्फ़्यू लागू है.

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  3. भारत में अब कोरोना का लोकल वेरिएंट हुआ ख़तरनाक

    कोरोना

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    भारत में कोरोना वायरस का लोकल वेरिएंट बढ़ते संक्रमण का कारण बन रहा है.

    नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के प्रमुख सुजीत कुमार ने बताया है कि ‘’भारत में यूके वेरिएंट वाले कुछ कोरोना संक्रमण के मामले शुरुआती दिनों में मिले थे, लेकिन अब कई राज्यों में कोरोना के स्थानीय वोरिएंट के संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं.’’

    कोरोना

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    बुधवार को केंद्र सरकार ने कहा कि देश में तेज़ी से बढ़ते कोरोना संक्रमण का संबंध डबल म्यूटेंट वेरिएंट से है. इससे पहले सरकार ने कहा था कि B.1.617 वेरिएंट के इतने मामले नहीं मिले हैं कि भारत में आई दूसरी लहर की तबाही से जोड़ा जा सके.

    लेकिन अब सरकार का कहना है कि कुछ राज्यों में संक्रमण के बढ़ते मामलों का संबंध B.1.617 वेरिएंट से है. हालांकि सरकार ने ये भी कहा है कि B.1.617और बढ़ते कोरोना मामलों का संबंध पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं हो पाया है.

    भारत में यूके, ब्राज़ील और साउथ अफ़्रीका के वेरिएंट हैं और सरकार ने इन्हें चिंताजनक वेरिएंट बताया है. 13,000 सैंपल की जाँच की गई और इनमें से 3532 मामले वेरिएंट ऑफ कंसर्न में पाए गए जबकि 1527 मामले B.1.617 वेरिएंट के मिले. ये वेरिएंट ज़्यादातर महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश में पाए गए हैं.

    कोरोना

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  4. ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में कोरोना की तबाही जारी, 24 घंटे में सवा चार लाख लोग संक्रमित, चार हज़ार के क़रीब मौतें

    कोरोना

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    बुधवार को देश भर में कोरोना के 4,12,262 नए मामले सामने आए हैं और पिछले 24 घंटों में 3,980 लोगों की संक्रमण से मौत हुई है.

    इस वक़्त देश में कुल सक्रिय मामले 35,66,398 हैं.

    गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इन आँकड़ों की जानकारी दी गई है.

    बीते 24 घंटों में 3,29,113 लोग अस्पताल से ठीक हो कर अपने घर लौटे हैं.अब तक देश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 2,10,77,410 हो चुके हैं और इससे मरने वालों की संख्या 23,01,68हो चुकी है.

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  5. कोविड वैक्सीन के पेटेंट में छूट देगा अमेरिका, भारत के लिए बड़ी राहत

    अमेरिका

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का यह फ़ैसला कोरोना महामारी की जंग जीतने में बेहद अहम माना जा रहा है. राष्ट्रपति बाइडन ने बुधवार को कोविड-19 वैक्सीन को बौद्धिक संपदा के पेटेंट से मुक्त रखने का समर्थन किया है.

    पहले से ही भारत, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील जैसे देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिश कर रहे थे कि कोविड वैक्सीन को पेटेंट मुक्त रखा जाए ताकि उन्हें इस महामारी से लड़ने में मदद मिले.

    विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में अमेरिका इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ था कि वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए बौद्धिक संपदा पेटेंट से बाहर रखा जाए. लेकिन जो बाइडन पर इसे लेकर काफ़ी दबाव था. यहाँ तक कि कांग्रेस में भी डेमोक्रेटिक सांसद चाहते थे कि वैक्सीन को पेटेंट के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि बाक़ी के देशों को कोरोना की लड़ाई में मदद मिले.

    WTO में अमेरिका की वाणिज्य दूत कैथरीन ताइ

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    इमेज कैप्शन, WTO में अमेरिका की वाणिज्य दूत कैथरीन ताइ

    बुधवार को WTO मेंअमेरिका की वाणिज्य दूत कैथरीन ताइ ने कहा, ''यह बहुत ही असाधारण वक़्त है और हमने असाधारण फ़ैसला लिया है. अमेरिका ने कोविड-19 वैक्सीन को बौद्धिक संपदा पेटेंट से बाहर रखने का समर्थन किया है ताकि महामारी को ख़त्म करने में मदद मिले.’’

    ‘’हम बौद्धिक संपदा के पेटेंट में पूरा भरोसा रखते हैं लेकिन कोविड-19 वैक्सीन में छूट दे रहे हैं ताकि पूरी दुनिया से महामारी को ख़त्म करने में मदद मिले. हमारा लक्ष्य है कि दुनिया भर में लोगों तक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन पहुँचे. हम वैक्सीन के लिए रॉ मटीरियल के उत्पादन को भी बढ़ाएंगे.''

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    बाइडन प्रशासन पर एक्टिविस्टों का भी दबाव था कि महामारी के वक़्त में अमेरिका वैक्सीन को पेटेंट से मुक्त रखे. लेकिन कहा जा रहा है कि केवल पेटेंट में छूट देने से ही वैक्सीन की आपूर्ति में बढ़ोतरी नहीं हो जाएगी. इसके लिए तकनीक ट्रांसफर की भी ज़रूरत होगी और इस तकनीक के इस्तेमाल को सीखाना भी होगा.

    याले यूनिवर्सिटी के संक्रमण विशेषज्ञ और एड्स एक्टिविस्ट ग्रेग गोंजाव्लेस ने कहा कि यह शुरुआत है और आगे बाक़ी की प्रक्रिया के लिए इंतज़ार करना होगा. उन्होंने कहा कि इसमें तकनीक ट्रांसफर के बिना नहीं होगा. WTO में भारत और दक्षिण अफ़्रीका ने कोविड-19 वैक्सीन को बौद्धिक संपदा के पेटेंट के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव पेश किया था.

    अमेरिका

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    कोविड वैक्सीन को पेटेंट मुक्त रखने से भारत में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा और कई तरह की वैक्सीन का उत्पादन हो सकेगा. भारत एक अरब 30 करोड़ की आबादी वाला देश है और अमेरिका के इस फ़ैसले से व्यापक पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाने में बड़ी मदद मिलेगी.

    अमेरिका के इस फ़ैसला का विश्व स्वास्थ्य संगठन से स्वागत किया है. WHOप्रमुख ने अपने बयान में कहा है कि यह एक प्रभावी नेतृत्व का फ़ैसला है तो दुनिया की स्वास्थ्य चिंताओं को समझता है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है जिससे दुनिया के हर किसी को मुश्किल वक़्त में मदद मिलेगी.

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  6. कोरोना मई के अंत तक देश में कम होने लगेगा संक्रमणः डॉ. कांग

    कोरोना

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    जानी-मानी वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कांग का कहना है कि देश में मई के अंत तक कोविड-19 की दूसरी लहर का असर कम होने लगेगा.

    बुधवार को भारतीय महिला प्रेस कोर की सदस्यों से एक वर्चुअल बातचीत में उन्होंने कहा, ‘’जिस तरह के मॉडल हम देख रहे हैं, उससे एक अंदाज़ा लगाया सकता है कि मई के मध्य से लेकर अंत तक कोरोना का प्रभाव कम होने लगेगा. कुछ मॉडल को देखते हुए ये भी संभव है कि जून की शुरुआत में केस कम होने लगें. लेकिन जो हमें अभी नज़र आ रहा है उसके आधार पर मई के आख़िरी में ऐसा होने की ज़्यादा संभावना है.‘’

    कांग भारत की पहली महिला वैज्ञानिक हैं, जिन्हें रॉयल सोसायटी के फेलो को रूप में चुना गया है. वह वायरस और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए किए गए इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए जानी जाती है. वह इस वक़्त पंजाब और आंध्र प्रदेश सरकार के साथ बतौर सलाहकार जुड़ी हुई हैं और महामारी से निपटने में राज्यों की मदद कर रही हैं.

    उन्होंने भारत में लगाई जा रही दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के प्रभावी होने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी लोगों के संशय को दूर किया और कहा कि जल्द ही भारत में और भी वैक्सीन का विकल्प उपलब्ध होगा.

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    वह कहती हैं, ‘’वैक्सीन बीमारियों से बचाती हैं,ये बीमारियों से सुरक्षा तो देती ही हैं साथ ही संक्रमण से भी बचाती है. अगर आप संक्रमण से बचे हैं तो आप इसे बाक़ियों तक पहुँचा भी नहीं सकते. इसलिए वैक्सीन हमेशा गंभीर बीमारियों के खिलाफ़ काफ़ी अच्छा काम करती है.‘’

    वह ये भी जोड़ती हैं कि वैक्सीन संक्रमण को रोक नहीं सकती हैं लेकिन उसे कम ज़रूर करती हैं.

    डॉ. कांग देश में कोरोना की दूसरी लहर का ज़िम्मेदार मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाक़े में इसके विस्तार को मानती हैं- जहां ये संक्रमण पहली लहर के दौरान नहीं पहुंचा था.

    आर वर्ल्ड इन डेटा वेबसाइट पर मौजूद डेटा साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इर बार जो केस हमें दिख रहे हैं वो पिछली बार की तुलना में तीन-साढे तीन गुना ज़्यादा हैं.‘’जितना तेज़ी से ये संक्रमण बढ़ा है उतनी ही तेज़ी से ही ये घटेगा भी. टेस्टिंग कम होने के बावजूद हम इस वक़्त कोरोना के मामलों में पीक देख रहे हैं. हर दिन चार-साढे चार लाख नए मामले सामने आ रहे हैं.‘’

    कोरोना

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    क्या देश भर में लॉकडाउन ही आगे का रास्ता हो सकता है?

    इस सवाल पर वह कहती हैं, ‘’अगर हम अगले दो-तीन सप्ताह तक कम नए केस चाहते हैं तो लॉकडाउन इसमें ज़रूर मदद करेगा. हमें आज ही लॉकडाउन लगाना चाहिए इससे एक बार की गारंटी होगी कि आने वाले दिनों में केस कम हो जाएंगे.’’

    ‘’लेकिन सवाल ये है कि क्या हम ये करने की स्थिति में हैं,अगर आप ये करते हैं तो आपको दिखाना होगा कि आपने बीते साल जो मानवीय त्रासदी लॉकडाउन से पैदा हुई थी उससे निपटने के लिए क्या सीखा है,अगर ये गारंटी दी जाए कि वैसा फिर नहीं होगा,लोगों को रहने के लिए सुरक्षित जगह,खाना दिया जाए,ये तय किया जाए कि मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होता तो लॉकडाउन लगाना चाहिए.‘’

    18 से 44 साल के लोगों को संक्रमण का सबसे कम खतरा है,अपेक्षाकृत बुजुर्ग और वो लोग जिन्हें पहले से शुगर,ब्लड-प्रेशर जैसी बीमारियां हैं,उन्हें ख़तरा थोड़ा ज्यादा है.

    कांग कहती हैं, ‘’हर देश में वैक्सीन को फ़ेज में बाँट कर ही शुरू किया गया है,ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि जिन लोगों को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है उन्हें से सबसे पहले मिले.‘’

  7. बाइडन का यह फ़ैसला भारत के लिए बड़ी जीत

    जो बाइडन

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    कोरोना वायरस वैक्सीन को बौद्धिक संपदा अधिकार से बाहर रखने की विश्व व्यापार संगठन (WTO) की पहल का अमेरिका ने समर्थन किया है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने डेमोक्रेटिक सांसदों और 100 से अधिक अन्य देशों के बढ़ते दबाव के कारण बुधवार को यह अस्थायी समर्थन दिया. हालांकि, इससे दवा कंपनियां ख़ासे ग़ुस्से में हैं.

    भारत और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों ने इसका प्रस्ताव दिया था, उनका तर्क है कि इससे दुनिया भर में वैक्सीन उत्पादन में तेज़ी आएगी.

    हालांकि, दवा निर्माताओं का अलग तर्क है, उनका कहना है कि इस छूट से उत्पादन नहीं बढ़ेगा क्योंकि कॉन्ट्रैक्टर्स के पास तकनीक नहीं है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉक्टर टेड्रॉस गेब्रेयासिस ने कहा है कि राष्ट्रपति बाइडन का छूट को समर्थन कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग में एक ‘ऐतिहासिक क्षण’है.

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने चेताया है कि विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों के बीच इस पर सहमति में वक़्त लगेगा.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिका समेत कई देशों ने पहले व्यापार संगठन में भारत और दक्षिण अफ्रीका के छूट प्रस्ताव में रोड़ा अटका दिया था. इस प्रस्ताव का मक़सद विकासशील देशों में दवा कंपनियों के आईपी का इस्तेमाल करते हुए कोविड-19 वैक्सीन बनाने में मदद करना था.

    ताई ने कहा कि बाइडन प्रशासन बौद्धिक संपदा की सुरक्षा का मज़बूती से समर्थन करता है लेकिन महामारी को ख़त्म करने की सेवा में कोविड-19 वैक्सीन की सुरक्षा में छूट को समर्थन किया जा रहा है.

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