कोरोना महामारी की दूसरी घातक लहर
से जूझ रहे भारत के अस्पताल ऑक्सीजन की भारी कमी का सामना कर रहे हैं. चरमराने की
कग़ार तक पहुंच चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकारें, केंद्र
सरकार से मदद की गुज़ारिश कर रही हैं.
ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए ओडिशा और
छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्य से दूसरे राज्यों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई
है. कई राज्य दूसरे देशों से भी ऑक्सीजन मंगाने की कोशिश कर रहे हैं.
इन हालातों के बीच कई देशों ने भारत
को मदद की पेशकश की है और जल्द से जल्द ऑक्सीजन और ज़रूरी मेडिकल साजोसामान भारत भेज
रहे हैं या भेजने की कोशिश कर रहे हैं.
श्रीलंका में मौजूद चीनी दूतावास ने
कहा है कि महामारी के इस मुश्किल वक्त में चीन भारत के साथ है. दूतावास ने जानकारी
दी है कि दिल्ली के लिए हॉन्ग कॉन्ग से 800 ऑक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर भेजे गए हैं और आने
वाले सात दिनों में और दस हज़ार ऑक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर भारत भेजने की जा रही है.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल
मैक्रों ने रविवार को कहा है कि महामारी से लड़ रहे भारत के लिए वो आने वाले दिनों
में ऑक्सीजन वेंटिलेटर भेजेगा.
इससे पहले यूरोपीय कमीशन ने कहा था कि भारत के मदद की गुज़ारिश
मिलने के बाद जल्द से जल्द ज़रूरी दवाएं और मेडिकल सप्लाई भारत भेजने की तैयारी कर
रहा है.
इधर ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि उनकी
सरकार भारत सरकार के साथ मिल कर काम कर रही है और कोरोना से लड़ने के लिए ब्रिटेन ने
300 से अधिक ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर समेत 600 मेडिकल डिवाइस भारत भेज रहा है.
इस तरह दवाओं और मेडिकल सामान की कुल नौ खेप भारत के लिए
भेजी जा रही है, जिसकी पहली खेप मंगवार को दिल्ली पहुंचेगी.
सिंगापुर ने भारत के लिए 500
बाईपैप, 250 ऑक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर और दूसरी मेडिकल सप्लाई भेजी हैं.
सभी ज़रूरी सप्लाई की पहली खेप लेकर
एक विमान सिंगापुर से चांगी हवाईअड्डे से बीती रात मुंबई पहुंचा.
संयुक्त अरब अमीरात ने भारत की मदद के लिए हाई कैपासिटी क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंकर भेजे हैं.
यूएई के विदेश मंत्री शेख़ अब्दुल्ला बिन ज़ायेद ने रविवार को कहा कि कोरोना के मामलों में आए अचानक उछाल से जूझ रहे भारत की हरसंभव मदद करने और उसका साथ देने के लिए यूएई प्रतिबद्ध है.
भारत में महामारी की ताज़ा स्थिति के बारे में उन्होंने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से फ़ोन पर चर्चा की और कहा कि मुश्किल वक्त में वो भारत के साथ हैं.
सऊदी अरब ने कहा है कि वो
भारत की आपातकालीन ज़रूरत के लिए चार क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंकर और 80 मैट्रिक टन
ऑक्सीजन भेजने वाला है.
सऊदी गैजेट के अनुसार अडाणी
ग्रूप और लिंडे कंपनी के सहयोग से ये ऑक्सीजन भारत लाई जा रही है. इसके अलावा लिंडे
कंपनी ने 5000 ऑक्सीजन सिलेंडर भी भारत के लिए देगी जिसे भी जल्द से जल्द भारत के
अस्पतालों में पहुंचाया जाएगा.
ऑक्सीजन की पहले खेप सऊदी
के पूर्व में मौजूद दम्मम से गुजरात के मुंद्रा के लिए निकल चुकी है.
अमेरिका ने कहा है कि वो कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन के लिए भारत को ज़रूरी कच्चे माल की आपूर्ति करेगी ताकि वैक्सीन के उत्पादन के काम में तेज़ी लाई जा सके.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिका भारत की मदद करने को लेकर दृढ़-संकल्प है.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है किबीते सात दशकों से दोनों देश स्वास्थ्य सेक्टर में एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं और मदद करते रहे और जैसे कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में भारत की ओर से अमेरिका को मेडिकल मदद की गई थी उसी तरह अब जबकि भारत को ज़रूरत है तो अमेरिका मदद करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्प है.
असम के स्वास्थ्य मंत्री
हिमन्ता बिस्व सर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने भूटान से ऑक्सीजन आयात करने की
व्यवस्था की है.
इससे एक दिन पहले असम स्वास्थ्य एवं
परिवार कल्याण मंत्री पीयुष हज़ारिका ने भूटान के समद्रूप जोंगखर में बन रहे ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया और कहा कि एक बार ये
प्लांट बन कर तैयार हो गया तो इससे असम को रोज़ाना 50 मेट्रिक टन कर ऑक्सीजन
मिलेगी जिससे कोरोना से लड़ने में मदद मिलेगी.