राहुल गांधी ने कहा- ऑक्सीजन, बेड और श्मशान के लिए भी लाइनें, मोदी हैं ज़िम्मेदार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए ख़ास इंटरव्यू में कहा है कि भारत में कोविड-19 महामारी की गंभीरता और लाइनों को देखकर पूरी दुनिया हिल गई है.
लाइव कवरेज
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली में आज कोरोना के 25,219 नए मामले, 412 मौतें
राजधानी दिल्ली में शनिवार को कोरोना संक्रमण
के कुल 25,219 नए मामले दर्ज किए गए जबकि यहां 412 मौतें हुईं. दिल्ली में अब तक इतनी
बड़ी संख्या लोगों की मौत नहीं हुई थी.
दिल्ली सरकार द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के
अनुसार दिल्ली की पॉज़िटिविटी दर 31.61 फीसदी है, यानी टेस्ट कराने वाले हर तीन में से एक व्यक्ति संक्रमित है.
आंकड़ों के अनुसार राजधानी में 50,554 लोग
फिलहाल होम आइसोलेशन में है.
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कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में लॉकडाउन को एक और हफ़्ते के लिए बढ़ा दिया है. उन्होंने
ट्विटर पर इसकी जानकारी दी.
दिल्ली
में जारी लॉकडाउन की अवधि सोमवार सुबह ख़त्म होने वाली थी. ये दूसरी बार है जब
केजरीवाल ने लॉकडाउन को एक हफ़्ता बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
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कोविशील्ड का उत्पादन दूसरे देशों में शुरू हो सकता है - पूनावाला
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एस्ट्राज़ेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड की कोविड-19 वैक्सीन का 'कोविशील्ड' नाम से उत्पादन करने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया दूसरे देशों में भी वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर
सकती है.
शुक्रवार को सीरम
इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने ब्रिटेन के द टाइम्स अखबार को दिए एक
इंटरव्यू में इसकी जानकारी दी.
उन्होंने कहा, “अगले कुछ
ही दिनों में इससे जुड़ी घोषणा की जाएगी.”
पूनावाला
ने बताया कि कंपनी जुलाई तक हर महीने 10
करोड़ डोज़ का उत्पादन शुरू कर देगी.
पहले मई तक इतने डोज़ के
उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था.
पूनावाला ने कहा, “मैं
लंदन में हूं क्योंकि मैं वापस नहीं जाना चाहता. सब कुछ मेरे कंधों पर आ जाता है.
मैं उस हालत में नहीं पहुंचना चाहता जहां आप सिर्फ़ अपना काम करने की कोशिश कर रहे
हैं, और इस दौरान किसी को अगर आप वैक्सीन न दे पाएं, तो आपको ये नहीं लगना चाहिए
कि वो क्या कर बैठेंगे.”
“वैक्सीन को पाने की ऐसी
इच्छा और गुस्सा पहले कभी देखा गया है. इससे घबराहट होती है. हर किसी को लगता है
कि उसे वैक्सीन चाहिए. लेकिन वो ये नहीं समझ पा रहे कि किसी और को उनसे पहले क्यों
मिलनी चाहिए.”
ब्रेकिंग न्यूज़, कोविड-19: मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गया चुनाव आयोग
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देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को लेकर
चुनाव आयोग पर की गई मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणियों के ख़िलाफ़ केंद्रीय चुनाव
आयोग शनिवार को सुप्रीम कोर्ट चला गया.
मद्रास
हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग के कर्मचारियों को चार राज्यों में चुनाव प्रक्रिया के
दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल को लागू करने में नाकाम रहने के लिए ज़िम्मेदार माना था
और टिप्पणी की थी कि इन पर हत्या की धाराओं के तहत मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
सख़्त
टिप्पणियों के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग की याचिका को हाई कोर्ट ने सुनने से इनकार कर
दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच सोमवार को इस
पर सुनवाई करेगी.
चुनाव
आयोग के वकील अमित शर्मा ने कहा है, “हमने हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील दायर
की है.”
ऑक्सीजन, बेड, और श्मशान के लिए भी लाइनें, मोदी हैं ज़िम्मेदार: राहुल गांधी
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए ख़ास इंटरव्यू में कहा है कि भारत में कोविड-19
महामारी की गंभीरता और लाइनों को देखकर पूरी दुनिया हिल गई है.
उन्होंने कहा कि यह लाइनें चाहे ऑक्सीजन
सिलेंडर के लिए हों, जीवनरक्षक दवाइयों के लिए हों, अस्पताल के बेड के लिए हों या
फिर श्मशान के बाहर लगी हुई हों.
उन्होंने
सरकार पर आरोप लगाया कि उसने वैज्ञानिकों की शुरुआती चेतावनियों को नज़रअंदाज़
किया और ग़लत तरीक़े से स्थिति से निपटी.
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कोरोना वायरस की स्थिति पर राहुल गांधी ने कहा कि हर दिन सुबह उठने पर इसने उनके दिल को तोड़ा है. उन्होंने कहा कि यह कोई लहर नहीं बल्कि सुनामी है जिसने सबकुछ तबाह कर दिया है और हर जगह पर न समाप्त होने वालीं लाइनें लगी हुई हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए हर चीज़ की कमी है और राजधानी के अच्छे अस्पताल भी तबाह हो रहे हैं, भारत के टॉप डॉक्टर ऑक्सीजन की कमी की बातें कह रहे हैं और अस्पतालों को ऑक्सीजन के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ रहा है.
राहुल गांधी ने कहा कि इन सब नाकामियों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि वही देश की मशीनरी को चलाते हैं.
डब्ल्यूएचओ ने मॉडर्ना वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी दी
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने
कोविड-19 की मॉडर्ना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी है.
mRNA वैक्सीन अमेरिका में ही बनी है और अब ये भी एस्ट्राज़ेनेका, फाइज़र-बायोएनटेक
और जॉनसन एंड जॉनसन की तरह डब्ल्यूएचओ की इमरजेंसी इस्तेमाल की लिस्ट में शामिल हो
गई है.
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि ऐसी ही मंज़ूरी आने वाले
दिनों में चीन की सिनोफ़ार्म और सिनोवैक वैक्सीन को भी मिल सकती है.
मॉडर्ना को शुक्रवार देर शाम मंज़ूरी मिलने की घोषणा हुई. मॉडर्ना को कई
महीनों बाद मंज़ूरी मिल सकी, क्योंकि डब्ल्यूएचओ को वैक्सीन के निर्माता से डेटा
बहुत देर में मिला.
पश्चिम बंगाल सरकार का फ़रमान, गंभीर मरीज़ों को हर हाल में दाख़िला दें अस्पताल
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प्रभाकर मणि
तिवारी
कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना संक्रमित
मरीज़ों को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए उनका शीघ्र इलाज सुनिश्चित करने
के लिए राज्य सरकार ने तमाम अस्पतालों को कड़ा निर्देश दिया है.
इसका मक़सद
ऐसे मरीज़ों को इलाज में होने वाली कोताही को दूर करना है. शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय
की ओर से जारी दिशानिर्देश में कहा गया है कि नेगेटिव कोरोना जांच रिपोर्ट या रिपोर्ट
के बिना आने वाले गंभीर मरीज़ों को भी अगर अस्पताल में दाख़िले की ज़रूरत है तो अस्पताल
इससे इंकार नहीं कर सकते. ऐसे मरीज़ों को भर्ती करना ही होगा.
इसमें कहा गया
है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद संक्रमण की गंभीरता का पता लगाने के लिए रैपिड
एंटीजन टेस्ट करना होगा. उस मरीज़ के लिए बेड का इंतज़ाम करना होगा और बिना बेड सुनिश्चित
किए उसे दूसरे अस्पताल में रेफर भी नहीं किया जा सकेगा.
सरकार ने कहा
है कि इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
ध्यान रहे कि
राजधानी कोलकाता और आसपास के इलाकों में संक्रमितों और मरने वालों की संख्या लगातार
बढ़ रही है.
इसे ध्यान में
रखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत
शुक्रवार शाम से ही कई नई पाबंदियां लागू कर दी हैं. इनके तहत शॉपिंग मॉल्स, जिम, स्वीमिंग पुल, सिनेमा हाल, ब्यूटी पार्लर, स्पा, स्पोर्ट्स परिसर, सिनेमा हॉल, बार और रेस्तरां
बंद रहेंगे. हालांकि होम डिलीवरी और आनलाइन बिक्री जारी रहेगी. सरकार ने तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और
धार्मिक आयोजनों पर भी पाबंदी लगा दी है.
मुख्य सचिव
ने बताया कि राज्य के तमाम हाट और बाज़ार अब सुबह सात से दस और शाम को पांच से सात
बजे तक ही खुले रहेंगे.
हालांकि दवाओं, खाने-पीने का सामान बेचने वाली दुकानों और दूसरी
ज़रूरी सेवाओं को इस पाबंदी के दायरे से बाहर रखा गया है.
बीबीसी इंडिया बोल, 1 मई 2021, कोरोना कब और कैसे जाएगा?, बीबीसी इंडिया बोल, आज आपके साथ मिलकर उस सवाल का जवाब ढूँढने की कोशिश करेंगे जो इन दिनों सबके मन में है- कोरोना कब और कैसे जाएगा? बीबीसी इंडिया बोल में आज इसी विषय पर चर्चा मोहनलाल शर्मा के साथ.
रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V की पहली खेप भारत पहुंची
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भारत में कोरोना से बिगड़ते हालात के बीच रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन की पहली खेप भारत
पहुंची है. ये खेप हैदराबाद में पहुंची.
स्पुतनिक V की ओर से बयान जारी किया गया है, “स्पुतनिक V वैक्सीन की पहली खेप हैदराबाद पहुंच गई है, भारत! इसी दिन देश ने अपनी पूरी व्यस्क आबादी के टीकाकरण के लिए
बड़े स्तर पर कोविड टीकाकरण अभियान शुरू किया है. साथ मिलकर इस महामारी को हराते
हैं. एकजुट होकर हम
ज़्यादा मज़बूत होंगे.”
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इस मौक़े पर भारत में रूस के राजदूत, निकोले कुदाशेव ने कहा, “रूस और भारत कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए साथ मिलकर लगातार कोशिशें कर रहे हैं, इस बीच ये क़दम दूसरी घातक लहर को शांत करने और ज़िंदगियों को बचाने के भारत सरकार के प्रयासों में सहयोग देने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.”
भारत के लिए रूस के राजदूत ने साथ ही कहा, “स्पुतनिक V की प्रभावकारिता दुनिया में सबसे अधिक है, और ये टीका कोविड-19 के नए स्ट्रेन के ख़िलाफ़ भी प्रभावी होगा. इसका स्थानीय उत्पादन जल्द शुरू होगा और धीरे-धीरे इसे हर साल 850 मीलियन डोज़ तक बढ़ाने की योजना है.”
इस वैक्सीन के भारत में पहुंचने के साथ अब कोविड-19 से बचने की तीन वैक्सीन हो गई हैं. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया और ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से बनी कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और रूस की स्पुतनिक V.
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स्पुतनिक V के बारे में हम क्या जानते हैं?
मॉस्को के गैमालेया इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित इस वैक्सीन के ट्रायल के अंतिम नतीजे सामने आने के पहले ही इसकी मंज़ूरी के चलते शुरू में कुछ विवाद पैदा हो गया था. हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार अब इसके फ़ायदे ज़ाहिर हो गए हैं.
इसे विकसित करने के लिए सर्दी का कारण बनने वाले वायरस का उपयोग किया गया है. इस वायरस का उपयोग कोरोना वायरस के छोटे अंश को शरीर में डालने के लिए वाहक के रूप में किया गया है. और इसमें ऐसे बदलाव किए गए हैं कि शरीर में जाने के बाद वह लोगों को नुक़सान न पहुँचा सके.
कोरोना के जेनेटिक कोड का एक अंश जब शरीर में जाता है तो इम्यून सिस्टम बिना शरीर को बीमार किए इस ख़तरे को पहचानकर उससे लड़ना सीख जाता है. टीका लगाने के बाद शरीर कोरोना वायरस के अनुरूप एंटीबॉडी का उत्पादन करना शुरू कर देता है. इसका अर्थ यह हुआ कि टीके के बाद शरीर का इम्यून सिस्टम वास्तव में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है.
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इस वैक्सीन की ख़ासियत है कि इसे दो से आठ डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर स्टोर किया जा सकता है. इस वजह से इस वैक्सीन का भंडारण और ढुलाई करना आसान है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैक्सीन की मार्केटिंग करने वाले रूसी कंपनी रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फ़ंड यानी आरडीआईएफ़ ने भारत में स्पुतनिक V की 75 करोड़ से अधिक ख़ुराक बनाने के लिए क़रार किया है.
वैसे स्पुतनिक V को अब भारत सहित 60 देशों में मंज़ूरी मिल चुकी है. आरडीआईएफ़ ने भारत में इसके वितरण के लिए डॉ रेड्डीज़ लैब और ग्लैंड फ़ार्मा सहित कुल पाँच कंपनियों से क़रार किया है.
कोरोना की दूसरी वैक्सीन से इतर स्पुतनिक V पहली और दूसरी ख़ुराक के लिए टीके के दो अलग-अलग संस्करण का उपयोग करता है. वैसे दूसरी ख़ुराक पहली के 21 दिन बाद दी जाती है.
दोनों ख़ुराकों में कोरोना वायरस के विशिष्ट 'स्पाइक' का लक्ष्य किया जाता है. हालांकि इसके लिए दो अलग-अलग न्यूट्रल वायरस को वेक्टर यानी रोगवाहक के रूप में उपयोग किया जाता है. इसके पीछे तर्क यह है कि दो अलग-अलग वेक्टर के उपयोग से शरीर का इम्यून सिस्टम तब की तुलना में ज़्यादा मज़बूत होगा जब शरीर में एक ही वेक्टर दो बार जाए.
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना: दिल्ली में एक हफ्ते के लिए बढ़ाया गया लॉकडाउन
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कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली में लॉकडाउन को एक और हफ़्ते के लिए बढ़ा दिया गया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी.
दिल्ली में जारी लॉकडाउन की अवधि सोमवार सुबह ख़त्म होने वाली थी. ये दूसरी बार है जब केजरीवाल ने लॉकडाउन को एक हफ़्ता बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
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राजधानी दिल्ली में हर दिन 25 हज़ार से अधिक नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं. शुक्रवार को जारी किए गए बीते 24 घंटों के आंकड़ों के मुताबिक 375 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है.
इस बीच कई अस्पतालों से ऑक्सीजन की कमी की शिकायतें भी आ रही हैं. शनिवार को एक अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 12 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई.
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली के बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के बाद 12 कोरोना मरीज़ों की मौत
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दिल्ली के बत्रा अस्पताल में
ऑक्सीजन की कमी के कारण 12 कोविड-19 मरीज़ों की मौत की पुष्टि हुई है. यह संख्या कुछ समय में बढ़ भी सकती है, ऐसा अस्पताल का कहना है.
अस्पताल के मुताबिक़, ऑक्सीजन की सप्लाई जब कम हुई तो कई मरीज़ों का ऑक्सीजन लेवल
गिर गया और उन मरीज़ों को बचाया नहीं जा सका.
अगले 24 घंटे कई मरीज़ों के लिए बहुत क़ीमती हैं और यह
संख्या बढ़ भी सकती है.
बत्रा अस्पताल में इस समय 220 मरीज़ ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं.
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पीटीआई का कहना है कि मरने वालों में बत्रा अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
विभाग के अध्यक्ष भी शामिल हैं जबकि डॉक्टरों ने 5 दूसरे मरीज़ों की जान बचाने की कोशिश की.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि
ऑक्सीजन की भारी कमी है और कई अस्पतालों ने इमरजेंसी कॉल दी है.
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उन्होंने कहा, “हमने कोर्ट से कहा है और केंद्र को
भी लिखा है कि दिल्ली को 976 टन रोज़ाना ऑक्सीजन की ज़रूरत है लेकिन हमें 490 टन
ऑक्सीजन ही दी गई है और कल हमें सिर्फ़ 312 टन ऑक्सीजन मिली थी. आख़िर ऐसे कैसे
चलेगा?”
सोनिया गांधी ने कहा- ‘यह केंद्र सरकार के जाग जाने का समय है’
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी करते हुए
देश में कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए एक राष्ट्रव्यापी रणनीति बनाने की
मांग की है.
कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किए गए वीडियो में सोनिया गांधी ने अपील
करते हुए कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकारों के ‘जागने और अपनी ज़िम्मेदारी निभाने
का समय है.’
उन्होंने कहा, “कोरोना महामारी के चुनौतीपूर्ण समय
में आप और आपके परिवार की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं. वो लाखों
परिवार, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया
है, उनके प्रति भी दिल से अपनी संवेदना
व्यक्त करती हूं. हमारा देश इस समय कोरोना की जानलेवा मुसीबत का सामना कर रहा है.
आप सब जानते हैं, लाखों की संख्या में हमारे परिजन
कोरोना से रोज़ाना पीड़ित हो रहे हैं. ये संकट सभी देशवासियों के लिए परीक्षा की
घड़ी है. हमें एक-दूसरे का हाथ पकड़, एक-दूसरे का सहारा भी बनना है और एक-दूसरे की ताकत भी.”
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उन्होंने कहा, “केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए यह समय जाग जाने और कर्तव्य को निभाने का है. मेरा केन्द्र सरकार से आग्रह है कि वे सबसे पहले ग़रीबों की सोचें और उनका पलायन रोकने के लिए हर एक परिवार के खाते में संकट खत्म होने तक 6,000 रुपए डालें.”
“देश में कोरोना टेस्टिंग बढ़ाई जाए, दवाओं, ऑक्सीजन और अस्पतालों का युद्ध स्तर पर प्रबंध किया जाए. सारे देशवासियों के लिए कोरोना से बचाव के मुफ्त टीकाकरण का इंतज़ाम हो, ताकि लोगों को बचाया जा सके.”
“कोरोना वैक्सीन की कम्पलसरी यानि अनिवार्य लाइसेंस दी जाए ताकि थोड़े समय में सबको वैक्सीन मिले. वैक्सीन की कीमत का भेदभाव बंद हो. जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाज़ारी बंद हो. सारी इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन को अस्पतालों को देने का फौरन इंतज़ाम हो. देश के सभी राजनीतिक दलों की सहमति से राष्ट्रीय स्तर पर कोविड से निपटने की रणनीति बनाई जाए.”
“इस अवसर पर मैं कोविड से लड़ रहे सभी डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टॉफ, हेल्थ वर्कर्स को नमन करती हूं, जो अपनी जान की बाजी लगाकर मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं.”
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पंचायत चुनावों की मतगणना पर रोक लगाने से किया इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर
प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए मतगणना पर रोक लगाने से शनिवार को इनकार कर दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, शीर्ष अदालत ने ये
भी कहा कि रविवार को मतगणना के दौरान या उसके ख़त्म होने के बाद कोई भी विजय जुलूस
निकालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि वो मतगणना
केंद्रों पर कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन कराने की ज़िम्मेदारी राजपत्रित अधिकारियों को सौंपेगा.न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदेश में
मतगणना केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को तब तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, जब तक कि इलाहाबाद
उच्च न्यायालय उसके समक्ष दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी नहीं कर लेता.
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली हाई कोर्ट की केंद्र को चेतावनी, ऑक्सीजन दो वरना अवमानना का सामना करो
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दिल्ली
हाई कोर्ट ने शनिवार को राजधानी में ऑक्सीजन की कमी के मामले पर सुनवाई करते हुए
केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो दिल्ली को उसके हिस्से की 490 मीट्रिक टन
ऑक्सीजन कैसे भी उपलब्ध कराए.
जस्टिस
विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की डिविज़न बेंच का यह आदेश कई अस्पतालों की
ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की शिकायत के बाद आया है.
कोर्ट
ने साथ ही केंद्र को चेतावनी दी कि अगर दिल्ली को आज ही उसके हिस्से की ऑक्सीजन की
सप्लाई नहीं हुई तो उसके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है.
कोर्ट
ने कहा,“पानी सिर के ऊपर जा
चुका है. अब हमें काम से मतलब है. आप (केंद्र) अभी सब व्यवस्था करिए.”
कोर्ट
ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई पर
संबंधित प्रशासन को कोर्ट में पेश होना होगा.
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कोर्ट
ने कहा कि दिल्ली कोई औद्योगिक राज्य नहीं है और उसके पास क्रायोजेनिक टैंकर्स
नहीं हैं.
कोर्ट
ने बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 12 मरीज़ों के मारे जाने का संज्ञान
लेते हुए कहा, “दिल्ली में मरते लोगों को देखकर क्या हम अपनी
आंखें बंद कर लें.”
कोर्ट
ने माना कि दिल्ली का 20 अप्रैल को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाया गया था और तब से लेकर
अब तक किसी भी दिन पूरी सप्लाई उसे नहीं हुई है.
इस
मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.
वहीं,
ऑक्सीजन की समस्या पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि ऑक्सीजन की भारी कमी है और
कई अस्पतालों ने इमरजेंसी कॉल दी है.
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उन्होंने
कहा, “हमने कोर्ट से कहा है और केंद्र को भी लिखा है कि दिल्ली को
976 टन रोज़ाना ऑक्सीजन की ज़रूरत है लेकिन हमें 490 टन ऑक्सीजन ही दी गई है और कल हमें सिर्फ़ 312 टन ऑक्सीजन मिली थी. आख़िर ऐसे कैसे चलेगा?”
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वो
नीति-निर्माताओं से हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि वे दिल्ली को ऑक्सीजन दें.
कोरोना: 18+ के टीकाकरण के लिए कितने तैयार हैं राज्य?
अस्पतालों को मौजूदा अनुभव से सीखना चाहिए और ऑक्सीजन प्लांट लगाने चाहिए: हाई कोर्ट
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दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार को कहा कि अस्पतालों को मौजूदा कोविड-19
महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी के अपने अनुभवों से सीखना चाहिए और इस जीवनरक्षक
गैस का उत्पादन करने के लिए प्लांट लगाने चाहिए.
जस्टिस विपिन संघी और रेखा पल्ली की बेंच ने कहा कि खर्चे को देखते हुए कुछ
अस्पताल ऑक्सीजन प्लांट जैसी चीज़ों पर पूंजीगत व्यय को कम करते हैं. जबकि ये किसी
अस्पताल के लिए ज़रूरत की चीज़ है, ख़ासकर बड़े अस्पतालों के लिए.
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बेंच ने कहा, “ऑक्सीजन प्लांट ज़रूरी हैं. उनका न होना ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है.”
छुट्टी के दिन ऑक्सीजन संकट और अन्य कोविड-19 संबंधि मसलों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “आपको (अस्पतालों को) अपने अनुभव से सीखना चाहिए और एक प्लांट लगाना चाहिए.”
योगी के विधायक ने अपनी सरकार पर और आप विधायक ने केजरीवाल पर उठाए सवाल
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दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के विधायक शोएब इक़बाल ने कोविड-19 के
बिगड़ते हालात को देखते हुए शुक्रवार को दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
की.
कांग्रेस छोड़ पिछले साल आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने
वाले मटिया महल से विधायक शोएब ने कहा कि ना तो वो और ना ही सरकार कोविड-19 की
दूसरे लहर की चपेट में आए लोगों की कोई मदद कर पा रहे हैं.
शोएब इक़बाल की मांग पर आप ने कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है.
शोएब ने कहा, “मैं एक विधायक के तौर पर शर्मिंदा
महसूस कर रहा हूं क्योंकि मैं किसी के काम नहीं आ पा रहा. हमारी सरकार लोगों के
साथ खड़ी होने में असमर्थ है. छह बार विधायक रहने के बावजूद, कोई (मेरी) सुनने वाला नहीं है और मैं
किसी से संपर्क नहीं कर सकता.”
उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट से अपील की है कि
राष्ट्रीय राजधानी में तत्काल प्रभाव से तीन महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया
जाए. आप विधायक ने कहा, “दिल्ली बहुत ही ख़राब स्थिति में
है. मैं दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली में तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन लगाने
की गुज़ारिश करता हूं. नहीं तो पूरे शहर में हर जगह शव होंगे.”
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यूपी में बीजेपी विधायक ने पंचायत चुनाव पर उठाए सवाल
वहीं उत्तर प्रदेश में हरदोई ज़िले की सवायजपुर सीट से बीजेपी विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य चुनाव आयोग से पत्र लिखकर मांग की है कि दो मई को होने वाली पंचायत चुनाव की मतगणना को कम से कम एक महीने के लिए टाल देना चाहिए.
उनका कहना है कि नहीं तो इसकी वजह से ख़ासकर ग्रामीण इलाक़ों में मामलों का “सुपर विस्फोट” हो सकता है.
माधवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान हुई लापरवाही की वजह से बड़ी तादाद में मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान, जो 36 से 48 घंटे चल सकती है, उस वक़्त मतगणना केंद्रों के बाहर हर उम्मीदवार के समर्थक जमा हो जाएंगे.
उन्होंने द हिंदू से बातचीत में कहा, “गांवों के लोग उतने सतर्क नहीं है, जितना उन्हें होना चाहिए. मतगणना को टालने से कुछ राहत मिलेगी. मेरे ज़िले में स्थिति बहुत ही बुरी है.”
आरएसएस से जुड़े शिक्षा अधिकारी संघ ने भी मतगणना टालने की मांग की है. मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद ने पहले मांग की थी महामारी को देखते हुए पंचायत चुनाव टाल देने चाहिए.
हालांकि राज्य चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि मतगणना तय तारीख़ पर ही होगी.
वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल में 135 शिक्षकों और चुनावी ड्यूटी के दौरान तैनात अन्य की मौत का संज्ञान लिया. शिक्षक संघ के अनुमान के मुताबिक़, मौतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा क़रीब 550-1,000 हो सकती है.
कोरोना से ख़ुद को संक्रमित कराने वाला छात्र
कोविड संकट: वैज्ञानिकों की चेतावनी की मोदी सरकार ने उपेक्षा की- रॉयटर्स
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सरकार की ओर से गठित वैज्ञानिक सलाहकारों के एक फोरम
ने मार्च की शुरुआत में भारतीय अधिकारियों को देश में एक नए और ज़्यादा संक्रामक
वेरिएंट के फैलने की चेतावनी दी थी. फोरम में शामिल पाँच वैज्ञानिकों ने समाचारएजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी है.
चार वैज्ञानिकों ने कहा कि चेतावनी के बावजूद केंद्र
सरकार ने वायरस के फैलाव को रोकने के लिए बड़े स्तर पर प्रतिबंध नहीं लगाए.
बिना
मास्क पहने लाखों लोगों ने धार्मिक आयोजन और राजनीतिक रैलियों में हिस्सा लिया, जो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी नेताओं ने की
थीं.
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी के कृषि संबंधी बदलावों को
लेकर दिल्ली की सीमाओं पर हज़ारों किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा.
दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश अब
दूसरे दौर के संक्रमण से जूझ रहा है, जो पिछले साल के पहले दौर के संक्रमण से कहीं ज़्यादा
गंभीर है. दूसरी लहर के लिए कुछ वैज्ञानिक नए वेरिएंट को ज़िम्मेदार मानते हैं और
अन्य ब्रिटेन में सबसे पहले मिले वेरिएंट को इसके पीछे बताते हैं.
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संक्रमण में ये उछाल 2014 के बाद से सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ा संकट है. ये देखना होगा कि संक्रमण को हैंडल करने का उनका तरीक़ा उन्हें और उनकी पार्टी को राजनीतिक तौर पर कैसे प्रभावित करता है.
अगले आम चुनाव 2024 में होने हैं. स्थानीय चुनावों के लिए मतदान हालिया मामलों के रिकॉर्ड उछाल के पहले ही पूरा हुआ है.
मार्च की शुरुआत में नए वेरिएंट को लेकर इंडियन सार्स-कोव-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम या INSACOG ने चेतावनी जारी की थी.
एक वैज्ञानिक और उत्तरी भारत में एक रिसर्च सेंटर के निदेशक ने पहचान नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि ये चेतावनी उस एक शीर्ष अधिकारी तक पहुंचाई गई थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं.
रॉयटर्स ये पुष्टि नहीं कर सका कि क्या INSACOG की फाइंडिंग ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचाई गई थी. रॉयटर्स ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया, जहां से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
वैज्ञानिक सलाहकारों का ये फोरम सरकार ने दिसंबर के अंत में गठित किया था. जिसका मक़सद कोरोना वायरस के उन जीनोमिक वेरिएंट्स का पता लगाना था, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरा हो सकता है. इस फोरम ने 10 राष्ट्रीय लैब को एक साथ लाया जो वायरस के वेरिएंट्स पर अध्ययन करने में सक्षम हैं.
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फोरम के सदस्य और सरकार की ओर से संचालित जीव विज्ञान संस्थान के निदेशक अजय परिदा ने रॉयटर्स को बताया,INSACOG के रिसर्चरों ने फ़रवरी में ही B.1.617 का पता लगा लिया था, जिसे वायरस का भारतीय वेरिएंट कहा जा रहा है.
उत्तरी भारत के रिसर्च सेंटर के निदेशक ने रॉयटर्स से कहा, फोरम ने अपनी फाइडिंग 10 मार्च से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) के साथ साझा की थीं और चेतावनी दी थी कि संक्रमण देश के हिस्सों में तेज़ी से बढ़ सकता है.
इस व्यक्ति के मुताबिक़, इसके बाद फाइंडिंग भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पहुंचाई गईं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने टिप्पणी की गुज़ारिश पर कोई जवाब नहीं दिया है.
उसी तारीख़ के आस-पास, फोरम ने स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए मीडिया स्टेटमेंट का ड्राफ्ट तैयार किया था. उस ड्राफ्ट की एक कॉपी रॉयटर्स ने देखी है, जिसमें फोरम की फाइंडिंग बताई गई है: नए भारतीय वेरिएंट के दो अहम म्यूटेशन है, जो इंसानी कोशिशाकों से चिपक जाते हैं, और उन्हें महाराष्ट्र के 15% से 20% सैंपलों में पाया गया है.
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नेपाल: स्वास्थ्य मंत्रालय हुआ लाचार, कहा कोरोना से हालात बेकाबू
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इमेज कैप्शन, सुकराराज ट्रॉपिकल एंड इनफैक्शियस डिज़ीज़ हॉस्पिटल में वेंटिलेटर और आईसीयू बेड ना होने के कारण मरीज़ को दूसरे अस्पताल रेफर किया गया.
नेपाल में
कोरोना वायरस से हालात नियंत्रण से बाहर हो गए हैं. नेपाली अख़बार काठमांडू पोस्ट के अनुसार नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने
कहा है कि स्थिति संभाले जाने लायक नहीं है क्योंकि अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे
हैं.
स्वास्थ्य
मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी करके कहा, “जैसे-जैसे संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, स्वास्थ्य
प्रणाली उसे संभालने की स्थिति में नहीं है और पहले ही ऐसे हालात बन चुके हैं कि
अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं हैं.”
स्वास्थ्य
मंत्रालय ने लोगों से सावधान रहने, मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग रखने और हाथ
धोने जैसे सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है.
काठमांडू पोस्ट
की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नेपाल में कोरोना संक्रमित मरीज़ों को इलाज़ के लिए बेड
नहीं मिल पा रहा है.
राजधानी काठमांडू
के टेकु में स्थित सुकराराज ट्रॉपिकल एंड इनफैक्शियस डिज़ीज़ हॉस्पिटल के बाहर
शुक्रवार को 17 कोरोना संक्रमित मरीज़ जनरल वॉर्ड और इंटेसिव केयर में भर्ती होने
के लिए इंतज़ार कर रहे थे.
कुछ लोगों को
अस्पताल परिसर में ही कुर्सी या व्हिलचेयर पर ऑक्सीजन दी जा रही थी. अस्पताल के
सभी 23 इंटेसिव केयर यूनिट बेड और 12 वेंटिलेटर गंभीर मरीज़ों से भर चुके हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय
ने 22 ऐसे ज़िलों के नाम बताए जहां वायरस बहुत तेज़ी से फैल रहा है.
मंत्रालय ने
लोगों को भीडभाड़ वाली जगहों पर जाने और विदेश यात्राएं करने से मना किया है.
नेपाल में गुरुवार
को कोरोना के आरटी-पीसीआर टेस्ट से 4831 और एंटीजन टेस्ट से 97 मामले सामने आए थे.
मंत्रालय ने बताया
कि कोरोना से एक दिन में 35 लोगों की मौत हो गई जो गुरुवार तक का मौत का सबसे बड़ा
आँकड़ा था.
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भारत की मदद के लिए साथ आए ब्रिटेन के हिंदू-मुसलमान