महाराष्ट्र: बुधवार रात आठ बजे से पूरे राज्य में लागू होगी धारा 144 –आज की बड़ी ख़बरें

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि बुधवार रात आठ बजे से राज्य में कड़ी पाबंदियां लागू की जाएंगी.

लाइव कवरेज

  1. ये महामारी जल्द ख़त्म नहीं होगी - WHO प्रमुख

    विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस

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    विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कदम उठा कर कुछ महीनों में कोरोना महामारी पर क़ाबू तो पाया जा सकता है लेकिन ये वायरस अभी जाने वाला नहीं है.

    उन्होंने कहा कि भले ही अब तक वैश्विक स्तर पर कोरोना वैक्सीन के 78 करोड़ डोज़ लगाए जा चुके हैं लेकिन ये महामारी अभी ख़त्म होने से कोसों दूर है.

    दिसंबर, 2019 में चीन के वुहान से फैलना शुरू हुए कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अब तक 13.65 करोड़ लोगों को संक्रमित किया है और 2,944,500लोगों की जान ले चुका है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने कहा, जनवरी और फरवरी में लगातार छह सप्ताह तक कोरोना के मामलों में कमी आती रही. लेकिन बीते सात सप्ताह से संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और बीते चार सप्ताह से मौतों की संख्या भी काफी बढ़ गई है. बीते सप्ताह कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए गए थे. एशिया और मध्यपूर्व के कई देशों में संक्रमण के मामलों में तेज़ी से उछाल आया है.

    कोरोना  संक्रमण

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    इमेज कैप्शन, हाल के दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है.

    जेनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि महामारी से लड़ने के लिए वैक्सीन शक्तिशाली हथियार ज़रूर है लेकिन ऐसे नहीं है कि केवल इसी हथियार से महामारी को हराया जा सकता है.

    उन्होंने कहा, सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क लगाना और बार-बार हाथ धोना और हवादार जगह में रहना- महामारी के ख़िलाफ़ ये सब भी काम करते हैं. साथ ही सर्विलांस, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, आइसोलेशन और समझदारी से एक दूसरे का ख़याल रख कर भी हम कोरोना संक्रमण को रोक सकते हैं और ज़िंदगियां बचा सकते हैं.

    उन्होंने कहा कि महामारी को लेकर कोताही बरती जा रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उठाए गए कदमों में समानता नहीं है, इस कारण संक्रमण के मामलों में तेज़ी आ रही है और लोगों की जान जा रही है.

    उन्होंने कहा कि लोग इसे मामूली फ्लू समझना बंद करें क्योंकि इस वायरस ने युवा और स्वस्थ लोगों की भी जान ली है.

    उन्होंने कहा, जो इसके संक्रमण से ठीक हुए हैं, उनमें इस बीमारी के क्या दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, इस बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है. कुछ लोगों को लगता है कि वो युवा है और उन्हें कोविड-19 हो जाए तो कई फर्क नहीं पड़ेगा.

    महामारी अभी ख़त्म होने वाली नहीं

    विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने कहा कि दुनिया के पास उम्मीद बनाए रखने के लिए कई कारण हैं लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि महामारी अभी ख़त्म होने वाली नहीं है.

    उन्होंने कहा, इस साल की शुरूआत में कोरोना संक्रमण के मामलों में और इससे होने वाली मौतों में भारी कमी आई थी. ये बताता है कि महामारी पर क़ाबू पाना संभव है और इस वायरस को और इसके वेरिएंट्स को फैलने से रोका जा सकता है. अगर हम सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उचित कदम उठाएं और वैक्सीन लगवाने पर ज़ोर दें तो कुछ महीनों में महामारी पर क़ाबू पाया जा सकता है.

    लेकिन हम ऐसा करते हैं या नहीं ये हमारा निजी फ़ैसला होता है, या फिर हमारी सरकार हमारे लिए ये फ़ैसला लेती है.

    उन्होंने कहा कि फिलहाल वैश्विक स्तर पर जिस तेज़ी से कोरोना वैक्सीन का उत्पादन किया जा रहा है, सभी मुल्कों तक इसका जल्दी और समान रूप से पहुंचना असंभव है.

    उन्होंने कहा कि सरकारों को देश के भीतर वैक्सीन के सुरक्षित उत्पादन पर ज़ोर देने और इसके लिए राष्ट्रीय नियामक संस्था बनाने की ज़रूरत है.

    उन्होंने कहा कि जो देश कोरोना वैक्सीन का उत्पादन करने में इच्छुक है वो इसके लिए संगठन से मदद ले सकते हैं.

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  2. कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-वी को भारत ने दी मंज़ूरी, क्या बोले डॉक्टर?

  3. अमेरिका कभी एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन इस्तेमाल करेगा या नहीं, स्पष्ट - डॉक्टर एंथनी फ़ाउची

    डॉक्टर एंथनी फ़ाउची

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    अमेरिका के वरिष्ठ कोरोना विशेषज्ञऔर राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य मेडिकल सलाहकार डॉक्टर एंथनी फ़ाउचीने कहा है कि ये बात अब तक स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका कभी ऑक्सफ़र्ड और एस्ट्राज़ेनेका की बनाई कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल करेगा या नहीं.

    डॉक्टर फ़ाउची ने बीबीसी से कहा कि एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन से जुड़ी चिंताओं को पहले “दूर किया जाना चाहिए.“

    उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन प्रभावी है ज़रूर लेकिन यूरोपीय संघ में इसे लेकर ये चिंता है कि इससे दिमाग़ में ‘ख़ून के थक्के बनने का ख़तरा हो सकता है’.

    उन्होंने कहा कि अमेरिका को एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि उम्मीद है कि उसके पास वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक होगा.

    उन्होंने कहा, “अमेरिका ने वैक्सीन को लेकर कई देशों के साथ समझौते किए हैं और हमें उम्मीद है कि हमारे पास एस्ट्राज़ेनेका के अलावा और पर्याप्त मात्रा में दूसरी वैक्सीन होगी या हमें समय पर मिल जाएगी और हम अपने सभी नागरिकों का टीकाकरण कर सकेंगे."

    ”हम आने वाले वक्त में कभी एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन का इस्तेमाल करेंगे या नहीं ये अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि हमें इसकी ज़रूरत नहीं होगी.”

    उन्होंने देश के कुछ राज्यों में कोरोना संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी दी और सवाल किया कि कुछ गवर्नरों का कोरोना के कारण लगाई पाबंदियों को वापिस लेना कितना सही है.

  4. पश्चिम बंगालः बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष से चुनाव आयोग ने माँगा जवाब

    निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में मतदान के दिन हुई हिंसा के सिलसिले में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष से सफ़ाई माँगी है.

    आयोग ने उनके बयानों पर उनसे बुधवार 10 बजे तक अपना जवाब भेजने का आदेश दिया है.

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  5. ब्रेकिंग न्यूज़, पश्चिम बंगालः बीजेपी नेता राहुल सिन्हा के प्रचार करने पर 48 घंटे की पाबंदी

    निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता और प्रत्याशी राहुल सिन्हा के चुनाव प्रचार करने पर अगले 48 घंटों के लिए पाबंदी लगा दी है.

    आयोग ने चौथे चरण के चुनाव के दौरान कूचबिहार ज़िले के शीतलकुची मतदान केंद्र पर हुई हिंसा को लेकर उनकी टिप्पणी पर कार्रवाई करते हुए ये फ़ैसला लिया है.

    ये पाबंदी मंगलवार 12 बजे दोपहर से 15 अप्रैल दोपहर 12 बजे तक जारी रहेगी.

    राज्य में पाँचवें चरण का मतदान 17 अप्रैल को होना है जिसके लिए प्रचार 15 अप्रैल को थम जाएगा.

    चुनाव आयोग ने इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों पर आपत्ति जताते हुए उनके प्रचार करने पर भी 24 घंटे की पाबंदी लगा दी थी.

    ममता बनर्जी इस फ़ैसले का विरोध करने के लिए मंगलवार को धरना दे रही हैं.

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  6. फिलहाल लॉकडाउन का सवाल ही नहीं है- येदियुरप्पा

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति पर चर्चा करने के लिए उन्होंने 18 अप्रैल को सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में लॉकडाउन लगाने का कोई सवाल नहीं है.

    उन्होंने लोगों से अपील की कि लोग कोरोना वायरस के फैलने को लेकर सतर्क रहें और इसे रोकने के लिए जारी किए गए सभी दिशानिर्देशों का पालन करें.

    उन्होंने कहा कि कोविड-19 पर तकनीकी सलाहकार समिती ने मई की 2 तारीख तक करोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखे जाने के बारे में कहा है इसलिए सभी को अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क होना चाहिए.

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    12 अप्रैल को सवेरे 8.00 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में बीते चौबीस घंटों के भीतर संक्रमण के 10,250 नए मामले दर्ज किए गए थे. इस मामले में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़, के बाद कर्नाटक पांचवें नंबर पर है.

    जहां बीते चौबीस घंटों में महाराष्ट्र में संक्रमण के 63,294 नए मामले सामने आए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में 15,276 नए मामले, दिल्ली में 10,774 नए मामले और छत्तीसगढ़ में 10,521 मामले दर्ज किए गए हैं.

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  7. वायरस का ब्रितानी वेरिएंट उतना ख़तरनाक़ नहीं जितना समझा गया- लैंसेट

    कोरोना वायरस

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    मेडिकल पत्रिका द लैंसेट इंफेक्शस डिज़ीज़ में छपे एक नए अध्ययन के अनुसार पहली बार ब्रिटेन में मिला बेहद संक्रामक कोरोना वायरस वेरिएंट अस्पताल में भर्ती मरीज़ों में अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता.

    अमेरिकी सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के अनुसार बीते साल के आख़िरी महीनों में पाए गए कोरोना वायरस के इस वेरिएंट को B.1.1.7 नाम दिया गया था. ये अमेरिका में सबसे अधिक संक्रमण फैलाने वाला वायरस वेरिएंट बन गया था.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सोमवार को छपे इस अध्ययन के लिए 496 कोविड-19 मरीज़ों में बीमारी के लक्षणों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है. इन मरीज़ों को बीते साल नवंबर और दिसंबर में ब्रिटेन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. इनमें देखी जा रहे लक्षणों की तुलना B.1.1.7 या कोरोना वायरस के दूसरे वेरिएंट से संक्रमित मरीज़ों से की गई.

    शोधकर्ताओं ने पाया कि अन्य कोरोना वेरिएंट के मुक़ाबले B.1.1.7 वेरिएंट के कारण मरीज़ों में गंभीर बीमारी का जोखिम, मौत या दूसरी जटिल समस्याओंं का ख़तरा अधिक नहीं था.

    स्टडी में कहा गया है, “अध्ययन के दौरान एकत्र किए गए आंकड़े प्रारंभिक तौर पर बताते हैं कि अन्य वेरिएंट से संक्रमित मरीज़ों की स्थिति की तुलना में B.1.1.7 वेरिएंट से संक्रमित मरीज़ों की स्थिति बहुत अलग नहीं थी.”

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    द लैंसेट पब्लिक हेल्थ मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित एक और स्टडी में कहा गया है कि ब्रितानी वेरिएंट के ख़िलाफ़ भी वैक्सीन प्रभावी रह सकती है क्योंकि दूसरे वायरस वेरिएंट की तुलना में ब्रितानी वेरिएंट से दोबारा संक्रमण की दर में अधिक इज़ाफ़ा नहीं देखा गया है.

    ब्रितानी वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस का B.1.1.7 वेरिएंट पहले के वायरस वेरिएंट के मुक़ाबले 40 फ़ीसदी से 70 फ़ीसदी अधिक संक्रामक है.

    इन अध्ययनों में पहले की स्टडी के निष्कर्षों की भी पुष्टि की है और कहा है कि B.1.1.7 वेरिएंट अधिक संक्रामक है.

  8. कोरोना से बचाव में क्या विटामिन डी मदद कर सकता है?

    विटामिन डी हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मज़बूत करता है और स्वस्थ रखता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों को लगता है कि ये शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली को भी मज़बूत करता है और इसी वजह से ये कोविड-19 जैसे वायरस से लड़ने में भी कारगर साबित हो सकता है.

    विटामिन डी को आमतौर पर धूप से मिलने वाले विटामिन के रूप में जाना जाता है क्योंकि ये हमारे शरीर में तब बनता है जब त्वचा पर सूरज की किरणें पड़ती हैं.

    ये शरीर को कैल्शियम और फॉस्फेट पचाने में मदद करता है जो हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मज़बूत और स्वस्थ रखते हैं.

    ऐसा शोध में भी साबित हुआ है. अब विटामिन डी को कोरोना से लड़ने में अहम माना जा रहा है. देखिए इस वीडियो में यह पूरी जानकारी.

    स्टोरीः एमिली थॉमस और साइमन टुलेट

    आवाज़ः मोहम्मद शाहिद / वीडियो एडिटः मनीष जालुई

    वीडियो कैप्शन, कोरोना से बचाव में क्या विटामिन डी मदद कर सकता है?
  9. बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 1,61,736 मामले, 879 मौतें

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार बीते चौबीस घंटों में देश में कोरोना संक्रमण के 1,61,736 मामले सामने आए हैं, जबकि 879 मौतें हुई हैं.

    वहीं मंत्रालय के अनुसार बीते चौबीस घंटों में देश में एक्टिव मामलों की संख्या 63,689 हो गई है.

    इसके साथ देश में कुल संक्रमितों का आंकड़ा अब 13.68 करोड़ हो गया है जबकि मौतों का कुल आंकड़ा 1,71,058 हो गया है.

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    12 अप्रैल सवेरे 8.00 तक दर्ज किए गए नए संक्रमण के मामलों के मुक़ाबले आज 7176 मामले कम आए हैं.

    12 अप्रैल को चौबीस घंटो में कोरोना संक्रमण के 168,912 नये मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 11 अप्रैल को 152,879 नये मामले सामने आए थे.

  10. अडानी पोर्ट को S&P इंडेक्स ने सूची से हटाया, म्यांमार सैन्य शासन से संबंध रखने का आरोप

    गौतम अडानी

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    एसएंडपी (स्टैन्डर्ड एंड पूअर्स) और डाओ जोन्स स्थिरता सूचकांक ने कहा है कि उन्होंने भारत की कंपनी अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन को अपनी सस्टेनेबिलिटी सूची से हटा दिया है.

    मंगलवार को जारी किए गए एक बयान में एसएंडपी डाओ जोन्स ने कहा है कि कंपनी के व्यापारिक संबंध म्यांमार के सैन्य शासन से है जिस पर हाल में मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगाए गए हैं.

    इसी साल फरवरी की एक तारीख को म्यांमार की सेना ने वहां की गणतांत्रिक रूप से चुनी सरकार का तख़्तापलट कर नेताओं को हिरासत में ले लिया था.

    भारत का सबसे बड़ा निजी मल्टी-पोर्ट ऑपरेटर,अडानी पोर्ट्स म्यांमार के यंगून शहर में 29 करोड़ डॉलर की लागत से एक बंदरगाह का निर्माण कर रहा है. इसके लिए म्यांमार सेना के समर्थन प्राप्त म्यांमार आर्थिक निगम पट्टे पर ज़मीन ली गई है.

    बयान में कहा गया है कि गुरुवार, 15 अप्रैल को सूचकांक खुलने से पहले कंपनी का नाम सूचकांक से हटा दिया जाएगा.

    बयान में कहा गया है, “हाल के दिनों में आई ख़बरों में इस ओर इशारा किया गया था कि म्यांमार सेना के साथ व्यापारिक संबंधों के कारण कंपनी के लिए जोखिम बढ़ सकता है. म्यांमार सेना पर अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत कथित रूप से मानवाधिकारों के हनन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस मुद्दे पर किए गए विश्लेषण के बाद अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन को डाओ जोन्स स्थिरता सूचकांक से बाहर करने का फ़ैसला किया गया है.”

    एसएंडपी प्रेस रिलीज़

    भारत ने निफ्टी सूचकांक की तरह एसएंडपी भी एक तरह का जानामाना शेयर बाजार सूचकांक है जो अमेरिका में स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 500 बड़ी कंपनियों के शेयर बाज़ार में प्रदर्शन को आंकता है. वहीं डाओ जोन्स शेयर बाज़ार 30 सबसे बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रदर्शन को आंकता है.

    माना जा रहा है आने वाले दिनों में इसका असर कंपनी के शेयरों पर पड़ सकता है.

    म्यांमार में सैन्य़ शासन के विरोध में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 700 से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बर हैं.

    इससे पहले मार्च में म्यांमार सेना और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर 37 आंदोलनकारी संस्थाओं से मिली शिकायतों के बाद एसएंडपी ग्लोबल इस बात पर सहमत हो गया था कि वो डाओ जोन्स स्थिरता सूचकांक में अडानी पोर्ट्स की स्थिति पर दोबारा विचार करेगा.

  11. भोपाल: कोरोना के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जाने के बाद 7 दिन का कर्फ्यू

    कोरोना लॉकडाउन

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    मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में सोमवार कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जाने के बाद प्रशासन ने यहां सात दिन के 'कोरोना कर्फ्यू' की घोषणा की है.

    यहां 12 अप्रैल रात 9.00 बजे से लेकर 19 अप्रैल सवेरे 6 बजे तक 'कोरोना कर्फ्यू' लागू रहेगा.

    जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर प्रभार तिवारी ने कहा है कि “जिले में कोरोना के क़रीब 5,000 एक्टिव मामले हैं जिनमें से क़रीब 50 फ़ीसदी फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं. इसके बाद अब बड़ी संख्या में ताज़ा मामले सामने आए हैं. हम फिलहाल जमा किए गए डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं.“

    डॉक्टर प्रभार तिवारीने लोगों से अपील की कि जो कोई भी कोरोना वैक्सीन लेने के लिए योग्य हैं वो जल्द से जल्द वैक्सीन लें और कोरोना से बचने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाएं.

    सोमवार को भोपाल में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,456 नए मामले दर्ज किए गए हैं. बीते साल कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से अब तक इस जिले में इतनी संख्या में मामले दर्ज नहीं किए गए थे.

    यहां तक कि मध्य प्रदेश के किसी और जिले में भी एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोग पॉज़िटिव नहीं पाए गए थे. एक्टिव मामलों की बात करें तो भोपाल के मुक़ाबले इंदौर आगे है, लेकिन एक दिन में पाए गए संक्रमितों के हिसाब से जिला फिलहाल भोपाल से पीछे है.

    नए आंकड़ों के साथ भोपाल में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 60,407 हो गई है.

    बीते कल भोपाल में 5,200 लोगों की जांच की गई थी जिनमें से 1,456 की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई.

    इस हिसाब से जिले की पॉज़िटिविटी दर 28 फ़ीसदी है जो भयावह है, यानी टेस्ट किए जा रहे प्रत्येक सौ सैम्पल में से 28 पॉज़िटिव पाए जा रहे हैं.

    अधिकारियों के अनुसार भोपाल में बीते कल पांच लोगों की मौत कोरोना से हुई है. इस नए आंकड़े के साथ ही जिले में मौतों का कुल आंकड़ा अब 654 हो गया है.

  12. नमस्कार!

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